Divya Himachal Logo Aug 20th, 2017

दखल


हां… मैं हूं चौधरी

ओबीसी में सबसे मजबूत चौधरी बिरादरी की हिमाचल के 18 सियासी हलकों में मजबूत पकड़ है। मुजारा एक्ट के बाद हर फील्ड में खुद को इक्कीस साबित करने वाले इस समुदाय की करीब 12 लाख आबादी देवभूमि के विकास में अन्नदाता बनकर कर उभरी है। । हालांकि आरक्षण और पॉलीटिकल रिप्रेजेंटेशन न मिल पाना चौधरी बिरादरी की दुखती रग है… समुदाय की कामयाबी का सफर बता रहे हैं वरिष्ठ उपसंपादक जीवन ऋषि…

खेतों में हाडतोड़ मेहनत के बाद अन्नदाता बनकर समाज को पालने वाला चौधरी यानी घृत समुदाय हिमाचल में अपना खास स्थान रखता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 48 जातियों में सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाले समुदाय की आबादी हिमाचल में 12 लाख के करीब है। कांगड़ा जिला के अलावा सिरमौर जिला की पांवटा घाटी में समुदाय की हर तरह से पकड़ है। इसके अलावा ऊना, हमीरपुर,मंडी और चंबा के कई इलाकों में भी समुदाय के लोग हैं। समुदाय के लोगों का दावा है कि 19 विधानसभा हलकों में घृत समुदाय सीधे तौर पर हार-जीत में अहम भूमिका अदा करता है,जबकि कई अन्य क्षेत्रों में भी उनकी पूरी पकड़ है। कांगड़ा सदर हलके (70 फीसदी से ज्यादा वोटर्ज) में हमेशा चौधरी समुदाय का दबदबा रहा है। इसी तरह धर्मशाला (25 हजार वोटर),शाहपुर(करीब 35 हजार),नगरोटा बगवां (70 प्रतिशत)ं, देहरा (40 प्रतिशत से ज्यादा),नूरपुर,  ज्वालामुखी(20 हजार से ज्यादा वोटर), पांवटा साहिब (20 हजार वोटर) में समुदाय का दबदबा है। इसके अलावा नाहन में 12 हजार वोटर्ज सहित जवाली,पालमपुर, सुलाह, चिंतपूर्णी, हरोली, संतोषगढ़, गगरेट, ऊना, नादौन, बमसन आदि में भी समुदाय निर्णायक भूमिका में है। इसके अलावा बैजनाथ और डाडासीबा जैसे क्षेत्रों में एससी को मिलाकर चौधरी समुदाय ड्राइविंग सीट पर आ जाता है। दूसरी ओर जोगिंद्रनगर और सुजानपुर जैसे इलाकों में भी इस वर्ग के काफी लोग हैं। हालांकि कड़वा सच यह है कि चौधरियों को पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन उतनी नहीं मिल पाई है,जितनी के वे हकदार हैं। इसकी बड़ी वजह समुदाय में एकजुटता न होना रहा है। चौधरी समुदाय के 90 फीसदी से ज्यादा लोग खेती से जुड़े हुए हैं। सरकारी नौकरी में सरकारी दावों के उलट काफी कम लोग हैं,जबकि व्यापार में न के बराबर हैं। समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अब भी नकदी फसलों को दरकिनार कर धान-गेहूं की पारंपरिक खेती करता है,ऐसे में आर्थिक समृद्धि उतनी नहीं है,जितनी होनी चाहिए। घृत समुदाय के लोग कांगड़ा के स्थायी निवासी और प्रकृति से क्षत्रिय हैं। महाभारत काल में त्रिगर्त के नाम से विख्यात इस क्षेत्र के राजा सुशर्म चंद्र ने कौरवों की तरफ से हिस्सा लिया था। आज पढ़ाई से लेकर सरकारी नौकरी तक और व्यापार से लेकर सियासत तक इस वर्ग के लोगों ने अपनी धाक जमाई है।

