हर इम्तिहान में पास कांगड़ा के कोचिंग सेंटर

By: पवन शर्मा, नरेन कुमार Dec 2nd, 2020 12:10 am

हिमाचल प्रदेश में कोचिंग व एकेडमी का चलन बहुत पहले से है, लेकिन अब वक्त के साथ इनकी जरूरत बढ़ने लगी है। 90 के दशक से इक्का-दुक्का अकादमियों के साथ शुरू हुआ सिलसिला अब सैकड़ों का आंकड़ा पार कर गया है। बड़ी नौकरी की ख्वाहिश लिए बाहर जाने वाले छात्रों के लिए ये अकादमियां कहीं न कहीं उनके लिए घर में तैयारी कर एचएएस-आईएएस-डाक्टर-इंजीनियर बनने की उम्मीद दे रही हैं। देवभूमि के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में क्या है कोचिंग सेंटर्स का हाल, किन विषयों में दाखिले के लिए है सबसे ज्यादा मारामारी…                                                           बता रहे हैं पवन शर्मा और नरेन कुमार

हिमाचल के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में अकादमियों के इतिहास के बारे में बात की जाए, तो 90 के दशक यानी 1990 के बाद से ही धर्मशाला में कोचिंग सेंटर एकेडमी की नींव रख दी गई थी। सबसे पहले धर्मशाला में मॉडर्न साइंस एकेडमी शुरू की गई थी, जिसमें साइंस, फिजिक्स, मैथ्स सहित अन्य सभी विषय पढ़ाए जाते था। उसके बाद जिला के मुख्यालय धर्मशाला में आरसीसी व 2000 पहुंचते तक साइंस-कॉमर्स एकेडमी एससीए का भी आगाज हुआ।

इसके बाद वर्ष 2000 के बाद धीरे-धीरे धर्मशाला में निजी स्कूलों का भी अधिक चलन बढ़ा, तो वहीं इसके बाद कांगड़ा के अन्य क्षेत्रों में भी ट्यूशन सेंटर शुरू होने लगे। ट्यूशन सेंटर के बाद नौकरी प्राप्त करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं सहित प्रवेश परीक्षाओं के लिए कंपीटीशन का दौर बढ़ा, तो फिर कोचिंग सेंटर और अकादमियां खुलने का भी सिलसिला पूरे कांगड़ा में शुरू हो गया। बावजूद इसके वर्ष 2010 से पहले-पहले नाममात्र की अकादमियां ही जिला कांगड़ा सहित मुख्यालय में नज़र आती थी। वर्ष 2011 के बाद खासकर पांच वर्ष पहले  एकदम से अकादमियों की बाढ़ ने जिला कांगड़ा व मुख्यालय धर्मशाला में दस्तक दे दी। इससे पहले प्रतियोगी परीक्षाओं व प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग के लिए बाहरी राज्यों में जाने का चलन रहा, लेकिन अब बाहरी राज्यों की तर्ज पर पिछले चार से पांच वर्षों में कांगड़ा में ही हर प्रकार के अध्ययन व कोचिंग करने का अवसर छात्रों को मिल पा रहा है। ऐसे में आज के समय में जिला कांगड़ा में 111 के करीब विभिन्न कोचिंग सेंटर्स-अकादमियां चलाई जा रही हैं। ऐसे में लगातार मशरूम की तरह बढ़ते हुए ग्राफ ने कांगड़ा खासकर धर्मशाला को प्रदेश का सबसे बड़ा एजुकेशन हब बना दिया है।

चंडीगढ़-कोटा की दौड़ हुई कम

आईएएस, एचएएस, अलाइड, नीट, बैंकिंग,  सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अकसर पहाड़ के छात्रों को कोचिंग लेने के लिए चंडीगढ़ सरीखे बड़े शहरों को दौड़ लगानी पड़ती थी। बड़े शहर में रहना, खाना और पढ़ना अच्छे घरों से संबंध रखने वालों के लिए तो आसान था, लेकिन आम आदमी के लिए अपने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए चाह कर भी ऐसे शहरों में भेजना और पढ़ा पाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पहाड़ पर अच्छे एवं नामी कोचिंग सेंटर्स के खुलने से यहां के युवाओं को बड़ी राहत मिली है। यहां तैयारी कर सैकड़ों ही युवक व युवतियां, डाक्टर, इंजीनियर, पुलिस सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होकर सेवाएं दे रहे हैं।

