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हिमाचल के विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रदेश स्तर पर परखने के लिए रविवार को ‘ब्रेन ऑफ हिमाचल-2026’ टैलेंट हंट परीक्षा आयोजित की गई। एस्पायर आईआईटी एंड मेडिकल की ओर से आयोजित इस ...

राजकीय महाविद्यालय चंबा के हिंदी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. प्रशांत रमण रवि का भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान आईआईएएस, राष्ट्रपति निवास, शिमला के जीसी इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर आईयूसी फॉर ...

हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने और प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को तलाशने की दिशा में ‘हिम क्वेस्ट’ टैलेंट सर्च एग्जाम करवाया गया। प्रदेशभर में 143 परीक्षा...

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिन पितृ पक्ष (पितृ अथवा पिता) के नाम से जाने जाते हैं। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध आदि सम्पन्न करते हैं।

भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने सदियों से पूरी मानवता को सत्य, करुणा, प्रेम, सह-अस्तित्व और सद्भाव का संदेश दिया है। इसी विराट आध्यात्मिक परंपरा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्थान अत्यंत विशिष्ट और श्रद्धापूर्ण है।

मंदिर के महंत के अनुसार, इस सरोवर में पिंडदान करने की भी धार्मिक मान्यता है और हर साल आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस सरोवर का निर्माण भगवान राम ने लक्ष्मण के लिए किया था...

राजा दशरथ कई गुणों के स्वामी थे। महातेजस्वी और पराक्रमी : वे सूर्यवंश (इक्ष्वाकु कुल) के परम प्रतापी और अतिरथी राजा थे, जिन्होंने देवताओं की सहायता के लिए कई युद्धों में भाग लिया था।

हिमाचल प्रदेश राज्य में अनेकों धार्मिक व पर्यटन स्थल हैं, विशेषकर अनन्य धार्मिक स्थल होने के कारण यह राज्य विश्व के मानचित्र में देवभूमि के नाम से अंकित है और हर वर्ष देश-विदेश के सैलानियों का यहां तांता लगा रहता है।

राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज जी ‘जैसा खाए अन्न वैसा बने मन’ वाली उक्ति बहुत ही सारगर्भित है और इसी वजह से हमारे शास्त्रकारों एवं उपनिषद्कारों के मतानुसार मन को सात्विक बनाना आत्मोत्कर्ष की दृष्टि से नितांत आवश्यक है और उसके लिए आहार शुद्धि को प्रथम चरण माना गया है। हम सभी इस तथ्य से अच्छी तरह