क्यों बेहतर है बांग्लादेश की आर्थिकी: डा. वरिंदर भाटिया, कालेज प्रिंसिपल

डा. वरिंदर भाटिया By: डा. वरिंदर भाटिया, कालेज प्रिंसिपल Oct 28th, 2020 12:07 am

डा. वरिंदर भाटिया

कालेज प्रिंसिपल

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के फलने-फूलने के कई कारण हैं। पहली बात है कि बांग्लादेश अभी विकासशील देशों की लिस्ट में है। मतलब अभी विकास की गुंजाइश बची है। दूसरी बात बांग्लादेश में भारत जैसे मतभेद नहीं हैं। भारत में केंद्र सरकार एक बात कहती है तो कई राज्य सरकारें इसका विरोध करती हैं। बांग्लादेश में प्रधानमंत्री ने जो बोल दिया, वह सब मानते हैं। राजनीतिक विरोध वहां भी होते हैं, लेकिन डोमिसाइल, जाति, भाषा, राज्य के आधार पर वहां विभाजन भारत जैसा नहीं है। तीसरी बात वहां महिलाओं का सशक्तिकरण भी तेजी से हो रहा है। बांग्लादेश की सियासत में शेख हसीना और खालिदा जिया का प्रभुत्व रहा है। कपड़ा उद्योग में भी महिलाओं की भागीदारी है…

आजकल अपने देश में पड़ोसी बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर चर्चा का विषय बनी  हुई है। आईएमएफ का अनुमान यह भी है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी में आने वाले दिनों में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ कर आगे निकल जाएगा। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक प्रति व्यक्ति जीडीपी में बांग्लादेश भारत को 2021 में पीछे छोड़ देगा। उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देश इतना अच्छा कर रहे हैं, ये अच्छी खबर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की जीडीपी का अनुमान माइनस 10.3 प्रतिशत लगाया है, वहीं बांग्लादेश के लिए ये अनुमान 3.8 प्रतिशत का है। भारतीय मीडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर छपी कि भारत की जनसंख्या बांग्लादेश के मुकाबले 8 गुना बड़ी है। दूसरी बात ये कि 2019 में भारत की पर्चेजिंग पावर पैरिटी यानी खरीदने की क्षमता 11 गुना अधिक थी। मतलब ये कि बांग्लादेश के ये आंकड़े ‘अस्थायी’ बात है, इससे भारत को घबराने की जरूरत नहीं है। आम आदमी की समझ के लिए प्रति व्यक्ति जीडीपी यह बताती है कि किसी देश में प्रति व्यक्ति के हिसाब से आर्थिक उत्पादन कितना है। इसकी गणना किसी देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को उस देश की कुल जनसंख्या का भाग देकर निकाला जाता है। कोरोना की वजह से पहली तिमाही के दौरान दक्षिण एशियाई देशों में भारत की जीडीपी सबसे ज्यादा प्रभावित थी। ये माइनस 23.9 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जबकि बांग्लादेश और चीन की जीडीपी में गिरावट भारत के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन भारत में जिस स्तर का लॉकडाउन लगाया गया था, वैसा दूसरे देशों में नहीं था।

बांग्लादेश के बेहतर विकास के कई कारण हैं। बांग्लादेश की जनसंख्या तकरीबन 17 करोड़ के आसपास है। वहां की अर्थव्यवस्था में दो बातों का सबसे बड़ा योगदान है। पहला कपड़ा उद्योग और दूसरा विदेशों में काम करने वाले लोगों का भेजा पैसा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बांग्लादेश तेजी से प्रगति कर रहा है। कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है। 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले करीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है। विदेशों से ये जो पैसे कमाकर भेजते हैं, उनमें सालाना 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2019 में ये राशि 19 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

