
जयसिंहपुर के ऐतिहासिक चौगान पर 22 करोड़ का इनडोर स्टेडियम अगर जनता ने नामंजूर किया तो इसके पीछे एक बड़ा पैगाम है। बेशक बतौर खेल मंत्री यादविंदर गोमा का सपना हो सकता है, लेकिन वह जनता की प्रतिक्रिया को मंजूर करते हुए इसे कहीं अन्यत्र ले जा रहे हैं। इस तरह जयसिंहपुर का चौगान तो बच गया, लेकिन यह सरोकार कई चौगानों के प्रति नहीं रहे। चौगान या ऐतिहासिक मैदान महज संपत्ति नहीं ये विरासत की पूंजी है, जिसे हमने गंवा दिया। सबसे ज्या
राष्ट्रपति टं्रप ने टैरिफ का खेल फिर शुरू कर दिया है। अमरीकी कांग्रेस (संसद) में एक बिल पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले पांच देशों-भारत, चीन, हंगरी, अजरबैजान, स्लोवाकिया-पर 100 फीसदी टैरिफ थोपने का प्रावधान है।
हर सरकार को अपनी कार्यशैली का एक नक्शा जमीन पर उतारना पड़ता है और इस लिहाज से सुक्खू सरकार ने अपने इरादे चिन्हित कर दिए हैं। मंडे बैठकों के दौर के बाद उच्च स्तरीय बैठकों में इरादों की कार्यशैली स्पष्ट हो रही है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपने-अपने स्तर पर ‘चाणक्य’ साबित कर दिया है। गृहमंत्री का ‘ऑपरेशन दो-तिहाई’ लगभग अंजाम तक पहुंच चुका है और पवार ने ‘परिसीमन संशोधन बिल’ को समर्थन का संकेत देकर अपने 8 सांसदों का दलबदल बचा लिया है। संभावनाएं बन रही हैं कि पवार एनडीए में भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशानुसार गृहमंत्री शाह का आग्रह है कि एनसीपी के दोनों गुट आपस में विलय कर एक संगठित पार्टी बनाएं और फिर एनडीए का हिस्सा बनें। एनसीपी का जो गुट दिवंगत अजित पवार के नेतृत्व में टूटा था, वह महाराष्ट्र और कें
पर्यटन की तारीफ में कुछ आंकड़े जब दरियादिल हो जाते हैं, तो सडक़ें आबाद और अर्थतंत्र प्रसन्न हो जाता है। कांगड़ा को पहली बार टूरिज्म कैपिटल का संबोधन मिला, तो बांछें खिल उठी, हालांकि योजनाएं-परियोजनाएं अभी करवटें बदल रही हैं। आंकड़ों के हस्ताक्षर बता रहे हैं कि मई में 1.26 लाख घरेलू व 3500 विदेशी कांगड़ा पहुंच गए। पर्यटक आगमन का चित्र बेशक बड़ा हो रहा है, तो इसके कारणों पर गौर होना चाहिए। कांगड़ा घाटी में पर्यटन की घाटियां पहली बार नजर नहीं आ रहीं, बल्कि नजरों में कांगड़ा को लाने के लिए बहाने जरूर बढ़ रहे हैं। घाटी के मंदिर वास्तव में पर्यटन के प्रवेश द्वार हैं, जहां से अस्सी फीसदी आंकड़े हाजि
सोच समझ के दायरे पहले भी हिमाचल में सुदृढ़ थे, लेकिन अब सुक्खू सरकार ने पानी को महज पानी न मानते हुए, इसकी हर बूंद में हीरे-ज्वाहरात देखे हैं। यही वजह है कि न केवल किशाऊ बांध समझौते के बाद...
राष्ट्रपति टं्रप बयान देते हैं और देशों की अर्थव्यवस्थाएं हिचकोले खाने लगती हैं। बाजार धड़ाम से गिरते हैं। तेल, गैस, उर्वरक और अन्य सामान की किल्लत बढऩे लगती है, लिहाजा संकट भी व्यापक और विकराल होने लगते हैं।
पुलिस के एक अधिकारी का निलंबन चकित करता है या एक पुलिस बैंड ‘हारमनी ऑफ द पाइंस’ के प्रभारी विजय कुमार पर हुई कार्रवाई हैरान करती है। एक पुलिस अधिकारी के मशहूर होने के कारणों में कानून-व्यवस्था का पैमाना हो सकता है, लेकिन यहां जिस इंस्पेक्टर का जिक्र हो रहा है, वह म्यूजिक की शब्दावली में बैंड मास्टर है जिसके कंधों पर वर्दी का गौरव और सर्विस रूल्स की फाइल लटक रही है। शौर्य, सूरत और सीरत में यहां यह मामला इतना भी आसान नहीं कि
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 9 अगस्त को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में कारसेवा करेगी। अखाड़ा परिषद 50 लाख से अधिक साधु-संतों की प्रतिनिधि धार्मिक संस्था है। परिषद में मुख्यत: 13 अखाड़े हैं, जिनमें 7 शैव, 3 वैष्णव और 3 ही उदासीन अखाड़े हैं। वे सभी सनातन के पैरोकार और आस्थावान हैं, लिहाजा अब उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण मंदिर के लिए कारसेवा की घोषणा की है। जिस तरह अयोध्या में विवादित ढांचे (कथित बाबरी मस्जिद) का गुंबद ध्वस्त किया गया था, उस तरह श्रीकृष्ण मंदिर कारसेवा का मकसद नहीं है। साधु-संत और श्रद्धालु राजधानी दिल्ली से