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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के ठियोग की बेटी अर्चिता बेक्टा ने मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है। गवर्नमेंट मॉडल स्कूल सैंज की छात्रा ...

डीएवी स्कूल तियारा के नौवीं कक्षा के छात्र एवं गांव वैदी निवासी अथर्व चौधरी ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में चार देशों की अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता...

शैक्षणिक उत्कृष्टता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निरंतर बेहतर प्रदर्शन के दम पर सेक्टर-32 स्थित गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कालेज ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। पिछले सालों की तरह ...

कबीर (जन्म : 1398, मृत्यु : 1518) का नाम कबीरदास, कबीर साहब एवं संत कबीर जैसे रूपों में भी प्रसिद्ध है। वह मध्यकालीन भारत के स्वाधीनचेता महापुरुष थे और उनका परिचय प्राय: उनके जीवनकाल से ही, उन्हें सफल साधक, भक्त कवि, मतप्रवर्तक अथवा समाज सुधारक मानकर दिया जाता रहा है तथा इनके नाम पर कबीरपंथ नामक संप्रदाय भी प्रचलित है। कबीरपंथी उन्हें एक अलौकिक अवतारी पुरुष मानते हैं और उनके संबंध में बहुत-सी चमत्कारपूर्ण कथाएं भी सुनी जाती हैं। उनका कोई प्रामाणिक जीवनवृत्त आज तक नहीं मिल सका, जिस कारण इस विषय में निर्णय करते समय, अधिकतर जनश्रुतियों, सांप्रदायिक ग्रंथों और विविध उल्लेखों तथा उनकी अभी तक उपलब्ध कतिपय फुटकर रचनाओं के अंत:साध्य का ही सहारा लिया जाता रहा है। फलत: इस संबंध में तथा उनके मत के भी विषय में बहुत कुछ मतभेद पाया जाता है।

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में देव समाज और खेतीबाड़ी का गहरा संबंध रहा है। कुछ देवता विशेष रूप से कृषि से संबंधित कार्यों को समर्पित रहे हैं। खेत्रपाल देवता कृषि से संबंधित इन्हीं देवताओं में से एक हैं। जब भी कोई नई फसल तैयार होती है, इन देवी-देवताओं को भोग के रूप में विशेष पूजा (प्रसाद) अर्पित की जाती है। श्रद्धा एवं विधिपूर्वक अर्पित की जाने वाली किसी पूजा को स्थानीय भाषा में पूड़ू कहते हैं। कांगड़ा जिला सहित निचले हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओं को पूड़ू अर्पित करने को लेकर विशेष मान्यता रही है। यहां यह पूड़ू हर 6 महीने में नई फसल निकलने के बाद अर्पित किया जाता है। यह पूजा खेत्रपाल देवता, माल्ल माता आदि देवी-देवताओं को श्रद्धापूर्वक चढ़ाई जाती है। इसके पीछे का विश्वास है कि जो भी नई फसल एवं सुख-समृद्धि घर में आती है, वे इन्हीं देवी-देवताओं के आशीर्वाद से प्राप्त होती है। इसके प्रति अपनी आस्था एवं श्रद्धा ज्ञापित करते हुए यह पूड़ू देवी-देवताओं को चढ़ाने की परंपरा विकसित हु

ज्येष्ठ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। इस दिन गंगा में स्नान का भी महत्त्व है। गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना तथा दान-दक्षिणा आदि से व्यक्ति के मनोरथ पूर्ण होते हैं। ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन स्त्रियां वट वृक्ष की पूजा करती हैं...

हिमाचल देवभूमि के रूप में विख्यात है, क्योंकि यहां पर असंख्य देवी-देवताओं के प्राचीन ऐतिहासिक पावन स्थल मौजूद हैं, इसीलिए इनके दर्शनों को हर मौसम में बड़ी संख्या में देश-विदेश से भक्त यहां पहुंचते हैं।

स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, लगातार आने वाली सूचनाओं और अत्यंत व्यस्त जीवनशैली के इस दौर में क्या कोई यह कल्पना कर सकता है कि वह लगातार दस दिनों तक बिना मोबाइल फोन, पुस्तकों, समाचार

* मुंह के छालों से राहत के लिए हरी इलायची के दानों को पीसकर, थोड़ा सा शहद मिलाकर, इस पेस्ट को छालों पर 5 मिनट लगाएं और लार टपकने दें। इससे मुंह के छालों से आराम मिलेगा।