संपादकीय

एक विकराल आर्थिक विरोधाभास सामने आया है कि 57 लाख करोड़ रुपए से अधिक देश के सिर्फ 98 लोगों के पास हैं। इतना धन 55 करोड़ से अधिक आबादी के पास भी नहीं है। कितनी गहरी आर्थिक असमानता है देश में? जितना धन मुट्ठी भर लोगों के पास है, वह देश के बजट, 35 लाख

सियासी पहेलियां फिर गुनगुनाने लगी हैं, चुनाव की तारीख पास आने लगी है। कुछ सत्ता की, तो कुछ विपक्ष की गरमाने लगी हैं। राजनीतिक एकता के प्रश्न पर इतराते स्वार्थ की एक बानगी मंडी में पंडित परिवार की पृष्ठभूमि को खंगाल रही है, तो कमोबेश हर विधानसभा क्षेत्र में टिकटार्थियों की नई पौध, नए समीकरणों

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने किसानों की चुनावी सोच स्पष्ट की है। यह जरूरी भी नहीं है कि सभी किसान एक ही लीक पीटें और एक ही पक्ष में मतदान करें, लेकिन किसानों का मानस प्रभावित जरूर होता है। नरेश टिकैत ने सपा-रालोद गठबंधन को वोट देने की इच्छा जताई है। फिर

सत्ता के अंतिम वर्ष में एक काल का सूर्यास्त, अगली आशा के सूर्योदय से लाभान्वित होने का संघर्ष भी है। हिमाचल सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा इस गणित में आगे निकलने की कोशिश करती हुई प्रतीत हो रही है। भले ही कोविड के नए दौर ने भाजपा से कुछ इवेंट्स और सरकार से कुछ मंच छीन

उप्र इतना विशाल राज्य है कि उसके किसी आकस्मिक बदलाव की व्याख्या करना असंभव-सा है। दुनिया के कई देश उप्र से छोटे हैं। उप्र के पूरे चुनावी माहौल की एकदम व्याख्या करना भी संभव नहीं है। मतदान 7 चरणों में कुल 403 सीटों के लिए होगा, जो मार्च तक फैला है। फिर भी चर्चाएं हैं

दो दशक बाद हिमाचल की खेल नीति ने अंततः पदार्पण करते हुए सबसे बड़ा आश्वासन दिया है कि अब खेल संगठनों का संचालन केवल मंझे हुए खिलाड़ी ही करेंगे। खेलों में प्रतिस्पर्धा, काबिलीयत, दक्षता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देती खेल नीति का दायरा बढ़ा हुआ प्रतीत होता है, लेकिन इसे मुकम्मल करते लक्ष्य तय

रविवार, 16 जनवरी को कोरोना रोधी टीकाकरण अभियान का एक वर्ष बीत गया। काफी लंबा और ऊबड़-खाबड़ रास्ता था, लेकिन सफर फिर भी जारी है। इस अभियान पर राजनीतिक टीका-टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि एक ही साल में भारत की 138 करोड़ से अधिक की आबादी को दोहरा टीकाकरण कोई आसान लक्ष्य नहीं है।

कोरोना वायरस की तीसरी लहर ने उसकी दूसरी लहर की तरह तबाही नहीं मचाई है। हालांकि कोरोना संक्रमण फैलता ही जा रहा है। औसत राष्ट्रीय संक्रमण दर 12.1 फीसदी तक पहुंच चुकी है, कि कुछ जबबड़े शहरों में यह 25 फीसदी को पार कर रही है। इसी दौरान 35 डॉक्टरों ने सरकार को पत्र लिख कर

एक विधायक की पत्नी कितनी मासूम या कितनी खामोश है, इससे कहीं विपरीत ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा की जा रही हैं कि हर बार प्रेस कान्फं्रेस करके यह महिला अपने घरेलू विवाद को अदालत से बड़ा कर रही है। धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया व उनके मंगल सूत्र से बंधी रही एचएएस अधिकारी ओशिन शर्मा