हिमाचली सेब ने लूटे बाजार; देश भर की मंडियों में पहुंची 27 लाख 25 हजार पेटियां, सरकार ने अब खोले 195 एकत्रीकरण केंद्र

By: रिपोर्टः विशेष संवाददाता, शिमला Aug 23rd, 2020 12:08 am

हिमाचली सेब ने पूरे देश में धमाल मचा दी है। देश भर की मंडियों में पहाड़ का सेब छा गया है। करीब  27  लाख 25 हजार सेब पेटियां अब तक देश की मंडियों में जा चुकी हैं।  हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के रफ्तार पकड़ते ही कुल्लू, शिमला, मंडी सहित किन्नौर से सेब मंडियों में पहुंच रहा है तथा देश की विभिन्न मंडियों में अब तक पौने नौ लाख पेटियां पहुंच चुकी हैं । कुछ दिन पहले ही सरकारी प्रवक्ता ने बताया था कि अब तक 1933 ट्रकों के माध्यम से देश की विभिन्न मण्डियों में 27 लाख से ज्यादा सेब की पेटियां भेजी जा चुकी हैं।

प्रदेश सरकार ने अभी तक मंडी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत सेब के लिए 195 एकत्रीकरण केंद्र खोले हैं। इनमें 106 केंद्र एचपीएमसी तथा 89 हिमफैड द्वारा खोले गए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत अभी तक एचपीएमसी तथा हिमफैड द्वारा 130.865 टन सेब का प्रापण किया गया है। कीटों, दवाइयों से दूषित व फंफूद व स्कैव युक्त फल स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना के अंतर्गत 51 मिली मीटर व्यास से अधिक सेब का ही प्रापण किया जाएगा।    खराब छाल अथवा पक्षियों द्वारा खाए गए फलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। कीटों व दवाइयों के कारण दूषित और फंफूद बीमारी व स्कैब युक्त फलों को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। एथरोल स्प्रे युक्त फल को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, ओलावृष्टि से हल्के नुकसान, देखने में खराब व विकृत फलों का प्रापण किया जाएगा।

रिपोर्टः विशेष संवाददाता, शिमला

ऊना में ढाई फीट के पौधे पर लगे पपीते

ऊना में केवीके के अधिकारियों की मेहनत रंग लाने लगी है। अपनी माटी टीम ने  कृषि विज्ञान केंद्र ऊना का दौरा किया। वहां चल रहे कुछ नए प्रयोग किसानों को हैरान कर देने वाले हैं। मसलन एक पपीते का पौधा ऐसा तैयार किया गया है कि उसकी हाइट महज ढाई फीट होने पर ही फल लग रहा है। अगर यह प्रयोग सफल होता है,तो भविष्य में किसानों को इससे बड़ा फायदा होगा। केंद्र में बैंगन पर भी जोरदार तरीके से काम चल रहा है। यहां ओरेंज और ग्रीन कलर के बैंगन हर किसी को खूब भा रहे हैं। इसके अलावा हरी मिर्च और पोमेटो पर भी काम चल रहा है। हमार टीम ने कें द्र के विशेषज्ञ  डॉ. सिन्हा से बात की। डा सिन्हा ने कहा कि ये प्रयोग काफी सफल हो रहे हैं,जिससे किसानों को काफी फायदा होगा।

रिपोर्टः स्टाफ रिपोर्टर, ऊना

कोरोना काल में बागबानों को मिल रहे मुंहमांगे दाम

हिमाचली सेब ने धीमी शुरूआत के बाद अब देश की मंडियों में धमाल मचा दी है। कोरोना काल में अब बागबानों को मनमाफिक दाम मिल रहे हैं। पेश है मतियाना से सुधीर शर्मा की यह स्पेशल रिपोर्ट

