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-गतांक से आगे… घोर-रूपा घोर-दंष्ट्रा घोरा घोर-तरा शुभा। महा-दंष्ट्रा महा-माया सुदन्ती युग-दन्तुरा।। 11।। सुलोचना विरूपाक्षी विशालाक्षी त्रिलोचना। शारदेन्दु-प्रसन्नस्या स्फुरत-स्मेताम्बुजेक्षणा।। 12।। अट्टहासा प्रफुल्लास्या स्मेर-वक्त्रा सुभाषिणी। प्रफुल्ल-पद्म-वदना स्मितास्या प्रिय-भाषिणी।। 13।। कोटराक्षी कुल-श्रेष्ठा महती बहु-भाषिणी। सुमतिः कुमतिश्चण्डा चण्ड-मुण्डाति-वेगिनी।। 14।। प्रचण्डा चण्डिका चण्डी चर्चिका चण्ड-वेगिनी। सुकेशी मुक्त-केशी च दीर्घ-केशी महा-कचा।। 15।। प्रेत-देहा-कर्ण-पूरा प्रेत-पाणि-सुमेखला। प्रेतासना प्रिय-प्रेता प्रेत-भूमि-कृतालया।। 16।। श्मशान-वासिनी पुण्या

कालाष्टमी अथवा काला अष्टमी का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त वर्ष की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी, जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष के छठे दिन यानी षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। श्रीकृष्ण की माता यशोदा का जन्म पर्व गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारतीय राज्यों में भी मनाया जाता है। इस बार मां यशोदा जयंती 4 मार्च को मनाई जाएगी… भगवान श्रीकृष्ण की माता मैया यशोदा

मां ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं। ललिता जयंती का व्रत भक्तजनों के लिए बहुत ही फलदायक होता है। श्री ललिता जयंती इस बार 27 फरवरी को मनाई जा रही है। भक्तों में मान्यता है कि यदि कोई इस दिन मां ललिता देवी की पूजा भक्तिभाव सहित करता है, तो उसे देवी मां की

गतांक से आगे… लाहुल-स्पीति से कुछ पीढ़ी तो आज भी अनजान ही है। इन्हीं त्योहारों के साथ कई तरह के खेल भी, जिन्हें जनजातीय लोग खेल कर अपनी शारीरिक क्षमता को परखते रहे हैं। कहते हैं युग बदलते देर नहीं लगता, ऐसा ही हुआ लाहुल-स्पीति के साथ। वर्षों रोहतांग के उस ओर बंद रहने के

बाबा हरदेव इस आत्मा के कारण ही इस शरीर का चलना फिरना है, यही जीवन है। इसी की वास्तव में हमने पहचान करनी है कि हम यह शरीर नहीं, बल्कि एक आत्मा हैं। आत्मा की ही महत्ता है। अगर परमात्मा को हमने पाया नहीं और सभी काम हम करते रहे, शरीर को सजाते रहे, शृंगारते

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… हम लोग तो ज्योति के तन्य हैं। उनका इस प्रकार प्रत्युत्तर सुनकर मैं समझ गया कि स्वामी जी उक्त ग्रंथ निर्दिष्ट इन प्राथमिक साधन सोपानों को पार कर साधना राज्य की कितनी उच्च भूमि में पहुंच गए हैं। हम लोग यह विशेष रूप से देखते थे कि संसार की अत्यंत

28 फरवरी रविवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, प्रथमा 1 मार्च सोमवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, द्वितीया 2 मार्च मंगलवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, चतुर्थी, अंगारकी गणेश चतुर्थी 3 मार्च बुधवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, पंचमी 4 मार्च बृहस्पतिवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, षष्ठी 5 मार्च शुक्रवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, सप्तमी 6 मार्च शनिवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, अष्टमी, कालाष्टमी

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव अगर कोई वाकई आपका दोस्त है, तो आपके अंदर उसे नाराज करने का साहस होना चाहिए और फिर भी उसके प्रति प्रेम और सद्भाव होना चाहिए। फिलहाल आपकी दोस्तियां हमेशा सहमति, पसंद-नापसंद पर बनती हैं। लेकिन चाहे आप सेब और संतरे की तरह भिन्न हों, फिर भी आप अच्छे दोस्त हो सकते