
हमारा देश देवभूमि है। यहां लगभग प्रतिदिन परमात्मा के साथ जुडऩे के लिए कोई न कोई पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। आजकल हमारे देश में नवरात्र का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।
कभी दिवाली मिट्टी के दीयों की सौंधी महक, घर में बनते पकवानों की मिठास, आंगन के मांडणों, रिश्तों के अपनत्व और लोक परंपराओं की जीवंतता का पर्व हुआ करती थी। आज बिजली की रंग-बिरंगी लडिय़ां हैं, महंगे उपहार हैं, मिठाइयों के आकर्षक डिब्बे हैं, पटाखों का शोर है और इंटरनेट पर शुभकामनाओं की भरमार है। सब कुछ है, लेकिन क्या वह पहले जैसा उल्लास, वह आत्मीयता और वह सुकून भी है? आधुनिकता की चकाचौंध में कहीं हम दिवाली की आत्मा तो नहीं खोते जा रहे हैं? दिवाली केवल अमावस्या की रात को रौशन करने का पर्व नहीं है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नशे का मुद्दा उठाकर वादा किया था कि सरकार बनने पर 3 महीने के भीतर पंजाब को नशामुक्त कर दिया जाएगा। पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान आम आदमी पार्टी ने सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन नशा मुक्त पंजाब का वादा अधूरा ही है। पंजाब देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक और सिंचित कृषि क्षेत्रों में शामिल है, लेकिन आज उसी धरती का युवा नशे के दलदल में फंसकर अपना भविष्य खो रहा है।
हमारा देश देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां लगभग हर रोज किसी न किसी धर्म के धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं और यह सब हमें मानवता और नैतिकता की राह पर चलने की शिक्षा देते हैं। हमारे देश में भगवान श्री राम जी की लीलाओं की झलक रामलीला में भी देखने को मिलती है। रामलीला दशहरे से पहले देश के लगभग सभी राज्यों में आयोजित होती हैं, खासतौर पर उत्तर भारत में। रामलीला में यह दिखाया जाता है कि किस तरह भगवान श्री राम ने अहंकारी रावण का अंत किया था।
आपदा कभी चेतावनी देकर नहीं आती, लेकिन उससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम आपदा आने के बाद राहत और बचाव की तैयारी करने के बजाय पहले से ही जोखिमों को पहचानें, सुरक्षित निर्माण को प्राथमिकता दें और प्रत्येक नागरिक को आपदा से निपटने के लिए तैयार करें। इसी उद्देश्य के साथ प्र
विद्यार्थी किसी भी देश का भविष्य ही नहीं, उसकी संभावनाओं और प्रगति के सबसे मजबूत आधार भी होते हैं। उनके विचारों में नवीनता, आंखों में सपने और कुछ नया कर गुजरने का उत्साह समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति देता है। इसी भावना के साथ भारत में प्रति वर्ष 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और युवाओं के प्रेरणास्रोत डा. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के कारण विशेष महत्व रखता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को आधिकारिक रूप से विश्व छात्र दिवस घोषित नहीं किया है।
दस अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन बहुत से देशों में सरकारी और विभिन्न सामजिक संगठन लोगों को मानसिक तनाव से बचने के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हंै। हर व्यक्ति का शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य होना भी जरूरी है, तभी हम जिंदगी के मजे ले सकते हैं।
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में गोवा स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए सीपीआर की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। भारतीय सिनेमा ने 8 अक्टूबर को एक ऐसे कलाकार को खो दिया जिसकी पहचान केवल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने दमदार व्यक्तित्व, बेबाक आवाज और सादगी भरे जीवन के कारण भी थी। नाना पाटेकर का जाना हिंदी और मराठी सिनेमा के उस दौर का अवसान है जिसमें अभिनेता केवल चेहरे से नहीं, अपने अभिनय की ताकत से पहचाना जाता था।
महंगाई केवल बाजार में वस्तुओं की कीमत बढऩे का नाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण काम करते हैं। जब किसी देश में विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं या कच्चे माल की कीमत बढ़ती है और उसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ता है, तो इसे आयातित महंगाई कहा जाता है। भारत जैसे देश के लिए यह चुनौती अधिक गंभीर है क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था ऊर्जा की आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयातित कच्चे तेल पर