खतरे में मत्स्य पालन

अभिषेक कुमार, धर्मशाला मछली जिसे संस्कृत में मत्स्य भी कहा जाता है तथा सरकार ने जिसे पालने के लिए कई कदम उठाए हैं और जिसे पालने पर सरकार बल तथा ऋण दोनों उपलब्ध करवा रही है, परंतु कुछ लोगों के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। आजकल…

सुधार मांगती शिक्षा

रूप सिंह नेगी, सोलन हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर, गुणवत्ता और विद्यार्थियों की संख्या में निरंतर गिरावट पिछले कई दशकों से चर्चा का विषय तो रहा है, लेकिन लगता नहीं है कि किसी भी आती-जाती सरकार ने कोई खास कारगर कदम उठाए…

चार साल की चांदनी!

 सुरेश कुमार, योल नरेंद्र मोदी ने अपनी चार साल की उपलब्धियां गिना दीं और विपक्ष ने महंगाई पर हल्ला बोला। इतना बड़ा देश और सवा करोड़ लोगों को खुश करना आसान नहीं। मोदी ने अपनी तरफ से कोशिश की या यूं कहें कि देश के साथ नए प्रयोग किए चाहे वह…

पाक की नापाक हरकतें

डा. अक्षित, अदित्य, तिलक राज गुप्ता, रादौर पड़ोसी अगर निकम्मा हो, तो जीना दुश्वार हो जाता है। यह भारत और अफगानिस्तान का दुर्भाग्य है कि उन्हें पाकिस्तान जैसा निकम्मा पड़ोसी मिला है। कभी अफगानिस्तान में रूस की मौजूदगी को पश्चिमी देशों ने…

घटते प्राकृतिक संसाधन

अजय भंडारी, विद्यार्थी ,पीजी कालेज सोलन हिमाचल निर्माता डा. परमार ने कहा था कि ‘हिमाचल में खूबसूरती के जखीरे जमा हैं।’ उनका यह कथन बिलकुल सत्य है। हिमाचल को प्राकृतिक सौंदर्यता और संसाधनों की बहुतायत के कारण विश्व भर में ख्याति प्राप्त है,…

बने रोजगारपरक योजना

अंकित कुंवर, दिल्ली देश में बढ़ रही बेरोजगारी केवल एक समस्या ही नहीं अपितु विश्व में देश की स्थिति को प्रतिबिंबित भी कर रही है। हम तकनीकी युग में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं के प्रति आकर्षित हो रहे हैं, किंतु सच्चाई तो यह है कि देश को…

अस्पताल या शोपीस

पूजा ठाकुर, जवाली जवाली अस्पताल बाहर से देखने के लिए  बिलकुल अच्छा बनवा दिया है, परंतु अभी भी यहां स्वास्थ्य सेवाओं से लोग वंचित हैं। सुविधाएं नहीं होने की वजह से यह अस्पताल सिर्फ शोपीस बन कर रह गया है। इस अस्पताल में डाक्टरों की कमी मुख्य…

महंगाई से बेहाल जनता

लता शर्मा, कांगड़ा देश में लगातार बढ़ रही महंगाई ने आम जनता की जेब पर गहरा असर डाला है। महंगाई का आम जनता पर ऐसा असर हो रहा है कि जेब में पैसों का बोझ बढ़ जाता है और थैले में समान कम होता जाता है। कभी खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें,…

जलते जंगल, सोती सरकार

सुरेश कुमार, योल सुबह के अखबार जंगलों में आग की दुर्घटनाओं से अटे पड़े रहते हैं। सब जान जाते हैं, पर सरकार के ऊपर असर नहीं होता। मुट्ठी भर वन कर्मी भला कैसे ये सब संभालेंगे। केंद्र ने 64 प्रतिशत हिमाचली क्षेत्र वनों के अधीन किया और आग ऐसा…

मौत-मौत में फर्क क्यों

अक्षित, आदित्य, तिलक राज गुप्ता, रादौर कश्मीर घाटी से गत 30 अपै्रैल को दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। पहली घटना में सुरक्षा बलों ने दो आतंकी कमांडरों-समीर टाइगर और आकिब खान को मार गिराया, जिसके बाद…

निपाह से रहें सतर्क

राजेश कुमार चौहान आज दुनिया कई तरह की जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रही है। कुछ बीमारियों के फैलने का कारण पशु-पक्षी भी बताए जाते है। भारत भी इन बीमारियों की चपेट में आ गया है। जानलेवा वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए जागरूकता और सतर्कता…

सौर ऊर्जा सही विकल्प

भोमिन, बल्ह, मंडी आने वाला समय आर्थिक आधार पर देश के सामने कई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आज महंगाई अपने चरम पर है। आजकल पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दामों से सभी लोग परेशान हैं। दूसरी तरफ पेट्रोल व डीजल की कीमतों पर  हमारा पूरा आर्थिक परिवेश…

कृषि को बने नीति

बीरबल सिंह डोगरा,  कांगड़ा हिमाचल प्रदेश कृषकों और मेहनतकाश लोगों का प्रदेश है। किसान प्रदेश व देश का अन्नदाता है। सरकार आधुनिक ढंग से और वैज्ञानिक तौर- तरीके से नए-नए किस्म के उन्नत बीजों से कृषि को बढ़ावा दे रही है। दुर्भाग्यवश हिमाचल का…

मजाक बना लोकतंत्र

विनोद गुलियानी, बैजनाथ कर्नाटक के चुनाव परिणाम आते ही लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाना जन प्रतिनिधियों के लिए आए दिन की बात हो गई है। गठजोड़ की बैसाखी द्वारा पोस्ट पोल अलाएंस द्वारा सरकार बनाने को वे पूर्णतः स्वतंत्र हो जाते हैं व रह जाते हैं…

नक्सलवाद की आग

राजेश कुमार चौहान छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से नक्सलियों ने सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया। इसमें कुछ सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए। भारत के कुछ राज्यों में नक्सलवाद की समस्या आतंकवाद से भी खतरनाक समस्या बन चुकी है। केंद्र और नक्सल प्रभावित…