विचार

समाज में बढ़ता नशा पंचायतों की गैर जिम्मेदारी वाली कार्यप्रणाली का नतीजा है। जनता को न्याय मुहैया करवाना केवलमात्र पुलिस का काम नहीं है। पंचायतों को भी पुलिस के समान अधिकार मिले हुए हैं, मगर उनकी पालना कौन करे? पंचायत प्रतिनिधियों में मनोबल की कमी ज्यादा है। नतीजतन गांवों में एकता, भाईचारा, सद्भाव, अपनापन खत्म

किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थक भी मौजूद हैं! यह कथन अब हैरान नहीं करता और न ही हम प्रत्यक्ष तौर पर आरोपित कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की प्राथमिकी में प्रथमद्रष्ट्या ऐसे ही आरोप हैं। किसान नेता एवं ‘लोक भलाई इंसाफ  वेलफेयर सोसायटी’ के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा और उनके बेटे मेहताब

जैसे-जैसे प्रो. चौपट नाथ की रिटायरमेंट का समय नज़दीक आ रहा था, उनके माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं। वह अपनी तमाम पारिवारिक चिंताओं से मुक्त होकर, बुज़ुर्गों के शब्दों में कहें तो ‘गंगा नहा चुके थे’। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें भारी-भरकम पेंशन भी मिलने वाली थी। फिर भी उन्हें चिंता सताए

पंचायत चुनाव में हिमाचल के दर्शन करता समाज खुद से भी रू-ब-रू है, जबकि बनती बिगड़ती कहानियों के बीच राजनीति और राजनेता खड़े हैं। सभी ने जोर लगाया और पहले चरण की भूमिका में करीब 78 प्रतिशत मतदान के मायने लोकतंत्र की पृष्ठभूमि को प्रदेश में सुदृढ़ कर गए। नारी सशक्तिकरण के परिदृश्य में पंचायत

पिछले लगभग एक वर्ष से पूरे विश्व को कोरोना महामारी ने बुरी तरह से घेर रखा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। भारत में एक करोड़ से भी अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और डेढ़ लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्ष 2020 में इस महामारी ने देश के

राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा परिवार नियोजन के मामले में हमारा देश विश्व में ऐसा प्रथम देश है। इसने 1952 में परिवार नियोजन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था। इसमें समय-समय पर परिवर्तन भी हुए, लेकिन अफसोस फिर भी हमारे देश में अभी भी कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों से अनजान

डा. जयंतीलाल भंडारी विख्यात अर्थशास्त्री इस समय जब सरकार कोविड-19 की चुनौतियों के बीच राजकोषीय घाटे की चिंता न करते हुए विकास की डगर पर आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रही है, तब कई बातों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित किए गए विभिन्न आर्थिक पैकेजों के क्रियान्वयन पर

भारत में एक नया सूर्योदय हुआ है, लिहाजा महामारी का खौफनाक अंधेरा भी छंटने लगेगा। कोरोना वायरस की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े और व्यापक टीकाकरण का शुभारंभ किया। देशवासियों को स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं और टीके की बधाइयां भी साझा कीं। देश के 3352 केंद्रों

यह पहली बार नहीं हो रहा, बल्कि हिमाचल में स्कूल-कालेज खोलने का फैसला उस आत्मविश्वास  से लबरेज है जो एक हाथ में वैक्सीन की डोज पकड़े है, तो दूसरे में कोरोना से सुधरते आंकड़ों का हिसाब। छुट्टियों के माहौल के बाहर फिर से स्कूल-कालेज में कदम धरने का सबब बनकर हिमाचल मंत्रिमंडल का फैसला आ