चौधरी हरि राम : एक मसीहा

चौधरी हरि राम का जन्म 1899 में  पंजावर ऊना (तब होशियारपुर) के अति निर्धन परिवार में चौ. उधो मल के घर हुआ। खड्ड गांव में प्राइमरी शिक्षा के बाद ऊना शहर के स्कूल में दाखिला लिया। यहां वजीफा व अन्य गतिविधियों में पुरस्कार जीतकर पिता और समुदाय का नाम रोशन किया। बाद में एडवोकेट बनकर समुदाय की सेवा की। हजारों लोगों के निःशुल्क सर्टिफिकेट बनवाए। पंजाब सरकार में मंत्री रहकर पहली बार पिछड़ों को कोटा दिलवाया, जिससे समुदाय के लोगों को उच्च शिक्षा में मदद मिली।

‘क्षत्रिय’ किताब में चौधरियों के अनूठे पहलू

चौधरी समुदाय पर ‘क्षत्रिय’ शीर्षक से पुस्तक स्व रिटायर्ड कर्नल डीआर चौधरी ने लिखी है। इसके कुल 110 पेजों में 54 हिंदी और 56 अंग्रेजी में हैं। दूसरी ओर ओबीसी वित्त निगम कांगड़ा में है। पहले चेयरमैन दौलत चौ ने इसे 1995 में सोलन से शिफ्ट करवाया था। अभी इसके चेयरमैन चौ चंद्र कुमार हैं। साइड इफेक्ट यह कि आय आदि नियम कठिन होने के चलते इसका ओबीसी को पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

सामाजिक समारोहों में रोकनी पड़ेगी फिजूलखर्ची

चौधरी समुदाय के वरिष्ठ नागरिक हुकम चंद गुलेरी कहते हैं कि सामाजिक समारोहों के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची को रोकना होगा। इस पैसे को बचाकर शिक्षा पर खर्च किया जा सकता है। इसी तरह इंटरनेट से भी जुड़ना समय की मांग है। जब तक इंटरनेट से नहीं जुड़ेंगे, कंपीटीशन करना असंभव है। गुलेरी हिमाचल विधानसभा से ज्वाइंट सेक्रेटरी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए हैं। समय-समय पर लोगों की मदद करते हैं। साथ ही पढ़े-लिखे युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए प्रेरित करते हैं।

इस चौधरी परिवार ने दान दी थी सौ कनाल जमीन

कृषि विभाग के भू-संरक्षण विंग में बतौर जेई तैनात अतुल्य कुमार के दादा ने जगतपुर रेलवे स्टेशन के लिए सौ कनाल जमीन दान दी थी। इसी तरह मंगवाल में एक स्कूल को चलाने में भी इस परिवार का अहम योगदान है। इनके पिता चौधरी लखपत राय शिक्षा विभाग में तैनात थे। वर्तमान में यह परिवार जवाली क्षेत्र से धर्मशाला शिफ्ट होकर समुदाय की मदद के लिए हरदम तैयार रहता है। अतुल्य के भाई भी सरकारी नौकरी में हैं। यह परिवार अभी धर्मशाला के बड़ोल में रहता है तथा कई सामाजिक संगठनों से जुड़ा है।

समुदाय की शान

प्रो. नारायण चंद पराशर

सांसद, भाषा विज्ञानी और लेखक रहे प्रो.नारायण चंद पराशर समुदाय की शान रहे हैं। 2 जुलाई , 1934 को शेरा गांव (हमीरपुर)के रहने वाले श्री पराशर अंग्रेजी में एमए थे। उन्होंने चीनी, जापानी और बंगाली भाषा में डिप्लोमा किया था। इसके अलावा वह जर्मन, इटेलियन,स्पेनिश,तेलुगू व पंजाबी का भाषा का भी ज्ञान रखते थे । उन्होंने पहाड़ी बोली के विकास में जी-जान लगा दी । उन्होंने पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम की बायोपिक लिखी है।  उन्होंने समुदाय के लिए कई अहम कार्य किए।

