नागनी माता मंदिर

कांगड़ा जिला की देव भूमि वीर भूमि एवं ऋषि- मुनियों की तपोस्थली पर वर्ष भर मनाए जाने वाले असंख्य मेलों की शृंखला में सबसे लंबे समय अर्थात दो मास तक मनाए जाने वाला प्रदेश का एक मात्र मेला नागनी माता का है। इस मंदिर को छोटी नागनी माता मंदिर के…

त्रिलोचन महादेव मंदिर

भगवान शिव की महिमा भी बड़ी न्यारी है। विभिन्न रूपों में शिव जी अपने भक्तों का बड़े ही भोले अंदाज में मन मोह लेते हैं। भांग, धतूरा और श्मशान की राख और गले में सर्प की माला उन्हें औघड़ स्वरूप देती है। यही कारण है कि शिवलिंग के रूप में भगवान…

संन्यासी की बात

ओशो एक यात्रा की बात है। कुछ वृद्ध स्त्री-पुरुष तीर्थ जा रहे थे। एक संन्यासी भी उनके साथ थे। मैं उनकी बात सुन रहा था। संन्यासी उन्हें समझा रहे थे, मनुष्य अंत समय में जैसे विचार करता है, वैसी ही उसकी गति होती है। जिसने अंत संभाल लिया, उसने…

सावन में क्यों भोलेनाथ को है जल चढ़ाने का विधान

भगवान शंकर ने विष का पान किया, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया। इस वजह से भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। विष पान करके सृष्टि की रक्षा करने के कारण सभी देवताओं ने भगवान शिव का गुणगान किया और उनको जल अर्पित किया, ताकि उस विष का प्रभाव और ताप कम हो…

शहनाज को ट्राउजर पकड़कर पूरा करना पड़ा डांस

सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर…

सच्चे दिल से प्रार्थना

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे... मैं कहता हूं आज रात को काली के मंदिर में जाकर मां को प्रणाम करके जो मांगोगे, मां तुझे वह सब देगी, यकीन हो या न हो। श्री रामकृष्ण की प्रस्तरमयी जगतमाता क्या चीज है, उसकी परीक्षा करके देखनी होगी, नरेंद्र ने…

किसी अजूबे से कम नहीं हैं

महाभारत के पात्र कर्ण कभी भी शकुनी की पांडवों को छल-कपट से हराने की योजनाओं से सहमत नहीं था। वह सदा ही युद्ध के पक्ष में था और सदैव ही दुर्योधन से युद्ध का ही मार्ग चुनने का आग्रह करता। यद्यपि वह दुर्योधन को प्रसन्न करने के लिए द्यूत…

विवाद से परे है ईश्वर का अस्तित्व

निःसंदेह युग के महान दार्शनिकों में से रूसो और मार्क्स की भांति ही फ्रैडरिक नीत्से की भी गणना की जाए। इन तीनों ने ही समय की विकृतियों को और उनके कारण उत्पन्न होने वाली व्यथा-वेदनाओं को सहानुभूति के साथ समझने का प्रयत्न किया है। अपनी…

श्री गोरख महापुराण

मछेंद्रनाथ बोले, मैं तो यती नाम से प्रसिद्ध होऊंगा ही, पर मेरे मन में एक शंका है। हनुमानजी मुस्करा कर बोले, क्या? तब योगीराज ने कहा , आपने त्रिकालदशी होकर मेरे से वाद-विवाद क्यों किया? आपसे मेरी पहली भेंट नागाश्वत्थ वृक्ष के तले हुई थी। उस…

विवेक चूड़ामणि

गतांक से आगे... आप्तोक्तिं खननं तथोपरिशिलाद्युत्कर्षणं स्वीकृर्ति निक्षेपः समपेक्षते न हि बहिः शब्दैस्तु निर्गच्छति तद्वद् ब्रह्मविदोपदेशमननध्यान स्वममलं तत्त्वं न दुर्युक्तिभिः।। पृथ्वी में गड़े हुए धन को प्राप्त करने के लिए जैसे पहले…

वैराग्य का भाव

श्रीश्री रवि शंकर कोई भी उत्सव तभी वास्तविक हो सकता है जब दिल में वैराग्य का भाव हो। जब मन भीतर की ओर मुड़कर उस अनंत और कभी नहीं बदलने वाले स्वरूप की ओर चला है और जब आप अपने भीतर के गहन में उस अनंत को देखते हैं तो फिर जन्म और मृत्यु का…

सोए रहिए चुपचाप

जेन कहानियां गासन को उनके गुरु तेकीसुई अपना उत्तराधिकारी चुन चुके थे। तेकीसुई की मृत्यु से तीन दिन पहले गासन उनके बिस्तर के पास बैठे थे। कुछ समय पहले एक जेन आश्रम आग की भेंट चढ़ चुका था। गासन उसके पुनर्निर्माण में लगे हुए थे। तेकीसुई ने…

विष्णु पुराण

उभयोः काष्ठयोर्मध्ये भ्रमतो मंडलानि तु। दिवा नक्तच सूर्यस्य मन्दा शीघ्र च वैं गतिः।। मंदाहिन यस्मिन्नयने शीघ्रा नक्तं तदा गतिः। शीघ्रा निशि यदा चास्या तदा मन्दा दिवा गतिः।। एक प्रमाणमेवैय मार्ग याति दिवाकरः। अहोरात्रेण भुङक्ते समस्ता…

चक्र का ध्यान करने से सिद्धियों पर अधिकार

इन नौ चक्रों में से किसी भी एक चक्र का ध्यान करने पर सिद्धियां और मोक्ष साधक के अधिकार में हो जाते हैं। कठोपनिषद में यम के द्वारा नचिकेता को जिस अग्नि का उपदेश दिया गया था, कुछ विद्वान उसे कुंडलिनी शक्ति ही समझते हैं। पाश्चात्य देशों के…

आत्म पुराण

जो पुरुष दूसरों के नेत्र की पुतली में अथवा दर्पण आदि में अपने प्रतिबिंब का मस्तक नीचे की तरफ देखने का संशय करे उसका मृत्यु काल निकट ही समझना चाहिए। हे शिष्य! दोनों कानों को अपनी दोनों अंगुलियों से बंद कर लेने पर जो प्राणों की ध्वनि रूप शब्द…