दखल

घोषणाओं के जरिए नगर निगम की डगर लांघने के लिए भाजपा-कांग्रेस ने वादों की बरसात कर दी है। देखना दिलचस्प होगा कि शहर की जनता इन वादों के सामने क्या इरादे रखती है। चार में से तीन नगर निगमों में पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जाहिर है जनता के लिए एक नया अनुभव है

हाल ही में तीन नए नगर निगम बनने के बाद हिमाचल के कदम शहरों की ओर बढ़ रहे हैं। सोलन, मंडी और पालमपुर को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद शहरी विकास मंत्रालय पर काम का बोझ बढ़ना तय है। संविधान के 74वें संशोधन में नगर निगम की संरचना का उल्लेख किया गया है।

देश के चुनिंदा शहरों में शुमार धर्मशाला का नगर परिषद से नगर निगम और उससे स्मार्ट सिटी बनने के बाद नया जन्म हुआ है। 1848 में अस्तित्त्व में आया धर्मशाला कभी अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के करीब था, पर 1905 के भूकंप ने पूरी योजना बदल दी। इस शहर में जो सालों से नहीं

हिमाचल के सबसे प्राचीन शहरों में शुमार छोटी काशी यानी मंडी कई मायनों में अहम है। प्रदेश का यह हृदय स्थल ऐतिहासिक, पुरातात्त्विक विरासत एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को अपने दामन में समेटे है। नगर निगम का ताज सजने के बाद अब उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला स्मार्ट सिटी के तौर

प्रदेश की राजधानी शिमला के बाद सबसे तेजी से विकसित होने वाला सोलन शहर पिछले करीब डेढ़ दशक से नगर निगम बनाए जाने की आस संजोए बैठा था। प्रदेश में सरकारें आती और जाती रहीं, लेकिन सोलन को नगर निगम का दर्जा नहीं मिल पाया, जिसका खामियाजा यहां की आम जनता को भुगतना पड़ा। लोगों

अंतरराष्ट्रीय पटल पर चाय नगरी के नाम से विख्यात पालमपुर की एक पहचान और भी रही है। पालमपुर का नाम विश्व की सबसे छोटी नगर परिषदों में शुमार रहा है। मात्र 6.72 वर्ग किलोमीटर का दायरा और सिर्फ साढ़े तीन हजार की जनसंख्या वाली पालमपुर नगर परिषद को नगर निगम में बदलने में सात दशक

कृषि प्रधान प्रदेश हिमाचल में खेती का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इसमें हर साल दस से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है, यानी लोग खेती अपनाने आगे आ रहे हैं। भले ही यहां धारा 118 जैसा कानून है, लेकिन ज़मीन की खरीद-फरोख्त का सिलसिला जारी रहता है। हिमाचल में खेती के हालात

हिमाचल प्रदेश में हर जगह कोचिंग सेंटर्स व अकादमियों की भरमार है। 90 के दशक से इक्का-दुक्का अकादमियों के साथ शुरू हुआ सिलसिला अब सैकड़ों का आंकड़ा पार कर गया है। बड़ी नौकरी की ख्वाहिश लिए बाहर जाने वाले छात्रों के लिए ये अकादमियां कहीं न कहीं उनके लिए घर में तैयारी कर एचएएस-आईएएस-डाक्टर-इंजीनियर बनने

हिमाचल आज किसी पहचान का मोहताज नहीं। छोटे से राज्य की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कायम है, जिसका रुतबा निरंतर बढ़ता जा रहा है। आज हिमाचल अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है और यहां तक पहुंचे हिमाचल ने कई उतार-चढ़ाव देखे। आज हिमाचल हर क्षेत्र में सिरमौर है और इसकी उन्नति के लिए हर हिमाचल