खेत से शिक्षा की ओर

बेटियां इंजीनियर, तो बेटे अफसर

कभी जिस  समुदाय को खेतिहर समझा जाता था,आज उसकी पहचान बड़े भू-स्वामी के रूप में है। पहले  जिसकी पहचान सिर्फ किसान थी,आज इलाके की बड़ी हस्ती है। मुजारा एक्ट लागू होने के बाद इस समुदाय ने और मेहनत कर खुद को मजबूत किया है। सच यह भी है कि अब बेटियां शिक्षा में बड़ा नाम कमा रही हैं।  पूर्व सीपीएस एवं पांवटा के दिग्गज नेता सुखराम चौधरी की तीन बेटियां हैं, जिनमें एक बेटी गीतांजलि बंगलूर में आईबीएम कंपनी में इंजीनियर है। दूसरी बेटी अनुराधा पीएमटी की ट्रेनिंग कर रही है। सबसे छोटी बेटी दिल्ली के मोतीलाल नेहरू शिक्षण संस्थान से कॉमर्स में ग्रेजुएशन कर रही हैं। इसी तरह प्रदेश भर में कई अध्यापिकाएं, डाक्टर और महिला वकील इस समुदाय से हैं। यही नहीं, सैकड़ों महिला पंचायत प्रधान चौधरी समुदाय का गौरव बढ़ा रही हैं। दूसरी ओर कई होनहार अफसरों ने देश-प्रदेश की सेवा की है और कई कर रहे हैं।  डा. आरके चौधरी समुदाय से निकले नामी चिकित्सक हैं। सुरेश चौधरी जज और मधु चौधरी ने सीनियर एचएएस बनकर समुदाय के लिए मिसाल कायम की। आरएस चौधरी पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर-इन-चीफ रहे। वेद प्रकाश चौधरी आईपीएच में ईएनसी रहे। डा. विनोद चौधरी बिलासपुर में सीएमओ,तो वर्मा जी डीआईजी पद से रिटायर हुए। डा रमेश कौंडल एचपीयू में रीजनल डायरेक्टर,तो उत्तम चौधरी ज्वाइंट सेक्रेटरी बने। इसके अलावा हुकम चंद,सुरेंद्र चौधरी ,जगत राम,प्रभात चौधरी ,खजाना राम,कुंदा मल बिरादरी के बड़े नाम हैं। इसी तरह इच्छी से राजेश मोंगरा आईपीएच विभाग में एक्सईएन हैं। यह भी सच है कि अब चौधरी के खेत में  हल-बैलों की जगह पावर टिल्लर-वीडर ने ले ली है,तो शिक्षा का प्रसार होने से चौधरी समझ गया है कि कब,क्या बीजना है। हालांकि यह चौधरी समुदाय ही है,जो नाकारा होने के बाद भी गाय- बैलों को लावारिस नहीं छोड़ते। कांगड़ा से लेकर पांवटा तक चौधरी गोरक्षक की भूमिका अदा करते हैं।

कांग्रेस से चंद्र, भाजपा से विद्यासागर बड़े लीडर

भले ही महासभा भाजपा-कांग्रेस पर अनदेखी के आरोप जड़े, लेकिन हिमाचल में चौधरी चंद्र कुमार का पांच बार मंत्री बनना और एक बार शांता जैसे नेता को हराकर कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से एमपी बनना उनके कद को दिखाता है। अभी चंद्र कुमार ओबीसी वित्त निगम के चेयरमैन हैं तथा निर्विवाद रूप से चौधरी समुदाय से आगे बढ़ने वाले सबसे बड़े नेता हैं। दूसरी ओर भाजपा ने कांगड़ा के धाकड़ नेता चौ विद्यासागर को कृषि मंत्री बनाया,तो उन्होंने खेती की तस्वीर बदल डाली। कृषि के क्षेत्र में जो काम विद्यासागर के समय हुए हैं,उन्हें समुदाय अभी भी याद करता है। इसी तरह चौ हरदयाल ने अपने समय नगरोटा बगवां में शानदार काम किया है। चंद्र, विद्यासागर, हरदयाल ऐसे नाम हैं,जिन्होंने समय-समय पर अपनी कैपेसिटी के अनुसार बिरादरी की मांगें बुलंद की,यही वजह है कि समुदाय ने इन्हें अपना लीडर स्वीकारा।  अभी जवाली से नीरज भारती सीपीएस और कांगड़ा से पवन काजल तेज तर्रार विधायक  हैं। दूसरी ओर ज्वालामुखी से रमेश धवाला ने बतौर मंत्री अच्छी सेवाएं दी हैं। इसी तरह धर्मशाला से बलदेव चौधरी,जिला परिषद सदस्य अनिल कुमार,कांगड़ा में संजय चौधरी,कुलभाष चौधरी,उत्तम चौधरी समुदाय से बड़े चर्चित नाम हैं।

