Divya Himachal Logo Aug 20th, 2017

प्रतिबिम्ब


डा. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

डॉ. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (जन्म 19 अगस्त, 1907 – मृत्यु 19 मई, 1979) हिंदी के शीर्षस्थ साहित्यकारों में से हैं। वह उच्च कोटि के निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, चिंतक तथा शोधकर्ता हैं। साहित्य के इन सभी क्षेत्रों में द्विवेदी जी अपनी प्रतिभा और विशिष्ट कर्त्तव्य के कारण विशेष यश के भागी हुए हैं। द्विवेदी जी का व्यक्तित्व गरिमामय, चित्तवृत्ति उदार और दृष्टिकोण व्यापक है। द्विवेदी जी की प्रत्येक रचना पर उनके इस व्यक्तित्व की छाप देखी जा सकती है…

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !

August 20th, 2017

 
 

वेदों में राष्ट्र की कल्याण कामना

वैदिक ग्रंथों में भारतीय राष्ट्र की अवधारणा स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है और वेदों में भारत राष्ट्र की महिमागान के साथ ही राष्ट्र के कल्याण की कामना की गई है। वैदिक ग्रंथों के अध्ययन से इस सत्य का सत्यापन होता है कि राष्ट्र की अवधारणा भी […] विस्तृत....

August 20th, 2017

 

साहित्य का लोक संस्कृति को नमन

पुस्तक समीक्षा पत्रिका का नाम : साहित्य अमृत (मासिक) विशेषांक : लोक संस्कृति संपादक : त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी मूल्य : मात्र 30 रुपए प्रकाशन स्थल : 4/19, आसफ अली रोड, नई दिल्ली-2  अगस्त 1995 में सुप्रसिद्ध विद्वान एवं साहित्यकार स्व. पं. विद्यानिवास मिश्र के संपादकत्व […] विस्तृत....

August 20th, 2017

 

कविता

प्यास पलकों में नींद कहां हलचल सी मची है मैखाने में हुस्ने तसव्वुर को साकी तस्वीर तेरी देखता प्याले में है प्यास जो नहीं बुझती अतिशेदर्द सी भड़कती है जैसे बियां बां जंगल में रूहेफरिश्ते तड़पती है मुद्दत हुई पीते-पीते सूफियों के लबों पर खामोशी […] विस्तृत....

August 20th, 2017

 

शिमला में भारतीयता परोसता इंडियन कॉफी हाउस

पूरे भारत में आप कहीं भी चले जाएं, पर यदि अकस्मात आपको इंडियन कॉफी हाउस शिमला के दीदार हो जाएं तो दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आस्वादन किए बिना आप रह नहीं सकते। व्यंजनों का स्वाद तमाम बड़े होटलों व रेस्तराओं से कहीं बेहतर तथा दाम […] विस्तृत....

August 20th, 2017

 

साहित्य में घटती विश्व दृष्टि

आज बहुत से कवियों के अंतःकरण में जो बेचैनी है, ग्लानि, अवसाद एवं विरक्ति है उसका एक कारण उनमें विश्व दृष्टि का अभाव है जो उन्हें आभ्यंतर आत्मिक शक्ति प्रदान कर सके, उन्हें मनोबल दे सके व उनकी पीड़ाग्रस्त अगतिकता को दूर कर सके… साहित्य […] विस्तृत....

August 20th, 2017

 

स्वतंत्रता आंदोलन-देश भक्ति में प्रेस का योगदान

स्वतंत्रता आंदोलन-देश भक्ति में प्रेस का योगदानमंगलवार को हम आजादी की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस उपलक्ष्य में ‘दिव्य हिमाचल’ ने प्रतिबिंब के इस अंक में कलम की ताकत को उकेरा है। कवियों-पत्रकारों व अन्य रचनाकारों ने आजादी की लड़ाई में क्या भूमिका निभाई, उसी का लेखा-जोखा यहां दे रहे […] विस्तृत....

August 13th, 2017

 

एक था मोगा…

वर्ष 2017 की गुरु पूर्णिमा के दिन मोगा इस दुनिया को छोड़ कर चला गया। उसकी मृत्यु का समाचार मुझे अगले दिन सुबह उस समय मिला, जब मैं बस अड्डे पर रोजाना की तरह अखबार लेने गया। मोगा ‘कहलूरी शटराला’ का वह पात्र था जो […] विस्तृत....

August 7th, 2017

 

भीष्म साहनी

भीष्म साहनी (जन्म- 8 अगस्त, 1915, रावलपिंडी, अविभाजित भारत; मृत्यु- 11 जुलाई, 2003, दिल्ली) प्रसिद्ध भारतीय लेखक थे। उन्हें हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है। वह आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। भीष्म साहनी मानवीय […] विस्तृत....

August 7th, 2017

 

लोक कहावतों में स्वास्थ्य

लोक कहावतों के अनुसार लोग अपने व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर लंबे समय तक स्वस्थ और सुखमय जीवन बिताया करते थे। लोक कहावतों में स्वस्थ शरीर के लिए विशेष उल्लेख किया गया है, जिसे अपना कर आप भी लंबे समय तक स्वस्थ […] विस्तृत....

August 7th, 2017

 
Page 1 of 16912345...102030...Last »

पोल

क्या कांग्रेस को विस चुनाव वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में लड़ना चाहिए?

View Results

Loading ... Loading ...
 
Lingual Support by India Fascinates