प्रतिबिम्ब

अतिथि संपादक : डा. गौतम शर्मा व्यथित विमर्श के बिंदु हिमाचली लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विवेचन -39 -लोक साहित्य की हिमाचली परंपरा -साहित्य से दूर होता हिमाचली लोक -हिमाचली लोक साहित्य का स्वरूप -हिमाचली बोलियों के बंद दरवाजे -हिमाचली बोलियों में साहित्यिक उर्वरता -हिमाचली बोलियों में सामाजिक-सांस्कृतिक नेतृत्व -सांस्कृतिक विरासत के लेखकीय सरोकार -हिमाचली इतिहास

शिवा पंचकरण, मो.-8894973122 लोकसाहित्य किसी भी समाज के खानपान, वेशभूषा, परंपराओं, बोलियों, भाषाओं, लिपियों, तीज-त्योहारों व मान्यताओं का घोतक होता है। लोक संस्कृति को निरंतर संरक्षित करते हुए, श्रुति ज्ञान परंपरा का निर्वाह करते हुए लोकसाहित्य लोक संस्कृति की एक शाखा के रूप में लगातार कार्य करता रहा है। सरल शब्दों में मनुष्य की उत्पत्ति

लेखक डा. धर्मपाल साहिल ‘अध्यापक : एक जीवनी’ (अध्यापकीय संस्मरण) लेकर आए हैं। डा. हरमहेंद्र सिंह बेदी इसके संपादक हैं। अध्यापन से मिले अनुभवों को 278 पृष्ठों में समेटा गया है।इंडिया नेटबुक्स प्रा. लि. नोएडा इसके प्रकाशक हैं। पुस्तक का मूल्य 450 रुपए है। धर्मपाल साहिल का यह साहित्यिक प्रयास नया एवं मौलिक है। चार

मो.- 9418130860 अतिथि संपादक:  डा. गौतम शर्मा व्यथित विमर्श के बिंदु हिमाचली लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विवेचन -38 -लोक साहित्य की हिमाचली परंपरा -साहित्य से दूर होता हिमाचली लोक -हिमाचली लोक साहित्य का स्वरूप -हिमाचली बोलियों के बंद दरवाजे -हिमाचली बोलियों में साहित्यिक उर्वरता -हिमाचली बोलियों में सामाजिक-सांस्कृतिक नेतृत्व -सांस्कृतिक विरासत के लेखकीय सरोकार -हिमाचली

जूनियर इंजीनियर इलेक्ट्रिकल की लिखित परीक्षा में चार पास कार्यालय संवाददाता— हमीरपुर हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर ने जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) (पोस्ट कोड 802) की लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। आयोग सचिव डा. जितेंद्र कंवर ने बताया कि एक पद के लिए 1803 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 1410

पदमा ठाकुर, मो.-9418155324 हिमाचल प्रदेश का जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति अपनी अलग परंपराओं, मान्यताओं, भौगोलिक कारणों से सदैव प्रदेश के अन्य जिलों से भिन्न पहचान रखता आया है। यहां के लोगों की सादगी जनजातीय स्वभाव को निःसंदेह दर्शाती है क्योंकि स्वभाव को किसी प्रकार से बदला नहीं जा सकता:  ‘स्वभावो न उपदेशेन शक्यते कुर्तभन्यथा।’ लाहुल की

बल्लभ डोभाल, मो.-8826908116 प्रायः सुनने में आता है कि मनुष्य अच्छे कर्म करे तो मरने के बाद उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। अच्छे कर्म जिसने नहीं किए, उसके लिए भी स्वर्ग की कामना की गई है। मरने के बाद सभी स्वर्गवासी हो जाते हैं। स्वर्ग जाने के लिए मरना एक जरूरी शर्त जैसे

लोकसाहित्य की दृष्टि से हिमाचल कितना संपन्न है, यह हमारी इस शृंखला का विषय है। यह शृांखला हिमाचली लोकसाहित्य के विविध आयामों से परिचित करवाती है। प्रस्तुत है इसकी 37वीं किस्त… सपना नेगी मो.-9354258143 किन्नौर की पुरातन संस्कृति को संजोए रखने में यहां के ग्राम देवताओं की अहम भूमिका रही है। अगर यहां के ग्राम

अतिथि संपादक : डा. गौतम शर्मा व्यथित विमर्श के बिंदु हिमाचली लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विवेचन -36 -लोक साहित्य की हिमाचली परंपरा -साहित्य से दूर होता हिमाचली लोक -हिमाचली लोक साहित्य का स्वरूप -हिमाचली बोलियों के बंद दरवाजे -हिमाचली बोलियों में साहित्यिक उर्वरता -हिमाचली बोलियों में सामाजिक-सांस्कृतिक नेतृत्व -सांस्कृतिक विरासत के लेखकीय सरोकार -हिमाचली इतिहास