भूमिका लेखन

पूरन सरमा स्वतंत्र लेखक चार दशक के लेखन की साधना करने के बाद मेरा मन लेखन से उलट गया था। अब तो दिली इच्छा यही रह गई थी कि कोई स्वनामधन्य लेखक-साहित्यकार मुझसे अपनी पुस्तक की भूमिका या उसका फ्लैप मैटर लिखवाए। इससे मेरी साधना पर पक्की मोहर…

व्यवस्था की असफलता का जश्न

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हम उस नपुंसक समाज में जी रहे हैं जहां पुरुष किशोरावस्था से लेकर कब्र में जाने तक महिलाओं के वक्षस्थल की कल्पना में डूबा रहता है, और सिर्फ तभी चिंतित होता है जब वह किसी कन्या का बाप, नाना या दादा…

पुराना लतीफा नई तासीर

सुरेश सेठ sethsuresh25U@gmail.com जनाब, लोग परेशान हैं कि हम उनका दिल पुराने लतीफे सुना-सुना कर बहलाने का प्रयास करते हैं। जैसे एक शक्तिवान भरे पूरे मालिक के पास एक नौकर को काम करते हुए कई बरस हो गए। मालिक वेतन बढ़ाने में ही न आए। एक दिन…

सैन्य अफसर देने में हिमाचल अव्वल

रोहित पराशर लेखक, शिमला से हैं हिमाचल की आबादी देश की आबादी का मात्र 0.057 फीसदी है, लेकिन इसके बावजूद हर साल देश की तीनों सेनाओं में हिमाचल के 100 से अधिक सैन्य अफसर बनकर देश की सरहदों की रक्षा करने जा रहे हैं। हाल ही में…

सिजोस्कीजोफ्रेनियाई दोस्त

अशोक गौतम ashokgautam001@Ugmail.com कल अपने सिजोस्कीजोफ्रेनियाई दोस्त बड़े दिनों बाद मिले। सरकार उनके कथनानुसार उनकी थी तो तय था उनका सिर उनके असली सिर से ऊंचा होता। जिसकी सरकार में पैठ हो उसे अपना आभासी सिर अपने सिर की वास्तविक सिर की…

बाल कल्याण में यूनिसेफ का योगदान

योगेश कुमार गोयल स्वतंत्र लेखक विकासशील देशों में बच्चों और महिलाओं की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 1950 में यूनिसेफ के दायरे को विस्तारित किया गया। वर्ष 1953 में यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र का एक स्थायी हिस्सा…

ऊर्जा- दिशा व दशा-2

चंद्रशेखर लेखक, मंडी से हैं विकास के सफर में हमारा विनाश या नुकसान का बही खाता क्या है, इसकी जानने तक की कोशिश भी हमने नहीं की। नदी-नालों के बदलते रुख व उनसे पैदा होता भूमि कटाव तथा जल व जमीन में विलुप्त होते जीव व वनस्पति, बाढ़ों व…

मंदी को तोड़ने के उपाय

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक यदि बाजार में मांग होती है तो उद्यमी येन केन प्रकारेण पूंजी एकत्रित कर फैक्टरी लगाकर माल बना कर उसे बेच ही लेता है। बाजार में मांग होती है तो उसे उत्पादित माल के दाम ऊंचे मिलते हैं और वह लाभ कमाता है।…

दया याचिका सिस्टम खत्म हो

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं हैदराबाद गैंगरेप व हत्या की विभत्स घटना से देश भर में उपजा आक्रोश चारों अपराधियों की एनकाउंटर में हुई मौत से आमजन में अन्याय से निपटने की उम्मीद जागी है। पुलिस की भाषा में कहूं तो यह एनकाउंटर रेपिस्टों का…

हॉर्स ट्रेडिंग अच्छी है

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं टीवी पर दिखाए जा रहे सर्फ के विज्ञापन में टैग लाइन ‘दाग अच्छे हैं’ को दोहराते हुए पंडित जॉन अली ने जब कहा, ‘‘हॉर्स ट्रेडिंग अच्छी है!’’ तो मैं उनके दोहरे चरित्र पर कटाक्ष किए बिना न रह सका और बोला, ‘‘पंडित…

क्यों प्रशिक्षण से दूर हैं प्रशिक्षक?

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक हिमाचल प्रदेश में लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम का कोई भी प्रावधान अभी तक नहीं बन पाया है। हिमाचल प्रदेश राज्य युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के प्रशिक्षकों को कभी विभिन्न विभागों की भर्तियों में…

लाभप्रद है विनिवेश की डगर

डा. जयंतीलाल भंडारी विख्यात अर्थशास्त्री सरकार के द्वारा विनिवेश के लिए चयनित किए गए उपक्रमों के लिए लेन-देन और कानूनी सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अधिकांश अर्थविशेषज्ञों का मानना है कि इस समय जब अर्थव्यवस्था में…

भाषा विभाग का निमंत्रण

निर्मल असो स्वतंत्र लेखक आखिर मुझे पता चल ही गया कि मैं भी लेखक हूं। कितने पापड़ बेल कर मैं भाषा विभाग की डाक तक पहुंचा, यह मेरा दिल जानता है और उस नेक अधिकारी का सीना जानता है, जिसने कई नाम काट कर सूची में मुझे खड़ा किया है। मैं खड़ा हुआ…

मनमोहन सिंह ने चुकाया कर्ज

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार कांग्रेस और भ्रष्टाचार लगभग पर्यायवाची ही बन गए हैं। सत्ता कांग्रेस की होगी तो जाहिर है वरिष्ठ से लेकर कनिष्ठ कांग्रेसी सत्ताधारी अपने- अपने रुतबे और योग्यता के हिसाब से घोटालों में लग ही…

इंसानियत फिर हुई शर्मसार

प्रो. वीना ठाकुर veenakthakur@gmail.com लीजिए, एक और बेटी हैवानियत की भेंट चढ़ी, इनसानियत शर्मसार हुई, निर्भया फिर याद आई, मोमबत्तियां फिर जलीं, जुलूस निकले, बड़े-बड़े राजनीतिक वादे हुए। पूरे देश ने आग लग जाने के बाद एक बार फिर…