प्रतिबिम्ब

साहित्य वैचारिक संप्रेषण का ऐसा प्रभावशाली माध्यम है, जो कलात्मक सांकेतिकता के साथ किसी भी भाव को व्यक्त करने में सक्षम होता है। कविता अपनी शाब्दिक तरलता एवं संवेदनात्मक भृकृटि से और भी तीव्रता से प्रहार करती है।

‘जश्न-ए-बहारां’ की कलम से राजेंद्र राजन ने बदलते सामाजिक परिवेश में स्त्री की महत्त्वाकांक्षा, मौकापरस्ती और तरक्की की प्रस्तुति में उसकी उपलब्धियों की तफ्तीश लिखी है। यहां न समाज गला-सड़ा है और न ही मान्यताओं के पिंजरे, बल्कि एक औरत की हस्ती में आकर्षण की तमाम ऐसी सूलियां हैं, जो वक्त-वक्त पर पुरुष समाज को टांग देती हैं।

कविताओं की महफिल में लेखन का न•ाराना और भाव व्यंजना का समावेश करते कवियों ने हिमाचली प्रसंगों की चित्रावलियां बनाई हैं। कविता जैसे पहाड़ की बर्फ को पिघला कर नदी के रूप में, पाठकों की यादों से गुजरी है।

कवि हंसराज भारती अपने प्रश्नों से मुखातिब, परिवेश से हासिल और अनुभवों के खातिर कविताओं के हुजूम के साथ चलते हुए साठ रचनाओं का एक नया संसार ‘इस तपती धूम में’ कई किनारों पर उगी धूप-उगी भूख को छू रहे हैं।

डा. दीनदयाल वर्मा अनकही भावनाओं की कहानी ‘डायरी के पन्ने’ के माध्यम से सुना रहे हैं। डायरी लेखन एक व्यक्तिगत और अनौपचारिक गतिविधि है, जिसमें कोई व्यक्ति अपने दिनभर के खास अनुभवों, महत्वपूर्ण घटनाओं...

कविताओं की महफिल में लेखन का न•ाराना और भाव व्यंजना का समावेश करते कवियों ने हिमाचली प्रसंगों की चित्रावलियां बनाई हैं। कविता जैसे पहाड़ की बर्फ को पिघला कर नदी के रूप में, पाठकों की यादों से गुजरी है।

एक प्रश्न है जो वर्षों से हिंदी रंगमंच और हिंदी साहित्य दोनों को भीतर ही भीतर कुरेदता आया है। प्रश्न बहत सरल है, किन्तु उसका उत्तर उतना ही असहज है- क्या राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कारों में हिंदी नाटक को...

मैं कविता लिखता हूं/जब होता हूं तुम्हारे बहुत करीब/या फिर होता हूं/तुम से बहुत दूर/अकेला और उदास/पेड़ों और परिंदों के पास/मैं कविता से अपना दुख/सांझा करता हूं/जब अपना साया होता है अपने ही...

साहित्यकार अमर देव आंगिरस ने ‘महर्षि मार्कंडेय का अमर भक्ति साहित्य एवं हिमालयी संस्कृति’ नामक पुस्तक में उनका साहित्य संजोने की कोशिश की है। महर्षि मार्कंडेय महर्षि व्यास की तरह महान...