जिंदगी, जिंदगी जैसी हो, इससे ज्यादा कोई सपना हमने नहीं देखा

मुरारी शर्मा मो.-9418025190 कर्फ्यू के भीतर साहित्यिक जिंदगी-1 मन के ताले खोले बैठे साहित्य जगत के सृजन को कर्फ्यू कतई मंजूर नहीं। मुखातिब विमर्श की नई सतह पर और विराम हुई जिंदगी के बीचों-बीच साहित्य कर्मी की उर्वरता का कमाल है कि…

जिस लाहौर नहीं वेख्या

कर्फ्यू का विराम तोड़ती किताब पंजाबियत किन्हीं सरहदों के टकराव से कहीं दूर कई दरियाओं के बीच घूमती संवेदनात्मक टापू सरीखी है, जो कभी बोलियों, टप्पों, गिद्धों में मशगूल होकर जब हीर सुनाने लगती है, तो एक साथ कई चिराग जल उठते हैं।…

कर्फ्यू ने बहुत सिखायाखास लिखाया

अशोक गौतम मो.-9418070089 इन दिनों स्वर्ग से धरती तक आदमियत का सन्नाटा पसरा हुआ है। कल तक जिन कुत्तों को हम हड़काया करते थे, वे आज हमें ढूंढ रहे हैं कि हे हमें चलते-फिरते हड़काने वालो! कहां दुम दबाकर छुपे हो आज तुम लोग? आदमी जीने के लिए…

नजरबंदी में मैं और मेरा साहित्यकार

डा. सुशील कुमार फुल्ल मो.-9418080088 एक अमरीकी आलोचक ने लिखा है कि किसी भी साहित्यकार को अपनी रची जा रही कृति या रचना नहीं दिखानी चाहिए, जैसे कोई मां अपनी कोख में पल रही संतान को प्रसूति से पहले नहीं दिखा सकती। परंतु दिव्य हिमाचल के…

चिंतनशील हो गया है साहित्यकार

डा. गंगाराम राजी मो.-9418001224 कोरोना के कारण आज मनुष्य घर की चारदिवारी के अंदर बंद है, वह टीवी के माध्यम से बाहर के जगत का अंदाजा लगा रहा है और भयावह दृश्य देख डर का संचार उसके मन में होने तो लगा है, परंतु मनुष्य ने कभी इसके कारणों पर…

पर्याप्त रचनाओं से परिपूर्ण है हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य

डा. हेमराज कौशिक मो.-9418010646 साहित्य के कितना करीब हिमाचल-2 अतिथि संपादक : डा. हेमराज कौशिक हिमाचल साहित्य के कितना करीब है, इस विषय की पड़ताल हमने अपनी इस नई साहित्यिक सीरीज में की है। साहित्य से हिमाचल की नजदीकियां इस सीरीज में…

हिमाचली बाल साहित्य में लोक-चेतना

डा. आर. वासुदेव प्रशांत मो.-9459987125 बाल साहित्य पर हमारी विवेचनात्मक सीरीज की छठी किस्त का शेष भाग लोक-चेतना से अभिप्राय लोक-चिंतन अथवा जन-सामान्य की किसी विषय पर सोच से है। कोई भी समाज हमेशा से अपने कल्याण के प्रति चिंतन करता हुआ ही…

सरकारी प्रकाशनों में हिमाचली साहित्य

रतनचंद निर्झर मो.-9459773121 साहित्य, कला व संस्कृति के संवर्धन में जब सरकारी पक्ष से भी प्रोहत्साहन मिलता है तो साहित्यकार, कलाकार व संस्कृति कर्मी के रचनाकार के रचना कर्म में और ऊर्जा जागृत होती है और वे दुगने उत्साह के साथ अपनी…

लेखन का हिमाचली अभिप्राय एवं प्रासंगिकता

डा. प्रेमलाल गौतम ‘शिक्षार्थी’ मो.-9418828207 संस्कृत साहित्य में एक सूक्ति प्रख्यात है ‘स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते’। इससे स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि क्रांतद्रष्टा सहृदय लेखक देशकाल की सीमाओं से परे है। वह समाज में जो…

‘शब्द तलवार है’ में सार्थक भावों की अभिव्यक्ति

पुस्तक समीक्षा जिला सिरमौर से संबद्ध हिमाचल के प्रसिद्ध लेखक व कवि पंकज तन्हा का काव्य संग्रह ‘शब्द तलवार है’ भावों की सार्थक अभिव्यक्ति में सफल रहा है। कवि ने रचनाकर्म के दौरान भाव पक्ष को वरीयता दी है। इस संग्रह में कविताएं, गजलें, दोहे…

पर्याप्त रचनाओं से परिपूर्ण है हिमाचल का साहित्यिक परिदृश्य

डा. हेमराज कौशिक मो.-9418010646 साहित्य के कितना करीब हिमाचल-1 अतिथि संपादक : डा. हेमराज कौशिक हिमाचल साहित्य के कितना करीब है, इस विषय की पड़ताल हमने अपनी इस नई साहित्यिक सीरीज में की है। साहित्य से हिमाचल की नजदीकियां इस सीरीज में…

पाश कभी नहीं मरते…

पुण्यतिथि पर विशेष अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार क्रांतिकारी कवि पाश पाश न महज पंजाबी कविता बल्कि समूची भारतीय कविता के लिए एक जरूरी नाम हैं, क्योंकि उनके योगदान के उल्लेख के बिना भारतीय साहित्य और समाज के लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं बनता है।…

हिमाचल में साहित्य का उद्देश्य सिकुड़ रहा है

डा. राजन तनवर मो.-9418978683 हिमाचल प्रदेश हिम के आंचल में बसा पहाड़ी प्रदेश है। इस प्रदेश के दो जिलों किन्नौर और लाहौल-स्पीति में चीनी-तिब्बती भाषा परिवार की तथा अन्य जिलों में भारोपीय भाषा परिवार की बोलियां बोली जाती हैं। सभी जिलों की…

हिमाचल के भाषायी सरोकार

सुदर्शन वशिष्ठ मो.-9418085595 विशाल हिमाचल के गठन से आरंभ करें तो हिमाचल में भाषायी सरोकारों और साहित्य का उदय अस्सी के दशक में हुआ। या यूं कहें कि विशाल हिमाचल बनने के बाद यहां भाषायी और साहित्यिक उथल-पुथल इकट्ठा शुरू हुई। यह सही है कि…

नई पुस्तक : महासुवी लोक संस्कृति

पुस्तक समीक्षा हाल ही में युवा लेखिका उमा ठाकुर की नई पुस्तक ‘महासुवी लोक संस्कृति’ प्रकाशित हुई है। उमा ठाकुर पिछले चार साल से इस पर कार्य कर रही थीं। इसी कड़ी में वर्ष 2016 में आकाशवाणी शिमला से भी ‘महारा महासु’ शीर्षक से उनका नाटक तेरह…