विचार

डा. राजेश चौहान लेखक शिमला से हैं सरकार को नई शिक्षा नीति में संगीत विषय को प्रमुखता से शामिल कर प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को उनका अधिकार प्रदान करना चाहिए। आधी-अधूरी नई शिक्षा नीति यदि लागू भी कर दी जाए तो उसके दूरगामी परिणाम अपेक्षा के विपरीत ही आएंगे।

हिमाचल प्रदेश में कोचिंग व एकेडमी का चलन बहुत पहले से जारी है, लेकिन अब वक्त के साथ इनकी जरूरत बढ़ने लगी है। 90 के दशक से इक्का-दुक्का अकादमियों के साथ शुरू हुआ सिलसिला अब सैकड़ों का आंकड़ा पार कर गया है। बड़ी नौकरी की ख्वाहिश लिए बाहर जाने वाले छात्रों के लिए ये अकादमियां

उनकी पेरशानी देख मैं उन्हें लोकल तावीजबाज के पास ले गया। वह हर किस्म के समाज में उपजी सामाजिक परेशानियों के तावीज बनाता है। यही नहीं! आजकल कोरोना तक के तावीज भी बना रहा है। जैसे ही मैं उनको साथ ले तावीजबाज की दुकान में पहुंचा तो मैंने तावीजबाज को बताया, ‘जनाब कंवर साहब मेरे

देश के सवाल लगातार नीचे उतर रहे हैं और आखिर की पंक्ति में खड़े नागरिक से फिर पूछा जा रहा है कि इस हालात के लिए क्यों न उसे ही दोषी मानकर बढ़ते आंकड़ों के पाप धो लिए जाएं। कोरोना लगभग एक साल से सारे देश और नागरिक समाज को सबक दे रहा है, लेकिन

देश की राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन लागू करना पड़ा है। इसके अलावा महाराष्ट्र, उप्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, गुजरात आदि राज्यों में भी लॉकडाउन है अथवा नाइट कफ्र्यू जारी है। शब्दावली भिन्न हो सकती है, लेकिन कोरोना वायरस के बेकाबू संक्रमण के कारण तालाबंदी और घरबंदी ही एकमात्र विकल्प शेष रह गया

कोरोना वायरस नवंबर 2019 में चीन में उत्पन्न हुआ। वहां से यह पूरी दुनिया में फैल कर अब महामारी बन गया है। दुनिया के सभी लोग इसके आगे असहाय हो गए हैं तथा इसने लाखों लोगों की जान ले ली है। यह वायरस रुकने वाला नहीं है। लेकिन चीन में ऐसा क्या हुआ कि वहां

जरूरत इस बात की है कि हम अपने समग्र पर्यावरण की रक्षा करें, जिससे उत्तराखंड में जंगल का जलना, गंगा के पानी का प्रदूषित होना इत्यादि न हो। देश का पर्यावरण स्वच्छ और स्निग्ध हो ताकि देश के अमीर देश में ही रहकर अपनी पूंजी का निवेश देश में ही करने को लालायित हों और

आधार कार्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने अब जायज हैं। सरकारों ने आधार कार्ड प्रत्येक कार्य के लिए पहचान पत्र के तौर पर लगाए जाने को प्राथमिकता दी है। इस तरह आधार कार्ड का दुरुपयोग होने से इस मामले की कड़ी जांच होनी चाहिए। जनता के जान-माल की रक्षा करने वाली पुलिस ने शायद

रेमडेसिविर इंजेक्शन का खूब शोर मचा है। इंजेक्शन को लेकर मारामारी मची है, लिहाजा दवा के सौदागरों ने महामारी की आपदा के दौरान भी जमाखोरी और कालाबाज़ारी जारी रखी है। सरकार का दावा है कि रेमडेसिविर की कमी नहीं है। जमाखोरी और कालाबाज़ारी करने वालों के खिलाफ  रासुका की धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी।