यह कैसा बदलाव है, जनाब

सुरेश सेठ, साहित्यकार हमें आजकल देश के भाग्य विधाता हर समय उस कोशिश में लगे नजर आते हैं, हमें आश्वस्त करते हुए कि उनके भगीरथ प्रयास से यह देश बदल गया है। थोड़ा बदला है, थोड़ा और बदलने की जरूरत है। इसलिए इस देश के हर आम और खास आदमी को…

बैंकिंग अनियमितताओं से त्रस्त

डा. वरिंदर भाटिया लेखक, पूर्व कालेज प्रिंसिपल हैं हाल ही में मशहूर वाणिज्यिक एजेंसी मूडीज ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम को सबसे कमजोर करार देते हुए चेतावनी देते हुए कहा है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम दुनिया की सबसे असुरक्षित व्यवस्थाओं में से…

प्रकृति का संरक्षण है ईको टूरिज्म

कपिल चटर्जी लेखक, मंडी से हैं आज शहरी चिन्हित पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का जमावड़ा निरंतर बढ़ रहा है, जो केवल कुछ ही क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया है। ईको टूरिज्म के तहत प्रदेश के अनछुए, रमणीक स्थलों को चिन्हित कर जो अपने आप में एक…

महासेल और खालीपन का खेल

अशोक गौतम साहित्यकार स्वर्ग से लेकर नरक तक सेल की धूम मची हुई है। आटे से लकेर डाटे तक की सेल महासेल चरम पर है। सेल का जादू हर जीव के दिमाग चढ़ खौल रहा है। सेल के बाजार में भीड़ ऐसी कि अभी नहीं तो फिर कभी नहीं। गली मोहल्ले वाले तो गली…

टैक्स कटौती से नहीं होगा विकास 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक कंपनियों द्वारा अदा किए जाने वाले आयकर को घटाकर लगभग 33 प्रतिशत कर दिया है। इस उलटफेर से स्पष्ट होता है कि आयकर की दर का आर्थिक विकास पर प्रभाव असमंजस में है। यदि आय कर बढ़ाया जाता है तो इसका प्रभाव…

भू-डॉन से पदमश्री का सफर

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं यह तो सभी जानते हैं कि हमारे देश में भू-दान आंदोलन की नींव आचार्य बिनोवा भावे ने रखी थी, लेकिन भू-डॉन आंदोलन के प्रण्ेता को कोई नहीं जानता। वजह जमीनों पर कब्जों का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी हमारी…

आम लोगों की आवाज सोशल मीडिया

जगदीश बाली स्वत्रंत लेखक अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में आरंभ में समाचार पत्र व रेडियो ने अहम भूमिका निभाई। फिर टीवी ने दस्तक दी। अब आ गया सोशल मीडिया जो सब पर छा गया है। इनमें ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप मुख्य हैं। सोशल मीडिया ने आम…

पर्यावरण मित्र फोरलेनिंग सड़कें जरूरी

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं बरसात और बर्फबारी के सीजन में हर साल प्रदेश की सड़कों को नुकसान पहुंचता है। सरकार अपने स्तर पर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान से इनका रख-रखाव करती है। जबकि केंद्र से राज्य के…

नई औद्योगिक नीति की जरूरत

डा. जयंतीलाल भंडारी विख्यात अर्थशास्त्री इस समय दुनिया के साथ-साथ देश का भी औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ऐसे बदलते परिदृश्य में औद्योगिक विकास की जरूरतें भी बदल रही हैं। इस समय उद्योग-कारोबार में रोबोट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस…

आओ जिनपिंग, हम ढोएंगे पालकी

नवेंदु उन्मेष स्वतंत्र लेखक 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला कर दिया था तब कवि गोपाल सिंह नेपाली ने लिखा था चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा, अहिंसा उसे कहते हैं जो हिजड़ों का है नारा। हालांकि आज अहिंसा का नाम जपने वाले हमारे देश के लोग…

संघ और भारत की अवधारणा

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार मोहन भागवत के द्वारा लिंचिंग शब्द विदेशी मूल का है, जिसका अर्थ भीड़ द्वारा बिना किसी कारण के मारा जाना होता है। रोम साम्राज्य की स्थापना में ईसाई भीड़ द्वारा निरपराधों की हत्या कर दी जाती थी।…

बेसहारा गोधन अर्थव्यवस्था का हिस्सा

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, बिलासपुर से हैं देश के किसान कर्ज के बोझ तले दबकर गुरबत व मुफलिसी का जीवनयापन कर रहे हों तथा अर्थतंत्र की नुहार बदलने की क्षमता रखने वाला लाखों गोवंश सड़कों की धूल फांक रहा हो तो मुल्क की अर्थव्यवस्था मातम ही…

वायु सेना में ‘रफाल’

कर्नल मनीष धीमान स्वतंत्र लेखक वायु सेना दिवस आठ अक्तूबर को पेरिस में भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नींबू, मिर्ची का टोटका कर पहला रफाल लड़ाकू विमान ग्रहण किया। ‘रफाल’ एक फ्रांसीसी कंपनी ने बनाया है जिसका अंग्रेजी में मतलब ‘गस्ट…

स्वच्छता के बहुपक्षीय निहितार्थ

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार जैसा कि मैंने अपने शोध और किताब ‘ईस्टर्न एंड क्रास कल्चरल मैनेजमेंट’ में निष्कर्ष निकाला है कि भारत ‘चलता है’ वर्क कल्चर से ग्रस्त है। पुराने दिन अच्छे थे जब समुदाय ने गांव और तालुका काम…

अंतरराष्ट्रीय वालीबाल प्रशिक्षक विद्यासागर

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक 20 जुलाई, 1945 को हमीरपुर जिला के भरेड़ी डाकघर के खरीयंणी गांव में स्वर्गीय दुर्गा राम शर्मा व सैना देवी शर्मा के घर जन्मे इस हमेशा हंसमुख, जिंदा दिल इनसान व भारत के बेहतरीन वालीबाल प्रशिक्षक…