संपादकीय

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में बगावत हो गई है, लिहाजा पार्टी में टूट के पुख्ता आसार हैं। ममता ने मंगलवार को जहां ‘प्रतीकात्मक धरना’ दिया था, वहां तृणमूल के 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से सिर्फ 7 ही पहुंचे। शेष 73 विधायक कहां थे? धरने से एक दिन पहले ममता बनर्जी ने विधायकों की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसमें भी 20 विधायक ही पहुंचे। शेष 60 विधायक तब भी गायब थे, नतीजतन बैठक रद्द करनी पड़ी। धरने के वक्त समर्थकों की जो संख्या दिख रही थी, उससे ममता

हाथों में तलवार-पिस्तौल लिए कौन पर्यटक हो सकता है, लेकिन हिमाचल में ऐसे परिदृश्य से पर्यटक सीजन गुजर रहा है। पर्यटक सीजन अगर कानून व्यवस्था का उल्लंघन बनता जा रहा है, तो इस मंजर को समझना होगा। समझना होगा कि सडक़ों पर वीभत्स दृश्य क्यों उभर रहे हैं। क्यों कोई कार वाला दराट निकाल कर ट्रक पर प्रहार कर रहा है या वाहनों की छत से बाहर गर्दनें शोर-शराबा कर रहीं। हम अत्यधिक पर्यटन के शिकार होने के बावजूद जिन्हें सैलानी मान रहे हैं, वे दरअसल भीड़ के संवाहक हैं। हमारी पर्यटन योजनाएं सडक़ों पर हांफ रही हैं। बढऩे वाहन, अंधाधुंध निर्माण, गंदगी का आलम, जलापूर्ति का अभाव, महंगाई का प्रभाव और उपेक्षा में गतिशील होता आवागमन, प्रदेश की छवि को मलियामेट कर देगा। लगभग हर पर्यटक सीजन अपने सा

बेशक आरसीबी को लगातार, दोबारा आईपीएल चैंपियन बनाने में ‘विराट किंग’ कोहली का सर्वश्रेष्ठ योगदान रहा है। विराट रिटायरमेंट की दहलीज के भीतर आ चुके हैं। टेस्ट और ‘ताबड़तोड़’ टी-20 क्रिकेट से वह संन्यास ले चुके हैं। वह उम्र के ऐसे पड़ाव पर आ चुके हैं, जहां गेंद और बल्ले के समन्वय धुंधलाने लगते हैं। शॉट्स गलत साबित होने लगते हैं। विराट ने इन विरोधाभासों और अवरोधों को पछाड़ते, नकारते हुए आईपीएल, 2026 में 675 रन ठोंके हैं। एक शतक और पांच अद्र्धशतक तथा 56 से अधिक का औसत...! निश्चित ही वह ‘विराट’ और अतुलनीय हैं, लेकिन यह टूर्नामेंट एक 15-वर्षीय किशोर बल्लेबाज की विस्फोटकता की चर्चा के बिना अधूरा ही रहेगा। वह अद्भुत बालक है-वैभव सूर्यवंशी। वास्तव में वैभव ही आईपीएल, 2026 के ‘उन्नायक खिलाड़ी’ हैं। उन्हें टूर्नामेंट का ‘बेशकीमती खिलाड़ी’ (प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट), सबसे उभरता हुआ खिलाड़ी, दिग्गज खिलाडिय़ों की मौजूदगी के बावजूद 72 छक्कों का ‘किंग’, स

घुसपैठियों का मुद्दा सामान्य नहीं, बेहद संवेदनशील और पेचीदा है। कूटनीति और बांग्लादेश के साथ हमारे संबंधों पर तनाव बढ़ सकता है। यह भारत की ही समस्या नहीं, बल्कि खाड़ी के मुस्लिम देश, यूरोप, ब्रिटेन और अमरीका भी परेशान हैं। अंतत: घुसपैठियों को खदेड़ा जा रहा है। ऐसे सभी लोग घुसपैठिए भी नहीं हैं। बहरहाल सिर्फ मुस्लिम देशों के ही कुछ उदाहरण लें, तो साफ होगा कि यह कितना नाजुक और बिलबिला देने वाली समस्या है। पाकिस्तान ने बीते सालों में 1.46 लाख से अधिक अफगानी मुसलमानों को उनके देश वापस जाने को विवश किया है। दोनों इस्लामी देश हैं। ईरान आज युद्ध में घिरा है, लेकिन इससे पहले वह करीब 15 लाख मुसलमानों को देश से खदेड़ चुका है। संयुक्त अरब अमीरात के स्वप्निल, शानदार शहर दुबई जाने को आधुनिक युवा हरचंद कोशिश

