बेरोजगारों को अपनी सोच बदलनी होगी

कर्म सिंह लेखक, मंडी से हैं आज का युवा इतना अल्प संयमी हो गया है कि हल्की सी बात को भी समझने के लिए तैयार ही नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में लाखों की संख्या में युवा हर वर्ष अपना समय बर्बाद करते हैं तथा उनके हाथ में निराशा के अलावा कुछ भी…

मैं भी सूअर हूं सरकार जी

अशोक गौतम ashokgautam001@Ugmail.com बडे़ दिनों से उस दोस्त आदमी से बातचीत नहीं हुई थी। कारण, एक दूसरे से सत्ता हथियाने के लिए गहरे लूटमारी मतभेदों के बीच उथली व्यावहारिक समानताएं तलाशते उनका न्यूनतम साझा कार्यक्रम उल्ट-पुल्ट रहा था। जब…

वित्तीय घाटे का भ्रम जाल

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्तीय घाटे को नियंत्रण करने की नीति मूलतः भ्रष्ट सरकारों पर अंकुश लगाने के लिए बनाई गई थी। सत्तर के दशक में दक्षिण अमरीका के देशों के नेता अति भ्रष्ट थे। वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक से ऋण…

यशपालः क्रांतिकारी और लेखक

ओ.पी. शर्मा लेखक, शिमला से हैं यशपाल का जन्म 3 दिसंबर 1903 को फिरोजपुर, पंजाब में हुआ था, परंतु उनके माता-पिता के परिवार और उनके पूर्वजों की एक शाखा हिमाचल के हमीरपुर क्षेत्र के भूंपल गांव के वासी थे। उनके दादा गरडू राम विभिन्न स्थानों…

तेरे कूचे से हम निकले…

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं पंडित जॉन अली अपने पुत्र को पूरे जोश-ओ-खरोश से महाराष्ट्र प्रहसन की मिसाल देकर प्रबंधन का पाठ पढ़ा रहे थे। उत्सुकता में, मैं भी उनकी खिड़की के पास कान लगा कर खड़ा हो गया। गीता के कर्म और फल सिद्धांत को…

आखिर कब रुकेगी हैवानियत?

प्रवीण शर्मा पालमपुर कितनी गुडि़यां इस देश के अंधे कानून की आड़ में हैवानियत का शिकार होंगी। भारतीय कानून में अब कानून की देवी की आंखों से पट्टी खोलने का वक्त आ गया। आज हैवानियत का शिकार हो रही बेटियां क्रांतिकारियों व देवी-देवताओं के इस…

महिलाओं का कोई चौकीदार नहीं.

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं आज भारत उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां तीन तलाक से मुक्ति मिल चुकी है, कश्मीर में धारा 370 से मुक्ति मिल चुकी है, अयोध्या जैसी समस्या का समाधान किया जा चुका है, समान आचार संहिता लागू करने की बात की जा रही…

भ्रष्टाचार में और कमी जरूरी

डा. जयंतीलाल भंडारी विख्यात अर्थशास्त्री 97 फीसदी भारतीय मानते हैं कि आधार कार्ड की वजह से सरकारी राशन, सरकार के द्वारा किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि और मनरेगा जैसे भुगतान काफी हद तक भ्रष्टाचार शून्य हो गए हैं और दो-तिहाई से अधिक…

नक्सलियों की धमक

नवेंदु उन्मेष स्वतंत्र लेखक चुनाव आयोग ने झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा करते हुए पांच चरणों में चुनाव कराए जाने की बातें कहीं थीं। हालांकि कई राजनीतिक दल चाहते थे कि चुनाव एक दो चरण में कराए जाने चाहिए। तब चुनाव आयोग ने पहली बार…

साहित्यिक कांव-कांव के बीच कृष्ण काव

अजय पाराशर लेखक, धर्मशाला से हैं हमारे रीढ़विहीन समाज में किसी व्यक्ति का अपने मूल्यों के प्रति ऐसा समर्पण कुछ ऐसे ही अन्य लोगों को सामाजिक तूफानों के मध्य प्रकाश स्तंभ की मानिंद सदा प्रेरणा देता रहता है। जहां तक ब्यूरोक्रेसी का सबंध है…

महाराष्ट्र की नई सरकार

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार जाहिर है मुस्लिम अंडरवर्ल्ड को हिंदू के उत्तर भारतीय होने सा दक्षिण भारतीय होने से कोई मतलब नहीं था। उस कालखंड में शिव सेना ने अपने चिंतन व दृष्टि का विस्तार करना शुरू किया व संगठित मुस्लिम…

एड्स के प्रति रहें जागरूक

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं एड्स एक जानलेवा बीमारी है जो एचआईवी संक्रमण के कारण मानव की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है। एचआईवी के मामलों में वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की स्थापना की…

युवाओं व समाज को जकड़ता मोबाइल

प्रो. मनोज डोगरा लेखक, हमीरपुर से हैं सोशल मीडिया से हमारी युवा पीढ़ी शायद हासिल तो कुछ नहीं कर पा रही है अपितु इसके दुष्प्रभावों से ग्रस्त अवश्य हो रही है। यही कारण है कि आए दिन ऐसी अजीब घटनाएं सुनने के लिए मिल रही हैं जिनके बारे में…

सेना का ‘सिंधु सुदर्शन-2’

कर्नल मनीष धीमान स्वतंत्र लेखक पिछले कल यानी 29 नवंबर से भारतीय सेना द्वारा थार मरुस्थल में युद्ध अभ्यास सिंधु सुदर्शन-2, की शुरूआत की गई। इस अभ्यास के दौरान सेना की दुश्मन की सरहद के अंदर जाकर हमला बोलने की क्षमता को जांचा जाएगा, इस…

अशांति के लिए प्रशासन दोषी

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार राष्ट्र अब बौद्धिक संपदा को विकसित करने के लिए चेतना विकसित कर रहे हैं जो आर्थिक विकास और वैज्ञानिक सफलता का स्रोत है। इसलिए उच्च शिक्षा एक देश को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है।…