यही वजह है कि अब पहाड़ के बच्चों का यहां के शैक्षणिक संस्थानों मेें विश्वास बढ़ रहा है। यहां के मेहनती व होनहार शिक्षक अपनी सेवाओं से यहां के नौनिहालों को तराश रहे हैं। एक-दो कोचिंग सेंटर्स से हुई शुरुआत अब दर्जनों में पहुंच गई है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ी आयु तक के युवाओं को यहां के शांत वातावरण में कोचिंग दी जा रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद अब धर्मशाला शोध का भी बड़ा केंद्र बनकर उभरने लगा है। साथ लगते चंबा जिला के छात्र भी बड़ी संख्या में यहां पढ़ने व कोचिंग लेने के लिए हर साल आते हैं। धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रदेश विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र, पीजी कोलेज, बीएड कालेज, डाइट संस्थान सहित कई बड़े एवं उच्च शिक्षा के केंद्र हैं।

जहां प्रदेश भर के युवा पढ़ने आते हैं। साथ ही अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयारी शुरू कर भविष्य संवार रहे हैं। इसका सबसे अधिक लाभ युवतियों और मध्यम व आम परिवार से संबंध रखने वाले छात्रों को हुआ है। यह वर्ग अकसर चंडीगढ़ सरीखे शहरों में जाकर महंगी पढ़ाई करने से वंचित रह जाते थे, लेकिन पहाड़ में यह सुविधा मिलने के बाद इन्हें बड़ी राहत मिली है।

बेहतर रिजल्ट दे रहीं अकादमियां

जिला कांगड़ा में करीब सौ अकादमियां हैं। अब जिला में चलने वाली अकादमियां बेहतर रिजल्ट देकर प्रदेश सहित देश भर में अपना नाम रोशन कर रही हैं। चाहे बात डाक्टर बनने की हो, आर्मी ऑफिसर, एचएएस, आईएएस बनने की या इंजीनियर, बैंकर सहित विभिन्न केंद्र व प्रदेश के विभिन्न विभागों में प्रतियोगी परीक्षाओं में धाक जमाने की, यहां की अकादमियां बेहतर रिजल्ट दे रही हैं। इससे अब छात्रों को बाहरी राज्यों में जाकर भारी भरकम फीस खर्च करने सहित रहने-खाने के लिए भी लाखों रुपए खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हिमाचल प्रदेश सहित जिला कांगड़ा व मुख्यालय धर्मशाला शिक्षा के क्षेत्र में अब नए आयाम स्थापित कर रहा है।

सबसे ज्यादा डिमांड में ये कोर्स

टाइप-1ः हिमाचल सहित कांगड़ा के मौजूदा हालात की बात करें, तो यहां भी मुख्य रूप से तीन प्रकार के अध्ययन की सबसे अधिक डिमांड है, जिसके आधार पर ही कोचिंग सेंटर, ट्यूशन व विभिन्न संस्थान दौड़ रहे हैं, जिसमें सबसे पहले विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं द्वारा जॉब प्राप्त करने वाले अध्ययन नंबर एक पर शामिल हैं। जॉब प्राप्त करने के लिए करवाए जाने वाले अध्ययन, जिसमें आईएएस, एचएएस, अलाइड, पुलिस भर्ती, बैंक कलेरिकल, बैंक पीओ, आर्मी, पटवारी भर्ती, एसएससी, हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की सभी पद, एचपीएसएसबी के पदों के लिए, कमीशन पदों सहित प्रदेश सहित केंद्र के अन्य विभागों में समय-समय पर निकलने वाले पदों के लिए अधिक छात्रों का रूझान कोचिंग व एकेडमी में अध्ययन करने की ओर दिखता है।

