वैचारिक लेख

चुनाव प्रक्रिया में 31 हजार के करीब अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी कत्र्तव्यनिष्ठा से चुनाव प्रक्रिया को संपन्न करवाया । मीलों पैदल चल कर नाव से नदी पार कर अपने-अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचे। यह सभी बधाई के पात्र हंै। यह सच है कि हिमाचल गांव में बसता है। गांव-गांव में सर्वाधिक मतदान हुआ और

जब उनकी सेवा पानी कर करके तंग आ गया तो मैं उनके साहब को मिला। उस समय वे कुर्सी पर सुख से पसरे सुस्ता रहे थ, मुंह से कुछ खा रहे थे, ‘साहब जी ! अंदर आ सकता हूं क्या?’ मैंने उनसे दोनों हाथ जोड़े कहा तो वे अपना बिजली की चक्की की तरह चलता

जहां हरियाणा लगातार पराली की समस्या से मुक्ति की ओर अग्रसर है, वहीं पंजाब की सरकार अभी भी इस मामले में न केवल असमर्थ रही है, बल्कि किसानों की मजबूरी का हवाला देते हुए, इस समस्या से मुंह भी मोड़ती दिखाई दे रही है। लेकिन हरियाणा का उदाहरण यह इंगित कर रहा है कि पराली

प्रतिभा सिंह का कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होना, उनके भीतर छिपे उत्साह और आने वाले चुनाव नतीजों को लेकर आशावादिता की कहानी कहता है। बहुत से लोगों का यह कहना है कि भारतीय जनता पार्टी का यह नारा ही गलत था कि इस बार रिवाज बदलेंगे।

हाजी क़ौल यह सोच कर कई दिनों से परेशान हैं कि प्रशासन बार-बार जनता को क्यों याद दिला रहा है कि ईवीएम कड़े पहरे में है। लगभग हर रोज़ जि़ला चुनाव अधिकारी के हवाले से ज़ारी सरकारी प्रेस नोट में कहा जाता है कि इन्तज़ाम कड़े हैं, पहरा सख़््त है, प्रशासन चाक-चौबन्द है और ईवीएम

हम उम्मीद करें कि अब जब आगामी वर्ष 2023 के लिए भारत के हाथों में जी-20 की कमान है और वर्ष 2023 में कई देशो के साथ भारत के एफटीए का विस्तार होगा तो देश में विदेशी निवेश बढ़ेंगे तथा देश मैन्युफैक्चरिंग हब व मेक फॉर दि ग्लोबल की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

देश का हर चुनाव किसी की प्रतिष्ठा का प्रश्न बनता है, किसी का सियासी मुस्तकबिल दांव पर लगा होता है। किसी को अपनी सियासी विरासत बचानी होती है, मगर इक्तदार हासिल होने के बाद हुक्मरानों के सियासी आश्वासनों के आगे आम लोगों की उम्मीदें दम तोड़ जाती हैं। इंतखाबी तशहीर में किए वादे अंजाम तक

पुलिस अधिकारी के सपने में एक दिन कविता क्या आई, अब वह कविमय दृष्टि से अपराध को भी देखने लगा है। वह सडक़ पर ट्रैफिक जाम से विचलित नहीं होता। उसे लगता है कि वहां वाहनों के बीच कोई प्रतिस्पर्धा न होकर अलग-अलग कविताएं पां पूं कर रही हैं। हर अपराधी को सर्वप्रथम वह कविता

उनकी आत्मकथा ‘सिंहावलोकन’ हिंदी साहित्य में एक माना हुआ ग्रंथ है… जाने-माने साहित्यकार व क्रांतिकारी यशपाल का हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान है। बचपन की यातनाएं, भूमिगत विद्रोही भावना तथा सात वर्ष की लंबी जेल ने उसे वर्तमान सामाजिक व आर्थिक ढांचे के विरुद्ध कर दिया। वे इस ध्येय को नहीं मानते थे कि कमजोर