सरवीण ने दिखाया, डर के आगे जीत

अमूमन चौधरी समुदाय से महिलाएं चारदीवारी से नहीं निकल पाती थीं,लेकिन शाहपुर जैसे हलके से मौजूदा विधायक और पूर्व में कैबिनेट मंत्री रहीं सरवीण से इस धारणा को बदल दिया है। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद सरवीण बार-बार जीत पाकर अपने समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। सरवीण कहती हैं कि खुद पर विश्वास रखें और मुश्किलों से न हारें।

स्टाइलिश काजल

कांगड़ा के विधायक पवन काजल चौधरी समुदाय के सबसे स्टाइलिश नेताओं में हैं। काजल कहते हैं कि गाड़ी-कपड़े अच्छे होंगे,तो कॉन्फिडेंस आएगा। काजल खुद ब्रांडेड कपड़े पहनंते हैं और अपनी पसंद की फार्च्यूनर गाड़ी से चौधरी युवाओं को स्टाइलिश लाइफ स्टाइल का संदेश देते हैं।

सिरमौर में सुखराम की धाक

जिला सिरमौर में बाहती समुदाय की करीब 55 हजार आबादी है। जिसमें पांवटा विधानसभा में 43 हजार और नाहन विधानसभा मे करीब 12 हजार बाहती समुदाय के लोग रहतें है। इसमे पांवटा में वोटरों की संख्या जहां करीब 20 हजार हैं, वहीं नाहन विधानसभा मे समुदाय के करीब 6 हजार वोटर हैं। पांवटा साहिब की बात करें तो यहां पर बाहती समुदाय बहुत कई पंचायतें हैं,जो चुनाव मे हार जीत के फैसले में अहम भूमिका निभाती हैं। इनमे भंगानी, मुगलवाला करतारपुर, अजौली, निहालगढ़, फूलपुर, अमरकोट, भांटावाली, जामनीवाला, कुंडियों और व्यास कोटड़ी पंचायतें शामिल है। इसके अलावा पीलपीवाला, पुरुवाला, पातलियों, गहराल, बद्रीपर, डोबरी सालवाला तथा गोरखुवाला पंचायतों मे भी समुदाय के लोग रहते हैं। पांवटा साहिब, दून क्षेत्र मे बाहती समुदाय के लोग रियासत काल में बसे हैं।

समुदाय के कद्दावर नेता

पांवटा में  पूर्व सीपीएस सुखराम चौधरी का समुदाय में बोलबाला है। सुखराम चौधरी वर्ष 2002 से 2012 तक लगातार 10 साल पांवटा साहिब के विधायक चुने गए। 2007 में जीतने के बाद उन्हें प्रदेश सरकार मे सीपीएस का ओहदा मिला। उन्होंने समुदाय व अन्य लोगों के लिए शानदार काम किया । उनका कहना है कि चुनाव में 70 से 75 प्रतिशत बाहती समुदाय के वोट उन्हें मिलते हैं।

