आपरेशन के दौरान आई सामान-दवाइयों की याद!
आईजीएमसी में नॉर्मल आपरेशन के लिए भी डाक्टरों ने बार-बार दौड़ाए तीमारदार
शिमला – शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज की स्वास्थ्य सुविधाओं पर पहले से ही कई बार सवालिया निशान लग चुके हैं, बावजूद इसके अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधारी नहीं जा रहीं। आईजीएमसी में शुक्रवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। अस्पताल के सर्जरी वार्ड में आपरेशन के नाम पर मरीज के तीमारदारों से बार-बार रफ कागज पर दवाइयों की लिस्टें थमाई जाती रहीं। बता दें कि अस्पताल में हर्नियां के हाइड्रोसीन आपरेशन के लिए आए मरीज के तीमारदार को सुबह से लेकर दोपहर तक दवाइयों के लिए आठ से दस दौड़े डाक्टरों द्वारा लगवाई गईं। ऐसे में बिलासपुर के नवगांव क्षेत्र से आए मरीज के तीमारदार बाबूराम खासे परेशान हुए। बताया जा रहा है कि आपरेशन के बाद मरीज के तीमारदार को आपरेशन का बचा सामान भी वापस नहीं किया गया। हालांकि परिजनों ने आपरेशन थियेटर में लड़ झगड़कर 300-300 रुपए के दो इंजेक्शन वापस लिए। इस पर भी तीमारदारों और ओटी में मौजूद स्टाफ के बीच काफी बहस हुई। उल्लेखनीय है कि आईजीएमसी में इस तरह का यह मामला पहली बार ही पेश नहीं आया है। इससे पहले भी ओटी व डाक्टरों द्वारा महंगी दवाई व बार-बार टेस्ट के सामान लाने के मामले सामने आ चुके हैं। जानकारी के अनुसार हर्नियां के हाइड्रोसीन का आपरेशन नॉर्मल आपरेशन होता है। ऐसे में चिकित्सकों को पहले से ही पता होता है कि उन्हें ओटी के लिए क्या-क्या सामान चाहिए।
डाक्टर रद्दी कागज पर लिखते हैं दवाएं
आईजीएमसी में चिकित्सकों के पास दवाइयों का नाम लिखने के लिए अस्पताल की अलग से पर्ची पैड भी उपलब्ध नहीं है। कई अलग से पर्ची पैड न होने की वजह से केमिस्ट भी तीमारदारों को दवाइयां देने से मना कर देते हैं। बावजूद इसके अस्पताल में चिकित्सक कागज पर नाम लिखकर तीमारदारों को केमिस्टों के पास भेज देते हैं।
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