हिमाचल में  पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का सेब कारोबार  पहाड़ी इकोनॉमी में बड़ा अहम स्थान रखता है। कोरोना के चलते इस बार सेब कारोबार की धीमी शुरूआत हुई थी,लेकिन अब यह बिजनेस रंग दिखाने लगा है। देश भर की मंडियों में पहाड़ी सेब ने धूम मचा दी है। अब बागबानों का अच्छे दाम मिल रहे हैं।  अपनी माटी टीम ने दिल्ली के बडे़ आढ़ती और जेसीओ ट्रेडर नरेल लाफूघाटी के संचालक अमिताभ धवन से बात की । उन्होने बताया कि  निचले क्षेत्रों फसल कम होने से सप्लाई कम आ रही है । इसी तरह  मध्यम उंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश कम होने से साइज नहीं बन पा रहा। ऐसे में तुड़ान में देरी हो रही है। इसके चलते मार्केट में सप्लाई कम होने से  बागबानों को दाम ज्यादा मिल रहे हैं। दूसरी ओर  शडी मतियाना के बागवान अमी चंद चंदेल, सुनील शर्मा, लांलचंद, श्याम सिंह चंदेल ने बताया कि अच्छे दाम मिलने से उन्हें भारी राहत मिली है। कुल मिलाकर सेब सीजन ने अब तेजी पकड़ ली है

रिपोर्ट: निजी संवाददाता, मतियाना

तेज हवाओं ने मटियामेट की मक्की कांगड़ा के खेतों में बिछी फसल

अमरीकी कीट के बाद अब मौसम ने मक्की की फसल पर बड़ी मार दी है। कांगड़ा  जिला के तहत रक्कड़ इलाके में बारिश और तेज हवाओं ने मक्की पर खूब कहर बरपाया है। पेश है यह रिपोर्ट

कांगड़ा जिला के तहत मैदानी इलाकों में बारिश और तेज हवाओं ने मक्की की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। अपनी माटी टीम ने रक्कड़ तहसील के इलाकों का दौरा किया। गांवों में जाकर पता चला कि बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से मक्की की फसल खेतों में बिछ गई है। किसानों ने बताया कि अमरीकन कीट से थोड़ी बहुत बची फसल को अब बारिश ने तबाह कर दिया है। सुबह के समय चली हवा इतनी तेज थी कि कई जगह  मक्की के पौधे तक टूट गए हैं। प्रदेश सरकार को चाहिए कि जल्द नुकसान का आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

सेब का खेल, अब तक बागबान पास, कारोबारी फेल

 हिमाचल में सेब सीजन यौवन पर है। अमूमन 15 अगस्त के बाद मंडियों में सेब की आवक बढ़ जाती थी,लेकि न इस बार ऐसा नहीं हो पाया है। ऐसे में डिमांड ज्यादा होने से बागबान फायदे में हैं,तो कारोबारी घाटा झेल रहे हैं। पेश है अपनी माटी के लिए निजी संवाददाता की यह रिपोर्ट

हिमाचल में इस वर्ष सेब की फसल कम है, ऊपर से कोरोना का खौफ भी है। ऐसे में मंडियों में फसल कम पहुंच रही है। आवक कम होने से डिमांड और प्राइस दोनों बढ़ गए हैं।  इससे बागबानों को मुंहमांगे दाम मिल रहे हैं।  बागबानों की मानें, तो बरसों बाद उन्हें बिजनेस के लिए बढि़या समीकरण बनें हैें। यह तो है सेब बिजनेस की तस्वीर का एक पहलू। सेब सीजन को दूसरा पहलू इससे पूरी तरह उलट है। सेब की कम आवक से बाहरी राज्यों से आए खरीददार मायूस हैं। एक तो उन्हें माल महंगा पड़ रहा है्र ऊपर से दो तीन दिन बाद ही ट्राले का लोड बन पाता है। इससे लदानियों को परेशानी हो रही है। हर वर्ष 15 अगस्त के बाद मंडियों मे सेब की आवक बढ जाती थी और दाम भी गिर जाते थे लेकिन इस साल 20 अगस्त बीत जाने पर अभी तक लगभग 25 लाख पेटियां ही मंिडयों मे पंहुची है जबकि गत वर्ष ये आंकडा दोगुना था। सेब खरीददार इस बात के इंतजार में है कि सेब की अराइवल बढे़ ,लेकिन इस वर्ष ऐसा होना असंभव लग रहा है।  नासिक के संतोष निकम ने बताया कि गत वर्ष उन्होने 15 करोड का कारोबार किया था। इस बार मुश्किल से 10 करोड का कारोबार ही हो पाएगा। वंही आंध्रप्रदेश के आनंद अन्ना की मानें तो वह दो दिनो बाद ही एक ट्राला भेज पा रहे है। फिलहाल सेब सीजन में बाहरी कारोबारी मायूस हैं

