संपादकीय

हिमाचल में सियासत का चरित्र खानदानी रहा है और इसे प्रमाणित करते कई विधायक आज भी शिरकत कर रहे हैं। वर्तमान विधानसभा में भी करीब तेरह विधायक इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं, जबकि लोकसभा के प्रतिनिधित्व में अनुराग ठाकुर का कद इसी परिभाषा को सुदृढ़ कर रहा है। इस समय चर्चाओं के शिखर पर मंडी के विधायक अनिल शर्मा हैं, क्योंकि उनके साथ पंडित सुख राम की राजनीतिक विरासत जोड़ कर देखी जा रही है। वह पल में भाजपा को माशा करके खुद में तोला तौल लेते हैं। यानी कि सियासत के गरबा नृत्य में वह गोल-गोल घूम कर ऐसे बयान दाग रहे हैं, जिससे भाजपा के अनुशासन के बाहर असमंजस हैं। ऐसे सवाल यही कि क्या अनिल शर्मा पुन: खानदानी विरासत के पलड़े पर बैठ कर दूसरे पलड़े में छलांग लगा कर अपना वजन तय करेंगे और क्या नया भार उन्हें नई पार्टी में मिलेगा। खैर यह उनके लिए ऐसी स्थिति है जो सियासी पैमाने से ऊपर और खानदानी

सियासत की अंकतालिका में हिमाचल का नागरिक समाज जिन मुद्दों का मुरीद हो रहा है, वहां प्रदेश की वित्तीय स्थिति घायल व अपाहिज हो चुकी है। आश्चर्य यह कि नागरिक समाज न तो संघर्ष की सतह पर खड़ा हो पाता है...

भारत में ‘सूखा’ पड़ रहा है। मॉनसून बीते अभी एक माह भी नहीं हुआ, लेकिन देश में ‘जल-आपातकाल’ के हालात बन गए हैं। करीब 10 साल के अंतराल के बाद 2026 में अब भारत में ‘सूखे’ की स्थितियां स्पष्ट हो चुकी हैं। करीब 70.6 फीसदी हिस्सा, किसी न किसी रूप में, ‘सूखे’ का सामना कर रहा है। बुनियादी कारण ‘कम बारिश’ ही नजर आता है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर इस बार सामान्य से करीब 13 फीसदी बारिश कम हुई है। देश के 300 बड़े जलाशयों में पानी बहुत कम है। तालाब तो शहर-दर-शहर सूख चुके हैं। कम बारिश, अनियमित बारिश और अलनीनो के व्यापक प्रभाव के कारण स्थितियां यहां तक पहुंच चुकी हैं कि गोवा में 94.6 से 100 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में करीब 82 फीसदी, पंजाब में करीब 80 फीसदी, कर्नाटक में 76.3 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में

हिमाचल में प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के खंभे जहां तक गाड़े जा रहे हैं, वहां सियासत का एक बड़ा दांव मौजूदा सरकार खेलना चाहेगी। रिटायर्ड जस्टिस धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय आयोग के अन्य सदस्यों में अधिवक्ता विशाल पंवार, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा तथा हिमाचल भू अभिलेख विभाग के निदेशक सदस्य सचिव होंगे। आयोग को छह महीने यानी बजट सत्र के आसपास अपनी रिपोर्ट देनी है। प्रश्र जरूरत और व्यावहारिकता के मसौदे पर तौला जाता है या राजनीति की आंच पर धीमे से पकाया जाता है, यह इसकी तासीर से मालूम होगा। राजनीतिक मंच पर विरोधी भाजपा के लिए यह एक ऐसा चि

खुदरा महंगाई ने बीते 23 माह का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारत सरकार के ही सांख्यिकी मंत्रालय ने आंकड़े जारी किए हैं कि सितंबर, 2026 में खुदरा महंगाई दर 5.54 फीसदी रही। यह अक्तूबर, 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। तब महंगाई दर 6.2 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी महंगाई बढ़ेगी। अक्तूबर-दिसंबर की औसत महंगाई दर 6 फीसदी या उससे अधिक भी हो सकती है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई दर की सीमा वैसे तो 4 फीसदी तय कर रखी है, लेकिन उसे 6 फीसदी तक ‘सामान्य’ मान कर तमाम आकलन और विश्लेषण किए जाते हैं। लगातार चौथे माह उस ‘लक्ष्मण-रेखा’ को लांघा गया है, क्योंकि खाद्य महंगाई दर और शहरी-ग्रामीण इलाकों में महंगाई की स्थितियां भिन्न और अधिक हैं। खाद्य महंगाई दर सितंबर में बढ़ कर 7.74 फीसदी तक पहुंच गई। गांवों में खुदरा महंगाई दर 5.24 फीस

