हर विषय को अभिव्यक्त करती है ग़ज़ल : नाज़ली

मेरी किताब के अंश : सीधे लेखक से किस्त : 2 ऐसे समय में जबकि अखबारों में साहित्य के दर्शन सिमटते जा रहे हैं, ‘दिव्य हिमाचल’ ने साहित्यिक सरोकार के लिए एक नई सीरीज शुरू की है। लेखक क्यों रचना करता है, उसकी मूल भावना क्या रहती है, संवेदना की…

कुछ अविस्मरणीय यादें

संस्मरण सन् 1990 में मैं अहमदाबाद में था। फिर कुछ वर्षों तक अहमदाबाद में ही रहना हुआ। यहां थोड़ा पढ़ने-लिखने का माहौल था। कुछ अच्छे साहित्यिक मित्र भी बने। सांप्रदायिक दृष्टि से अहमदाबाद उन दिनों बड़ा संवेदनशील था। लेकिन आम गुजराती…

नागार्जुन

नागार्जुन (जन्म : 30 जून, 1911;  मृत्यु : 5 नवंबर, 1998) प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि थे। नागार्जुन ने 1945 ईस्वी के आसपास साहित्य सेवा के क्षेत्र में कदम रखा। शून्यवाद के रूप में नागार्जुन का नाम विशेष उल्लेखनीय है। नागार्जुन का…

रोचकता से भरपूर पुस्तक है ‘कचकथाकाव्यम्’

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक का नाम : कचकथाकाव्यम् * मूल हिंदी लेखक : परमानंद शर्मा * संस्कृत अनुवाद : भूषणलाल शर्मा * कुल पृष्ठ : 96 * मूल्य : 175 रुपए * प्रकाशक : साईं पूजा प्रकाशन, थापरां मोहल्ला, जालंधर शहर धर्मशाला के प्रो. परमानंद…

देवकीनंदन खत्री : जिन्हें पढ़ने को लोगों ने सीखी हिंदी

इस माह जन्म पर विशेष देवकीनंदन खत्री (जन्म-29 जून, 1861 ई.; बिहार; मृत्यु-1 अगस्त, 1913 ई., बनारस) हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक थे। उन्होंने चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति, काजर की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त…

नागार्जुन

नागार्जुन (जन्म  30 जून, 1911;  मृत्यु  5 नवंबर, 1998) प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि थे। नागार्जुन ने 1945 ईस्वी के आसपास साहित्य सेवा के क्षेत्र में कदम रखा। शून्यवाद के रूप में नागार्जुन का नाम विशेष उल्लेखनीय है। नागार्जुन का असली…

लोक जीवन तक कमलेश सूद की कलम

मेरी किताब के अंश : सीधे लेखक से किस्त : 1 ऐसे समय में जबकि अखबारों में साहित्य के दर्शन सिमटते जा रहे हैं, दिव्य हिमाचल ने साहित्यिक सरोकार के लिए एक नई सीरीज शुरू की है। लेखक क्यों रचना करता है, उसकी मूल भावना क्या रहती है, संवेदना की…

छोटी उम्र में लेखन के लंबे हाथ

दि कोंबो आफ प्राब्लम्स दिव्यांगना त्रिवेदी अंग्रेजी में लिखी गई किताब ‘दि कोंबो आफ प्राब्लम्स’ लेकर पाठकों के समक्ष हैं। 54 पृष्ठों पर आधारित यह किताब दो सेक्शन में बांटी गई है। यह किताब कहानियों व थ्यूरी का सम्मिश्रण है। प्रथम सेक्शन के…

डिजिटल की अटलता में

विराम इन दिनों सहजता और सजगता को स्थायी रूप से विदा कर दिया गया है। अब साधारण और सहज होना व्यक्ति का पिछड़ापन घोषित हो चुका है। सजगता की बात हो सकती है, लेकिन तभी तक जब आप उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता की हां में हां मिला रहे हैं। जैसे ही आपने…

सोलन के इतिहास और संस्कृति को उकेरती किताब

किताबें मिली  हिमाचली परिप्रेक्ष्य में सोलन जनपद (इतिहास एवं संस्कृति) सोलन जिले के अर्की से संबद्ध प्रतिष्ठित लेखक अमरदेव आंगिरस अपनी नई किताब के साथ पाठकों के समक्ष हाजिर हैं। कई पुस्तकों व आलेखों के रचयिता अमरदेव लेखन के क्षेत्र में…

लेखक का निष्पक्ष व निर्भय होना जरूरी

साहित्य में शब्द की संभावना शाश्वत है और इसी संवेग में बहते कई लेखक मनीषी हो जाते हैं, तो कुछ अलंकृत होकर मानव चित्रण  का बोध कराते हैं। लेखक महज रचना नहीं हो सकता और न ही यथार्थ के पहियों पर दौड़ते जीवन का मुसाफिर, बल्कि युगों-युगों की…

कबीर जैसे साहित्य साधक विरले हैं

इस माह जन्म पर विशेष कबीर (जन्म-28 जून 1398 काशी, मृत्यु-सन् 1518 मगहर) का नाम कबीरदास, कबीर साहब एवं संत कबीर जैसे रूपों में भी प्रसिद्ध है। ये मध्यकालीन भारत के स्वाधीनचेता महापुरुष थे और इनका परिचय, प्रायः इनके जीवनकाल से ही, इन्हें सफल…

उपयोगी व संग्रहणीय पुस्तक है ‘दो टूक’

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक : दो टूक (निबंध संग्रह) * लेखक : योगेश कुमार गोयल * कुल पृष्ठ : 112 * प्रकाशक : मीडिया केयर नेटवर्क, 114, गली नं. छह, वेस्ट गोपाल नगर, नई दिल्ली-43 * कीमत : 150 रुपए मात्र लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार…

देवकीनंदन खत्री

देवकीनंदन खत्री (जन्म-29 जून, 1861 ई.; बिहार; मृत्यु-1 अगस्त, 1913 ई., बनारस) हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक थे। उन्होंने चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति, काजर की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त गोंडा, कटोरा भर और भूतनाथ…

जीवन के अनुभव कलमबद्ध करते हैं अजय पाराशर

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के उपमंडल बैजनाथ के गांव सेहल में जन्मे अजय पाराशर की शिक्षा-दीक्षा, भारतीय थल सेना में सेवारत उनके स्वर्गीय पिता कैप्टन ज्योति प्रकाश पाराशर जी की विभिन्न प्रांतों में तैनाती के कारण, अलग-अलग स्थानों पर संपन्न…