Divya Himachal Logo Mar 27th, 2017

दखल


आधुनिक करवटों का शहर सोलन

पहली सितंबर, 1972 को अस्तित्व में आए जिला का सोलन शहर दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। शहर ने हर क्षेत्र में सफलता के लंबे डग भरे हैं। शहर के विकास की कहानी दखल के जरिए बता रहे हैं सोलन के ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार…

बीते 20 वर्षों में सोलन शहर एक मामूली नगर से मेट्रो सिटी की तर्ज पर यकायक विकसित हो गया। यह शहर न सिर्फ बाहरी जिलों के लोगों के लिए एक शानदार आश्रय बन गया, अपितु हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए एक रोजगार की स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध हो गया। वर्ष 2001 में जेपी यूनिवर्सिटी (वाकनाघाट) में खुलने के बाद सोलन व आसपास का क्षेत्र  शिक्षा के हब के रूप में विकसित होते-होते चंद वर्षों में ही अरबों रुपए के निवेश का केंद्र बिंदु बन गया। 2004 में उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों के खुलने का जो सिलसिलेवार क्रम शुरू हुआ, उसने पूरे देश के शिक्षाविदों का स्थान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। इस दौड़ ने जिला में जहां निजी क्षेत्र में पांच नए विश्वविद्यालय खुलने की राह आसान की, वहीं सोलन के नजदीक ही मेडिकल कालेज के रूप में क्षेत्र को एक बड़ा तोहफा भी मिला। छोटे से शहर के रूप में पहचान बनाने वाले सोलन ने गत दो दशकों में विस्तार की ऐसी राहें पकड़ीं कि अब यह शहर चंबाघाट, रबौण, शामती, देउंघाट, बसाल, बाइपास जैसे क्षेत्रों को अपने शहरीकरण के आगोश में समेट चुका है। करीब एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में सिमटा यह शहर अब आठ वर्ग किलोमीटर तक के भू-खंड में फैल चुका है। शहर व आसपास के क्षेत्र में 5000 फ्लैट निर्मित होकर बिके हैं तथा 50 के करीब अपार्टमेंट बन चुके हैं। सोलन शहर में 21500 के करीब वाहन हैं । औसतन आठ वाहन प्रतिदिन यहां एसडीएम व आरटीओ कार्यालय में पंजीकृत होते हैं।

हैरानी! प्रशासनिक ढांचा जस का तस

सोलन जिला मुख्यालय होने के कारण प्रत्येक बड़े कार्यालय का केंद्र है। बीते दो दशकों में सोलन ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की, किंतु प्रशासनिक ढांचा जस का तस रहा। यहां न तो कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या में कोई इजाफा हुआ तथा न ही कोई बड़ा कार्यालय यहां पर आया। हालांकि बाइपास पर सब्जी मंडी का निर्माण एकमात्र बड़ा प्रशासनिक कार्य अवश्य है। नए निर्माण कार्यों में सोलन में शामती बाइपास का निर्माण, मिनी सचिवालय, जोनल अस्पताल में नए भवनों का निर्माण, पालिका बाजार व दस नए पार्किंग स्थलों का निर्माण नए बदलाव में शामिल है।

व्यावसायिक ढांचा

70 फार्मा उद्योगों से बढ़ी शान

कुछ बड़ी दुकानों के बलबूते पहचान बनाने वाले जिला मुख्यालय में बड़े औद्योगिक घरानों ने जहां दस्तक दी, वहीं नामी-गिरामी कंपनियों के शोरूम भी यहां खुल चुके हैं। कुल 70 फार्मा व अन्य उद्योग शहर के आसपास स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त आनंद कांप्लेक्स, सिटी सेंटर प्लाजा, साहनी कांप्लेक्स, विशाल मेगामार्ट, वी-टू, वुडलैंड, रिबॉक, सागर रतना, ओकटेव जैसे बिग हाउस भी दस्तक दे चुके हैं।

