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चौंकाने वाली हकीकत

( जयेश राणे, मुंबई, महाराष्ट्र )

राजकोट के एक ही सहकारी बैंक में नोटबंदी के बाद 871 करोड़ रुपए जमा किए गए, 4500 नए खाते खोले गए और एक ही मोबाइल नंबर से पांच दर्जन से अधिक खाते शुरू किए गए। आयकर विभाग की कार्रवाई में ऐसी चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। इस प्रकरण के रहस्योद्घाटन के पश्चात उन बैंकों की तलाशी करने का अभियान तेज करना पड़ेगा, जिन पर इस तरह का संदेह पैदा हो। नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों में इस तरह की गड़बडि़यों की शंका बढ़ने लगी थी। इसके बाद विभागीय कार्रवाई में कई मामले उजागर हुए हैं। बैंकों में काला धन जमा करने के बाद वह सफेद हो जाएगा, यह मंशा बैंकों में बड़ी मात्रा में धन राशि जमा करने के पीछे हो सकती है। वह सहकारी बैंक तो सिर्फ रुपए जमा करती गई। आयकर विभाग ने उस पर शिकंजा कसने पर आखिर सच सामने आ ही गया। अपनी मर्जी के हिसाब से गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करने वाले बैंकों ने देश को डुबोया है। इससे पहले नोटबंदी के फैसले के बाद कई बैंक शाखाओं में गलत तरीके से नोट बदलने के मामले सामने आए थे। आम जनता के लिए कड़े नियम और धनवानों के लिए उनमें शिथिलता लाने की प्रवृत्ति भी दुर्भाग्यपूर्ण ही मानी जाएगी। इस तरह काम करने वाले बैंक नाम के लिए आम जनता के लिए होते हैं, जिनका मूल उद्देश्य तो धनवानों को फायदा पहुंचाना होता है। जो बैंक तय नियमों को दरकिनार करके चलाए जा रहे हैं, उनकी जांच करके उन्हें प्रतिबंधित करना चाहिए। इस तरह के गोरखधंधे में शामिल कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

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