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भूपिंदर सिंह


पूर्णकालिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करिए

भूपिंदर सिंह

लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं

भूपिंदर सिंहहिमाचल में जहां-जहां खेल सुविधा है, वहां पर अच्छे प्रशिक्षक अनुबंधित कर खेल प्रशिक्षण की जिम्मेदारी अगले पांच वर्षों तक दी जाए। इसके साथ-साथ उनका निरीक्षण भी पैनी नजर से किया जाए, ताकि आगे चलकर उत्कृष्ट खेल परिणाम भी आ सकें…

ओलंपिक खेलों में भारत को अभी तक कुछ खेलों में इक्का-दुक्का पदक जरूर मिले हैं, मगर एथलेटिक्स, जिम्नास्टिक व अधिक पदकों वाली स्पर्धाओं में एक भी पदक नहीं मिल पाया है। इस नाकामी का मुख्य कारण जहां देश में खेल संस्कृति का अभाव है, वहीं हम पूरा वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखने वाले प्रशिक्षण केंद्र देश में स्थापित नहीं कर पाए हैं। भारतवर्ष में सामान्यतः वर्ष में छह महीने मौसम गर्मी व उमस भरा रहता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम अगर लगातार आठ-दस वर्षों तक बिना किसी परेशानी के चलता है, तभी विश्व स्तर पर अच्छे खेल परिणाम आते हैं। हिमाचल प्रदेश की जलवायु ऐसी है, जहां गर्मियों में अभ्यास यूरोप व अमरीका की तरह हो सकता है। यदि यहां पर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएं, तो निश्चित तौर पर भारत का खेलों में प्रदर्शन सुधरेगा। खेल राज्य सूची का विषय है। यदि हम हिमाचल में उच्च स्तरीय खेल प्रशिक्षण केंद्र तैयार करते हैं, तो उनसे हम जहां खेल पर्यटन को बढ़ावा देंगे, वहीं हम अपने हिमाचली खिलाडि़यों को भी राष्ट्रीय टीमों में भागीदारी का पूरा-पूरा मौका दे सकते हैं। इससे ये खेल प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे चलकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर सकेंगी। आज देश का हर राज्य अपने यहां खेलों को बढ़ावा देने के लिए उच्च खेल परिणाम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर रहा है। पंजाब ने अपने यहां पंजाब खेल संस्थान नाम से विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षण केंद्र अलग-अलग जिलों में खेल सुविधा के अनुसार स्थापित किए हैं। इसका परिणाम यह रहा है कि पिछले दिनों हुई विश्व कनिष्ठ हाकी प्रतियोगिता में भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीम के दस सदस्य पंजाब के खेल संस्थान की उपज थे। पंजाब की धरती से प्रशिक्षण हासिल कर रही कई प्रतिभाएं एथलेटिक्स में भी भारत का नाम रोशन कर रही हैं। इसी तरह गुजरात ने भी अपने यहां खेल अकादमियां शुरू की हैं। उसके बाद से गुजरात के भी कई खिलाड़ी अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तक दे रहे हैं। यही सब मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने भी अपने यहां शुरू कर रखा है। चंद्र बाबू नायडू ने पहले तो आंध्र प्रदेश की खेलों को ऊपर ले जाने में योगदान दिया था और अब नए बने तेलंगाना में भी खिलाडि़यों को विशेष सुविधाओं का प्रबंधन किया है।

जिन राज्यों ने अपने यहां उच्च खेल परिणाम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं, उन्होंने इन केंद्रों पर देश के नामी प्रशिक्षकों को एक लाख से अधिक महीने का वेतन देकर अपने यहां अनुबंधित किया है। खिलाडि़यों के चयन की जिम्मेदारी भी उन्हें दे दी है। उत्कृष्ट खेल परिणाम दिलाने के लिए उन्हें पूरी-पूरी सहायता भी दी है। यदि खेल परिणाम अनुकूल नहीं आते हैं, तो अनुबंध रद्द करने की भी बात है। हिमाचल प्रदेश में इस समय भारतीय खेल प्राधिकरण के दो खेल छात्रावास धर्मशाला में लड़कियों के लिए तथा बिलासपुर में लड़कों के लिए कुछ खेलों में चल रहे हैं। साथ ही साथ राज्य खेल विभाग बिलासपुर तथा ऊना में खेल छात्रावास चला रहा है। अच्छे खेल प्रशिक्षकों के अभाव में ये खेल छात्रावास अभी तक स्तरीय खेल परिणाम नहीं दिला पाए हैं। भारतीय खेल छात्रावासों के तो परिणाम कुछ खेलों में काफी अच्छे रहे हैं, मगर अधिकतर खेलों में तो खानापूर्ति ही पाई गई है। ऊना राज्य खेल छात्रावास अभी तक किसी भी खेल में कोई भी उत्कृष्ट खेल परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो दूर, राष्ट्रीय स्तर पर भी नहीं दे पाया है। राज्य खेल छात्रावास बिलासपुर कबड्डी महिला में एक समय जरूर अच्छा प्रशिक्षण दे रहा था, मगर आज वहां भी सब खत्म है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रो टर्फ है, मगर वहां पर खेल छात्रावास में हाकी के खिलाड़ी नहीं हैं, क्योंकि हाकी खेल ही ऊना छात्रावास में नहीं है। जहां-जहां खेल सुविधा है, वहां पर अच्छे प्रशिक्षक अनुबंधित कर खेल प्रशिक्षण की जिम्मेदारी अगले पांच वर्षों तक दी जाए तथा उसके साथ-साथ उनका निरीक्षण भी पैनी नजर से किया जाए, ताकि आगे चलकर उत्कृष्ट खेल परिणाम भी आ सकें। समय आ गया है अब खेल के अग्रणी राज्यों की तरह हिमाचल को भी अपने यहां उच्च स्तरीय खेल प्रशिक्षण सुविधा विकसित करनी होगी। इससे देश तथा प्रदेश दोनों को लाभ होने वाला है। खेल किसी भी राज्य व देश की तरक्की व खुशहाली का पैमाना होते हैं। प्रदेश के शासन व प्रशासन को भी यह हकीकत समझनी होगी। अगर आज हिमाचल अग्रणी शिक्षित राज्यों में आ रहा है, तो खेलों में भी उसे आगे लाने के लिए आगामी सरकार को इन पर विशेष ध्यान देना होगा। अगर प्रदेश सरकार खेलों के विकास के प्रति संजीदगी दिखाती है, तो हिमाचल प्रदेश खेलों के क्षेत्र में भी काफी आगे जा सकता है।

ई-मेल : penaltycorner007@rediffmail.com

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May 26th, 2017

 
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