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पाठकों के पत्र


और यह भी…

( सुरेश कुमार, योल )

लाल बत्ती संस्कृति खत्म होने से हिमाचल प्रदेश का सबसे ज्यादा फायदा होगा। क्योंकि हिमाचली नेता सदन में लाल बत्ती या नीली बत्ती के लिए काफी समय बहस में गुजार देते थे। इस बदलाव के बाद कम से कम वह समय दूसरे मुद्दों को हल करने में खर्च होगा।

 

April 26th, 2017

 
 

नए भारत की परिकल्पना

( जयेश राणे, मुंबई, महाराष्ट्र ) नए भारत के निर्माण हेतु प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में देश के विकास के लिए आवश्यक कार्य योजनाओं पर चर्चा हुई। देश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना है, तो अगले […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

भगोड़ा शिकंजे में

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) नीलकंठ के पर कटे, तल में धंसे विमान, जकड़ गया है व्यूह में, तड़प रही है जान। अजय, पराजय खा गया, पड़ गया पक्षाघात, कसा शिकंजा इस कद्र, फक्कड़ ने दी मात। बैंक लूटकर ऐश में थे, शहंशाह […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

हिंदी का सम्मान

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) हिंदी को सार्वजनिक जीवन में सम्मानजनक स्थान दिलाने के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण पहल हो रही है। आधिकारिक भाषा पर संसदीय राजभाषा समिति की नौंवी रिपोर्ट की ज्यादातर सिफारिशें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्वीकार कर ली हैं। अब केंद्र […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

फिर नक्सली घाव

(स्वस्तिक ठाकुर, पांगी, चंबा) छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 24 जवानों के शहीद होने की खबर है। इस हमले में छह जवान घायल भी हुए हैं। सोमवार को यह मुठभेड़ राज्य के सुकमा जिले में हुई। सुकमा में चिंतागुफा के पास बुर्कापाल […] विस्तृत....

April 25th, 2017

 

मुश्किल घडि़यों में भी संयमशील

(गुरमीत राणा, खुंडियां, कांगड़ा) गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की नौ घंटे कड़ी पूछताछ की खबर वाकई हर हिमाचली शख्स को अचंभित कर गई। यदि पार्टीबाजी से ऊपर उठकर इनसानियत की नजर से देखा जाए, तो एक 85 वर्ष के व्यक्ति से […] विस्तृत....

April 25th, 2017

 

ठेका जिगर जला रहा

(डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर) दो दिन से जुटती नहीं, दो रोटी, दो जून, ठेका जिगर जला रहा, चूस रहा नित खून। चूल्हा ठंडा है पड़ा, घर में लग गई आग, बोतल में है विष भरा, मूर्ख अब तो जाग। पत्नी कुटती, पिट रही, बच्चे […] विस्तृत....

April 25th, 2017

 

वीआईपी संस्कृति को ‘न’

(किशन सिंह गतवाल, सतौन, सिरमौर) सच्चाई कड़वी होती है। हकीकत यह है कि देश में अति विशिष्ट संस्कृति बड़ी तेजी से पांव पसार रही है। यही कारण है कि खुद को औरों से अलहदा प्रदर्शित करने के प्रयत्न में हमारे कर्णधार और अधिकारीगण दिन-रात लगे […] विस्तृत....

April 25th, 2017

 

पहाड़ी जलवायु का खेल प्रशिक्षण में लें लाभ

(डा मुनीश सिंह राणा (ई-मेल के मार्फत)) हिमाचल देवभूमि है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता व शांतिप्रिय वातावरण ने इसे कई ऋषि-मुनियों की तप स्थली बनाया है। भौगोलिक दुरूहता के कारण खेलों के मैदान बनाने में भले ही प्रकृति अड़चन पैदा करती रही हो, इसके विपरीत इसकी […] विस्तृत....

April 24th, 2017

 

बात बराबरी की

(प्रेम चंद माहिल, हमीरपुर) स्त्री और पुरुष समाज रूपी रथ के पहियों के समान हैं, जिसमें एक भी पहिया थम जाए, तो रथ आगे नहीं बढ़ सकता। ठीक उसी प्रकार यदि समाज में स्त्री समाज की उपेक्षा होगी, तो संपूर्ण समाज के विकास की प्रक्रिया […] विस्तृत....

April 24th, 2017

 
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