आवासीय प्रारूप

शहर में सैकड़ों फ्लैट-अपार्टमेंट

बीते दो दशक में सोलन शहर में आवासीय ढांचा द्रुत गति से विकसित हुआ। शिक्षा का हब व बाहरी प्रदेशों के शौकीन परिवारों के रुझान को  देखते हुए यहां पर ‘फ्लैट संस्कृति’ पनपी तथा अल्प समयावधि में ही बिल्डिरों ने अपार्टमेंट खड़े करने शुरू कर दिए। आलम यह है कि सोलन शहर व आसपास के  इलाकों में 5000 फ्लैट बिक चुके हैं। इसके अलावा 1000 के करीब हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट भी बिक्री हुए हैं। फ्लैट संस्कृति को यहां बढ़ावा देने के लिए आनंद, साहनी, अमित, देवभूमि, सुगंधा अपार्टमेंट, मेघा सिटी के मालिकों की पहल रंग लाई है।

शैक्षणिक माहौल

पांच यूनिवर्सिटी बढ़ा रहीं ज्ञान

सोलन में शैक्षणिक ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव आए। यहां निजी क्षेत्र में जेपी विश्वविद्यालय, बाहरा विश्वविद्यालय, शूलिनी विश्वविद्यालय, महर्षि मार्केंडेश्वर विश्वविद्यालय, मानव भारती विश्वविद्यालय जैसी पांच बड़ी यूनिवर्सिटीज तथा एलएलआर इंस्टीच्यूट, ग्रीन हिल्ज इंजीनियर कालेज व प्रदेश का एकमात्र होम्योपैथिक भी यहां संचालित है। इसके अलावा डीपीएस, गुरुकुल, चिन्मय विद्यालय, केटीएस, सेंट ल्यूक्स, बीएल स्कूल, दयानंद डीएवी, गीता आदर्श जैसे दर्जनों स्कूलों में 15 हजार के करीब विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

पड़ोसी जिलों के सहयोग से तरक्की

पड़ोसी जिलों का सोलन शहर को विकसित करने में भारी योगदान है। शिमला, सिरमौर, किन्नौर, बिलासपुर व हमीरपुर के लोगों ने यहां आकर न सिर्फ आलीशान भवन बनाए, अपितु व्यवसाय के क्षेत्र में भी झंडे गाड़े हैं। सिरमौर, किन्नौर के लोगों ने सोलन में आकर अपनी कालोनियां ही विकसित कर ली। शामती में नेगी कालोनी, रबौण में नेगी कालोनी, शामती में ही सिरमौर कालोनी, आनंद कांप्लेक्स में तिब्बती मार्केट जैसी कालोनियां इन्हीं जिलों के लोगों ने बनाई। इसके अलावा हमीरपुर व कांगड़ा के लोगों ने यहां के छोटे व्यवसाय पर भी कब्जा किया तथा वहां के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सोलन शहर के आसपास भूमि खरीदकर सोलन को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया। अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाकर कांगड़ा मैत्री सभा, हमीरपुर मैत्री सभा का गठन किया तथा सभा के यहां भवन भी निर्मित कर दिए हैं। इन बाहरी जिलों से करीब 2000 परिवार यहां पर आकर बस चुके हैं तथा 1500 के लगभग भूमि की रजिस्ट्रियां भी बाहरी जिलों के लोगों की सोलन में हुई हैं। इन लोगों की वजह से सोलन शहर अनेकता में एकता का संदेश लेकर सभी समुदाय के लिए एक शांत शहर माना जाता है। सोलन में व्यावसायिक दृष्टि से भी इनका बड़ा योगदान है। रेडिमेड गारमेंट्स, जूते व ढाबे के व्यावसाय पर इनका भी 30 प्रतिशत तक कब्जा है।