बरसाती पानी ने बहाईं कीमती जमीनें, किसान मायूस

बरसाती पानी प्रदेश भर में कहर बरपा रहा है। कई कनाल उपजाऊ जमीन हर साल बह जाती है,लेकिन इस मसले पर आज तक किसानों की किसी ने नहीं सुनी।

रिपोर्ट-थानाकलां, शाहपुर

हिमाचल में बरसात हर साल घरों से लेकर खेतों तक खूब कहर बरपाती है। इस दौरान सैकड़ों कनाल जमीन से फसलें बह जाती हैं।  कुटलैहड़ के सनहाल, बल्ह, सकौन, छपरोह में भारी बारिश और तेज आँधी तूफ़ान ने मक्की की फ़सल को पहुंचाया भारी नुकसान वहीं बारिश के साथ तेज आंधी तूफान एक साथ शुरू होने पर किसानों के चेहरे मायूस हो गए हैं खेतों में मक्की फ़सल बिछ गई है। इस बार मक्की की फ़सल की पैदावार सही है, लेकिन भारी बारिश और तेज़ तूफान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं स्थानीय खड्ड नाले भी उफान पर बह रहे हैं, जिसके चलते साथ लगी भूमि को काफी नुकसान हो रहा है। तेज बहाव के कारण भू स्खलन हो रहा है जिसके चलते भूमि मालिक भी चिंतित दिखाई दिए। इसके अलावा भारी बारिश से शाहपुर के साथ लगती ग्राम पंचायत बोडू सारना के गांव बलड़ी में भू-स्खलन होने से भारी नुकसान हुआ है। कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते भारी  भू-स्खलन होने से करीब  40 कनाल उपजाऊ भूमि पूरी तरह से तबाह हो गई  है। इसके साथ ही यहां लगाई गई मक्की बर्बाद हो गई। तहसीलदार शाहपुर परमानंद रघुवंशी ने कहा कि नुकसान को लेकर  हलका पटवारी  से रिपोर्ट मांगी गई है। नुकसान का आकलन कर सरकार की और से  उचित  सहायता की जाएगी।

डाक्टर एचके चौधरी कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के उप-कुलपति

शिमला — हिमाचल सरकार ने कृषि विश्वविद्यालय को नए उपकुलपति नियुक्त कर दिए है। शुक्रवार को इस बाबत अधिसूचना राज्य पाल की ओर से जारी की गई। अब डाक्टर एचके चौधरी कृषि विवि के उप-कुलपति नियुक्त होंगे।

किन्नौर के मूरंग में 40 साल बाद शुरू होगी बंद कूहल, सैकड़ों बीघा पर होते हैं सेब,मटर और राजमाह

हिमाचल के बड़े हिस्से में सिंचाई का मुख्य साधन कूहलें हैं। ऐसी कई कूहलें हैं,जो बरसों से बंद पड़ी हैं। अब सरकार इन कूहलों को संवारने का प्रयास कर रही है।   इन्हीं में से एक कूहल है किन्नौर जिला के मूरंग गांव में। रिपोर्ट

