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आस्था


नवरात्रि : बढ़ें सकारात्मकता की ओर!

नवरात्रि : बढ़ें सकारात्मकता की ओर!नवरात्र देवी मां के सम्मान में भारत भर में मनाए जाने वाले पर्वों में से मुख्य पर्व है। यह उत्सव अमावस्या के पश्चात् शुक्लपक्ष के प्रारंभ का भी प्रतीक है। यह एक विशेष पर्व है, जिसमें पारंपरिक पूजन, नृत्य व संगीत सब सम्मिलित रहते हैं। नवरात्र शब्द दो शब्दों से बना है। नव अर्थात नौ और रात्रि अर्थात रातें। नवरात्र के पहले तीन दिन ‘तामसिक दिन’ होते हैं, उसके बाद ‘राजसिक दिन’ आते हैं और अंत के तीन दिन ‘सात्विक दिन’ होते हैं। रात को, सब चीजों का आनंद उठाने वाली देवी मां के लिए आरतियां गाई जाती हैं, शास्त्रीय नृत्य व गायन होता है और विभिन्न वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं। हर दिन का अपना विशेष महत्त्व होता है। यज्ञ, पूजा और होम किए जाते हैं। अग्नि को अर्पित की जाने वाली सामग्री में विभिन्न जड़ी-बूटियां, फल, वस्त्र और मंत्र शामिल होते हैं, जोकि मुग्ध कर देने वाले तेजोमय दैवीय वातावरण का निर्माण करते हैं

जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य

ऐसा कहते हैं कि देवताओं ने मां दुर्गा से पूछा कि ‘देवी, आपने इन शस्त्रों को क्यों उठा रखा है? आप अपनी एक हुंकार से सभी दानवों का विनाश कर सकती हैं।’ तब कुछ देवताओं ने स्वयं ही उत्तर देते हुए कहा, ‘आप इतनी दयावान हैं कि आप दानवों को भी अपने शस्त्रों के माध्यम से शुद्ध कर देना चाहती हैं। आप उन्हें मुक्त करना चाहती हैं और इसीलिए आप ऐसा कर रही हैं।’

देवी दुर्गा के रूप का गहरा अर्थ

इसके पीछे यह संदेश है कि कर्म की अपनी जगह होती है। केवल अकेले संकल्प के होने से काम नहीं होता। देखिए, भगवान ने हमें हाथ और पैर दिए हैं, ताकि हम काम कर सकें। देवी माता के इतने सारे हाथ क्यों हैं? इसका तात्पर्य यह है कि भगवान भी काम करते हैं, और केवल एक हाथ से नहीं, हजारों हाथों से और हजारों तरीकों से। देवी के पास असुरों का विनाश करने के हजारों तरीके हैं। वह एक फूल से भी अधर्म का विनाश कर सकती हैं, जैसे गांधीगिरी। इसीलिए, देवी अपने हाथों में फूल लिए हैं, ताकि फूल से ही काम हो जाए और फिर शंख बजाकर, ज्ञान प्रसारण करके भी।  अगर वह भी काम नहीं करता,तो फिर वे चक्र का उपयोग करती हैं। इसलिए, उनके पास एक से अधिक उपाय हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि इस विश्व में परिवर्तन लाने के लिए, केवल कोई एक ही युक्ति काम नहीं करती। आपको बहुत से तरीके ढूंढने पड़ते हैं। यही बात हमारे रिश्तों में भी है। हम हर परिस्थिति में हठ नहीं कर सकते। यदि आप अपने पिता के साथ हर समय हठ करेंगे और फिर उम्मीद करेंगे कि बात बन जाए तो ऐसा नहीं होगा। कभी प्यार, कभी हठ करना और कभी-कभी गुस्सा करने से काम होता है। बच्चों के साथ भी यही है। देखिए! किस तरह मां-बाप बच्चों को बड़ा करते समय तरह-तरह की युक्ति और व्यवहार करते हैं। हर बार डंडे का प्रयोग करने से काम नहीं बनेगा। कभी-कभी उनसे प्यार से भी काम करवाना पड़ेगा तो यही बात कही गई है। हर समस्या के बहुत से समाधान हो सकते हैं और इसीलिए देवी इतने सारे अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हैं।

-श्रीश्री रविशंकर

March 25th, 2017

 
 

कनिपक्कम मंदिर

कनिपक्कम मंदिरजब यह खबर उस गांव में रहने वाले लोगों तक पहुंची, तो वे सभी यह चमत्कार देखने के लिए एकत्रित होने लगे। तभी सभी को वहां प्रकट स्वयंभू गणेशजी की मूर्ति दिखाई दी, जिसे वहीं पानी के बीच ही स्थापित किया गया… वैसे तो गणेश […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

रघुनाथ मंदिर

रघुनाथ मंदिरजम्मू के पवित्र स्थान रघुनाथ धाम में एक- दो नहीं बल्कि 33 करोड़ देवी-देवताओं के दर्शनों का सौभाग्य भक्तों को मिलता है। यहां रघुनाथ के मुख्य मंदिर के आसपास कई मंदिर हैं, जिसमें अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा होती है। रघुनाथ मंदिर का निर्माण 1857 में […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

मां बिजासन धाम

मां बिजासन धाममध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सलकनपुर नामक गांव में 800 फुट ऊंची पहाड़ी पर एक मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मां दुर्गा का अवतार बिजासन देवी विराजमान हैं। यह मंदिर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 70 किमी. की दूरी पर तथा ऐतिहासिक […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

सिद्धपीठ बगलामुखी

सिद्धपीठ बगलामुखीमंदिर के भीतर मां बगलामुखी की भव्य मूर्ति व उसके ऊपर चांदी का छतर तथा दोनों कोनों में स्थापित अद्भुत मां सरस्वती व लक्ष्मी की कलात्मक मूर्तियों को देखकर श्रद्धालु नतमस्तक व भाव-विभोर हो जाते हैं… हिमाचल में कांगड़ा जिले में बनखंडी की वादियों के […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

शक्‍ति की मर्यादा

शक्‍ति  की मर्यादाचैत्र मास की नवमी को प्रभु श्री राम के जन्म से आरंभ होने वाली साधना की यात्रा शारदीय नवरात्र के पश्चात रावण के ऊपर प्रभु श्री राम से पूर्ण होती है। शक्ति का आदि स्रोत से शक्ति के प्रकाट्य की साधना का लक्ष्य लोकोपकार के […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

ध्यान का नियमित अभ्यास

श्रीश्री रवि शंकर जब हम विश्व को अपने भाग की तरह गोचर करते हैं, तब प्रेम प्रभावशाली रूप से विश्व तथा हमारे बीच प्रवाहित होता है। यह प्रेम हमें जीवन के विरोधात्मक बलों एवं उपद्रवों पर काबू पाने के लिए सशक्त करता है… ध्यान न […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

घटस्थापना

नवरात्र की समयावधि में घटस्थापना को एक महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। घटस्थापना के साथ ही नौ दिन तक रहने वाले व्रतों की शुरुआत होती है। हमारे शास्त्रों में घटस्थापना के लिए आवश्यक नियमों और दिशा निर्देशों का विस्तार से वर्णन किया गया है। घटस्थापना […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

आरती श्री दुर्गाजी

अंबे तू है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती। तेरे भक्त जनों पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 

ज्योतिष और वनस्पति जड़ें

आपकी कुंडली में यदि गुरु, राहु द्वारा युक्त है, राहु द्वारा दृष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है, तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गांठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के […] विस्तृत....

March 25th, 2017

 
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