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व्यक्तिगत विकास ने उकेरा पिछड़ेपन का धब्बा

जिला चंबा को पिछड़े जिला में 114वां स्थान मिलने से प्रदेश के राजनेताओं द्वारा अब तक किए प्रयासों को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। प्राचीनकाल में विकसित रहे इस जिला को आखिर इस पायदान तक पहुंचाने में क्या-क्या कारण रहे हैं आइए पढ़ें क्षेत्र…

सरकार से रिश्ते न निभाओ…जनता को जगाओ

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतु है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

अंत तक लड़ाई ही बड़ी उपलब्धि

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतु है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतु है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

आम आवाज को अंजाम तक पहुंचाना है उपलब्धि

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतू है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

सरकार से संबंध हों… पर एक हद तक

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतू है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

सरकार से रिश्ते न निभाओ…जनता को जगाओ

अपनी प्रखर लेखनी से सरकार की चूलें हिला देने वाला पत्रकार समाज को आईना दिखाकर सच से रू-ब-रू करवाता है। सरकार और आवाम के बीच की इस कड़ी को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यूं ही नहीं कहते। यह वह सेतू है जो देश और समाज की तरक्की की दिशा और दशा तय करता…

मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

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मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

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मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

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मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

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मंजिल नहीं…बस सफर ही है पत्रकारिता

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विकास चाहिए, तो कुछ सहना होगा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बिंदु हैं। इन फैसलों का हम पर त्वरित और दूरगामी क्या असर है। प्रबुद्ध जनता इन फैसलों पर क्या सोचती है। इन्हीं सवालोें के जवाब जानने के लिए प्रदेश के अग्रणी…

एनजीटी का फैसला…कौन देगा पांच लाख जुर्माना

जंगल और पहाड़ ही अब हिमाचल के लिए परेशानी बन रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी हिमाचल को झटका दिया है। पेड़ काटने पर सीधा जुर्माना, अढ़ाई मंजिला से ज्यादा मकान बनाने पर रोक, एनएच के किनारे भवन बनाने से रोक ये ऐसे निर्देश हैं, जो कि…

फिर सोच ले एनजीटी…फैसला गलत है

एनजीटी का निर्णय अव्यावहारिक है। एनजीटी के फैसले से प्रदेश में जनता की नींद और चैन उड़ गया है। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जनता पर ऐसा निर्णय थोपा गया है, जो प्रदेश के विकास को पूरी तरह ठप कर देगा। इस निर्णय के चलते मैट्रो सिटी जैसे हाल को…
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