Divya Himachal Logo Feb 24th, 2017

प्रतिबिम्ब


विद्यानिवास मिश्र

विद्यानिवास मिश्र हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, सफल संपादक, संस्कृत के प्रकांड विद्वान और जाने-माने भाषाविद थे। हिंदी साहित्य को अपने ललित निबंधों और लोक जीवन की सुगंध से सुवासित करने वाले विद्यानिवास मिश्र ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने आधुनिक विचारों को पारंपरिक सोच में खपाया था। संस्कृत मर्मज्ञ मिश्र जी ने हिंदी में सदैव आंचलिक बोलियों के शब्दों को महत्त्व दिया।  मिश्र जी के अभूतपूर्व योगदान के लिए ही भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया …

February 20th, 2017

 
 

घने नीम तरु तले

ललित निबंधों में प्रकृति सर्वाधिक जीवंत रूप में उपस्थित होती है। इनमें प्रकृति के अंग-उपांग इतनी सजीवता के साथ स्थान पाते हैं कि लगता है वे हमारे अस्तित्व का अहम हिस्सा हैं। सच यह भी है कि पहाड़ी क्षेत्र में प्रकृति अपने शीर्षस्थ रूप में […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

लोक गाथाओं में देवाख्यान

सतलुज घाटी देवभूमि है। यहां क्षेत्र अधिष्ठात्री भीमाकाली, अंबिका देवी, परशुराम, कोटेश्वर महादेव, मानणेश्वर महादेव, पंदोई देव, देव कुरगण, ममलेश्वर महादेव, शमशरी महादेव, माहूंनाग और चिखड़ेश्वर महादेव जैसे देवी-देव मंदिर पुरातन काल से संस्कृति व परंपराओं के संरक्षक रहे हैं। देवाख्यान वस्तुतः गोपनीय होता है। […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

कविताएं

बीता साल गुजारा हमने बीता साल गुजारा हमने पत्नी को मनाने में चप्पल-जूते घिस गए हमारे ससुराल आने-जाने में। बीता साल गुजारा हमने स्कूल से फरलो लगाने में रजिस्टर में ऑन ड्यूटी भरकर पहुंच जाते मयखाने में छात्रों को साल भर कुछ न पढ़ाया हमको […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

मेलों में बना रहे ‘लोक’

मेले हमारी संस्कृति का एक दर्पण हैं, प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। यहां तो साल भर लगभग हर रोज ही कहीं न कहीं ढोल- नगाड़ों के स्वर गूंजते रहते हैं, पूरा साल मेलों का दौर चलता है और इससे ही हमारी समृद्ध […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

सभ्यता का संदेश देते खंडहर

शिक्षा के मामले में भारत के पास एक स्वर्णिम थाती है और नालंदा विश्वविद्यालय उस थाती का उत्कृष्ट प्रतीक। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना करीब 2500 साल पहले बौद्ध धर्मावलंबियों ने की थी। यह विश्वविद्यालय न केवल कला, बल्कि शिक्षा के तमाम पहलुओं का अभिनव केंद्र […] विस्तृत....

February 13th, 2017

 

लोक गाथाओं में सतलुज का राग

लोक गाथा में भगवान वामन दो पग में पूरी पृथ्वी लांघ जाते हैं। परिणामतः आधा पद बलि अपने सिर पर धारण करता है। पृथ्वी के राज्य को खोने के बाद बलि भगवान से प्रार्थना करता है कि उसे धरती पर बारह संक्रांतियों और बारह अमावस […] विस्तृत....

February 13th, 2017

 

लोकार्पण

प्रतिष्ठित साहित्यकार नरेंद्र कोहली को हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। व्यवस्थागत उपेक्षाओं के बावजूद साहित्य जगत उनकी सशक्त उपस्थिति महसूस करता रहा है। हिंदी साहित्य में महाकाव्यात्मक उपन्यास विधा को प्रारंभ करने का श्रेय नरेंद्र कोहली को ही दिया जाता है। […] विस्तृत....

February 13th, 2017

 

जे. कृष्णमूर्ति

जे.कृष्णमूर्ति का जन्म तमिलनाडु के एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में 12 मई, 1895 को हुआ था। अपने माता पिता की आठवीं संतान के रूप में उनका जन्म हुआ था, इसीलिए उनका नाम कृष्णमूर्ति रखा गया। कृष्ण भी वासुदेव की आठवीं संतान थे। वह एक विश्व […] विस्तृत....

February 13th, 2017

 

सूरज तेरे मुखड़े का अनुयायी है

तेरी लट से ही तो रात चुराई है। सूरत तेरे मुखड़े का अनुयायी है। मौसम तेरे सांसों से बनते हैं। दिन और रात तेरे नयनों से चलते हैं। फूल खिले हैं पत्तों की शहनाई है। सूरज तेरे मुखड़े का अनुयायी है। जब तू शबनम ऊपर […] विस्तृत....

February 13th, 2017

 
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