राष्ट्रीय फलक पर शिक्षा के कारनामे जो भी हों, लेकिन हिमाचल ने परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में छठे स्थान पर खुद को स्थापित किया है। यह गुणात्मक सुधार माना जा सकता है, जहां लर्निंग के हिसाब से बच्चों के शैक्षणिक स्तर का उत्थान हुआ है। कहना न होगा कि स्कूली ढांचे में कई तरह के सुधार सामने आए हैं। शिक्षा के साथ समाज और प्रदेश अगर बेहतर हुआ है, तो यह साबित करता है कि स्कूलों में लैब टू लर्निंग तथा इंटरनेट से ज्ञान तक एक क्रांतिकारी उद्घोष हुआ है। हिमाचल जैसे पर्वतीय प्रदेश के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग में उच्च स्तरीय साबित होने के मायने सरकार के योगदान के अलावा समाज की उत्कंठा से भी जाहिर होते हैं। यहां शिक्षा सिर्फ सरकारी स्कूल की छत नहीं, बल्कि समाज की निष्ठा तथा निजी योगदान से भी परिष्कृत होती है। इसलिए सरकारी दायित्व का स्कूली आचरण बेशक बढिय़ा नजर आ रहा है, लेकिन इसे प्रतिस्पर्धी व उज्ज्वल बनाया है जनता के विश्वास ने। एक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी शिक्षा, स्वा

तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भीड़ ने ऐसा हमला किया कि लोकतंत्र पर सवाल उठने लगे। अभिषेक पर अंडे फेंके गए, पत्थर मारे गए, लात-थप्पड़ तक चले, उनकी कमीज फाड़ दी गई, उन्हें ‘चोर, चोर’ कहा गया, उनका चश्मा भी तोड़ दिया गया। सांसद को हेलमेट पहना कर, किसी तरह, वहां से निकाला गया। वह अब भी अस्पताल में भर्ती बताए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की, 15 लंबे सालों की सत्ता के बाद, करारी पराजय हुई है। मुख्यमंत्री रहीं एवं पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी तक हार गईं। अभिषेक ममता के ही सगे भतीजे हैं। बंगाल की जनता ने जनादेश के जरिए अपना गुस्सा, असंतोष, तृणमूल सरकार के प्रति नाराजगी और अस्वीकृति जता दी है। लोकतंत्र का बुनियादी अध्याय यहीं समाप्त होना चाहिए। अभिषेक पर भ्रष्टाचार, कटमनी, अवैध संपत्तियों, कोयला घोटाला, शिक्षा भर्ती घोटाला और धनशोधन के कई गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियां और अदाल

नगर निगमों के दर्पण में सत्ता बनाम विपक्ष के बीच चुनाव ने अपना रेखांकन कर दिया और इस तरह भाजपा ने शहरी मतदाता के सामने अपनी सफल यात्रा का वर्णन किया है। धर्मशाला, मंडी व सोलन में भाजपा और पालमपुर में कांग्रेस ने अपना जलवा दिखाया, तो इस अंकगणित में कई बड़े नेताओं की असफलताओं का ठीकरा फूटा है। पालमपुर में भाजपा की तमाम शर्तें, वादे और तैयारियां धराशायी हुईं, तो यह मानना पड़ेगा कि बुटेल परिवार के संपर्क और साधना कारगर साबित हुई। बतौर

कोरोना वैश्विक महामारी का खौफ, तनाव और मौत का भय आज भी हम महसूस करते हैं, लेकिन इबोला वायरस ने नए ‘स्वास्थ्य आतंकवाद’ का भाव पैदा कर दिया है। अब इबोला सिर्फ कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि 10 अन्य अफ्रीकी देश संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। अकेले कांगो में ही करीब 200 मौतें हो चुकी हैं। मौत का कुल आंकड़ा अभी तक 250 के करीब बताया जा रहा है और करीब 1000 लोग संदिग्ध मरीज बताए जा रहे हैं। ये आंकड़े सरकारी हैं, हकीकत नहीं हैं, क्योंकि संदिग्ध मरीजों में से कितने स्वस्थ हो गए हैं अथवा कितनों की मौत हो चुकी है, इसका कोई भी डाटा सामने नहीं है। इस त्रासद स्थिति से पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला वायरस और संक्रमण को ‘वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया

राष्ट्रीय महत्त्व की सिंधु जल संधि ने यकायक हिमाचल की जल शक्ति को उभार दिया है। हिमाचल की चंद्र-भागा नदियों का प्रवाह अब लापरवाह नहीं होगा। चंद्र से बहता पानी अब पाकिस्तान के सफर पर नहीं, बल्कि लाहुल-स्पीति के कोकसर से मनाली के मढ़ी तक 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए, ब्यास नदी से मिलन करेगा। दूसरी ओर भागा लाहौल की पीर पंजाल से सुरंग द्वारा रावी में समा जाएगी। अंतरराष्ट्रीय तौर पर सिंधु जल संधि का टूटना भारतीय सोच के दायरे को चंद्रताल झील तक ले आया है। पर्वतीय परिवेश की मजबूती को दर्ज करते हुए योजना आकार, राष्ट्रीय निर्माण की पुनर्विवेचना करता है। दिव्य हिमाचल ने हमेशा पहाड़ की शक्ति और पहाड़ के