विचार

होटल, रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों के मालिक पूरी तरह से बेरोजगार और प्रभावित हो चुके हैं। आज अगर एक अनुमान लगाया जाए तो हिमाचल प्रदेश का पर्यटन पूर्णतः ठप हो चुका है। कोरोना महामारी के कारण पर्यटकों के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए होटलों, ट्रैवल एजेंटों, टैक्सी कैब, ग्रुप पर टूर ऑपरेटर, मनोरंजन पार्क, एडवेंचर

केंद्र में कमजोर नेतृत्व ने राज्यों को संकट में डाल दिया है और वे असमंजस की स्थिति में हैं। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि जिस दल ने देश पर लगभग साठ वर्षों तक शासन किया, उसका कोई पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है। एक ऐसी पार्टी जो अगले संसदीय चुनाव में सत्ता में आने

कभी खजियार को स्विट्जरलैंड बनाने चले शांता कुमार डलहौजी का नाम बदलवाकर किसी समस्या का समाधान कर रहे हैं या किसी समस्या का विकास कर रहे हैं। आखिर क्यों डलहौजी अब राजनीति की आंख में किरिच पैदा कर रहा है और शांता सरीखे नेता को इतिहास के गड्ढे खोदने पड़ रहे हैं। न इतिहास के

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 संविधान में एक ‘अस्थायी व्यवस्था’ के तौर पर लागू किया गया था। संविधान सभा में हमारे राजनीतिक पुरखों ने इस व्यवस्था पर व्यापक विमर्श किया था। नतीजतन 14 मई, 1954 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने ऐसी ‘अस्थायी व्यवस्था’ को स्वीकृति दी थी और जाहिर है कि उसे अधिसूचित भी किया गया।

सवाल देश की इम्युनिटी का है, इसलिए हर भारतवासी इसकी मॉडलिंग करने को तैयार होने लगा है। दरअसल मॉडलिंग की ट्रेनिंग तो तब से शुरू हो गई है जब से प्रधानमंत्री के नाम से जुड़ी तमाम योजनाएं हर चुनाव में इम्युनिटी पैदा कर रही हैं। उज्ज्वला योजना के तहत जिन्होंने रसोई गैस की मॉडलिंग होते

अतिथि संपादक:  डा. गौतम शर्मा व्यथित विमर्श के बिंदु हिमाचली लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विवेचन -34 -लोक साहित्य की हिमाचली परंपरा -साहित्य से दूर होता हिमाचली लोक -हिमाचली लोक साहित्य का स्वरूप -हिमाचली बोलियों के बंद दरवाजे -हिमाचली बोलियों में साहित्यिक उर्वरता -हिमाचली बोलियों में सामाजिक-सांस्कृतिक नेतृत्व -सांस्कृतिक विरासत के लेखकीय सरोकार -हिमाचली इतिहास से

राजेंद्र राजन मो.-8219158269 चुटीली और लच्छेदार भाषा। खिलेदड़ापन। अंदाज़े बयां कुछ ऐसा कि पाठक अगर फिल्मों या फिल्मी हस्तियों के बेहद दिलचस्प किस्सों-कहानियों को एक बार पढ़ना शुरू कर दे, खुद को अंत तक रोक न पाए। ये परिचय है लेखक व पत्रकार राजकुमार केसवानी का जिन्होंने 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड के उस

डा. रवींद्र कुमार ठाकुर, मो.-9418638100 हिमाचल प्रदेश जैसे प्राकृतिक सौंदर्य के धनी राज्य की अलौकिक छटाएं किसी के भी मन-मष्तिष्क को स्वर्ग सी अनुभूति दिला सकती हैं। यही अनुभूति किसी भी साधारण व्यक्तित्व को प्रकृति के आंचल में खो जाने और झूमने को मजबूर कर देती है। मनुष्य चाहे सांसारिक जीवन के झंझावातों में कितना

पुस्तक समीक्षा डा. नलिनी विभा नाज़ली का एक और बाल कविता संग्रह ‘निश्छल बचपन’ प्रकाशित हुआ है। 88 पृष्ठों के इस संग्रह में 68 कविताएं संकलित हैं। अविचल प्रकाशन बिजनौर से प्रकाशित इस कविता संग्रह का मूल्य 250 रुपए है। सहज, सरल, निश्छल भावों को सहज-सरल भाषा में अभिव्यक्ति सरल-सरस छंदों (लय) की बानगी, सरस