अतिरिक्त कर्ज के लिए केंद्र की शर्तें: संजय शर्मा, लेखक शिमला से हैं

संजय शर्मा, लेखक शिमला से हैं By: संजय शर्मा, लेखक शिमला से हैं Oct 29th, 2020 12:07 am

जिला स्तरीय सेवाओं के अतिरिक्त केंद्र सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि उद्यमी को पहले से ली गई अनुमतियों को बार-बार पुनर्नवीनीकरण की असुविधा से छुटकारा दिलाया जाए, इस प्रणाली को एक हद तक कम से कम मुश्किल, पारदर्शी, ऑनलाइन तथा जहां तक हो सके नाममात्र की ऑनलाइन फीस लेकर ‘डीम्ड’  (स्वतः) कर दिया जाए। सुधारों की इस श्रेणी में तीसरा सुधार विभागों से संबंधित  एक ऐसी कम्प्यूटर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित करना है, जहां विभागों के आवश्यक निरीक्षणों के बारे में कम्प्यूटर स्वतः अलर्ट जारी करे। इंस्पेक्टरी राज खत्म करने में यह प्रणाली कारगर सिद्ध हो सकती है। कहां कौन सा अधिकारी,  किस उद्योग व प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेगा, यह कम्प्यूटर निर्धारित करेगा…

आज सारी विश्व की अर्थव्यस्थाएं कोविड से हुए संसाधनों के नुकसान की भरपाई में लगी हैं। हमारा देश भी इससे अछूता नहीं है। राज्य सरकारों को आवश्यकता है अतिरिक्त साधनों की, ताकि वे कोविड से मुकाबला करें व जनता को दी जाने वाली ‘‘सेवा वितरण व्यवस्था’’ को स्तरीय बनाए रख सकें।

राज्यों के हाथों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने राज्यों को अपने राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) का 2 फीसदी तक अतिरिक्त ऋण लेने की छूट प्रदान करने का निर्णय लिया है। सामान्य परिस्थितियों में सभी राज्य अपने जी.एस.डी.पी. का 3 फीसदी तक ही ऋण ले सकते हैं। सब राज्यों के लिए यह अतिरिक्त ऋण लगभग 4,27,300 करोड़ तक बनता है। यदि हिमाचल की बात करें तो यह राशि 876 करोड़ बनती है।

परंतु यह ऋण राज्य सरकारों को आसानी से नहीं मिल सकता, क्योंकि केंद्र सरकार का यह मानना है कि भविष्य में कोविड के पश्चात ‘‘समावेषी विकास’’ सरकारों का मुख्य एजेंडा रहेगा। अतः यह शर्त लगाई गई है कि यह अतिरिक्त 2 फीसदी ऋण प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों को पहले ये 4 सुधार लागू करने पडें़गे ः-एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड व्यवस्था लागू करना, व्यापार में सुगमता सुधार, शहरी स्थानीय निकाय सुधार व बिजली क्षेत्र के सुधार,  तभी वे यह ऋण सुविधा प्राप्त करने के पात्र बन सकेंगे। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन सुधारों को लागू करने से राज्यों की जी.एस.डी.पी. में सुधार होगा।

हर सुधार की वेटेज 0.25 फीसदी है जो कुल मिलाकर 1 फीसदी बनेगी। शेष 1 फीसदी ऋण सीमा को 0.50 फीसदी की 2 किस्तों में दिया जाएगा, पहली अनटाइड ऋण के रूप में शुरू में व दूसरी 4 में से 3 सुधारों को लागू करने पर मिलेगी। ‘‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’’ व्यवस्था यदि सारे देश में लागू होती है तो ‘‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून’’ के लाभार्थियों, विशेषकर ‘‘माइग्रेन्ट श्रमिकों’’ को विशेष लाभ होगा। ये श्रमिक पूरे देश में जहां भी काम करें, ‘‘सस्ते राशन की दुकानो’’ से राशन प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बोगस कार्डधारी व अपात्र व्यक्ति बाहर हो जाएंगे।

