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सुभद्रा कुमारी चौहान : झांसी की रानी को नायकत्व तक पहुंचाया

सुभद्रा कुमारी चौहान (जन्म : 16 अगस्त, 1904; मृत्यु : 15 फरवरी, 1948) हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं। उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए, पर उनकी प्रसिद्धि ‘झांसी की रानी’ कविता के कारण है। सुभद्रा जी राष्ट्रीय…

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (जन्म-21 फरवरी, 1896 ई., मेदनीपुर बंगाल; मृत्यु-15 अक्तूबर, 1961, प्रयाग) हिंदी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उन्होंने कई…

कहानी : नाम का महत्त्व

‘‘फैंसी बल्बों की लडि़यों की चकाचौंध कितनी अच्छी लगती है, आजकल दिवाली पर और कई दूसरे त्योहारों में यह रोशनी कितनी सुंदर लगती है मां!’’ 10 वर्षीय दीपक ने अपनी मां से कहा। मां शाम का खाना बनाने के लिए सब्जी काट रही थी। मां ने बेटे को पास…

हिमाचल में बाल साहित्य की भूमि और ऊर्जा

छोटे बच्चों को ध्यान में रखकर रचे गए साहित्य को ‘बाल साहित्य’ का दर्जा दिया जाता है। अच्छा बाल साहित्य बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अपनी अहम भूमिका अदा करता है। यह जहां बच्चों का मनोरंजन करता है, वहीं उन्हें शिक्षा, संस्कार और मानव…

हिमाचली लेखक समाज अपने स्तर के मुगालते में है

जीने को दर्द संभालने होंगे ‘अतीत कभी पीछा नहीं छोड़ता। उसकी स्मृतियां जहन में यूं रच-बस गई हैं जैसे शिलालेखों पर सदियों से आकृतियां या लिपियां अपना वजूद बनाए रखती हैं। क्या खोया, क्या पाया, इसका आकलन करना हो तो खोया का तराजू झुक जाता है। आज…

बिलासपुर के लेखकों का हिंदी में योगदान

सरोकार लेखन की कसौटी पर हिंदी का स्तर नापना या फिर परखना बहुत मुश्किल काम है। बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का वह जिला है, जहां 1863 ई. में बिलासपुर नगर में राजा हीरा चंद ने प्रथम प्राथमिक पाठशाला खोली थी। 1887 ई. में राजा विजय चंद ने इस पाठशाला…

पत्रिका का तेलंगाना के पर्यटन को प्रणाम

प्रणाम पर्यटन पत्रिका (हिंदी त्रैमासिक) का अक्तूबर-दिसंबर-2017 का अंक पाठकों के समक्ष आ चुका है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से प्रकाशित यह पत्रिका गत दो वर्षों से लगातार छप रही है। इस अंक में नवगठित राज्य तेलंगाना में पर्यटन की संभावनाओं का आकलन…

उनके आधार का सवाल

वे हमारा अपमान करते हैं। वे हमारे अब कान पर धरते हैं। वे सेवा के नाम पर सत्ता का चीरहरण करते हैं। वे बड़ों की बोलती बंद करते हैं। वे छोटों को दुत्कारते हैं। वे हमउम्र को फटकारते हैं। सिर्फ इसलिए कि हम हर बार दूसरों की आंखों से अपने सपने…

हिमाचली भाषा आठवीं अनुसूची में कब शामिल होगी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक भाषाओं का वर्णन किया गया है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में बाइस भाषाओं को शामिल किया गया है। हिमाचली भाषा को इसमें शामिल करवाने के लिए दशकों से चला आ रहा शोर कोई सार्थक मुहिम नहीं बना पाया है।…

कवि प्रदीप : देशभक्ति को घर-घर पहुंचाया

जन्म दिवस  विशेष कवि प्रदीप (जन्म : 6 फरवरी, 1915, उज्जैन, मध्य प्रदेश;  मृत्यु : 11 दिसंबर, 1998, मुंबई) का मूल नाम रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी था। प्रदीप हिंदी साहित्य जगत और हिंदी फिल्म जगत के एक अति सुदृढ़ रचनाकार रहे। कवि प्रदीप ‘ऐ मेरे…

पुस्तक समीक्षा

कस्तूरी पिछले 46 वर्षों से लेखन में सक्रिय प्रिया आनंद नए उपन्यास ‘कस्तूरी’ के साथ फिर पाठकों के सामने हैं। मोहब्बत का पेड़, बांस के जंगल में बांसुरी, मैं हवा हूं, बंद दरवाजों की खिड़कियां जैसे कहानी संग्रह व मेरा काबुली वाला, सुनो केया तथा…

परिवेश से होता है कहानी का जन्म

किताब के संदर्भ में लेखक हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के…

वृहद परिप्रेक्ष्य में दश गुरु परंपरा

पुस्तक समीक्षा * किताब का नाम : मध्यकालीन दश गुरु परंपरा-भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय * लेखक : प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री * प्रकाशक-हिमाचल रिसर्च इंस्टीच्यूट, चकमोह, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश * मूल्य : पचास रुपए (पेपरबैक) भारत में मध्य…

‘दृष्टि’ के माध्यम से लघुकथाओं की सरिता

पुस्तक समीक्षा * पत्रिका का नाम : दृष्टि * संपादक : अशोक जैन * कुल लघुकथाएं : 90 * मूल्य : 500 रुपए (छह अंकों के लिए) लघुकथा को पूर्णतया समर्पित अर्द्धवार्षिक पत्रिका ‘दृष्टि’ का अंक नंबर तीन (जुलाई-दिसंबर, 2017) साहित्यिक बाजार में आ गया…

साहित्य में मोक्ष जैसी चीज नहीं है

हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के मानिंद नजर आते हैं, तो किताब…
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