एंट्रेंस एग्जाम पास करने की होड़

टाइप-2ः आज के दौर में इसके अलावा एंट्रेंस एग्जाम पास करने को लेकर छात्रों में सबसे अधिक क्रेज देखने को मिलता है। अभिभावकों सहित छात्र अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए बेस्ट संस्थान में अपना अध्ययन कर अपने करियर को उड़ान देना चाहते हैं। इसके चलते ही डाक्टर बनने के लिए नीट, इंजीनियर बनने के लिए जेईई, आर्मी ऑफिसर के लिए एनडीए-सीडीएस, एफकैट, नर्सिंग, एमएनएस, टीजीटी, जेबीटी सहित सभी प्रमुख अध्ययन के लिए पास किए जाने वाले एंट्रेंस एग्जाम के लिए सबसे अधिक स्टूडेंट कोचिंग सेंटर्स की ओर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। प्रवेश परीक्षाएं पास करने के लिए क्रैश कोर्स के साथ-साथ कई वर्षों का अध्ययन स्कूली समय से ही चल रहा है।

स्कूल के साथ ट्यूशन-कोचिंग

टाइप-3ः इसी कड़ी में तीसरे प्रकार की अध्ययन की बात करें, तो ट्यूशन कोचिंग का चलन भी सबसे अधिक है। छात्र स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग सेंटर में अपने विषयों का अध्ययन कर रहे हैं, जिसे लेकर भी जिला कांगड़ा में सबसे अधिक छात्र रहते हैं।

सौ से ज्यादा संस्थान; एजुकेशन हब बना धर्मशाला

जिला कांगड़ा में सौ से अधिक कोचिंग, ट्यूशन व अन्य संस्थान इस समय मौजूद हैं, जिसमें जिला मुख्यालय धर्मशाला में सबसे अधिक 22 के करीब अकादमियां इस समय चल रही हैं, जो शहर को पहाड़ी राज्य का सबसे बड़ा एजुकेशन हब बना चुकी हैं। धर्मशाला शहर में अब बाहरी राज्यों में जाने की बजाय अन्य जिलों के छात्र भी बड़ी संख्या में कोचिंग प्राप्त करने के लिए पहुंच रहे हैं और अपना भविष्य उज्ज्वल बना रहे हैं। ऐसे में जिला कांगड़ा में सबसे अधिक कोचिंग सेंटर स्मार्ट सिटी धर्मशाला में ही मौजूद हैं। इसके अलावा पालमपुर, नगरोटा बगवां, नूरपुर, जसूर, नगरोटा सूरियां, देहरा, जवाली व जिला के अन्य शहरों में भी अब धीरे-धीरे अकादमियों की संख्या बढ़ने लगी है।

हर संस्थान का अपना रुतबा

देवभूमि हिमाचल शांत राज्य है और अब एजुकेशन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। इसमें जिला कांगड़ा के धर्मशाला, पालमुपर का विशेष महत्त्व बढ़ता जा रहा है। जिला के कई शहरों में अच्छे संस्थान स्थापित हो रहे हैं, जिससे अब छात्रों को कोचिंग प्राप्त करने के लिए बाहरी राज्यों में जाने की भी आवश्यकता नहीं है। जिला में बहुत से संस्थान हैं, जो अकसर डिमांड में रहते हैं।

डिमांड में ये संस्थान

जिला कांगड़ा में डाक्टर बनने की प्रवेश परीक्षा नीट की अगर बात की जाए, तो इसमें जेनेसिस नगरोटा बगवां, आरसीसी कोचिंग सेंटर धर्मशाला, ई-विंग्ज एकेडमी धर्मशाला चामुंडा व पालमपुर, रेस नारायणा धर्मशाला, एवीएस एकेडमी धर्मशाला, विज़न एकेडमी कांगड़ा, पीएसडी विद्या मंदिर कांगड़ा व अन्य सेंटर्स के नाम मुख्य रूप से लिए जा सकते हैं। इसके अलावा आईआईटी जेईई की बात की जाए, तो इसमें एससीए एकेडमी धर्मशाला, जेनेसिस नगरोटा बगवां, ई-विंग्ज एकेडमी चामुंडा, धर्मशाला व पालमपुर, रेस नारायणा, हेलियोस सहित अन्य के नाम लिए जा सकते हैं। यूपीएसएससी, एचपीएससी, एसएससी, एचएएस, अलाइड, बैंकिंग व केंद्र व हिमाचल की अन्य जॉब वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जिला कांगड़ा के सभी महत्त्वपूर्ण बड़े सेंटर्स में करवाई जा रही है। आर्मी व पुलिस सहित अन्य डिफेंस सर्विस की अगर बात की जाए, तो एम्स एकेडमी पालमपुर, विजय पथ एकेडमी, रॉयल एकेडमी, विवेक एकेडमी बड़ोल दाड़ी, बन्नी एकेडमी धर्मशाला, ई-विग्ंज एकेडमी धर्मशाला, चामुंडा व पालमपुर, आरसीसी, हेलियोस व अन्य संस्थान प्रमुख हैं। वहीं सीडीएस व एफकैट के लिए ई-विंग्ज एकेडमी धर्मशाला, चामुंडा व पालमपुर में विशेष कोचिंग करवाई जाती है।

