Divya Himachal Logo Aug 20th, 2017

संपादकीय


भाजपा के विजन की नब्ज

विजन विचार नहीं, विचारधारा बिलकुल नहीं, लेकिन जनता के विश्वास का विमर्श और समाधान के वृत्तांत की वसंत सरीखा हो, तो हिमाचल भाजपा के विकल्प को आसानी से समझा जा सकता है। चुनावी घोषणा पत्र से विजन दस्तावेज की ओर सरकती भाजपा के आदर्शों में सर्वप्रथम नीति, नीयत और नजदीकी का स्पर्श देखना होगा, क्योंकि सत्ता के रंग और सुशासन के ढंग अकसर बिगड़ जाते हैं। हालांकि हिमाचल प्रगतिशील व जागरूक नागरिकों का राज्य है, फिर भी सुधारवादी और विजन की रखवाली में अंतर दिखाई देता है। देश में आंकड़ों से मुलाकात करने का वर्तमान दौर, हकीकत को किसी कोने पर छोड़ देता है, लिहाजा विजन भी भिक्षावृत्ति सरीखा हो रहा है। विजन दिखाने की वस्तु नहीं है, इसलिए कल अगर भाजपा को इसी की धारा में चलना है, तो कठिन फैसलों की मांद में बैठना पड़ेगा। हिमाचल के हित में अनेक कठिन फैसले लंबित हैं, तो सर्वप्रथम भाजपा इन्हें सूचीबद्ध करके सोचे कि सुशासन की राह सरल नहीं और न ही यह लोकप्रियता की कलम से लिखी जाएगी। अवैध कब्जे, बेतरतीब निर्माण, वीआईपी संस्कृति, राजनीतिक प्रभाव और कार्यकर्ताओं का सत्तारूढ़ मिजाज रोकने के लिए कलेजे पर पत्थर रखना होगा। विजन की नब्ज तो नीतियां बनाती हैं, अतः स्थानांतरण नीति व नियम अगर व्यवस्था से नत्थी कर दिए जाएं, तो सरकारी कार्य संस्कृति नाम की चिडि़या फुदकना छोड़कर कामकाज के स्थायी चरित्र की निगरानी करेगी। हिमाचली सत्ता के आवरण के नीचे वर्षों से पनप रहा माफिया और सरकारी फाइल पर बैठे कबूतर उड़ाने पड़ेंगे, वरना सरकार बदलने की प्रतिज्ञा क्या होगी। विजन को संकल्प में बदलने के लिए भाजपा को अपनी पूर्ववर्ती सरकारों के ही अनेक फैसलों को पलटना पड़ेगा, जबकि प्रतिस्पर्धी राजनीति के बावजूद, विकास के पुराने खंभों पर भी विश्वास करना होगा। ऐसे में स्पष्ट तो यह करना होगा कि किस तरह राजनीतिक विजन से हटकर विकास और सुशासन का विजन कार्यकारी होगा। क्योंकि स्थायी विजन खुशामद नहीं करता इसलिए हिमाचल के स्वावलंबन के कथानक को आर्थिक अनुशासन से बांधना होगा। रोजगार की सरकारी पींगों पर भाजपा की ही सरकार ने पैंतालीस साल की उम्र तक युवाओं को बैठाए रखा, तो क्या सरकार इस फैसले को पलट कर स्वरोजगार के पथ पर चलेगी। युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा अगर पैंतालीस साल की आयु तक रहे, तो विजन में फजीहत किसकी। सरकार के आकार और प्रकार के बीच बजट कटौतियां कितनी जरूरी या यूं ही कर्ज में डूबा हिमाचल आगे बढ़ता रहेगा। जो विरासत कांग्रेस लिख रही, क्या उससे आगे निकलकर भाजपा भी राजनीतिक दुकानदारी में नए शिक्षण या मेडिकल संस्थान खोलती रहेगी या कुछ को बंद करने का साहस करेगी। क्या दिल पर हाथ रखकर भाजपा यह कह सकती है कि एम्स का बिलासपुर में खुलना या केंद्रीय विश्वविद्यालय का टुकड़ों में बंटना न्यायोचित है। क्या भाजपा शपथ लेकर कह सकती है कि नए जिलों के मुद्दे के बजाय हिमाचल निर्माण की उस अवधारणा पर चलेगी, जो छोटी-छोटी रियासतों के मिलन से एक आदर्श पहाड़ी राज्य बना। क्या भाजपा विश्वास दिलाएगी कि उसके आने से हिमाचली भाषा-हिमाचली आशा किसी तरह के क्षेत्रवाद या परिवारवाद के विवाद में नहीं फंसेगी। प्रदेश को नीतिगत बदलाव की जरूरत में देखने और परखने की सियासी शक्ति तो हमेशा रही है, लेकिन खुशफहमी की पलकों पर सवार होने के बजाय यथार्थ को अंगीकार करने की निगाह चाहिए। हम प्रदेश को हर दौड़ में शरीक करने के बजाय युवा शक्ति का बेहतर इस्तेमाल करें, तो परिवर्तन आएगा। शिक्षा के मौजूदा ढांचे की क्षमता को पिघलाने की आवश्यकता है, ताकि पढ़ाई जीवन को सक्ष्म बनाए। प्रदेश को पर्यटन एवं खेल राज्य घोषित कर दें, तो स्वरोजगार और युवा क्षमता में विस्तार होगा। हमारे विकास का ढर्रा, नीतियों का हल्ला और युवा आशाओं का मेला अगर पर्यटन क्षेत्र की पहचान में बदले, तो विजन की सुबह से हम एक अनूठे क्षितिज की स्थापना कर सकते हैं, वरना राजनीतिक कलम से लिखे घोषणा पत्र तो पहले भी उज्ज्वल दर्शन से नसीब की लालटेन लेकर सदा घूमते रहे।