डिवेलपमेंट प्लान की खल रही कमी

सोलन शहर का विकास तो जमकर हुआ है, लेकिन शहर के लिए डिवेलपमेंट प्लान बनाने में सरकार व प्रशासन फेल रहा है। शहर व आसपास के क्षेत्रों में बेतरतीबी से कालोनियों का निर्माण हुआ है। आलम यह है कि शहर की तंग गलियों से शव को ले जाना भी संभव नहीं है। चंडीगढ़ की तर्ज पर शहर को यदि विकसित किया जाता, तो आज यहां की तस्वीर ही कुछ और होती।  लोग अपनी मर्जी से भवनों का निर्माण कर रहे हैं। यहां तक कि  भवन निर्माण के लिए टीसीपी नियमों को भी कोई नहीं मानता है। यही वजह है कि शहर में अवैध भवनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। सोलन शहर से ग्रीन लैंड एरिया समाप्त हो चुका है। शहर कंकरीट के जंगल में तबदील हो चुका है। बढ़ती वाहनों की संख्या की वजह से प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि जहां दो दशक पहले तक शहर व आसपास के क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी होती थी, अब केवल नाममात्र की बर्फबारी  हो रही है। शहर की बढ़ती जनसंख्या के अनुसार यहां पर आधारभूत सुविधाएं भी लोगोें को नहीं मिल पाई हैं। दो दशक पहले भी शहर को तीसरे दिन पानी की सप्लाई मिलती थी और आज भी तीसरे दिन ही पीने का पानी मिल रहा है। दो पेयजल योजनाएं होने के बावजूद शहर में प्रतिदिन पानी की सप्लाई देने में नगर परिषद व आईपीएच फेल रहा है। शहर में छोटे व बड़े वाहनों की संख्या 45 हजार से अधिक है, लेकिन पार्किंग की सुविधा केवल पांच हजार वाहनों के लिए ही है। अधिकतर वाहन शहर की सड़कों और गली-मोहल्लों में पार्क किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से कई बार आपातकालीन समय में कई बार एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल पाता है। सोलन शहर से प्रतिदिन दस टन कूड़ा निकलता है। यहां पर कूड़ा संयंत्र न होने की वजह से कूड़े को चंडीगढ़ भेजा जा रहा है। एनजीटी ने कई वर्ष पहले सलोगड़ा स्थित कूड़ा संयंत्र पर रोक लगा दी थी।

हर रोज15000 को मिल रहा काम

सोलन हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला शहर है। विकास के साथ-साथ यहां पर रोजगार के भी नए साधन सृजित हुए हैं। स्वरोजगार के माध्यम से भी लोग यहां पर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। शहर में करीब 15 हजार से अधिक लोग मजदूरी करते हैं। यूपी, बिहार व झारखंड के लोग यहां पर दिन में 500 से 1000 रुपए प्रतिदिन की दिहाड़ी ले रहे हैं। बाहरी राज्यों के लोग यहां पर मिस्त्री, मुंशी, फर्नीचर, टाइल्स का कार्य कर रहे हैं। इसी प्रकार स्थानीय लोग भी सीमेंट, बजरी रेत, ईंट व सरिया की सप्लाई का कार्य करके ख्ूब कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा बिजली फिटिंग, सीवरेज, पाइप लाइन फिटिंग सहित कई प्रकार के कार्य स्थानीय लोगों व बाहरी राज्यों से आए लोगों द्वारा किए जा रहे हैं।

ऑटोमोबाइल सेक्टर ने खोले रोजगार के द्वार

ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी करीब दो हजार अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। अधिकतर कंपनियों के शोरूम यहां पर हैं। गोयल मारुति, आनंद टोयोटा, तपन हुंडई सहित अधिकतर कंपनियों ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान किया है। स्थानीय लोगों ने  स्वरोजगार के रूप में अपनी गाडि़यां भी व्यावसायिक कार्य के लिए खरीदी हैं। करीब 500 से अधिक लोग ट्रक व पिकअप चलाकर स्वरोजगार अर्जित कर रहे हैं।

