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दिल और दीयों के बीच

राजनीति में आंसू निकल आएं, तो माहौल प्याज के छिलकों सरीखा हो जाएगा। वैसे दिवाली का आलम भी आंख के पर्दे हिला रहा है और बाजार में छाई मायूसी के बीच दुकानदार को मासूम मानें या ग्राहक को बलि का बकरा। दिल और दीयों के बीच ऐसा फासला न पहले राजनीति…

मोदी की ‘विकास’ चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी को इतिहास बोध क्यों होने लगा है? वह जनसंघ और देश के अतीत में क्यों झांकने लगे हैं? सरदार पटेल और मोरारजी देसाई सरीखों को बार-बार क्यों याद कर रहे हैं? दरअसल यह गौरव गुजरात का ही नहीं, पूरे जनसंघ का है और व्यापक तौर पर पूरे…

साहसिक भाजपा की चुनौतियां

मंडी के पंडित परिवार को खुद में समाहित करके भाजपा ने अपना उद्धार किया या उद्वेग की सियासत में खुद को झोंक दिया, यह प्रश्न चुनाव के अंत तक मुखातिब रहेगा। पंडित सुखराम के परिवार से बड़े अपने कुनबे को दरकिनार करके गणित जो भी हो, लेकिन भाजपा ने…

गुरदासपुर जनादेश के मायने

लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित नहीं किया करते। उससे निकटस्थ राज्यों के जनादेश भी तय नहीं होते, लेकिन जो पार्टियां डूब रही हों या जनता के बीच अप्रासंगिक होती जा रही हों, ऐसी कोई भी जीत उनमें नया उत्साह,…

‘अश्लीलता का अड्डा’ सोशल मीडिया

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में सोशल मीडिया को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। न्यायिक पीठ का अब मानना है कि इसकी निरंकुशता पर लगाम जरूरी हो गई है। दरअसल ‘सोशल मीडिया’...इन शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भी घिन आती है। यह एक निरंकुश और बदनाम चेहरा है।…

सुरंग ने खोली आंख

पहाड़ की प्रगति को संबोधित करना आसान नहीं, फिर भी हिमाचल ने अपनी व्यथा से बाहर निकलने का हमेशा प्रयास किया है। ऐसे में जबकि रोहतांग सुरंग के दोनों छोरों से प्रगति को रोशनी मिल गई, तो अंदाजा लगाना आसान है कि इसके मायने कितने कबायली  घरों को…

तो आरुषि का कातिल कौन ?

बेशक दूसरा पक्ष या सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में जाएं, बेशक नए सिरे से जांच कराई जाए या अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक एजेंसियों को भी शामिल किया जाए, लेकिन 14 साल की किशोरी आरुषि की हत्या का रहस्य खुल सकेगा, यह तय नहीं है। सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी…

कब्र में चरित्र

गटर में तालीम का बटुआ गुम है और इधर हम देश की बुनियाद को खोज रहे हैं। नाहन में बच्चे न तो पक्के घड़े की तरह थे कि गुरुजन अपना मनोरंजन करते हुए बेखबर हो जाते और न ही रोबोट थे कि एक बार शुरू होते तो काम कर जाते। हिमाचल में प्राथमिक शिक्षा के…

चुनावी लक्ष्मण रेखा

चुनाव की तारीखी घोषणा ने हिमाचल को पुनः मतदाता के जागरूकता कक्ष में पहुंचा दिया। हालांकि चुनाव में कूदी राजनीति काफी समय से प्रतिस्पर्धा से आगबबूला थी, लेकिन अब रणनीतिक खुलासों में जनता के आगे शीर्षासन होगा। चुनाव आयोग ने भले ही गुजरात से…

यह पाबंदी संस्कृति विरोधी है

त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय की टिप्पणी है कि आज दही-हांडी और पटाखों पर पाबंदी लगाई गई है, तो कल चिता जलाने पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है। यदि दिवाली के मौके पर सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में ही पटाखों की बिक्री के संदर्भ में एक राज्यपाल को अपनी…

चुनावी पराली का प्रदूषण

हिमाचल में चुनाव की सरकती तारीख ने नैतिक-अनैतिक के बीच अंतर करना छोड़ दिया है और ऐसा प्रतीत होने लगा है कि सारी भुजाएं इस प्रदेश की हकदार हैं। मंत्रिमंडल की बैठकों में निरूपित उद्देश्यों का सौहार्द कितना भी नरम हो, लेकिन इस सद्भावना का…

मंदिर के साथ-साथ मूर्ति

बेशक उत्तर प्रदेश में भाजपा को 325 सीटों का जनादेश हासिल हुआ और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। अभी सरकार बने मात्र छह माह ही हुए हैं, लिहाजा कोई गंभीर सवाल नहीं, कोई संदेह या आशंकाएं भी नहीं, लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव के संकेत तो दिखाई देने…

पर्यटन का चांद

पर्यटन  की किश्तियां यूं तो हिमाचल के तट को छूने लगी हैं, लेकिन संभावनाओं का प्रवाह रुक सा गया है। ऐसे में जब कभी पर्यटन खुद एक नई परिभाषा में लिपट कर प्रस्तुत होता है, तो आशाओं के कदम भी शामिल होते हैं। ऐसा ही एक पर्यटन करवाचौथ बनकर शिमला…

अर्थव्यवस्था ‘निराशाजनक’ !

भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ सर्वे कराए थे, जिनके निष्कर्ष हैं कि सामान्य अर्थव्यवस्था डूब रही है। कारोबार करने की भावनाएं और हौसले पस्त हो रहे हैं। मुद्रा-स्फीति बढ़ोतरी की ओर है और आर्थिक विकास दर फिसल रही है। सर्वे से ही आकलन सामने आया है…

उम्मीदों भरी उम्मीदवारी

हिमाचल में उम्मीदों से भारी उम्मीदवारी को देखते हुए चुनाव की रेंज का हिसाब लगाया जा सकता है। राजनीतिक आरोहण में मुद्दों का हिसाब जो भी होगा, लेकिन इससे पहले टिकट खिड़की पर हिमाचली आचरण कतार में लगा है। यह दीगर है कि सियासी पहेलियों में…
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