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पाठकों के पत्र


ऋण लेना मजबूरी या आदत

(कंचन शर्मा,  नालागढ़)

अभी कुछ दिन पहले ही हिमाचल सरकार ने 700 करोड़ का ऋण उठाया था और अब सरकार फिर 500 करोड़ का कर्ज 10 साल की अवधि के लिए लेगी। यानी कि दूसरे-तीसरे महीने के बाद ऋण लेना ही पड़ रहा है। बिना ऋण लिए सरकार का काम चलने वाला भी नहीं। वैसे चुनावी वर्ष में सरकार ने खुले दिल से घोषणाएं कर दी हैं और पलट कर एक बार भी नहीं देखा कि इन घोषणाआों को पूरा करने के लिए पैसा है या नहीं। प्रदेश ने अपने पैर चादर के बाहर फैला दिए हैं। इस वित्त वर्ष में 3500 करोड़ रुपए अदायगी में जाएंगे और अंदाजा लगाया जा सकता है कि यही 3500 करोड़ अगर किसी विकास कार्य में लगाया होता,तो प्रदेश की तस्वीर बदलती। पहले ऋण लेना सरकार की मजबूरी हो सकती थी और अब यही मजबूरी उसकी आदत बन चुकी है। हर मंत्रिमंडल की बैठक में नौकरियों का पिटारा खुलता है और अभी जो कर्मचारी व पेंशनर्ज हैं, उनके लिए वेतन और पेंशन का भुगतान करना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। सरकार को खुद पता नहीं कि जो घोषणाएं कर रही है उसके लिए पैसा कहां से आएगा। बस चुनावी वर्ष है जो जनता मांगे दे दो,जीत गए तो संभाल लेंगे नही जीते तो दूसरी पार्टी भुगतेगी। दोनोें दलों की यही सोच रहती है और यही सोच कर्ज की कद बढ़ाती है।

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May 24th, 2017

 
 

कर्ज पर बेजा विवाद

(रूप सिंह नेगी, सोलन) आजकल प्रदेश में  सरकार  द्वारा ताजा कर्ज लेने और प्रदेश पर 50000 करोड़ के करीब की रकम कर्ज होने पर चर्चाओं का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है, लेकिन कर्ज लेने के बिना विकास कर पाना भी तो मुमकिन नहीं होता है। […] विस्तृत....

May 24th, 2017

 

शब्द वृत्ति

चारा बाबू कसकर चूसा प्रांत को, जैसे लैमन जूस, केवल चारा ही चरा, कभी न खाई घूस। अति दरिद्र अति दीन हैं, फिरते खाली पेट, तन पर बस बनियान है, कहते हो क्यों सेठ। आधी दिल्ली आपकी, फिर भी हैं लाचार, अब तो अपना  बंद […] विस्तृत....

May 24th, 2017

 

संकट बना फ्लाईओवर

(अक्षित आदित्य तिलक राज गुप्ता, रादौर) अंबाला से चंडीगढ़ जाते हुए या आते हुए जब आप लालड़ू के फ्लाईओवर पर पहुंचते हैं तो देखेंगे कि दाएं और बाएं, दोनों तरफ सवारियों का जमघट लगा रहता है, जो कि फ्लाईओवर पर ही रुकने वाली परिवहन की […] विस्तृत....

May 24th, 2017

 

शिक्षा के खूनी मंदिर

( करण सिंह, चंबा  ) यह कैसी शिक्षा जो जीना नहीं मरना-मारना सिखाती हो। हाल ही में छात्र गुटों के बीच हो रहे खूनी संघर्ष खूब सुर्खियां बन रहे हैं। आखिर इन सब का जिम्मेदार कौन है? जहां पढ़ाई का माहौल होना चाहिए वहां खूनी […] विस्तृत....

May 23rd, 2017

 

शराब पर पाबंदी

( केसी शर्मा, सूबेदार मेजर(रि), गगल ) शराब पर मुकम्मल पाबंदी के पक्ष में शायद न केंद्र है न राज्य सरकारें, लेकिन देश का महिला वर्ग शराब की बिक्री पर मुकम्मल पाबंदी चाहता है। शराब की दुकानों की संख्या निरंतर बढ़ना एक चिंता का विषय […] विस्तृत....

May 23rd, 2017

 

शहादतों का सिलसिला

( राखी वर्मा, नाहन ) रोज ही अखबार में आ जाता है कि सीमा पर दो आतंकी ढेर और सेना का एक जवान शहीद हो गया। आतंकी को मार गिराने में हम अपनी जीत समझें या अपने जवान को शहीद कर के हम हार गए। […] विस्तृत....

May 23rd, 2017

 

शब्द वृत्ति

पुनर्विचार याचिका ( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) आईसीजे, का फैसला, उन्हें नहीं मंजूर, क्या शरीफ क्या कुरैशी, सदमे में हैं चूर। चार सौ चालीस वोल्ट की, मिली करारी हार, आज पराजय चाट ली, मुंह की खाई मार। चांटा ऐसा जड़ दिया, सूज गए […] विस्तृत....

May 23rd, 2017

 

ऋण लेना मजबूरी या आदत!

(कंचन शर्मा, नालागढ़) अभी कुछ दिन पहले ही हिमाचल सरकार ने 700 करोड़ का ऋण उठाया था और अब सरकार फिर 500 करोड़ का कर्ज 10 साल की अवधी के लिए लेगी। यानी कि दूसरे-तीसरे महीने के बाद ऋण लेना ही पड़ रहा है। बिना […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 

मौसम के बदलते तेवर

(मयंक शर्मा, डलहौजी) पहले बिना कम्प्यूटर के ही हमारे बुजुर्ग मौसम की भविष्यवाणी कर देते थे कि अब गर्मियां शुरू हो रही हैं या अगले महीने से बरसात का मौसम आ रहा है। यानी पहले मौसम चक्र अपने नियमानुसार चलता था। हर मौसम प्रकृति ने […] विस्तृत....

May 22nd, 2017

 
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