शिमला की सिसकियां

32 हजार आबादी के लिए बसाए गए शिमला शहर में आज करीब दो लाख लोग वास कर रहे हैं, लेकिन नगर की दुर्गति यह है कि जनसंख्या बढ़ने के साथ मूलभूत सुविधाओं की ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। मसलन  पानी, सड़कें स्वास्थ्य और पार्किंग की दिक्कत दिनों-दिन…

दहकते जंगल

हर साल की तरह इस बार भी जंगल की आग में करोड़ों की वन संपदा राख हो चुकी है। यहीं नहीं, प्रचंड दावानल ने तीन अमूल्य जिंगदियों को भी लील लिया है। हर बार सरकार आग से निपटने की कई योजनाएं बनाती है पर आखिरकार नतीजा सिफर ही होता है। प्रदेश में…

हिंदी पत्रकारिता की धार

बेशक इक्कीसवीं सदी आते-आते दुनिया का चेहरा-मोहरा हर लिहाज से बहुत अधिक बदल गया है, परंतु मीडिया और पत्रकारिता के संबंध आज भी बदस्तूर कसौटी पर कसे जाते हैं। इसमें दो राय नहीं कि अब तक रचित साहित्य का बड़ा भाग शाश्वत और यशस्वी होकर मानव…

जहरीला होता भू – जल

बिना फिल्टर चलने वाली 500 परियोजनाएं और मटमैला पानी उगलने वाले एक हजार हैंडपंप... हिमाचल में  पानी की यही कहानी है। इसे और भयावह वे उन्नीस हजार बस्तियां बनाती हैं, जहां लोगों को पता ही नहीं कि वे दूषित जल पी रहे हैं या स्वच्छ। रही-सही कसर…

‘दाग’ अच्छे नहीं हैं  

हर माह आठ कत्ल, साल में 248 रेप और 1800 केस पेंडिंग। शांति का तमगा लिए हिमाचल में हर 30 मिनट बाद बड़ा क्राइम होता है। गणित ऐसा है तो सवाल भी पुलिस से ही होगा। जवाब में भले ही 1970 खाली पदों का हवाला दिया जाए, लेकिन ये दाग अच्छे नहीं हैं।…

बिजली प्रोजेक्टों ने सुखाए नदी- नाले

प्रदेश में धड़ाधड़ हाइडल प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके चलते नदी-नालों सहित कूहलें भी सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। परियोजना प्रबंधन तय नियमों के अनुसार पानी डिस्चार्ज नहीं करते, लिहाजा कृषि पर भी इसका विपरीत असर पड़ने लगा है।…

सिकुड़ता पर्यटन

हिमाचल को ईश्वर ने प्राकृतिक सौंदर्य देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पर यह दुखद है कि आज तक प्रदेश की सरकारें इस सौंदर्य को निखार पाने में कामयाब नहीं हो पाई हैं, नए टूरिस्ट प्लेस विकसित न होने से सैलानियों का भी देवभूमि से मोहभंग होने लगा।…

सड़क सुरक्षा मायने और व्यवस्था

तीन घंटे में हादसा, हर रोज जा रही तीन जानें हिमाचल सड़क हादसों की भूमि बनता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई दिन होगा, जब राज्य में कोई सड़क हादसा  न हो। प्रदेश में सड़क सुरक्षा और व्यवस्था को दखल के जरिए बता रहे हैं, खुशहाल सिंह... हिमाचल सड़क…

कैग हमें बचा लो…

कैग की रिपोर्ट में लगभग हर विभाग की लापरवाही सामने आई है। विभिन्न महकमों को करोड़ों का नुकसान रिपोर्ट में दर्शाया गया है। बड़ी बात यह है कि अगर सरकारी खजाने को नुकसान न हो तो प्रदेश तरक्की के लंबे डग भर सकता है। हर साल ऐसे ही चपत लगती रही…

सदन में ‘सरकार’

प्रदेश की भाजपा नीत जयराम सरकार के पहले बजट सत्र में बेशक तीन महीने के कार्यकलाप पर विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर हमला बोला, लेकिन पिछली सरकार की करनी को सामने लाकर प्रदेश सरकार ने न केवल अपना बचाव बेहतर तरीके से किया,बल्कि विपक्ष को भी…

सुहाने सफर की ओर हिमाचल

हिमाचल में फोरलेन बनने से लोगों को जहां सर्पीली सड़कों से राहत मिलेगी, फासला कम होने से समय और पैसे की भी बचत होगी। हिमाचल में प्रस्तावित महत्त्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना पर आधारित  इस बार का दखल... फोरलेन हिमाचल प्रदेश की लाइफलाइन को बदल…

उफ़ ! यह मौसम

हिमाचल में बारिश होते ही अचानक ठंड बढ़ जाती है और धूप चमकते ही गर्मी पसीने छुड़ाने लगती है। मौसम के इस बदलते मिजाज को देखकर हर कोई अचरज में है। सभी यह सोचने को मजबूर हैं कि आखिर यह क्या हो रहा है... इस बार के दखल में मौसम के तेवरों की…

उजड़ता पर्यटन सिसकते होटल

प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज हिमाचल सैरगाह के रूप में उभर कर सामने आया तो यहां सैलानियों की आमद भी बढ़ने लगी। खासकर कुल्लू-मनाली, कसौली, शिमला सैलानियों की पहली पसंद बन गए । इसके चलते प्रदेश के पर्यटन को भी पंख लगे । देखते ही देखते यहां आलीशन…

बजट के आईने में हिमाचल

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने पहले ही बजट में भविष्य के इरादे जाहिर कर दिए हैं। आर्थिक विषमताओं के बीच समाज के हर तबके तक पहुंचने की कोशिश की गई है। हिमाचल को किस दिशा में ले जाएगा बजट, पढ़ें इस बार का दखल... * परवाह नहीं चाहे जमाना…

100 दिन की गति में मंत्री

1200 पैरामेडिकल स्टाफ कम 700 डाक्टरों की कमी 250 विशेषज्ञों का टोटा 170 आयुर्वेद डिस्पेंरियां बेहाल 26000 हर रोजओपीडी 700 डाक्टर, 250 विशेषज्ञ व 1200 पैरामेडिकल स्टाफ की कमी झेल रहे हिमाचल का मिजाज बिगड़ा हुआ है। रही-सही कसर…