शुगर कम करेगी नशा छुड़वाने की दवा, अफीम नशामुक्ति में उपयोगी मेडिसिन से दुष्परिणाम होंगे कम

By: कार्यालय संवाददाता — मंडी Nov 3rd, 2020 12:06 am

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने उस प्रक्रिया का खुलासा किया है, जिससे शरीर में इंसुलिन की अधिकता से इंसुलिन प्रतिरोध पैदा होता है, जिसका डायबिटीज से संबंध है। उन्होंने यह देखा कि अफीम के नशे के इलाज में उपयोगी दवा से इस प्रक्रिया में सुधार करना मुमकिन है। विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) के अनुदान से वित्त पोषित इस अनुसंधान के परिणाम हाल में जर्नल ऑफ  बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुए हैं। इस शोध पत्र के प्रमुख वैज्ञानिक डा. प्रोसनजीत मोंडल एसोसिएट प्रोफेसर स्कूल ऑफ  बेसिक साइंसेज और अध्ययन के सह-परीक्षण शोध विद्वान हैं।

 आईआईटी मंडी के अभिनव चैबे और ख्याति गिरधर सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ के डा. देवव्रतघोष, आदित्य और शैव्य कुशवाहा, एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत, हरियाणा के डा. मनोज कुमार यादव भी शोध में शामिल हैं। इसमें उन्होंने बताया है कि  इंसुलिन पैनक्रियाज में बनने वाला हार्मोन हैं, जो इसका इस्तेमाल कोशिकाएं खून से ग्लूकोज ग्रहण करने में करती हैं। कई कारणों से कोशिकाएं इंसुलिन इस्तेमाल करने की क्षमता खो देती हैं, तो टाइप-2 डायबिटीज होता है। इंसुलिन प्रतिरोध का संबंध हाइपरइनसुलिनेमिया नामक समस्या से है, जिसमें रक्तप्रवाह में जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बना रहता है। डा. मोंडल ने बताया जिन्हें भरोसा है कि यह टाइप-2 डायबिटीज के उपाचार का व्यावहारिक रास्ता हो सकता है। नाल्ट्रेक्सोन पहले से एफडीए से मंजूर दवा है, जिसका उपयोग अफीम की लत के उपचार में किया जाता है और अब इसका उपयोग एक अन्य उद्देश्य शरीर में सूजन और डायबिटीज़ की रोकथाम के लिए किया जा सकता है।

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