यह सारी व्यवस्था आधार कार्ड सीडिग से सम्भव हो सकेगी। हिमाचल में यह सुधार लागू हो गया है। हिमाचल ने इस बार ‘‘व्यापार में सुगमता’’  के क्षेत्र में पहले ही सराहनीय 9 अंकों की उपलब्धि प्राप्त कर 7वां स्थान पाया है । 0.25 फीसदी स्कोर प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र में राज्य सरकार को तीन बिंदुओं पर कार्य करना है-1. जिला स्तरीय व्यापार सुगमता सुधार, जिसके अंतर्गत 46 सेवाएं, जो जिला स्तर पर दी जाती हैं, उन सबको आनलाइन करना है, इन सेवाओं से संबंधित सभी जानकारियां वेबसाइट पर उपलब्ध करवानी हैं ताकि उद्यमी घर बैठ कर स्वीकृतियां प्राप्त कर सकें। वर्तमान में 11 सेवाएं ऑनलाइन हैं व उद्योग विभाग नोडल विभाग के रूप में सभी संबंधित विभागों से सामंजस्य बनाकर शेष अन्य पर द्रुतगति से कार्य कर रहा है, जो कि शीघ्र पूरा होने वाला है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एन.आई.सी), सूचना प्रौद्योगिकी विभाग व उद्योग विभाग द्वारा रखे गए  ‘‘अर्नस्ट एण्ड यंग’’ परामर्शदाता कम्पनी के सलाहकार इस कार्य पर लगे हैं।

जिला स्तरीय सेवाओं के अतिरिक्त केंद्र सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि उद्यमी को पहले से ली गई अनुमतियों को बार-बार पुनर्नवीनीकरण की असुविधा से छुटकारा दिलाया जाए, इस प्रणाली को एक हद तक कम से कम मुश्किल, पारदर्शी, ऑनलाइन तथा जहां तक हो सके नाममात्र की ऑनलाइन फीस लेकर ‘डीम्ड’  (स्वतः) कर दिया जाए। सुधारों की इस श्रेणी में तीसरा सुधार विभागों से संबंधित  एक ऐसी कम्प्यूटर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित करना है, जहां विभागों के आवश्यक निरीक्षणों के बारे में कम्प्यूटर स्वतः अलर्ट जारी करे। इंस्पैक्टर राज खत्म करने में यह प्रणाली कारगर सिद्ध हो सकती है, कहां कौन सा अधिकारी,  किस उद्योग व प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेगा, यह कम्प्यूटर निर्धारित करेगा।

इससे मानवीय दखल व उद्यमी को उससे होने वाली ‘परेशानी’ काफी हद तक खत्म हो जाएगी। प्रदेश सरकार निश्चित समयावधि, जो कि 31 दिसंबर है, उससे पहले ही यह तीनों चीजें पूरी कर लेगी, ऐसी संभावना है। जनता को बेहतर स्वास्थ्य व सफाई संबंधी सुविधाएं तथा इसके लिए एक सशक्त आधारभूत ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से शहरी स्थानीय निकायों (यू.एल.बी.) को मज़बूत करना, तीसरे सुधार की श्रेणी में आता है। इसके अंतर्गत सभी यू.एल.बी. संपति कर की ‘‘फ्लोर दरें’’ अधिसूचित करेगी जो कि वर्तमान सर्कल रेट से मेल खाती हो। प्रदेश सरकार इस पर भी कार्य कर रही है, क्योंकि यह जरा टेढ़ा मसला लगता है।

बिजली संबंधी सुधारों में बिजली वितरण कम्पनियों (डिस्काम) की तरलता संबंधी समस्याओं को दूर करने, बिजली की चोरी रोकने, बिजली वितरण की कीमत व उससे प्राप्त राजस्व के अंतर को घटाना आदि शामिल है। हिमाचल बिजली बोर्ड व अन्य संबंधित एजेंसियां इन सुधारों को पूरा करने में लगी हैं। निश्चय ही यह स्पष्ट है कि राज्यों को इस अतिरिक्त 2 फीसदी ऋण प्राप्त करने के लिए इन चार सेक्टर में बताए गए सुधारों को लागू करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। हिमाचल आशान्वित है कि वह इन निर्दिष्ट 4 सुधारों को लागू करने में सफल हो सकेगा। अगर वह सफल हो जाता है तो वह विकास गतिविधियों के लिए पर्याप्त ऋण लेने के लिए क्षमतावान बन जाएगा।

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