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पाठकों के पत्र


विषैली होती राजनीति

( देव गुलेरिया, योल कैंप, धर्मशाला )

हम उन शहीदों-नेताओं को सलाम करते हैं, जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाया। हमें आजादी तो मिली, लेकिन  ‘आजाद’ शब्द से धीरे-धीरे हम अनभिज्ञ होते गए। लोकतंत्र का गठन हुआ, हमें अपने मत का अधिकार मिला, अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद-विधानसभाओं में भेजने का अधिकार मिला, ताकि हम अपनी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखें, उनका निदान पा सकें, लेकिन भोलीभाली जनता को प्राप्त क्या हुआ? चुने हुए प्रतिनिधि सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के प्रति व्यस्त हो गए। आज राजनीति किस दिशा में अग्रसर है? भाषा लगातार विषैली होती जा रही है। बाहुबल, धन का उपयोग, झूठे वादों के सपने और एक-दूसरे पर लांछन लगाकर चुनाव जीतने का यह अंदाज हमारे लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध होने का संदेश दे रहा है। अतः जनता को अपने इस अधिकार के प्रति जागरूक होना अति आवश्यक हो गया है। इसलिए समाज के बुद्धिजीवियों-समाजसेवियों तथा सरकार को इसके प्रति उचित कदम उठाने होंगे, जागरूकता अभियान चलाकर जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना होगा। साफ, ईमानदार, कर्मठ उम्मीदवारों को चुनकर संसद-विधानसभाओं में भेजना होगा, ताकि इनकी गरिमा बनी रहे। जनता को चुनावी प्रचार में हर नेता के व्यवहार पर नजर रखनी होगी और मतदान के वक्त अनैतिक लोगों के खिलाफ मताधिकार का उपयोग करना चाहिए।

 

February 24th, 2017

 
 

नशे के नरक में युवा

( राजेश सोनी, कुठेड़ा, बिलासपुर ) नशे की गिरफ्त में जिस तरह आज की पीढ़ी फंस रही है, वह अपना भविष्य तो अंधकार में धकेल ही रही है, पर साथ-साथ आसपास के समाज को भी बर्बाद कर रही है। आज हालात ये हो गए हैं […] विस्तृत....

February 24th, 2017

 

इसरो को सलाम

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) अंतरिक्ष का सिकंदर, इसरो की क्या बात, जादूगर अब देश के, बदलेगा हालात। इसरो राजाधिराज है, रचा विश्व इतिहास, एक यान से ही शतक, नहीं हुआ विश्वास। स्वप्न किए साकार सब, किया विलक्षण काम, धन्य है टीम यह, […] विस्तृत....

February 24th, 2017

 

और यह भी…

( सुरेश कुमार, योल ) सरकार को महज दस महीने बचे हैं। अब वक्त भी नहीं है और बजट भी नहीं। इसलिए परिवहन मंत्री और कुछ नहीं, तो बस अड्डों का नाम बदलने का काम ही करने लग पड़े हैं। अब खाली बैठे भी क्या […] विस्तृत....

February 23rd, 2017

 

आजादी से अब तक

( बाल मुकुंद ओझा, जयपुर (ई-पेपर के मार्फत) ) आजादी के 70 वर्षों बाद आज हमारा देश अपने देशवासियों की अंतरात्मा को झकझोर रहा है। एक वह भी वक्त था, जब देश की समृद्धि को कई उपमाएं दी गई थीं। जिस देश में दूध-दही की […] विस्तृत....

February 23rd, 2017

 

नायक हुए बेचैन

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) ईवीएम में कैद है, नेता की तकदीर, करवट, मर्जी ऊंट की, धुंधली है तस्वीर। अंदर से टूटे हुए, बाहर से मुस्कान, जैसे-जैसे दिन घटे, निकली जाए जान। नींद रात की उड़ गई, उड़ गया दिन का चैन, दिल […] विस्तृत....

February 23rd, 2017

 

लुटेरों पर नकेल

( जयेश राणे, मुंबई, महाराष्ट्र ) चीन के सर्वोच्च न्यायालय ने 67.3 लाख डिफाल्टरों को काली सूची में डाल दिया है। इस प्रकार न्यायालय ने देश से भाग जाने की उनकी हर कोशिश को नाकामयाब कर दिया है। डिफाल्टरों के साथ कैसे बर्ताव करना चाहिए, […] विस्तृत....

February 23rd, 2017

 

दुष्प्रचार से बचें

( डा. शिल्पा जैन, वंरगल (तेलंगाना) ) कुछ दिन पहले व्हाट्सऐप पर एक मैसेज बहुत शेयर किया गया। इसमें दो महिलाओं के स्कैच बने हुए थे, साथ में यह संदेश पुलिस की तरफ से था कि उक्त दोनों महिलाएं बच्चा चोर हैं। अतः लोग उनसे […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

हताशा से भरी भाषा

( रूप सिंह नेगी, सोलन ) इसमें दो राय नहीं कि हाल के कुछ समय से देश के नेताओं ने भाषा के स्तर को न्यूनतम पायदान पर पहुंचा दिया है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण और भारतीय मूल्यों के विपरीत ही कहा जा सकता है। उत्तर प्रदेश की […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

अवैध बनाम वैध

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) है अवैध कुछ भी नहीं, वोटों का रखा ध्यान, उन्हें पुरस्कृत वो करें, मिले मान-सम्मान। सरकारी का अर्थ है, मालिक मेरा बाप, नियमित होगा जल्द ही, फिक्र करें मत आप। कब्जा कर ले, फेंक नियम-कानून, जितना चाहे लूट […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 
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क्या हिमाचल में बस अड्डों के नाम बदले जाने चाहिएं?

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