शराबबंदी के बिना अधूरा है नशे पर प्रहार

राकेश शर्मा लेखक, कांगड़ा से हैं मां-बाप हमेशा उम्मीद करते हैं कि एक दिन उनकी संतान, उनका और उनके परिवार का बोझ अपने कंधों पर उठा लेगी और वे एक निश्चिंत जिंदगी जिएंगे, लेकिन संतान के नशे की चपेट में आने से उनकी सारी उम्मीदें तहस-नहस हो…

प्रेस विज्ञप्ति

कुल राजीव पंत kulrajeevpant1952@gmail.com छुट्टियां बिताने आए साहब स्विमिंग पूल के किनारे लगी आराम कुर्सी पर बैठे, रंगीन चश्मा लगाए चारों तरफ के नजारे का आनंद उठा रहे थे। बीच-बीच में गिलास से ठंडे पेय के सिप भी ले लेते। इसी बीच…

नागरिकता कानून के विरोधी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री वरिष्ठ स्तंभकार ब्रिटिश सरकार का हित इसमें था कि एक नया इस्लामी देश बना कर उसे इस्लामी देशों की कमान सौंपी जा सके और उसका उपयोग भारत में रूसी साम्यवाद को रोकने के लिए किया जाए। इसके साथ ही भारत का एक स्थायी…

दया याचिका भावनाओं पर भारी क्यों

सुखदेव सिंह लेखक, नूरपुर से हैं उन्नाव बलात्कार कांड, जम्मू में आसिफा और हिमाचल प्रदेश में गुडि़या बलात्कार हत्याकांड के आरोपियों को सजा न मिलना हमारी न्यायिक व्यवस्था में कमी आना ही कहा जा सकता है। बलात्कार पीडि़ता को सरेआम सड़क पर…

ईरान, अमरीका और भारत

कर्नल (रि.) मनीष धीमान स्वतंत्र लेखक तीन जनवरी को अमरीका ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया, जिसमें ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का जनरल कासिम सुलेमानी भी मारा गया। जनरल सुलेमानी को ईरान में राष्ट्रपति के बाद…

गुरु-शिष्य का घटता सम्मान

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार वामपंथ से जुड़े पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और संघ की वर्तमान अध्यक्ष आईशी घोष बात कर रहे हैं। किसी समय पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार मोदी या शाह या किसी अन्य व्यक्ति के बारे में…

दंड प्रक्रिया में परिवर्तन की जरूरत

सुनील वासुदेवा लेखक, शिमला से हैं लोग गंभीर मामलों में त्वरित न्याय चाहते हैं, लेकिन वास्तव में देश की न्याय प्रक्रिया जटिल है, जिस में पीडि़त को एक लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। अंग्रेजी में एक मशहूर कहावत है कि ‘न्याय में…

सच बोलने वाली सरकार चाहिए

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार सत्या नडेला भारतीय मूल के हैं। वे अमरीका में रह रहे हैं और उन्हें माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनी का सीईओ बनने का अवसर मिला। वह यह कहना चाह रहे हैं कि अन्य देशों के लोग यदि भारत में आएं तो…

साहित्यकार जटियानंद

सुरेश सेठ sethsuresh25U@gmail.com वे नई सदी के साहित्यकार थे। लिखते कम और बोलते ज्यादा थे। उपदेश के पाठ उन्हें पूरी तरह कण्ठस्थ थे। उम्र में थोड़ा अधेड़ होने से वे नए रचनाकारों पर टूट पड़ते तथा उन्हें अद्भुत और जीवंत लिखने की सीख देते।…

कब मिलेगी हिमालयन रेजिमेंट

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, बिलासपुर से हैं मलाल इस बात का है कि देश की सरहदों को अपने रक्त से सींच कर तथा देश के कई महाज पर सैन्य कुर्बानियां देकर अपनी शूरवीरता भरी कियादत तथा सलाहिमत से शौर्य गाथाओं के कई मजमून लिखने वाले प्रदेश की…

कर्मचारियों को मिले पुरानी पेंशन

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं केंद्र सरकार द्वारा एक जनवरी 2004 से और हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 15 मई 2003 से ही लागू न्यू पेंशन स्कीम के दुखदाई परिणाम सामने आने के बाद से इस प्रणाली से जुड़ने वाले नियमित सरकारी कर्मचारियों में…

लोकार्पण अभी बाकी हैं डियर

अशोक गौतम ashokgautam001@Ugmail.com सबसे पहले बीवी के ऋण से उऋण होने के लिए उन्होंने अपनी इधर-उधर से आधी मारी, आधी फाड़ी कालजयी किताब का लोकार्पण करवाया तो बीवी की उनके प्रति आस्था जागी कि वे भी कम से कम उसे पढ़ने लायक मानते हैं। वे…

कचरे के पहाड़ तले दबते देश

कुमार सिद्धार्थ स्वतंत्र लेखक अपने देश में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के नाम पर देशव्यापी ‘हो-हल्ला’ मचा हुआ है। वर्ष 2015 में शुरू हुए इस अभियान का मकसद तो देश को साफ-सुथरा बनाए रखने का था, लेकिन इसकी नींव ‘विश्व बैंक’ से लिए गए कर्ज…

तकनीकी विकास की चुनौती

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक तकनीकी विकास से अर्थव्यवस्था में इस प्रकार के मौलिक परिवर्तन समय-समय पर होते रहते हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ शुमपेटर ने इसे ‘सृजनात्मक विनाश’ की संज्ञा दी थी। जैसे पूर्व में घोड़ा गाड़ी चलती…

वादों के कितना करीब जयराम सरकार

के.एस. तोमर राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री को नौकरशाही से सख्ती से निपटना चाहिए जो उनकी सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है और मुख्य रूप से राज्य में…