पूरे साल का होता है पैकेज

हिमाचल में चलने वाले सभी कोचिंग सेंटर्स का फीस निर्धारण अपने ही स्तर पर होता है। प्रदेश सहित जिला कांगड़ा के अधिकतर कोचिंग सेंटर्स में चंडीगढ़ सहित अन्य संस्थानों में चल रहे फीस स्ट्रक्चर को ही फॉलो किया जा रहा है। इसमें क्लास की स्ट्रेंथ व छात्रों को प्रदान किए जा रहे स्टडी मैटीरियल को भी ध्यान में रखा जाता है। कोचिंग सेंटर्स में पूरे वर्ष का अलग पैकेज रहता है, जबकि क्रैश कोर्स के भी अलग-अलग से फीस पैकेज बनाए गए हैं। इसके अलावा कुछ संस्थानों में प्रति माह के हिसाब से भी फीस वसूली की जा रही है।

जीएसटी नंबर-कंपनी एक्ट के तहत चल रहे कोचिंग सेंटर

देश भर सहित प्रदेश व जिला कांगड़ा में भी कोचिंग सेंटर चलाने के लिए कोई नियम निर्धारित न होने के कारण मात्र कंपनी एक्ट के तहत ही चलाया जा रहा है। सरकार, शिक्षा विभाग व प्रशासन के पास कोई भी रजिस्ट्रेशन व संबद्धता देने का प्रावधान नहीं है। मात्र कंपनी एक्ट-2015 व जीएसटी नंबर के आधार पर ही एजुकेशन सिस्टम में अकादमियां चलाई जा रही हैं। इंटरव्यू-क्लास डेमो के बाद रखी जाती है फैकल्टी कोचिंग सेंटर में फैकल्टी की भर्ती किए जाने के लिए भी कोई विशेष नियम नहीं हैं। संस्थान अपनी मर्जी से ही स्टाफ भर्ती करता है। हालांकि इस दौरान लिखित व मौखिक इंटरव्यू सहित क्लास डेमो की व्यवस्था भी किसी-किसी कोचिंग सेंटर में की गई है। अगर जिला कांगड़ा के बड़े संस्थानों की बात करें, तो वहां प्रोफेशनल फैकल्टी रखी जा रही है, जिसमें एजुकेशन हब धर्मशाला में बड़े प्रोफेशनल फैकल्टी छात्रों को पढ़ाने के लिए रखी गई है।

सरकारी अकादमी मांग रहा कांगड़ा

हिमाचल का सबसे बड़े जिला कांगड़ा शुरुआती दौर से शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा है। यहां कांगड़ा, चंबा लाहुल-स्पीति, कुल्लू व मंडी सहित आसपास के जिलों के छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने को आते रहे हैं। मौजूदा समय में भी धर्मशाला की आबोहवा व धौलाधार की वादियों में सुकून के चलते यहां उच्च शिक्षा का अध्ययन करने देश-दुनिया से छात्र आते हैं। अच्छे घरों से संबंध रखने वाले छात्र तो महंगाई के इस दौर में निजी कोचिंग सेंटर्स से शिक्षा पाकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन कबायाली क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के जरूरतमंद युवा महंगी शिक्षा के दौर में आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे में इन युवाओं के लिए शिक्षा विभाग या हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड सरकारी स्तर पर कोचिंग सेंटर शुरू करे, तो सैकड़ों होनहार व जरूरमंद युवक व युवतियां अपने देश-प्रदेश की सेवाओं में अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवा सकती है।

