वैचारिक लेख

आज यही हो रहा है। देश में बेरोजगार युवकों ने सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना के विरोध में उत्पात मचा रखा है। ऐसे उत्पाती माहौल में मेरा यह पूछना शायद किसी को न भी भाए, लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि इस तरह उत्पाती रास्ते से अपनी बात मनवाने का बीज किसने बोया? किसी जांच-पड़ताल, सलाह-मश्विरे

देश में जिस तरह से हर दिन नया मुद्दा खबरों में चर्चा का विषय बना हुआ है उनको देखते हुए परिस्थिति तथा मुद्दों का सही आकलन करने वाले बुद्धिजीवी भी संशय में हैं कि मौजूदा हालात में कौन सा विषय कितना महत्वपूर्ण है। ज्ञानवापी मस्जिद से शुरू हुई चर्चा नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर

भारत ने ठाकरे राजवंश का सद्य आरोपित पौधा उखाड़ दिया और वहां विचार पूंजी को लेकर राजवंशियों से प्रश्न पूछने शुरू कर दिए तो पूरा राजवंश ‘वर्षा’ छोड़कर मातोश्री में चला गया। और अब द्रौपदी मुर्मू भाजपा की ओर से भारत के राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी होंगी। ओडीशा के सुदूरस्थ मयूरगंज जिला के पिछड़े क्षेत्र

दंगा हमारा राष्ट्रीय कार्यक्रम है। हमारे देश में यह प्रायोजित भी करवाया जाता है। वक्त जरूरत जिसको इसकी आवश्यकता होती है, वह दंगा उठा लेता है और दे मारता है देश के भाल पर। राष्ट्रवादियों ने इसे तहेदिल से अपनाया है। यह कहना भी अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि अब दंगा ही हमारी राष्ट्रीय मुख्यधारा का

हम भीड़ की मानसिकता में जी रहे हैं। धर्म के नाम पर तलवार भांजने वाली, हर असहमत व्यक्ति को देशद्रोही करार दे देने वाली, आईटी सैल के हर झूठे-सच्चे तर्क को आगे ठेल देने वाली भीड़ एक तरफ है तो मानसिक गुलामी में जी रही एक और भीड़ है जो हर भ्रष्टाचार की उपेक्षा करती

सरकार को चाहिए कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर विश्वास पैदा करने के लिए विभिन्न कानूनों में संशोधन लाए ताकि पीडि़त लोगों को न्याय मिले… पुलिस का नाम सुनते ही लोगों को एक अजीब सी घबराहट होने लग जाती है। लोग कहते हैं पुलिस की न तो दोस्ती अच्छी न ही दुश्मनी। पुलिस का नाम हर

बदलते हुए समाज विज्ञान की शोध में नए आंगन खुलते रहते हैं। नई शोध का विषय पिछले दिनों एक यह भी रहा है कि कार्टून बनाने वाले क्यों यह सच बांचते नज़र आते हैं, जब वे देश के महाभ्रष्ट लोगों और सब कुछ समेट कर अपनी जेब में डाल लेने वाले लोगों को भारी भरकम

हिमाचल प्रदेश में स्कूलों में इस बार बरसात की छुट्टियों में बदलाव किया गया है। अब यहां छुट्टियां 22 जून से 29 जुलाई तक देने का फैसला सरकार ने लिया है। छुट्टियों के समय में क्यों बदलाव किया गया है, यह सरकार जाने या फिर शिक्षा विभाग, लेकिन इस फैसले से पहले सरकार और शिक्षा

केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मणिपुर और पश्चिम बंगाल में चिंता विकारों की समस्या अधिक है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा पीडि़त हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में विकारों का खतरा अधिक है… विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि दुनिया भर में क़रीब