भारत-चीन के रिश्तों का बदलता स्वरूप: बंडारू दत्तात्रेय, राज्यपाल, हि. प्र.

बंडारू दत्तात्रेय, राज्यपाल, हि. प्र. By: बंडारू दत्तात्रेय, राज्यपाल, हि. प्र. Sep 19th, 2020 12:06 am

बंडारू दत्तात्रेय

राज्यपाल, हि. प्र.

इस मामले में एक अन्य पहलू यह है कि हिमाचल की सीमा चीनी कब्जे वाले स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के साथ लगती है और हमें चीनी योजनाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बनने की आवश्यकता है। महामहिम दलाई लामा हिमाचल के धर्मशाला में रहते हैं और निर्वासित तिब्बती सरकार यहां से कार्य करती है। राज्य सरकार ने पहले ही केंद्र से लाहुल-स्पीति और किन्नौर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने को लेकर आग्रह करने की पहल की है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तंत्र की त्वरित तैनाती में सहायता के लिए उचित पग उठाने चाहिए..

भारत और चीन की सीमा रेखा पर पिछले 45 वर्षों में पहली बार सात सितंबर को गोलियां चलीं। यह एक अप्रत्याशित घटना है। इस वर्ष जून में गलवान घाटी के संघर्ष में, जिसमें 20 बहादुर भारतीय सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की थी, मैं उन दिवंगत सेनानियों को शत-शत नमन करता हूं। चीनियों ने सीमा पर कुछ महीने पहले से ही शरारतपूर्ण गतिविधियां शुरू कर दी थी और वास्तविक सीमा रेखा पर मान्यता प्राप्त स्थिति को बदलने की कोशिश की थी। लेकिन चीन यह भी जानता है कि वह एक नए भारत का सामना कर रहा है।

हमारे सैनिकों ने 29-30 अगस्त को कैलाश शृंखला पर कब्जा कर लिया है और हर संभावित घटना से निपटने के लिए तैयार हैं। हाल ही में हमारे रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की चीनी विदेश मंत्री जनरल वेई फेगही से हुई वार्ता और विदेश मंत्रियों, एस. जयशंकर और वांग यी, के बीच हुई बातचीत से स्पष्ट है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन हमने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चीन अब न तो धमकी दे सकता है, न ही गुंडागर्दी कर सकता है। संभवतः यह पहली बार है जब भारत सरकार ने चीन से निपटने में इस ताकत और दृढ़ता का प्रदर्शन किया है जो नए भारत का प्रतीक है। मास्को में हुई भेंट के पश्चात श्री एस जयशंकर और वांग यी द्वारा जारी संयुक्त बयान में उल्लेख किया गया है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने दिया जाए। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्ष चीन-भारत सीमा मामलों पर सभी वर्तमान समझौतों और प्रोटोकाल का पालन करेंगे, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखेंगे और ऐसी कार्रवाई करने से बचेंगे जिससे स्थिति बिगड़ने की आशंका हो। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मामलों के मंत्रियों के मध्य हुई राजनीतिक स्तर की आधिकारिक बातचीत से आपसी विश्वास में बढ़ोतरी हुई है।

यह निश्चित रूप से तनाव को कम करने और समस्या को हल करने में सहायक सिद्ध होगा। हमें दो राष्ट्रों के बीच अधिक विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें वैश्विक हित समाहित है। विश्व जनसंख्या में भारत और चीन का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व जनसंख्या में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी एशिया की है। इस क्षेत्र में दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच किसी भी प्रकार का सशस्त्र संघर्ष पूरी दुनिया को विपत्ति में डाल देगा, इसलिए किसी भी कीमत पर इससे बचा जाना चाहिए। लेकिन दुनिया को यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत वर्ष 1962 का भारत नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सक्षम और दृढ़ नेतृत्व में एक युवा, प्रगतिशील और प्रबल भारत है। चीन के साथ हमारे हजारों साल पुराने संबंध हैं। बौद्ध धर्म पहली शताब्दी में भारत से चीन पहुंचा। वर्तमान में दो पड़ोसियों के बीच मजबूत धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बिगड़ने का कारण साम्यवादी चीन की विस्तारवादी नीतियां हैं।

आज चीन न केवल भारत पर सैन्य दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, अपितु भारत के विरुद्ध एक गुप्त प्रौद्योगिकी युद्ध में भी संलिप्त है, जैसा कि हालिया समाचारों से संकेत मिलता है। इसके अलावा पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका के साथ चीन के कम्युनिस्ट शासन द्वारा स्थापित गठबंधन इस बात का प्रमाण है कि चीन उभरते भारत की ताकत से अवगत है और वह इसे दबाना चाहता है। चीन के वुहान में शुरू हुई कोरोना महामारी ने विश्व अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। वर्ष 2020 को अनुत्पादक वर्ष के रूप में देखा जा रहा है और जानकारी छुपाने और विश्व को एक संकट में झोंकने को मजबूर करने के लिए चीन पर विश्व भर के नेता दबाव बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय सीमा पर चीन द्वारा उत्पन्न स्थिति न केवल कोविड-19 में अपनी भूमिका से दुनिया के नेताओं का ध्यान हटाने के लिए है, बल्कि अपने देश के में पैदा हो रहे गतिरोधों को नियंत्रित करने का प्रयास है जो एकल-पार्टी-निरंकुशता द्वारा पोषित निर्मम नीतियों का परिणाम है। इस मामले में एक अन्य पहलू यह है कि हिमाचल की सीमा चीनी कब्जे वाले स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के साथ लगती है और हमें चीनी योजनाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बनने की आवश्यकता है।

महामहिम दलाई लामा हिमाचल के धर्मशाला में रहते हैं और निर्वासित तिब्बती सरकार यहां से कार्य करती है। राज्य सरकार ने पहले ही केंद्र से लाहुल-स्पीति और किन्नौर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने को लेकर आग्रह करने की पहल की है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तंत्र की त्वरित तैनाती में सहायता के लिए सभी मौजूदा आधारभूत संरचनाओं की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में, मैंने सीमावर्ती गांवों की स्थिति का जायजा लिया, और पुलिस अधीक्षकों को इन क्षेत्रों का नियमित दौरा करने के निर्देश दिए। मैंने केंद्रीय मंत्रियों को इन क्षेत्रों में बड़े आधारभूत संरचनाओं और विकास परियोजनाओं को शुरू करने के लिए भी लिखा है ताकि हम बेहतर तरीके से तैयारी रख सकें। सवाल यह भी है कि चीन से कैसे निपटा जाए? मेरा मानना है कि ‘भय बिन होय न प्रीत’ (बिना डर के प्यार नहीं होता)। चीन के मामले में यह सत्य है। मेरा विश्वास है कि चीन का मुकाबला करने का एकमात्र तरीका उसे उसी की भाषा में जवाब देना है।

यह केवल एकमात्र राष्ट्रीय पहचान के तहत खुद को संगठित करने से संभव है। स्वाभिमानी भारतीय बनो। भारत और चीन की स्थिति को अक्सर हाथी बनाम ड्रैगन के समरूप में देखा जाता है। हाथी जमीन का सबसे बड़ा और ताकतवर प्राणी है जो सब उल्ट-पुल्ट करने में सक्षम है, फिर भी शांत रहता है। जबकि ड्रैगन एक क्रूर जानवर है, यह उड़ सकता है, इसे जलाया नहीं जा सकता है और यह आग उगलता है, परंतु हमें याद रखना चाहिए कि वास्तव में ड्रैगन का कोई अस्तित्व नहीं है, यह एक कल्पना भर है।

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