घृत-बाहती चाहंग सभा का स्टैंड

घृत-बाहती चाहंग महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी कहते हैं कि हमारे तीन प्रमुख लक्ष्य हैं। समुदाय के सामाजिक,आर्थिक उत्थान के अलावा हिमाचल में पॉलिटिकल रिप्रेंजेंटेशन हासिल करना। समुदाय के छात्रों को शिक्षा में मदद करना। तीसरा और सबसे जरूरी समुदाय के लोगों को शराब की कुरीति से बचाना। इसी तरह संविधान द्वारा समुदाय को प्रदान किए गए अधिकारों की रक्षा करना भी सभा का लक्ष्य है। महासभा की सियासी दलों को भी दोटूक है कि चौधरी और ओबीसी बहुल इलाकों में इसी वर्ग के लोगों को टिकट दी जाए।

इस आरक्षण में तिब्बती और चौधरी बराबर

ओबीसी समुदाय की सबसे बड़ी मांग मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करवाना है,जिनमें 27 फीसदी कोटा मुख्य है। वर्ष 2007 में केंद्र की यूपीए सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भी 27 फीसदी आरक्षण का बिल पास किया है। बड़ी हैरानी की बात है कि इसे हिमाचल की मौजूदा कांग्रेस सरकार ही लागू नहीं कर पाई है। हाल देखिए हिमाचल की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, निफ्ट, आईआईटी (सभी केंद्रीय संस्थान) में इसे लागू किया है,लेकिन टांडा मेडिकल कालेज में यह सिर्फ दो प्रतिशत है। इतना ही टीएमसी में तिब्बतियों और कश्मीरियों को है। घृत समुदाय एवं ओबीसी के बड़े जानकार एडवोकेट अजय चौधरी का सवाल है कि क्या हिमाचल के इतने बड़ा समुदाय की हैसियत अब तिब्बतियों के बराबर हो गई है। होना तो यह चाहिए था कि टीएमसी के लिए जिन लोगों ने जमीनें दी थीं,सरकार उन्हें नौकरी के साथ-साथ यहां पढ़ने का मौका देती।  हम यहां के स्थायी निवासी हैं,क्या यही न्याय है।

तो क्या मजदूर करेंगे मनरेगा की मॉनिटरिंग

धर्मशाला के कांग्रेस नेता एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य चौधरी हरभजन सिंह हिमाचल में मनरेगा को चौधरी समुदाय एवं निर्धन परिवारों के लिए जरूरी योजना मानते हैं। बकौल हरभजन, इस योजना में ग्रामीण विकास तो होता ही है,ऊपर से निर्धन लोगों को रोजगार भी मिलता है। उन्हें इज्जत से कमाने का मौका मिलता है। कुछ लोगों के मनरेगा मॉनीटरिंग पर सवाल उठाने पर चौधरी कहते हैं कि अगर मॉनीटरिंग ठीक नहीं हो रही,तो सरकार और विभाग के प्रयासों से ठीक करनी होगी।

सरकार से पूछा, कहां हैं नौकरियां

प्रदेश में क्लास थ्री और फोर में ओबीसी के महज सात फीसदी लोग सरकारी नौकरी में हैं। यह कहना है वरिष्ठ एडवोकेट राम लाल चौधरी का। श्री चौधरी सरकार ने  उस दावे पर सवाल खड़ा किया,जिसमें क्लास थ्री-फोर वर्ग में 18 फीसदी तैनाती का दम भरा जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में क्लास वन और टू के  लिए 12 प्रतिशत कोटे की बात कही जाती है,लेकिन असल में तैनाती है महज साढ़े तीन प्रतिशत। इसी तरह बैकलॉग के भी कई पद भरने को हैं।