बांग्लादेश में कोरोना का पहला मामला 8 मार्च 2020 को आया। 23 मार्च 2020 को वहां की सरकार ने ऐलान किया कि 26 मार्च से 30 मई तक सरकारी छुट्टी रहेगी। बैंक कम समय के लिए ही सही, वहां काम कर रहे थे। 8 अप्रैल को रोहिंग्या कैम्प में भी सरकारी पाबंदियां लगा दी गई थीं। 31 मई से बांग्लादेश में ज्यादातर चीजें खुल गई थीं, जबकि भारत में जनवरी के अंत में कोरोना का पहला मामला सामने आया था। 24 मार्च 2020 से पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया। उससे पहले ही कई राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर दूसरी पाबंदियां लगानी शुरू कर दी थी। पहली बार लॉकडाउन के दौरान 15 अप्रैल 2020 से कुछ इलाकों में आर्थिक गतिविधियों की छूट दी गई। वहीं 30 सितंबर तक कई चीजों पर कोरोना महामारी की वजह से कुछ न कुछ पाबंदियां लगी ही रही। आईएमएफ के मुताबिक बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कोरोना के दौर में दो वजहों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। पहला है रेमिटेंस (विदेशों में काम करने वाले देश में जो पैसा भेजते हैं) में कमी। रेमिटेंस का पैसा उनके देश की कुल जीडीपी का 5 प्रतिशत हिस्सा है। दूसरी वजह है उनके रेडीमेड कपड़ों के निर्यात में कमी। रेडीमेड कपड़ों का निर्यात बांग्लादेश के कुल निर्यात का 80 फीसदी है। इसके अलावा बारिश और बाढ़ ने भी कृषि को वहां काफी नुकसान पहुंचाया है। वहीं भारत के लिए आईएमएफ ने जीडीपी में भारी गिरावट की वजह कोरोना महामारी और देशभर में लगे लॉकडाउन को बताया है।

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के फलने-फूलने के कई कारण हैं। पहली बात है कि बांग्लादेश अभी विकासशील देशों की लिस्ट में है। मतलब अभी विकास की गुंजाइश बची है। दूसरी बात बांग्लादेश में भारत जैसे मतभेद नहीं हैं। भारत में केंद्र सरकार एक बात कहती है तो कई राज्य सरकारें इसका विरोध करती हैं। बांग्लादेश में प्रधानमंत्री ने जो बोल दिया, वह सब मानते हैं। राजनीतिक विरोध वहां भी होते हैं, लेकिन डोमिसाइल, जाति, भाषा, राज्य के आधार पर वहां विभाजन भारत जैसा नहीं है। तीसरी बात वहां महिलाओं का सशक्तिकरण भी तेजी से हो रहा है। बांग्लादेश की सियासत में दो महिलाओं शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का प्रभुत्व रहा है। कपड़ा उद्योग में भी महिलाओं की भागीदारी खूब है। समाज में महिलाएं जब आगे रहती हैं तो समाज में प्रगति बेहतर होती है। चौथी बात जो बांग्लादेश के पक्ष में है, वह है उनकी मार्केट वैल्यू। दुनिया भर में मेड इन बांग्लादेश कपड़ों की अलग और अच्छी पहचान है। इसके लिए बांग्लादेश सरकार के गवर्नेंस सिस्टम को श्रेय दिया जाना चाहिए। बांग्लादेश सरकार का शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन पर खर्च काफी बेहतर है। किसी भी देश की जीडीपी इस बात पर निर्भर करती है कि लोगों और सरकार के पास पैसा खर्च करने के लिए कितना है।

वहां की सरकार ने अलग-अलग योजनाएं चला कर पानी, बिजली, ग्रामीण इलाकों में बैंक, इन सब व्यवस्थाओं पर कितना ध्यान दिया है। बांग्लादेश की जीडीपी ग्रोथ इसलिए बेहतर है क्योंकि बांग्लादेश की सरकार ने अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सीढ़ी के रास्ते ऊपर चढ़ने की कोशिश की है, न कि अन्य देशों की तरह लिफ्ट का रास्ता चुना है। लिफ्ट में तकनीकी खराबी से आप एक जगह रुक सकते हैं, लेकिन सीढ़ी हो तो उतरना-चढ़ना ज्यादा आसान होता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले छोटी है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था फिलहाल 250 बिलियन अमरीकी डॉलर के आसपास की है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था तकरीबन 2.7 ट्रिलियन डॉलर की है। यूं भी भारत की आर्थिक गिरावट अस्थायी है। थोड़े समय बाद इसमें सुधार देखने को मिलने की उम्मीद है। कुल मिला कर इस समय अपने देश को आक्रामक राजकोषीय और मौद्रिक नीति की जरूरत है।

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