
राष्ट्र की सुरक्षा केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, अनुशासित, प्रेरित और राष्ट्रनिष्ठ सैनिकों से सुनिश्चित होती है। इसलिए भारत की सैन्य भर्ती व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सेना को दीर्घकाल तक सक्षम बनाए, युवाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य प्रदान करे तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। समय की मांग है कि सरकार, सेना और रक्षा विशेषज्ञ चिंतन करें...
‘तुम हमें स्वीकार करो, चाहे हम तुम्हें नहीं करते।’ छक्कन ने बताया है, आजकल तेरी दुनिया का यही चलन है। खोटे सिक्के तो कहीं चलते नहीं, ऐसा हमेशा सुनते आए थे, लेकिन आजकल जो खोटा है, वही चलता है। भाई जान, यहां खरा हो जाना एक गुनाह हो गया। खरे का अर्थ है सीधा, सपाट होना। होगा पिछले युग का यह गुण। आजकल तो इस सूत्र ने बात निपटा दी है, कि ‘जनाब, यहां तो सीधी उंगली से घी भी नहीं निकलता। उंगली टेढ़ी नहीं, अगर जन्मजात टेढ़ी हो तभी बात बने।’ किसी दिन बहुत पहले हमारे घर में शरीफ बच्चा पैदा हो जाना एक सुसंवाद होता था। आज शरीफ और नैतिक गुणों से भरपूर संतान को देख कर
2024 के कानून में भी दस साल तक की जेल और करोड़ों का जुर्माना था, फिर भी प्रश्नपत्र लीक होते रहे। इसलिए सवाल है कि सिर्फ आंकड़े बढ़ाने से कितना फर्क पड़ेगा? जानकारों का कहना है कि पेपर लीक असल में पेपर की छपाई, ढुलाई और रखरखाव के दौरान या कोचिंग माफिया के नेटवर्क से होता है। जब तक इस पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा, साइबर निगरानी और तकनीकी ऑडिट मजबूत नहीं होगा, तब तक अकेली सजा से पेपर लीक नहीं रुकेगा...
अब राज्यों में पहले से तैनाती की नीति लागू कर दी गई है और राहत बलों की मौजूदगी 68 जगहों पर है, जिसमें 28 रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर और 24 टैक्टिकल प्रीपोजिशनिंग लोकेशन शामिल हैं...
तमीजी बदतमीजी को लेकर ऊपर ऊपर से देखा जाए तो इसके दो तीन वर्ग होते हैं। सर्वप्रथम बदतमीजी वाले, द्वितीय तमीज वाले और तीसरे स्तर पर दोनों के मिश्रण वाले बोले तो, न बदतमीजदार, न तमीजदार। तमीजदार भी तो बदतमीजदार भी। डिमांड के अनुसार जैसे उनका दांव लगे, जैसी किसी की डिमांड हो, वैसे वे हो लेते हैं। मैं वो जीव हूं जो बाहर से गजब का बदतमीज दिखता है, पर भीतर से तमीजदार हूं। जो भीतर से तमीजदार होते हैं, वे अधिकतर बाहर से बदतमीज दिखते हैं। जो भीतर से तमीजदार हों और बाहर से बदतमीज दिखते हों, मेरे हिसाब से उनसे संभलकर रहने की जरूरत नहीं होती। ऐसा मेरा मानना है। पर जो बाहर से तमीजदार और भीतर से बदतमीज टाइप के जीव होते हैं, उनसे संभलकर रहने की बहुत जरूरत होती है। वे बहुत खतरनाक होते हैं। दीमक से भी खतरनाक। उन पर किसी भी तरह के पेस्टिसाइड का कोई असर नहीं होता।
27 अक्तूबर 1977 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के गांव कुरालसी में जन्मे नीरज जैन को पिता बिजेंद्र जैन व माता श्रीमती सावित्री जैन ने उच्च संस्कार व शिक्षा दी। दादा शिखर चंद जैन के आदर्शों ने उनके जीवन को नई दिशा दी...
ज्ञानी कहते हैं कि सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में दुनिया में उतने ही मत हैं, जितने मनुष्य। धर्म कहते हैं कि संसार ईश्वर की इच्छा से जन्मा। विज्ञान हमें महाविस्फोट की कथा सुनाता है। दार्शनिक उसे माया का विस्तार बताते हैं। साहित्यकार उसे एक अनंत स्वप्न मानते हैं। इतिहासकार उसके आरंभ की तिथि खोजते-खोजते स्वयं इतिहास बन जाते हैं। और काल...वह इन सबको सुनकर केवल मुस्करा भर देता है। क्योंकि वह जानता है कि उत्पत्ति का सबसे बड़ा रहस्य य
जो बिजनेस सही वैल्यू देते हैं, उन्हें ऐसे सिस्टम से डरने की कोई जरूरत नहीं है जो यह पक्का करता है कि बार-बार पेमेंट लेने से पहले ग्राहक पूरी तरह से जानकारी रखें...
सरकारी अस्पताल के आपरेशन थियेटर में बेहोश होना सबसे कठिन प्रक्रिया है, फिर भी वह पूरी व्यवस्था देखकर बेहोश हो चुका था। इससे पहले कि सर्जन आपरेशन शुरू करता, उसके ट्रांसफर आर्डर आ गए। गंतव्य मनपसंद था, इसलिए मरीज को छोड़ वह वहां पहुंच कर खुद को दर्ज करने की कार्रवाई में मशगूल हो गया। पहली बार सर्जरी विभाग का सहयोगी स्टाफ इस कोशिश में लग गया कि बिना आपरेशन मरीज होश में आ जाए। मरीज कहां मर्जी से बेहोश होते हैं, इसलिए होश में आना उससे भी कठिन हो रहा था। अब यह अस्पताल की साख का सवाल था, इसलिए नाक बचाने के लिए प्रार्थना तक हो रही थी। इधर अस्प