Divya Himachal Logo Jun 24th, 2017

प्रतिबिम्ब


नदी में अठखेलियां

ब्यास नदी में उतरा मन

ऊपर आकाश में

डोलता पैराग्लाइडर।

पहाड़ की चोटियां

झाड़ती बर्फ

जिस ओर देखें

सब बुलाती अपनी तरफ।

स्वच्छ धारा और मचलती लहरें

उछल-उछल कर कहती

हम से हैं बहारें।

बाहें पसार स्वागतरत

डोलता, तैरता राफ्ट

अभिमंत्रित करती अठखेलियां

धार में ध्वनि ओज माधुर्य व्याप्त।

विभोर मन

अपने तहखाने खोल

कहता छोड़ अहं

स्वरलहरियों संग डोल।

जी का ठौर नहीं

पल में कहां से कहां

पहुंच जाता पुलक-पुलक कर

सब विस्मृत केवल खुशी जहां।

सेब, पलम, अनार के

परागण की मादक गांध

रचते जीवन के

नए-नए छंद।

कलाबाजियां दिखाता पैराग्लाइडर

रंगीन पतंग सी पड़ती छाया

पेड़ों की ओट में

जैसे नदी में उतरी हो माया।

गठबंधन आकाश और

जल के नीलेपन का

सूए की चोंच का रंग

टीप देता बेड़े के फन का।

देखता जो भी जल और थल

नहीं रह पाता अनजान

क्या बंगाली, बिहारी, उडि़या

या गुजराती, मराठी सब समान।

बीकानेरिया हैरता आंखें फाड़े

पंजाबी, हरियाणवी, तेलुगू

अथवा तमिल, मलयालम, कन्नाडिगा

सब कहते थैंक यू।

-शेर सिंह, नाग मंदिर कालोनी, शमशी, कुल्लू

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June 19th, 2017

 
 

एक बेहतर दुनिया बनाएं

आओ पेड़ों के साथ कुछ सुख-दुख सांझे करें हवाओं से एक रिश्ता बनाएं बादलों से प्यार करें बारिश में भीगें धूप से शिकायत करें पर्वतों से गूढ़ बातें करें नदियों से दोस्ती गांठें जंगलों से भाईचारा निभाएं पंछियों के साथ-साथ चहकें, उड़ें फूलों सा खिलें, […] विस्तृत....

June 19th, 2017

 

लोक संपृक्ति के कथाकार अरुण भारती का जाना

‘भेडि़ए’ शीर्षक से ही वर्ष 1990 में अरुण भारती का पहला कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ। उस संग्रह की कहानियों-कब्र, टावर, स्वांग और शून्य से शून्य तक के अख्तर, नत्थू, चैतिया और ज्ञानी जैसे पात्र आज भी याद आते हैं। अरुण भारती का दूसरा कहानी संग्रह […] विस्तृत....

June 19th, 2017

 

जीवंत परंपराओं का प्रतीक ‘शांत महायज्ञ’

‘शांत महायज्ञ’ तीन दिनों तक मनाया जाने वाला महायज्ञ है। पहले दिन मेजबान देवता द्वारा आमंत्रित देवता अपने-अपने क्षेत्रों से पालकी में अपने-अपने खूंदो एवं ग्रामवासियों के साथ अस्त्र-शस्त्रों (तलवारें, दराट, लाठियां, भाले, खुरपी एवं बंदूकों) से सुसज्जित होकर मेजबान देवता के गांव पहुंचते हैं […] विस्तृत....

June 19th, 2017

 

ओंकारनाथ ठाकुर

ओंकारनाथ ठाकुर  भारत के प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक थे। ओंकारनाथ के दादा महाशंकर जी और पिता गौरीशंकर जी नाना साहब पेशवा की सेना के वीर योद्धा थे। एक बार उनके पिता का संपर्क अलोनीबाबा के नाम से विख्यात एक योगी से हुआ। इन […] विस्तृत....

June 19th, 2017

 

अरुण भारती जी का यूं चले जाना

प्रदेश के प्रतिष्ठित कहानीकार और साहित्यकार अरुण भारती जी का यूं अचानक चले जाना साहित्य जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। मुझे वह दिन याद आता है जब पुस्तक मेले के दौरान साहित्यक कार्यक्रमों के अंतर्गत, साहित्य अकादमी और भाषा संस्कृति विभाग के द्वारा कहानीकार […] विस्तृत....

June 19th, 2017

 

इतिहास के झरोखे में नर्मदा

सन् 1857 की क्रांति के बाद नर्मदा की धारा मानो स्वाधीनता की चेतना को सिंचित और पल्लवित करने वाली प्रेरणा रेखा बन गई। नर्मदा किनारे के आश्रम ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों के शरणस्थल ही नहीं बनें, बल्कि योजनाओं और उन्हें क्रियान्वित करने की रूप रेखा तैयार करने […] विस्तृत....

June 12th, 2017

 

गेयटी थियेटर में खिले इंद्रधनुषी रंग

पिछले दिनों  गेयटी थियेटर माल रोड शिमला में पुस्तक मेला लगा। साथ ही साथ विभिन्न विभागों के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसका यहां के स्थानीय लोगों के साथ स्कूलों के बच्चों, बाहर से आए पर्यटकों ने भी भरपूर आनंद उठाया और फायदा […] विस्तृत....

June 12th, 2017

 

खुदा मैंने तुझे दिलों में उतरते देखा है

फूलों में हो तुम डालों में तुम। अंधेरों में तुम उजालों में तुम।। भंवरों को मैंने फूलों से लिपटते देखा है। खुदा मैंने तुझे दिलों में उतरते देखा है।। प्रकृति के कण- कण में तू है समाया। अपनी महक से तूने ये संसार है महकाया।। […] विस्तृत....

June 12th, 2017

 

जीवंत परंपराओं का प्रतीक ‘शांत महायज्ञ’

महिषासुर का वध करने के बाद महाशक्ति का रूप इतना विकराल हो गया कि उनके उस रूप के आगे मानव तो क्या देवगण भी ठहर नहीं पा रहे थे। मां की रक्त पिपासा इतनी अधिक बढ़ गई थी कि उन्होंने सृष्टि का नाश करना आरंभ […] विस्तृत....

June 12th, 2017

 
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