हिमाचल में छात्रों से संबंधित मामलों के बीच, अब उस वातावरण को सुरक्षित बनाना है जहां भविष्य के सपने समृद्ध हों। एक पहल प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी में पुलिस द्वारा अलख जगा कर हो रही है। पंजाब की छात्र घटनाओं से सबक लेते हुए हिमाचल के पुलिस महानिदेशक ने राज्य के 17 निजी विश्वविद्यालयों के सुरक्षा बंदोबस्तों का मुआयना लेते हुए, नए कदमों की फेहरिस्त तैयार की है। पुलिस के दिशानिर्देश नए नहीं हैं, जबकि देखना यह होगा कि कैंपस का सुरक्षात्मक प्रबंधन कैसे होता है। हालांकि पंजाब के एक विश्वविद्यालय में हुई घटनाओं का विवरण कई पुलों को तोड़ता हुआ दिखा

हिमाचल में चिट्टा, अवैध शराब और खनन के समाचारों के बीच एक सुखद समाचार कांगड़ा से मिला। उपमंडल अधिकारी डा. अंजलि गर्ग ने युवा धमनियों में जोश भरते हुए बाइपास स्थित बाण गंगा घाट को जागृति का प्रतीक बना दिया। तीन दिवसीय फिटनेस महोत्सव का वास्तविक उद्देश्य युवा पीढ़ी को ऐसे आनंद से जोडऩा था, जो इनके लक्ष्यों में शारीरिक शुद्धिकरण का पैगाम सहजता से भर गया। युवाओं ने इस दौरान खुशी का इजहार करके हुए योग, कसरत, नृत्य तथा मानसिक शांति के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत खुद की क्षमता और खुद को पाने की अभिलाषा के प्रति अभिप्रेत किया। ऐसे प्रयोग भले ही छोटे और अप्रचारित रह जाएं,

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘अवधारणा’ का आंदोलन चला कर राजनीति में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बार-बार देश को संबोधित कर रहे हैं और इसे ‘भविष्य’ और पूरे देश की लड़ाई करार दे रहे हैं। संविधान और लोकतंत्र बचाने का उनका मुद्दा 2024 के लोकसभा चुनाव से चल रहा है, लेकिन अब उन्होंने ‘मताधिकार’ से जोड़ दिया है। बेशक देश के औसत नागरिक का ‘संवैधानिक मताधिकार’, किसी भी स्थिति में, छीना नहीं जा सकता। वह लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार है। नेता प्रतिपक्ष बार-बार आह्वान कर रहे हैं कि आओ दिल्ली! चलो दिल्ली!! यह आंदोलन नहीं, ‘शिव जी की बारात’ है, ‘शिव जी का तांडव’ है। इस आंदोलन में कुत्ता, बिल्ली, बंदर कोई भी शामिल हो सकता है। यदि भाजपावाले भी आना चाहें, तो कोई आपत्ति नहीं। उनका मन्तव्य और लक्ष्य है कि इस तांडव

अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप बीते कई दिनों से धमकी भरे बयान दे रहे हैं कि ईरान को उड़ा देंगे। ईरान का अस्तित्व खत्म कर देंगे। ईरान को नरक बना देंगे। ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे, लिहाजा वह संवर्धित यूरेनियम अमरीका को सौंप दे। पेंटागन ने 27 अक्तूबर-3 नवंबर की तारीखें घोषित की हैं, जब अमरीकी सेना ईरान पर बड़ा, निर्णायक, विध्वंसक हमला कर सकती है। यह तीन दिन का युद्ध हो सकता है, जो ईरान के 80 किलोमीटर अंदर किया जा सकता है। ईरान के परमाणु केंद्र, ऊर्जा ठिकाने एवं प्लांट और हथियारों के भंडार निशाने पर होंगे। अमरीकी सेना इस बार ईरान के तटीय इलाकों पर ही हमले करना चाहती है, लिहाजा वहीं लड़ाकू विमान, बी-1 बॉम्बर्स समेत 104 विमानों की आसमान में हलचलें, तैनाती चौंकाती है। यह पेंटागन का प्रस्ताव बताया जाता है, जिसे राष्ट्रपति टं्र