संपादकीय

चार साल की स्नातक डिग्री के माध्यम से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षण पद्धति की विरासत बदलने का मकसद पाले हुए है। नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक डिग्री का चौथा वर्ष अध्ययन में गुणवत्ता का प्रेरक होगा। बीए आनर्ज या बीए आनर्स विद रिसर्च के मायने शिक्षण परिसर में छात्रों की उड़ान, विषय की समझ तथा प्रोफेशनल जिंदगी के तरानों को नजदीक से समझना होगा। शिक्षा एक रूटीन का विषय बनते हुए पाठ्यक्रम के कुछ अध्यायों में सिमट के रह गई है, जबकि इसके व्यावहारिक स्वरूप से छात्र समुदाय के सोच, नजरिए और योगदान में परिवर्तन लाने की गुंजाइश है। यह हिमाचल में शोध के नए मानदंड चित्रित कर सकता है, बशर्ते छात्र समुदाय को प्रेरित करने के सिद्धांत सक्रिय रहें। हिमाचल के छात्रों का मनोविज्ञान एक डिग्री को अमानत

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मांग और आपूर्ति का चिट्ठा खोलते प्रश्न बताते हैं कि कुछ अनावश्यक ढांचा हमने अपना लिया है। विधायक रणधीर शर्मा के प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि डिनोटिफाई 1526 स्कूलों में 734 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक भी छात्र नहीं था। अगर इसी तरह हर विभाग की कार्यक्षमता का हवाला सामने आए तो यकीनन कई सफेद हाथी सामने आएंगे। इसी परिप्रेक्ष्य में चंबा मेडिकल कालेज का जिक्र स्वयं मुख्यमंत्री ने किया है जहां फैकल्टी पूरी तरह कायम रखने के लिए आज भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। यानी मांग और आपूर्ति के जिस हिसाब से शिक्षण व मेडिकल संस्थान खुले हैं, उनकी उपयोगिता सिद्ध करने की बुनियाद पर संदेह है। क्या चंबा में मेडिकल कालेज की स्थापना से चिकित्सकीय सेवाएं मुकम्मल होंगी या आधा चंबा जि

प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से एक बार फिर आग्रह किया है कि ‘अंतहीन युद्ध’ से निकल कर ‘युद्ध के अंत’ की ओर बढ़ें। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों और संवाद की शुरुआत के लिए मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुरोध किया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (एससीओ) के देशों का शिखर सम्मेलन जारी रहा और युद्ध-समाप्ति की ऐसी आवाजें बुलंद होती रहीं, लेकिन उसके समानांतर अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप ने ईरान पर एक बार फिर हमला करवा दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब लारक द्वीप पर हमला

सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क (अमरीका) में जो संबोधन दिया है, वह उनकी सोच की पुनरावृत्ति ही है, लेकिन संदेश अमरीकी जमीन से दिया गया है, लिहाजा उसकी गूंज ‘वैश्विक’ है। मुस्लिम धर्मगुरुओं, अमरीकी विचारकों और खुली सोच के समर्थकों ने संबोधन की सराहना की है। उसे स्वागतयोग्य भी माना है, लेकिन चुनौतीपूर्ण भी करार दिया है। आरएसएस अपनी स्थापना के 100 साल मना रहा है, लिहाजा सरसंघचालक अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन के प्रवास पर हैं। बहरहाल भारत में जो

कृत्रिम बांधों और ग्लेशियरों के खतरे तमाम हिमालयी राज्यों में मंडरा रहे हैं, तो नेपाल की घटना ने हिमाचल को भी सचेत किया है। प्रदेश के बांधों में एक चौथाई गाद का ठहरना जलक्षमता के भंडारण पर असर डाल रहा है, तो सडक़ मार्गों में सुरंगों के अलावा जल परियोजनाओं में सुरंगों के जरिए पानी को ले जाने का प्रबंध किया गया है। जाहिर तौर पर पर्वतीय आंचल में विकास के मायने तेजी से बदले हैं और मानवीय जरूरतों के कारण निर्माण के मानदंड भी औपचारिकता ही निभा रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग ने बांधों में जमती गाद को प्रमुख दुश्मन मानते हुए इसे हर तरह से हानिकारक माना है। प्रदेश की जल वितरण प्रणाली और विद्युत आपूर्ति का खाका भौगोलिक दृष्टि से विभिन्न चुनौतियों को नजरअंदाज कर रहा है। हिमाचल के शहरी इलाकों पर बढ़ता आबादी का घनत्व आधार

राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में हिमाचल के जिला सोलन का देश के टॉप पांच जिलों में शरीक होना एक उपलब्धि है और यह संकेत भी कि प्रदेश की आर्थिकी कैसे आगे बढ़ सकती है।

पर्यटकों की आमद का एक नक्शा विधानसभा सत्र में उभरा है। पिछले तीन साल में हिमाचल में 7.59 पर्यटक आए जबकि इस दौरान 262824 विदेशी सैलानी भी यहां आए। आंकड़ों की दृष्टि से आबादी से

भारत भी प्रलय और तबाही के कगार पर है। नेपाल में भी महाविनाश अब भी दस्तक दे रहा है। इसरो और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने अध्ययन किए हैं और उनकी रपटों के निष्कर्ष हैं...

पूर्व में मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री रहे शांता कुमार ने पुन: धर्मशाला में हाई कोर्ट की बेंच की स्थापना का मुद्दा रखा है। पिछले चार दशकों से यह मुद्दा गाहे बगाहे सामने आता है, जबकि किसी भी सरकार ने इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया। इस दौरान अदालतों का प्रसार हुआ है। कांगड़ा जिला में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालयों का दर्जा पालमपुर, नूरपुर और देहरा में मिला है। न्याय की परिभाषा में यह तस्वीर उस वक्त पूरी होगी जब हाई कोर्ट की एक पीठ धर्मशाला में स्थापित होगी। इस विषय का संबंध प्रादेशिक राजधानी शिमला से शिफ्ट हो रहे कार्यालयों से है और न्याय के मजमूनों से भी है। इसी तरह की एक अपेक्षा प्रशासनिक जिलों के संबंध में भी है और इसका प्रमुख निशाना भी कांगड़ा ही है, जहां पालमपुर, देहरा व नूरपुर को जिला बनाने की मांग उठती रहती है। अभी हाल ही में नूरपुर और देहरा को पुलिस जिला बनाने से नए जिलों के कयास बढ़े हैं। जाहिर है हिमाचल में संगठनात्मक तौर पर अदालतों और जिलों का पुनगर्ठन करने की दिशा में आगे बढक़र कम से कम एक जिला बढ़ाया जा सकता है। हमारा मानना है कि हर जिला के छह विधानसभा क्षेत्र होने चाहिएं। इस तरह दो कबाइली जिलों को छोडक़र बाकी ग्यारह जिले छह-छह विधानसभा क्षेत्रों के साथ महत्त्वपूर्ण इकाई साबित होंगे। हिमाचल के कई विधानसभा क्षेत्र आपस में मीलों दूर साबित होते हैं। मसलन नयनादेव, दरंग या जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक दूरी को मापना आसान नहीं है। यही भौगोलिक दूरी अदालतों के पुनर्गठन की जरूरत पैदा करती है।