रिपोर्टः दिव्य हिमाचल ब्यूरो, रिंकांगपियो

किन्नौर जिला में मूरंग गांव बेहद खूबसूरत है। इस गांव में सैकड़ों बीघा जमीन पर सेब,मटर, राजमाह और  सब्जियां लहलहाती हैं। मूरंग के खेतों और बागों को  बरसोें पहले एकमात्र मुख्य कूहल से सिंचाई होती थी। यह  कूहल पिछले 40 साल से बंद पड़ी है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए भारी मुश्किल हो रही है। किसानों की दिक्कतों को देखते हुए अब सरकार ने इस कूहल को संवारने के लिए दो करोड़ रुपए जारी किए हैं। सब ठीक रहा,तो जल्द ही 16 हजार फीट की ऊंचाई से पाइपों के जरिए पानी फिर से मूरंग पहुंचाया जाएगा। अपनी माटी टीम  ने इस बारे में पूह ब्लॉक कांग्रेस  अध्यक्ष प्रेम कुमार नेगी से बात की ।  नेगी ने  बताया कि विधायक जगत सिंह नेगी ने एमएलए प्रायोरिटी के माध्यम से नाबार्ड से  इस कूहल को बजट मंजूर हुआ है। संबंधी विभाग की देखरेख में  काम पूरा होगा।

तेमछो कूहल से किसानों की तकदीर संवरेगी

क्षेत्र में हो रही भारी बारिश से शाहपुर के साथ लगती ग्राम पंचायत बोडू सारना के गांव बलड़ी में भू-स्खलन होने से भारी नुकसान हुआ है। कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते भारी  भू-स्खलन होने से करीब  40 कनाल उपजाऊ भूमि पूरी तरह से तबाह हो गई  है। इसके साथ ही यहां लगाई गई मक्की बर्बाद हो गई। भू-स्खलन का अंदाजा होते ही गावं वासियों  ने अपने पशुओं को पशुशालाओं से बाहर निकाल लिया तथा आबादी वहां से दूर होने के कारण किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ, परंतु चार पशुशालाएं  भू-स्खलन की चपेट में आने से मलियामेट हो गई। जानकारी के मुताबिक भू-स्खलन से दीन दयाल  की लगभग 25 कनाल, रूमला देवी  की सात कनाल,  सिमलो देवी व जगरूप की भी लगभग चार-चार कनाल  जमीन व फसल बर्बाद  हो गई है। बारिश के चलते पहाड़ी दरकने से भारी भू-स्खलन हुआ है। भू-स्खलन से खेती व जमीन पूरी तरह से तबाह हो गई है। जमीन पर मलबा व बड़े-बड़े पत्थर आ गए हैं। उक्त चार परिवारों का आठ लाख रुपए का नुकसान हुआ है। तहसीलदार शाहपुर परमानंद रघुवंशी ने कहा कि नुकसान को लेकर  हलका पटवारी  से रिपोर्ट मांगी गई है। नुकसान का आंकलन कर सरकार की और से  उचित  सहायता की जाएगी।

रिपोर्टः नगर संवाददाता-शाहपुर

किसान बोले, सोलन को नगर निगम बनाने से हमें क्या फायदा

हिमाचल में कुछ नए नगर निगम बनने जा रहे हैं। सरकार की इस कवायद को किसान कैसे देखते हैं। इस पर अपनी माटी टीम ने सोलन के किसानों को टटोलने का प्रयास किया,तो कई बातें सामने आई। देखिए यह रिपोर्ट

सोलन  को नगर निगम बनाने के फैसले से किसान नाखुश दिखाई दे रहे हैं। पंचायत सेरी के किसानों का कहना है कि नगर निगम बनने से उन्हें कोई मुनाफा नहीं होगा। उनका कहना है कि उनकी आजीविका खेती पर ही निर्भर है।  उन्हें पंचायत से सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत काफी फायदा मिला है लेकिन सोलन के नगर निगम बनने से वे इन योजनाओं से वंचित हो जाएंगे। साथ ही टैक्स का भार भी किसान नहीं सह पाएंगे। सेरी के  उप प्रधान ने बताया कि उन तक विभिन्न गांवों के किसानों के सुझाव आए हैं कि सोलन को नगर निगम न बनाया जाए।  व्यक्तिगत तौर वे भी यही चाहते हैं कि जिन स्थानों पर कृषि होती हैं उन्हें नगर निगम में शामिल नहीं करना चाहिए।  बहरहाल नए म्यूनिसिपल कारपोरेशन को किसान अपने हित में नहीं मानते है।

सीधे खेत से

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