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August 19th, 2017

 
 

‘मोदी हटाओ’ ही साझा विरासत !

‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ के बैनर तले एक बार फिर विपक्षी जमावड़ा और एकता की कोशिशें…। ले-दे कर वही पुराने, पराजित और लुटे-पिटे, अंतर्विरोधी दलों की बैठक…। न तो कोई साझा एजेंडा और न ही कोई साझा न्यूनतम कार्यक्रम और सबसे बढ़कर कोई एक साझा […] विस्तृत....

August 19th, 2017

 

लालचौक पर ‘तिरंगे’ की बेटी !

आतंकी कितना भी कहर बरपा लें, अलगाववादी देश को गालियां दे लें और पाकिस्तान के इशारों पर साजिशों के दलाल बनते रहें, एक तबका कट्टरपंथी और भारत विरोधी है, जो दुष्प्रचार करता रहा है कि कश्मीरी हिंदोस्तानियों से बात ही करना नहीं चाहते, समाधान और […] विस्तृत....

August 18th, 2017

 

शिंदे के शिविर में कांग्रेस

शिंदे शिविर में हिमाचल कांग्रेस को सबसे पहले जो सीखना है वह आंतरिक अनुशासन व पार्टी की संगत में रहने की संयमित व्यवस्था होनी चाहिए। बेशक प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के आगाज में कड़े संदेशों की भरमार तो दिखाई देती है, लेकिन गुटबाजी के […] विस्तृत....

August 18th, 2017

 

लालकिले से चुनावी संबोधन !

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार लालकिले की प्राचीर से जो भाषण  दिया है, वह ऐतिहासिक नहीं, बल्कि चुनावी ज्यादा लगा। ऐसा महसूस हुआ कि उनकी निगाह 2019 पर टिकी रही, बेशक उन्होंने संकल्प का आह्वान 2022 तक के लिए किया। जिस तरह शौचालय के जरिए […] विस्तृत....

August 17th, 2017

 

छात्रों की डगर क्यों रूठ गई

प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों में सन्नाटा पसर रहा है,तो छात्र समुदाय की उमंगों का तराजू भी निराश है। तकनीकी ज्ञान की मंजिल पर खड़ी इमारतें, लेकिन छात्रों की डगर रूठ गई। जब सरकारी इंजीनियरिंग कालेज ही बमुश्किल अपनी क्षमता के  नजदीक पहुंचने के लिए पापड़ […] विस्तृत....

August 17th, 2017

 

70 साल का सार्थक सफरनामा

आज 15 अगस्त है। देश की आजादी का दिन और गुजरता एक और साल…! आजादी के लंबे 70 साल…! हमारी प्रगतियों और उपलब्धियों के साल…! सबसे पहले याद करें उन अनाम, असंख्य कुर्बानियों को, जिनकी बदौलत आज हम स्वतंत्र हैं, एक गणतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र […] विस्तृत....

August 16th, 2017

 

मेरा, तुम्हारा नहीं, हमारा अपना

आजादी की समीक्षा में हिमाचल की कुर्बानियों का इतिहास, आज भी सीमा पर प्रहरी के रूप में शहादत दर्ज करता है, तो यह राष्ट्रीय जज्बा प्रदेश की बुनियाद बनाता है। इसलिए हर बार देश को अक्षुण्ण बनाए रखने की सौगंध, तिरंगे में लिपटे किसी हिमाचली […] विस्तृत....

August 16th, 2017

 

मातम के पहर में हादसा

फिर प्रकृति की फटी छाती से हिमाचली अस्तित्व का रक्त बहने लगा और विनाश के उस पल ने हमसे हमारे रिश्ते छीन लिए। अचानक सफर मनहूस और गमगीन हो गया और प्रकृति के चौबारे पर आकर मौत बैठ गई। मंडी के उरला के पास सिर्फ […] विस्तृत....

August 14th, 2017

 

‘वंदे मातरम्’ किसी की वंदना नहीं…

यह देश की स्वतंत्रता का माहौल है। कल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे और पूरा देश आजादी के जश्न और भाव में सराबोर होगा। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ या राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ को गाने में जो मुसलमान, मुल्ले-मौलवी, जमातें […] विस्तृत....

August 14th, 2017

 
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