Divya Himachal Logo May 24th, 2017

प्रतिबिम्ब


कविताएं

समर्पण

आत्मा हैं हम

रचयिता हमारे तुम

परमात्मा।

तन, तुम्हारा उपहार

मन,

तुम्हारी कठपुतली

गुण, तुम्हारे आशीर्वाद

दोष तुम्हारे श्राप

बुद्धि, तुम्हारी देन

सब कुछ तुम्हारा,

तुमने ही दिया,

तुम ही लो,

श्रेय- हमारी उपलब्धियां का,

उत्तरदायित्व

विजय- पराजय का,

अपर्ण तुम्हे

सुख-दुख चिंताएं

जैसे अराधना,

अपना लेना अंततः

भले बुरे, जैसे हैं हम

नहीं इस योग्य तो,

बना देना हमें

स्वीकारणयी आत्मा,

ओ परमात्मा!

प्रेम रहे शेष

सूर्य रश्मियों के

स्नेहिल स्पर्श से

पिघलते हिम खंड

जता रहे,

कठोर से कठोर

हृदयों में छुपी है नर्मी,

ठोस बर्फ हो

या कठोर हृदय

द्रवित हो जाएं,

पाते ही सानिध्य

प्रेयमयी गर्मी का

ये गरमाहट

संजोए रखो,

जीवन को जीवन्त

बनाए रखने को

प्रेम बचाए रखो,

बांटते रहो, बढ़ाते

आनंद सहर्ष

बन स्नेहिल स्पर्श

रश्मियों सम

फैलो-फैलाओ प्रेम

पिधले-पिघल जाएं

घृणा, ईर्ष्या-द्वेष

प्रेम रहे शेष

और उसकी गरमाहट

पसरे चहुं ओर।

-प्रोमिला भारद्वाज

प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, मंडी

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May 22nd, 2017

 
 

गोविंद चंद्र पांडे

गोविंद चंद्र पांडे 20वीं सदी के जाने- माने चिंतक, इतिहासवेत्ता, संस्कृतज्ञ तथा सौंदर्यशास्त्री थे। वे संस्कृत, हिब्रू तथा लैटिन आदि अनेक भाषाओं के असाधारण विद्वान, कई पुस्तकों के प्रसिद्ध लेखक तथा हिंदी कवि भी थे। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति, बौद्ध दर्शन, साहित्य, इतिहास लेखन तथा […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

व्याख्या की विकृतियों तले हम

महर्षि दयानंद सरस्वती जी  शतपथ ब्राह्मण का प्रमाण देते हएु कहते हैं ‘राष्ट्र वा अश्वमेधः’ (13-1-6-3) इस आधार पर वह आगे लिखते हैं-‘राष्ट्र पालनमेव क्षत्रियाणाम् अश्वमेधाख्यो यज्ञो भवति, नार्श्व हत्वा तदड्ंगान होमकरणं चेतिः।’ अर्थात राष्ट्र का पालन करना ही क्षत्रियों का अश्वमेध यज्ञ है, घोड़े […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

गज़लें

1 तेरे वादों का  कैलेंडर दीवार पर लगा रखे हैं कितने निभाए तूने एक-एक कर निशां लगा रखे हैं। बाकी बचे वादे कब निभाओ खुदा जाने, तेरे सच और झूठ साथ दिल में लगा रखे हैं। हमारी एक खता को बार-बार दोहराने मे मशगूल तेरी […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

लोकमंच

साडा हिमाचल सब तों न्यारा साडा हिमचल सबतों न्यारा स्वर्ण एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ देवों का आलय पवर्त हिमालय स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ। भोले-भोले लोकी इसदे, भोलीयां-भालीयां शक्लां सीढ़ीनुमा खेत एत्थू हरियां-भरीयां फसलां डूगे-डूगे नालू, खड़े कुआलू स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

बाहुबली का दक्षिण मार्ग

बाहुबली को लेकर सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात इसके रचयिताओं का आत्मविश्वास है, रामायण और महाभारत के फ्यूजन से भरी कहानी, जिसे पहले भी अलग-अलग रूपों में असंख्य बार दोहराया जा चुका है। भारी-भरकम बजट और रीजनल सिनेमा के कलाकार, उस पर भी फिल्म […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी के शीर्षस्थ साहित्यकारों में से एक हैं। वह उच्चकोटि के निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, चिंतक तथा शोधकर्ता थे। साहित्य के इन सभी क्षेत्रों में द्विवेदी जी अपनी प्रतिभा और विशिष्ट काव्य के कारण विशेष यश के भागी हुए। द्विवेदी जी का […] विस्तृत....

May 15th, 2017

 

फिर से समझें मदनोत्सव

एक ऐसे दौर में जब काम से कोमलता गायब हो गई है, संवेदनाएं नेपथ्य में चली गई हैं और उसे एक उपयोगी वस्तु के रूप में परोसा तथा स्वीकार किया जाने लगा है, तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम उसे संपूर्णता में समझें। […] विस्तृत....

May 15th, 2017

 

गज़ल

छोड़ो भी तकरार कि जीवन छोटा है, यारो बांटो प्यार कि जीवन छोटा है। निज-स्वार्थ के लिए रिश्ते से कटना मत, म्यान में रख तलवार कि जीवन छोटा है। घमंड की गठरी क्यों उठाए फिरता है, जल्दी कर, उतार कि जीवन छोटा है। तेरे सारे […] विस्तृत....

May 15th, 2017

 

अनपढ़ा ते पढ़ेयो खरे, पढ़ेयां ते हन कढ़यों खरे

मेला किसी राष्ट्र और समाज के जनजीवन, मूल्यों, सभ्यता और संस्कृति का परिचायक होता है। इसी तरह का एक किसान मेला पद्धर डा. आशीष शर्मा के नेतृत्व में अत्यंत हर्ष उल्लास और प्रतिष्ठा पूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें स्वच्छता, साहित्य, संस्कृति, संगीत गायन और […] विस्तृत....

May 15th, 2017

 
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