शिक्षित होंगे, तो आएंगे अच्छे दिन

ज्ञान ज्योति बीएड कालेज राजोल और कांगड़ा भाजपा आईटी सैल के अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी ने समुदाय के लिए मौजूदा दौर में हायर एजुकेशन को कामयाबी का मूल मंत्र बताया। वीरेंद्र कहते हैं कि मात्र साक्षर होने से काम नहीं चलेगा। हायर एजुकेशन हासिल कर कंपीटीशन लड़ना होगा। इसी तरह सरकार और नेताओं को भी चाहिए कि रोजगार के साधन बढ़ाएं। वीरेंद्र चौधरी पूर्व मंत्री विद्यासागर के बेटे हैं। वर्तमान में वह समाजसेवा से जुड़े कई संगठनों में अहम भूमिका निभाकर लोगों की मदद कर रहे हैं।

सहकारी सभाओं का फायदा उठाएं लोग

सहकारी सभा में सचिव नारायण कहते हैं कि समुदाय के लोगों को सहकारी सभाओं से शत-प्रतिशत जुड़ना होगा। कम औपचारिकताओं से सभाएं जरूरतमंदों को धन मुहैया करवाती हैं। नारायण का यह भी कहना है कि लोगों को धान-गेहूं का मोह छोड़कर नकदी फसलों की तरफ मुड़ना पड़ेगा।

इन्होंने चमकाया नाम

धर्मशाला से सटे पासू गांव के दो भाई चौधरी बिरादरी के लिए बड़ी मिसाल हैं। बड़े भाई ओमप्रकाश(बाएं) रिटायर्ड ईटीओ हैं, जबकि छोटे जगदीश चंद फाइनांस से सेवानिवृत्त ज्वाइंट कंट्रोलर हैं। वे दो टूक कहते हैं कि चौधरी समुदाय को शिक्षा से लेकर सामाजिक जीवन तक अपनी अप्रोच बदलनी पड़ेगी।

सहयोग करें, आलोचना नहीं

घृत समुदाय के दिग्गज एवं नादौन निवासी होशियार सिंह पराशर कहते हैं कि खुद पर विश्वास रखना चाहिए। समुदाय का लीडर अगर उम्मीदों पर खरा नहीं उतररता है, तो उसकी लेग पुलिंग न करें। उसका सहयोग करें। हमें अपने पूर्वर्जाें पर सवाल उठाने का हक नहीं है। हमारे पूर्वर्जाें ने शानदार काम किया है। हमारे इतिहास की सही प्रस्तुत न करना इतिहासकारों की गलती है। अतः कमीहीन भावना को पास न आने दें।

उच्च शिक्षा की ओर रुख करें युवा

समुदाय के मुगलवाला करतारपुर पंचायत के रहने वाले 72 साल के जगीरी राम चाहते हैं कि आज के युवा उच्च शिक्षा लें और सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में अच्छे ओहदे पर जाएं। वह बताते हैं कि उनका जीवन तो पारंपरिक खेतीबाड़ी में ही चला गया,लेकिन वह चाहते हैं कि समाज के युवा शिक्षित होकर आगे बढ़ें।

बुराइयां दूर करने का प्रयास

अखिल भारतीय घृत बाहती चाहंग महासभा के जिला सिरमौर के अध्यक्ष नंद लाल परवाल का कहना है कि महासभा के गठन का मुख्य लक्ष्य समाज में फैली कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक कर उन्हें दूर करना है। महासभा इसके लिए प्रयासरत है।

चौधरी शीतल ने हमेशा की मदद

धर्मशाला हलके के भडवाल गांव में चौधरी शीतल राम का परिवार बेहद चर्चित है। चौधरी शीतल ने हमेशा समुदाय के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। इनके चार बेटे और एक बेटी है। राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा यह परिवार समुदाय के लिए हमेशा तत्पर रहता है। इन्होंने चुनाव भी लड़ा था।

ढकोसलों को कम करें

जिला मुख्यालय धर्मशाला से सटे मनेड के बीडीसी सदस्य राजेश निर्धनों के उत्थान में मदद करते हैं। आपदा के समय पीडि़त की मदद करनी चाहिए। मसलन मृत्यु होने पर निर्धन परिवारों से भी सामाजिक ढकोसलों के बहाने ज्यादा खर्च करवाया जाता है, इसे मिलकर समुदाय कम कर सकता है।

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