एनएच ने आसान की राह

यहां पर विकसित होने का सबसे बड़ा कारण सोलन शहर का राष्ट्रीय उच्च मार्ग-22 पर बसना है। सोलन से चंडीगढ़ की दूरी मात्र डेढ़ घंटे तथा शिमला की दूरी मात्र एक घंटे की है। सबसे अधिक फायदा यह है कि सोलन में बाहरी राज्यों से सामान लाना आसान है। शौकीन लोगों ने जो अपने फ्लैट सोलन में खरीदे हैं, उन्हें आवागमन में कोई दिक्कत नहीं है। मेट्रो की तर्ज पर सोलन इसलिए विकसित हो रहा है, क्योंकि जगह-जगह रेस्टोरेंट, ढाबे, शॅपिंग मॅल, शिक्षा हब के रूप में इसकी विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

शहर की सुरक्षा पर इनकी राय

* मनीष तोमर का कहना है कि सोलन सुरक्षा के हिसाब से अभी भी ज्यादा सुरक्षित नही है । सोलन के क्राइम रेट में कमी नहीं हो रही है, जिसके चलते लोग परेशान हैं। शहर में चोरियों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले पा रहा है । सोलन को सुरक्षित रखने के लिए खुफिया तंत्र को काफी सक्रिय होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुछ सालों में सोलन में काफी विकास हुआ है। इसके अलावा सोलन एजुकेशनल हब के रूप में काफी विकसित हुआ है ,जिसके चलते यहां पर रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हुई है। मनीष का कहना है कि यदि सोलन को आने वाले समय में और ज्यादा विकसित करना है तो सभी लोगों को ईमानदारी से कार्य करने की आवश्यकता है । विकास के लिए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना जरूरी है

* सुनीता वर्मा का कहना है कि आधुनिकता के साथ अभी भी शहर पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है । उन्होंने कहा कि शहर में अभी भी क्राइम रेट पूरी तरह से कम नही हुआ है । उनका कहना है कि विकास के रूप में सोलन काफी आगे बढ़ रहा है, लिहाजा सोलन को हिमाचल में एजुकेशनल हब के नाम से जाना जाता है । सोलन जिला के बीबीएन में औद्योगिक क्षेत्र होने से काफी लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है । उन्होंने कहा कि सोलन को और ज्यादा विकसित करने के लिए लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, साथ ही महिलाओं के लिए महिला सुरक्षा केंद्रों को स्थापित किया जाना चाहिए । इसके अलावा युवा वर्ग के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए जाने चाहिए

* महेश का कहना है कि सोलन शहर सुरक्षा के तौर पर अच्छा है । पिछले कई सालों को देखते हुए अब सोलन में सुरक्षा व्यवस्था काफी अच्छी हो रही है ।  उन्होंने कहा कि सोलन में अभी बहुत ज्यादा विकास नहीं हो पाया है। शहर में कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिनकी ओर सरकार द्वारा कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है । सोलन में सड़कों की हालत को लेकर सरकार व प्रशासन को कदम उठाए जाने चाहिए ।  सोलन शहर को और विकसित करने के लिए हर वर्ग के लोगों को अपना योगदान देना चाहिए, ताकि रोजगार के अवसर भी बढ़ें

* डा. अशोक हांडा का कहना है कि सोलन शहर बीते वर्षों के मुताबिक अब सुरक्षा के हिसाब से काफी असुरक्षित हो रहा है , जहां पर एक तरफ सोलन में विकासात्मक कार्य हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर क्राइम में भी बढ़ोतरी हो रही है। एजुकेशनल हब होने के चलते यहां पर युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही है, जो कि एक गंभीर समस्या है। विकास की बात की जाए तो सोलन में कई तरह के मेडिकल कालेज व यूनिवर्सिटी खुली हैं, जिससे यहां के बच्चों को बहुत फायदा मिला है । बकौल डा. हांडा शहर में पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है,जिसके चलते जनता  परेशान है । पार्किंग की समस्या को जल्द से जल्द ठीक किया जाना चाहिए

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