कर्नाटक का कड़वा सच

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि विधानसभा के दस सदस्य उच्चतम न्यायालय में जाकर फरियाद लगा रहे हैं कि उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाए। उधर विधानसभा के अध्यक्ष हैं कि जब सदस्य…

नाकामयाब साबित होते हैंडपंप

सुखदेव सिंह लेखक, नूरपुर से हैं सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग और जिला परिषद कमेटी सदस्यों में आपसी तालमेल सही न होने की वजह से इस योजना के तहत लगने वाले हैंडपंप भी खूंटे बनकर रह गए हैं। दो दशकों से खूंटे बन चुके इन हैंडपंपों…

बड़ा बनने के लिए…

पूरन सरमा स्वतंत्र लेखक मेरी समझ में नहीं आ रहा कि इस विषम काल में सरकार पर कोई आरोप लगाकर क्या लौटाऊं? क्योंकि सरकार की ओर से मुझे कुछ भी नहीं मिला है। न साहित्य अकादमी अवार्ड और न ही प्रदेश साहित्य अकादमी अवार्ड। लाइम लाइट में बने रहने…

नेता की तलाश में एक पार्टी

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार जवाहर लाल नेहरू का लोकतांत्रिक भारत के नेता के रूप में आरोहण भारत में एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम था। यह इसलिए कि मोती लाल नेहरू के बाद जवाहर लाल ने उस वंश परंपरा की नींव रखी जिसने…

प्रशिक्षक मोहताज, फिर कैसे होगा खेल

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक अब हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग उसे प्रशिक्षक बना रहा है, जो जिला स्तर तक खेला है और 42 दिनों की ट्रेनिंग किए हुए है, मगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो एक वर्ष की ट्रेनिंग किए…

विधायकों की होशियारी

नवेंदु उन्मेष वरिष्ठ पत्रकार अनाड़ी फिल्म का एक गीत है- सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी, सच है दुनियावालों कि हम हैं अनाड़ी। राजनीति में इस गीत का खूब उपयोग होता है। इसका ताजा उदाहरण कर्नाटक में देखने को मिल रहा है। कर्नाटक के…

कैसे बढ़े रोजगार

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार हमारे देश में अभी तक आम लोग यह नहीं समझ पाए हैं कि सरकार का काम रोजगार देना नहीं है, बल्कि उसका काम यह है कि वह ऐसी नीतियां बनाए, जिससे व्यापार और उद्यम फल-फूल सकें और रोजगार के नए-नए अवसर पैदा…

पहाड़ी गांधी को याद रखेगा हिमाचल

राजेंद्र पालमपुरी स्वतंत्र लेखक अरसा बीत जाने के बाद भी बाबा का वह गिरता हुआ कच्चा मकान आज सरकारी ढकोसलों का भी कच्चा चिट्ठा खोलता नजर आता है, जो बेहद अचरज भरा तो है ही, बल्कि शर्मसार भी करता है। मैं समझता हूं कि इस विषय पर…

रंग बदलती क्रांतियां

सुरेश सेठ साहित्यकार एक हिंदोस्तान उनका है और एक हमारा। उस हिंदोस्तान में भव्य अट्टालिकाएं हैं। बहुमूल्य बहु-मंजिली इमारतें हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं और दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते अरबपतियों की संख्या है। हमारे हिंदोस्तान को सत्ता…

हवाई परिवहन से फैलता प्रदूषण

डा. ओपी जोशी स्वतंत्र लेखक वर्ष 2013 में जारी एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में हवाई सफर से प्रतिवर्ष लगभग दस लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड पैदा होती है। वायुमंडल में बहुत ऊंचाई पर ठंडे वातावरण में विमानों से निकली गर्म गैसों पर वहां…

पोलिथीन से बदरंग होता पर्यावरण

बचन सिंह घटवाल लेखक, कांगड़ा से हैं व्यक्ति या तो प्लास्टिक में लिपटे खाद्य पदार्थों से तौबा कर ले या जरूरी पदार्थों में लिपटे पोलिथीन या प्लास्टिक को संभाल कर रखते हुए पूर्ण निष्पादन के लिए कचरा निष्पादन संयंत्रों के हवाले…

जय हो! नाक के बाल

अशोक गौतम साहित्यकार उनके पास अजब की चमचागिरी है। उनके पास गजब की चमचागिरी है, इसलिए वे आफिस में हर साहिब के नाक का बाल बड़े ही सहज भाव से हो जाते हैं। हालांकि उनके सिर के सारे बाल झड़ चुके हैं। पर अभी तक बीसियों बार नाक कटने के बाद भी…

अपेक्षाओं का बही-खाता

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्त मंत्री को चाहिए था कि देश में बढ़ते जल संकट को देखते हुए रिचार्ज वेल, जिसमें बरसात के पानी को सीधे भूगर्भीय जलाशयों में डाला जाता है, उसके लिए विशाल रकम उपलब्ध कराती। सेंट्रल ग्राउंड…

बेटियों को दें सुरक्षित माहौल

अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ प्रदेश पुलिस द्वारा जारी वर्ष 2017 की अवधि में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के आंकड़े बताते हैं कि दर्ज 1260 मामलों में 403 यौन शोषण, 248 रेप, 29 हत्या, दो दहेज हत्याओं, अपहरण के 249 तो बेटियों…

क्रिकेट रूप और विज्ञापनी लीला

रामविलास जांगिड़ स्वतंत्र लेखक अर्जुन अपने बल्ले को निराशा में लटकाए क्रिकेट पिच के बीचोंबीच पैड बांधे, ग्लव्ज पहने श्री कृष्ण से 10वां चैप्टर पढ़ता है, किंतु खाली शब्दों की कमेंट्री से अर्जुन को मजा नहीं आता है। अर्जुन पिच के बीचोंबीच…