हिमाचली जीवन में साहित्यिक गुंजाइश

किस्त - दो हिमाचल का नैसर्गिक सौंदर्य बरबस ही हरेक को अपनी ओर आकर्षित करता है। साथ ही यह सृजन, विशेषकर साहित्य रचना को अवलंबन उपलब्ध कराता रहा है। यही कारण है कि इस नैसर्गिक सौंदर्य की छांव में प्रचुर साहित्य का सृजन वर्षों से हो रहा है।…

अंतर्मन से आहूत विचारों का काव्य संग्रह

पुस्तक समीक्षा किताब खोलते ही ‘अंग-संग’ शीर्षक से लिखी कविता पर नजर पड़ती है। इसमें विचारों-भावनाओं का एक समंदर हिलोरे मारता नजर आता है। इन अथाह आवेशों पर नियंत्रण ही वास्तव में किसी भी प्रस्तुति के लिए अवश्यंभावी है। कवयित्री ने शायद…

बाहर व भीतर का फैलाव

भारत भूषण ‘शून्य’स्वतंत्र लेखक बाहरी दुनिया की सभी क्रियाएं और घटनाएं हमारे भीतरी संसार का परावर्तन है। सच्चाई यह है कि बाहर और आंतरिक अलग-अलग नहीं। एक ही सिक्के के दो पहलू भर हैं जो कभी विलग हो नहीं सकते हैं। एक रूप के दो कोण या एक कोण की…

हिमाचली जीवन में साहित्यिक गुंजाइश

किस्त - एक हिमाचल का नैसर्गिक सौंदर्य बरबस ही हरेक को अपनी ओर आकर्षित करता है। साथ ही यह सृजन, विशेषकर साहित्य रचना को अवलंबन उपलब्ध कराता रहा है। यही कारण है कि इस नैसर्गिक सौंदर्य की छांव में प्रचुर साहित्य का सृजन वर्षों से हो रहा है।…

चकित करती लघु साहित्यिक पत्रिकाएं

राजेंद्र राजन साहित्यकार संसाधनों के संकट के बीच लघु साहित्यिक पत्रिकाएं अपनी दमदार उपस्थिति बनाए हुए हैं। वरिष्ठ लेखकों के साथ-साथ युवा रचनाशीलता को पाठकों तक पहुंचाने और साहित्य पर चर्चाओं को पंख देने में अनेक पत्रिकाओं का कलेवर और…

ओपी शर्मा का साहित्य किसी दायरे में नहीं बंधता

मेरी किताब के अंश : सीधे लेखक से किस्त : 16 ऐसे समय में जबकि अखबारों में साहित्य के दर्शन सिमटते जा रहे हैं, ‘दिव्य हिमाचल’ ने साहित्यिक सरोकार के लिए एक नई सीरीज शुरू की है। लेखक क्यों रचना करता है, उसकी मूल भावना क्या रहती है,…

मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देती लघुकथाएं

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक का नाम : तुम्हारे लिए (लघुकथा संग्रह) लेखक का नाम : कृष्णचंद्र महादेविया प्रकाशक : पार्वती प्रकाशन, इंदौर मूल्य : 200 रुपए प्रसिद्ध लेखक कृष्णचंद्र महादेविया का लघुकथा…

डलहौजी में साहित्यिक गतिविधियों को समर्पित होटल

आपने कई ऐसे होटलों के नाम सुने होंगे जो ग्राहकों की आवभगत के उद्देश्य से बनाए गए हैं, किंतु ऐसे होटल का नाम नहीं सुना होगा जो प्रतिस्पर्धा के इस युग में भी अपने व्यावसायिक हितों को छोड़कर साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन में…

गालिब और प्रार्थी की अभिव्यक्ति में काल की भिन्नता

काव्य की लेखन विधा को लेकर मिर्जा गालिब की तरह आज का कवि चिंतित नहीं है। वह हिंदी तथा उर्दू में एक जैसे शिल्प अपनाने लगा है। अब तो इसके मापदंड की आवश्यकता भी नहीं रही है, जो गालिब के दौर में अत्यधिक जरूरी थी। सब कुछ बदल चुका है। महाकाव्य…

कविता : पेड़ देवदार का

हर मौसम में हरा-भरा सर्दी-गर्मी में तनकर खड़ा देवदार का ऊंचा पेड़ यह धरती की विषम ढलान में भी नहीं छोड़ता अपना प्राकृतिक गुण-धर्म नहीं होता टेढ़ा-मेढ़ा और न ही झुकना चाहता कभी भी बना कर रखे हुए अपना स्वाभिमान ढलानदार धरती नहीं कर सकती…

पुस्तकालय से पुस्तक मेले तक

शिमला पुस्तक मेले की हलचल में अब तक पुस्तकालयों में हाजिरी लगा रहे छात्र, शिक्षक व अन्य लोग पुस्तक मेले में भी शिरकत करने आए। पुस्तकालयों व पुस्तक मेले में वे कौनसी पुस्तकें ढूंढ रहे हैं, पाठ्यक्रम से इतर उनकी पसंदीदा पुस्तकें कौनसी हैं,…

अपने ही देश में हिंदी की दुर्गति क्यों?

हाल ही में दक्षिण भारतीय राज्यों के विरोध के कारण केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे से हिंदी की अनिवार्यता को खत्म कर दिया। अब संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी की अनिवार्यता का कोई जिक्र नहीं है। केंद्र सरकार के इस फैसले…

कविता

हर साल की तरह पहाड़ों पर जले जंगल घाटी से चोटी तक जाते हुए ठंडी बयार फिर नहीं बही जलती सांसों जैसी हवा ने घेर लिया घुटता हुआ दम आदत हो गई फिर भी सपने देखने का गुनाह करते रहे। बहुमंजिली इमारत के शीर्ष पर बैठा दीर्घकाय भारी भरकम अल्प…

सोशल मीडिया में नालेज पैक की चार्जिंग

जब हम खुश नहीं होते, तभी खुशी के आकार में समय की प्रताड़ना समझ पाते हैं। वैसे समय को सोशल बना देना इससे पहले नामुमकिन था, लेकिन मुमकिन बाजार में अब समय की क्या कीमत। हर व्यक्ति अपनी आयु के हर पड़ाव में खुद की बोली लगाकर समय को छलता है, फिर…

तपश्चर्या का काम है साहित्य साधना

किताब के संदर्भ में लेखक दिव्य हिमाचल के साथ साहित्य में शब्द की संभावना शाश्वत है और इसी संवेग में बहते कई लेखक मनीषी हो जाते हैं, तो कुछ अलंकृत होकर मानव चित्रण का बोध कराते हैं। लेखक महज रचना नहीं हो सकता और न ही यथार्थ के पहियों…