संपादकीय

पर्यटक सीजन की मेहनत में उस हिसाब का क्या होगा, जो सैलानियों के अनुभव में खीज पैदा करता है। हर साल हिमाचल में सौ से दो सौ होटल, होम स्टे या रेस्तरां बढ़ रहे हैं, लेकिन इन सुविधाओं के ठीक पीछे सैलानियों के सुकून को अपने लिए जगह खोजनी पड़ती है। महज तेरह दिनों में शिमला में अगर सवा पांच लाख के करीब वाहन आ जाएं, तो इस ट्रैफिक के बीच मेहमाननवाजी का आलम क्या होगा। अगर सप्ताहांत पर्यटन की भीड़ में धर्मशाला से मकलोडगंज और भागसूनाग के बीच पांच घंटे ट्रैफिक जाम हो जाए, तो सैलानियों का यात्रा वृतांत क्या होगा। अटल टनल के दोनों छोर से प्रतिदिन दस हजार से ऊ

बीते दिनों पश्चिम बंगाल में जो रेल दुर्घटना हुई थी, उसमें 10 लोगों को अपनी जिंदगी खोनी पड़ी। कंचनजंगा एक्सप्रेस टे्रन सियालदाह जाने वाली थी, लेकिन मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मारी और बहुत कुछ ध्वस्त हो गया। पीछे की दो बोगियां मलबा बन गईं। कुछ बोगियां पटरी से नीचे उतर कर पलट गईं। घायलों की संख्या भी 50-60 बताई गई थी। हम उनके स्वस्थ होने और अपने-अपने घर लौटने की दुआ करते हैं। दुर्घटना कोई भी हो, विध्वंस होती है। बीते साल ओडिशा के बालासोर में इतनी भयानक दुर्घटना हुई थी कि प्रधानमंत्री मोदी घटनास्थल पर गए थे। रेल मंत्री का तो यह फर्ज बनता है। उसकी तुलना में

पिछले चुनावों के बाद और उपचुनावों से पहले हिमाचल मंत्रिमंडल ने कुछ महत्त्वपूर्ण फैसले लेकर सरकार की मंशा और नए अवतरण के साक्ष्य पेश कर दिए हैं। हिमाचल की संरचना में सुक्खू सरकार के प्रभाव और आशय की बुनियाद पर लिए गए निर्णयों में अधिसूचनाओं की रंगत, कई नए पोस्टर बना रही है। खासतौर पर देहरा के संदर्भ में आए फैसलों की चकाचौंध में जज्बात और उमंगों की बरसात की सूचना है। देहरा के कानों में सरकार कह रही है कि वहां लोक निर्माण विभाग का अधीक्षण अभियंता और पुलिस अधीक्षक कार्यालय खुलेगा। कांगड़ा के इस भूखंड पर उपचुनाव का महाभारत यह सुने बिना नहीं रहेगा कि सरकार की इबारत में दो बड़े दफ्तरों का आकार क्या होगा। हिमाचल मंत्रिमंडल पुलिस भर्ती आयु सीमा में एक साल की छूट देकर बाधित प्रक्रिया को वांछित संरक्षण दे रहा है। इ

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पारिवारिक संसदीय सीट रायबरेली से ही सांसद रहेंगे, लेकिन केरल की वायनाड सीट से इस्तीफा देंगे। वायनाड से छोटी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी चुनावी सियासत की शुरुआत करेंगी। वैसे वह 2004 से कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करती रही हैं। वह पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, लेकिन 20 लंबे सालों के बाद अब उन्हें चुनाव लडऩे का मौका मिल रहा है, क्योंकि वायनाड की राजनीति को भी सुरक्षित रखना है। यदि प्रियंका उप

समाज में सियासत और सियासत में समाज की पड़ताल में चुनावों का वर्तमान परिदृश्य, पुन: हिमाचल के तीन विधानसभा क्षेत्रों के मुहाने पर खड़ा है। चुनावों की वजह जो भी रही हो, मतदान की परिभाषा में समाज का नए सिरे से अवलोकन होगा। जिस समाज ने पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टियों के उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए निर्दलीयों को अपनाया, वही अब अलग मोर्चे पर कहीं अलग निशान और निशाने देख रहा है। भाजपा ने अपने हाथों पर तीनों निर्दलीयों के नाम खुदवाकर

जिस प्रदेश में बार-बार उपचुनाव होने लगें और जहां विधानसभा की सदस्यता अदालत से विधानसभा अध्यक्ष की कचहरी तक नाच करे, वहां सामान्य परिस्थितियां नहीं हैं। हिमाचल अब तक अपनी सियासत की मजबूती, सहनशीलता, जवाबदेही, वचनबद्धता तथा दलगत संस्कृति के उच्च आयाम स्थापित करता रहा है, लेकिन अब जुबान, जिरह और जमीन बदल रही है। विधानसभा बार-बार बंट रही है और जनादेश भी सियासी बही खाते की अपंगता में शरीक हो रहा है। आप ऐसे तो न

जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा-हालात पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने जो शीर्ष बैठकें की हैं, वे बेमानी नहीं हैं, लेकिन उन्हीं से पाकपरस्त आतंकवाद को कुचला और जड़ से उखाड़ा नहीं जा सकता। कश्मीर घाटी और अन्य राज्यों में सक्रिय आतंकवाद या उग्रवाद के उदाहरण हमारे सामने हैं। सेना, सुरक्षा बलों, पुलिस और स्थानीय गुप्तचरों के साझा ऑपरेशन कई साल तक चलाने पड़े, तो आज घाटी लगभग आतंकवाद-मुक्त है। हम इन बैठकों को खारिज नहीं करते, क्योंकि क

यह महज यात्री बस नहीं है और न ही हिमाचल की डेस्टिनेशन में सहज रूट है। यह एक अनुभव, साल की गणना में खुला मौसम, पर्वतीय आवरण में चहलकदमी और लेह रूट का हिमाचल के पर्यटन का गहरा रिश्ता है।

रायसीना हिल्स की सत्ता स्थापित हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार तीसरी बार पद की शपथ ग्रहण की है। उनकी कैबिनेट भी सक्रिय हो चुकी है, लेकिन विपक्ष अब भी मुगालते में है कि मोदी सरकार ‘अल्पसंख्यक’ (अल्पमत कहें) है...