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पाठकों के पत्र


सलमान बड़ा या कानून

( शगुन हंस, योल )

भारत जितना बड़ा लोकतंत्र, उसका उतना ही पंगु कानून। हर किसी के लिए अलग कानून। सच कहो तो कानून सिर्फ छोटे और दबे-कुचले लोगों के लिए है। अमीर लोगों के लिए, फिल्म स्टार और क्रिकेट स्टार के लिए कोई कानून नहीं। कुछ अरसा पहले सलमान को जेल जाने के कोर्ट ने आदेश दिए थे और दो घंटे में ही उनकी जमानत भी हो गई। आम आदमी होता, तो दो घंटे क्या दो महीनों तक बेल के लिए भटकता रहता। अभी सलमान खान को आर्म्स एक्ट में बरी होने का फैसला आया। सलमान डेढ़ घंटा लेट कोर्ट में पहुंचे। जज को डेढ़ घंटा इंतजार करना पड़ा और सलमान सिर्फ सात मिनट ही कोर्ट में रुके। समझ नहीं आ रहा सलमान बड़ा है या कानून। एक दूसरे मामले में संजय दत्त कितनी ही बार पैरोल पर जेल से बाहर रहे, जबकि आम कैदी को इतनी बार पैरोल नहीं मिलती। यह सब तो यही बताता है कि भारत में हर किसी के लिए अलग नियम कानून हैं। कानून का दायरा सबके लिए एक हो जाए, तो देश की कई समस्याएं ऐसे ही खत्म हो जाएं, पर करेगा कौन। निर्भया को आज भी न्याय नहीं मिला, आरुषि मर्डर केस भी चल रहा है। इस ढर्रे को बदलना होगा। हर किसी केस को हल करने की एक समय सीमा बांधनी होगी, वरना हम चले जाएंगे, पर केस चलते रहें।

 

January 21st, 2017

 
 

केंद्र करे मदद

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी का दर्जा दिया है। यह एक स्वागत योग्य फैसला है। यहां एक सवाल उठता है कि पहले से ही वित्तीय तंगहाली की मार झेल रहे हिमाचल पर […] विस्तृत....

January 21st, 2017

 

बनें परिवर्तन के वाहक

( सूबेदार मेजर (से.नि.) केसी शर्मा, गगल ) देश के समग्र विकास का दायित्व केवल केंद्र और राज्य सरकारों का ही नहीं है। इस संदर्भ में हर उस व्यक्ति के कुछ दायित्व बनते हैं, जिसका यह देश है। आज हम सुविधाओं के इस कद्र गुलाम […] विस्तृत....

January 21st, 2017

 

साइकिल चकनाचूर

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) साइकिल के टुकड़े किए, ले समाज की आड़, रिश्ते फेंके भाड़ में, दिए कब्र में गाड़। अलग-अलग पहिए बंटे, खत्म हो गया खेल, क्या टीपू, क्या सख्त का, निकल गया सब तेल। महल सैफई का हुआ, सरेआम दोफाड़, […] विस्तृत....

January 21st, 2017

 

रोेडरेज की बढ़ती घटनाएं

(डा. राजेंद्र प्रसाद शर्मा, जयपुर (ई-पेपर के मार्फत)) बीच चौराहों पर रोडरेज की घटनाएं न केवल चिंतनीय हैं, बल्कि आज के युवाओं की संवेदनहीन मानसिकता को दर्शाती हैं। जरा सी बात पर एक-दूसरे की जान तक ले लेना आम होता जा रहा है। आखिर यह […] विस्तृत....

January 20th, 2017

 

दूर हुआ क्लेश

(डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर) साइकिल की चाबी मिली, नाच रहे अखिलेश, छीना-झपटी खत्म हुई अब, दूर हुआ क्लेश। साइकिल औड्डी बन गई, लगे सुनहरे पंख, अब चुनाव का बज गया, यह पंचजन्य शंख। बूढ़ा शेर पटक दिया, चाचू का है यह खोट, चुंबक लेकर […] विस्तृत....

January 20th, 2017

 

बैंक खातों की पड़ताल

(रूप सिंह नेगी, सोलन) सरकार ने नोटबंदी के बाद बैंकों में विमुद्रीकृत नोटों के जमा राशियों में से काले धन की अलगसे पहचान करने के लिए जो फार्मूला तैयार  किया गया है, वह सराहनीय है। लेकिन विभिन्न व्यवसायों, गैर सरकारी संगठनों, सरकारी विभागों और  राजनीतिक […] विस्तृत....

January 20th, 2017

 

एक मां है और एक यह सरकार!

( सुरेश कुमार, योल ) कल के समाचार में खबर पढ़ी कि मंडी के घाट की एक महिला अपने 7 दिन के बीमार बच्चे को लेकर 22 किलोमीटर बर्फ में पैदल चली। पढ़कर कलेजा कांप गया और जिन पर यह सब गुजरी, उनका क्या हाल […] विस्तृत....

January 19th, 2017

 

चंद हाथों में सिमटी संपदा

( अर्पिता पाठक (ई-मेल के मार्फत) ) ऑक्सफेम की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के एक फीसदी अमीरों के पास देश का करीब 58 फीसदी धन जमा है। सरकार और अमीरों ने साथ मिलकर काम किया, तो देश तेजी से आगे बढ़ सकता है। ऐसा […] विस्तृत....

January 19th, 2017

 

न्याय की कछुआ चाल

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) अगर आप गाड़ी चलाते हैं तथा आपका ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है और सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का सिपाही आपको रोक लेता है, तो वह चंद मिनटों में जान जाता है कि आपका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है। […] विस्तृत....

January 19th, 2017

 
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