देविका ने की चंबा की दूरी कम: प्रो. सुरेश शर्मा, लेखक नगरोटा बगवां से हैं

प्रो. सुरेश शर्मा ,लेखक नगरोटा बगवां से हैं By: प्रो. सुरेश शर्मा, लेखक नगरोटा बगवां से हैं Oct 13th, 2020 12:06 am

प्रो. सुरेश शर्मा

लेखक नगरोटा बगवां से हैं

प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देविका को देवभूमि हिमाचल की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए संदेश भेजा है : ‘केरल की बेटी देविका ने अपनी सुरीली आवाज में प्रसिद्ध हिमाचली गीत ‘चंबा कितनी की दूर’ गाकर हिमाचल की शान बढ़ाई है, इसलिए बेटी, आपको बहुत बधाई। एक भारत-श्रेष्ठ भारत के तहत आपने यह गाना गाकर देवभूमि हिमाचल की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ पूरे प्रदेश का दिल जीता है। आपकी आवाज में एक जादू है। मैं देवभूमि हिमाचल से प्रार्थना करता हूं कि आपकी सुरीली आवाज को विश्व भर में नई पहचान मिले।’…

हिमाचल प्रदेश में आजकल भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक दूरियां कम हो रही हैं। जहां पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अटल टनल के उद्घाटन से कुल्लू एवं लाहुल-स्पीति की भौगोलिक दूरियां कम हुई हैं, वहीं पर केरल की नौवीं कक्षा की छात्रा देविका ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जनपद का प्रसिद्ध लोकगीत ‘चंबा कितनी की दूर’ गाकर सांस्कृतिक एवं भावनात्मक दूरियां कम कर राष्ट्रीय एकता की मिसाल प्रस्तुत की है। विश्व में भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं अनेकता में एकता किसी से छुपी हुई नहीं है। भारतवर्ष सांस्कृतिक दृष्टि से एक समृद्ध एवं संपन्न देश है। सांस्कृतिक विविधता होते हुए भी हमारी शिक्षा व दार्शनिक मानवीय संस्कृति ने इसे एक सूत्र में पिरो कर रखा हुआ है। उल्लेखनीय है कि आजकल सोशल मीडिया पर हिमाचली लोकगीत के वायरल वीडियो में केरल के पट्टम केंद्रीय विद्यालय में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली देविका ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अभियान के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध लोकगीत ‘चंबा कितनी की दूर’ गाकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। देश की सांस्कृतिक एकता को लोकगीत के माध्यम से प्रदेश की चंबयाली बोली में निबद्ध मां और बेटी के मार्मिक संवाद तथा दुर्गम पहाड़ों के जीवन की कठिनाइयों के भावों को आत्मीयता एवं बड़ी ही संजीदगी से व्यक्त करते हुए देविका ने बहुत ही खूबी से इस महान लोकगीत को गाया है जिसकी चारों ओर प्रशंसा हो रही है।

देविका के इस मार्मिक लोकगीत की प्रस्तुति से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशंसा करते हुए बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘मुझे देविका पर गर्व है, उनके मधुर गायन से एक भारत बेहतरीन भारत का सार मजबूत होता है।’ प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने देविका को देवभूमि हिमाचल की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए संदेश भेजा है : ‘केरल की बेटी देविका ने अपनी सुरीली आवाज में प्रसिद्ध हिमाचली गीत ‘चंबा कितनी की दूर’ गाकर हिमाचल की शान बढ़ाई है, इसलिए बेटी, आपको बहुत बधाई। एक भारत-श्रेष्ठ भारत के तहत आपने यह गाना गाकर देवभूमि हिमाचल की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ पूरे प्रदेश का दिल जीता है। आपकी आवाज में एक जादू है। मैं देवभूमि हिमाचल से प्रार्थना करता हूं कि आपकी सुरीली आवाज को विश्व भर में नई पहचान मिले। मैं बेटी देविका को प्रदेश में आने का निमंत्रण देता हूं। बेटी, आप हिमाचल अवश्य आएं और यहां की संस्कृति को करीब से जानें।’ बहरहाल इस गाने के गायकों की श्रेणी में बॉलीवुड गायक मोहित चौहान, नेहा कक्कड़, सोनू कक्कड़, सत्येंद्र सरताज, हर्षदीप कौर के साथ-साथ केरल की देविका ने भी इस महान लोकगीत को अपना स्वर देकर गौरवान्वित किया है। देविका युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन कर सांस्कृतिक राजदूत बन गई हैं।

एक भारत-श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत ही यूट्यूब पर केवी नंबर-एक सीपीसीआरआई कसरगू, केरल की छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी बहुत ही मनमोहक एवं शानदार है जिसमें इन छात्राओं ने ‘करी लेणी, करी लेणी पहाड़ा दी सैर’, ‘ओ दिल्लिये, म्हारे पहाड़ा दा दिल शिमला’ तथा ‘चंबा वार की नदिया पार’ तीन समूह लोकगीत गाकर पहाड़ की छटा एवं सुगंध को केरल प्रदेश के समुद्री तट पर बिखेरने की सुंदर कोशिश की है। इसी वर्ष फरवरी-मार्च में केरल से ही धर्मशाला में स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश पहुंचे छात्र-छात्राओं ने भी हिमाचल की संस्कृति को जानने एवं समझने की कोशिश की थी, परंतु इसी दौरान कोविड-19 के चलते इस अभियान में व्यवधान सा पड़ गया था। देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत सन् 2015 से राष्ट्रीय एकता को बल देने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है जिसमें कि हिमाचल के साथ केरल को युग्म राज्य बनाया गया है।

इसके अंतर्गत कला उत्सव के आयोजन से संगीत, नाटक, नृत्य, दृश्य एवं श्रव्य तथा शिल्प कला के माध्यम से कला व शिक्षा में समन्वय, रचनात्मकता समस्या-समाधान, कल्पना शक्ति के विकास, संवेदनशीलता, सौंदर्य बोध, रचनात्मकता-सृजनात्मकता तथा संवेगात्मकता के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है जो कि निश्चित रूप से नई पीढ़ी को अपनी भारतीय संस्कृति से परिचित करवाने का एक सराहनीय प्रयास है। संस्कृति किसी भी समाज, प्रांत तथा देश में व्याप्त आंतरिक गुणों एवं मूल्यों के समग्र रूप का नाम है जो उस समाज की सोचने-समझने एवं विचारने, कार्य करने, खाने-पीने, पहनने, बोलने, गायन, वादन नृत्य शैलियों, साहित्य, कला एवं वास्तुकला आदि में परिलक्षित होती है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत परंपरागत कलाओं, कलाकारों तथा वर्तमान में नई भौतिकवादी संस्कृति में पोषित तथा सांस ले रहे युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए अपनी भारतीय समृद्ध एवं महान संस्कृति को जानने, पहचानने-परखने, सीखने तथा मनोरंजन के साथ-साथ सृजनात्मकता, रचनात्मकता एवं कलात्मकता को अनुभव करने का एक सुनहरी अवसर है।

मानवीय संवेगों, संवेदनाओं, भावनाओं, अनुभूतियों तथा गुणों के विकास के लिए शिक्षा में विभिन्न कलाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है। जीवन एक जीने की कला है। यह तब तक हमारे व्यक्तित्व में प्रतिबिंबित नहीं हो सकती जब तक कि जीवन में कलात्मकता का प्रभाव न हो। इन समग्र कलाओं का उत्सव ही जीवन का उत्सव है।

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