‘दिव्य हिमाचल’ ने इस मामले को शिक्षा मंत्रालय से लेकर शिक्षा बोर्ड तक कई बार उठाया, लेकिन आम व जरूरमंद छात्रों को सुविधा देने की योजना पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय के बाहर एक लंबा व बड़ा हाल बनाने और ऐसे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मंच प्रदान किया जा सकता है। धर्मशाला में प्रदेश भर के कई जिलों के छात्र लाइब्रेरी में किताबें लेकर अध्ययन करते हैं। छात्रों की संख्या इतनी अधिक होती है कि उन्हें बैठने के लिए स्थान तक नहीं मिल पाता है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यहां कितनी संख्या में छात्र आते होंगे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निराश होना पड़ता है।

..तो अच्छे ओहदे तक पहुंच सकते हैं बच्चे

प्रदेश सरकार का शिक्षा विभाग या शिक्षा बोर्ड इस दिशा में पहल करें, तो प्रदेश के ऐसे होनहार भी अच्छे ओहदों तक पहुंचकर देश समाज की सेवा कर सकते हैं। ऐसे पुन्य कार्य के लिए धर्मशाला के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने वाले और सेवानिवृत्त शिक्षक भी सेवाएं देने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन इसके लिए मंच प्रदान करने के लिए फिलहाल सबकी निगाहें सरकार की ओर लगी हुई हैं।

धर्मशाला में अच्छे इंस्टीच्यूट, बच्चे के हिसाब से तैयार करते हैं कोच

कांगड़ा जिला के धर्मशाला के अभिभावक चंपा देवी का कहना है कि कोचिंग सेंटर में बच्चे को उसी हिसाब से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तराशा जाता है। बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए धर्मशाला सहित ग्रामीण क्षेत्र में चामुंडा पद्धर की एकेडमी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

स्कूल-कालेज भी दें बेहतरीन एजुकेशन

अभिभावक इंद्रजीत सिंह का कहना है कि मौजूदा समय कंपीटीशन का हो गया है। ऐसे में छात्रों को स्कूल व कालेजों में भी शिक्षकों को बेहतर एजुकेशन प्रदान करनी चाहिए। आज छात्र बड़ी परीक्षा की तैयारी करने के लिए कोचिंग का भी सहारा ले रहे हैं। जिला कांगड़ा में कई अकादमियां अब बेहतर रिजल्ट देकर कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसे में छात्रों को बाहरी राज्यों में जाने की बजाय अपने प्रदेश व जिला में ही अच्छी स्टडी करने का मौका मिल पा रहा है।

सचमुच बहुत बड़ी राहत लेकर आई अकादमियां

अभिभावक शकुंतला का कहना है कि छात्रों के लिए अब लगातार अच्छे रिजल्ट देकर आगे बढ़ रही अकादमियां बड़ी राहत लेकर आई हैं। अब छात्रों को कोचिंग की भी जरूरत पड़ रही है और इसके लिए अच्छे विकल्प राज्य व जिला में ही उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं, चंडीगढ़ व कोटा सहित अन्य संस्थानों को प्रदेश के संस्थान अब अच्छी टक्कर देकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं।

संस्थानों को स्ट्रेंथन करने की जरूरत, क्वालिफाइड फैकल्टी चाहिए

एकेडमी में एक निर्धारित मापदंड के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है, ऐसे में उसकी जरूरत तो है, लेकिन स्कूल-कालेज में पढ़ने वाले छात्रों को वहीं तैयार करना चाहिए। अब जिला कांगड़ा व धर्मशाला में भी अच्छे रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं। बाहरी राज्यों की बजाय अपने प्रदेश व जिला में अच्छे संस्थान खुल भी रहे हैं और अधिक स्ट्रेंथन करने व क्वालिफाइड फैकल्टी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है

आरपी चोपड़ा, रिटायर्ड प्रिंसीपल एवं शिक्षाविद, धर्मशाला

मौजूदा समय में शिक्षा का प्रसार-प्रचार अति आवश्यक है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को आगे बढ़ाने में कोचिंग सेंटर भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, स्कूलों व कालेजों में भी फैकल्टी व अभिभावकों को एकत्रित होकर अच्छी एजुकेशन प्रदान करने के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि बेहतरीन इन्फास्ट्रक्चर का लाभ भी उठाया जा सके। बाहरी राज्यों में छात्रों को अधिक खर्च झेलना पड़ता है। यहां के संस्थान अब अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें और अधिक स्ट्रेंथन किए जाने की जरूरत है

—डा. वाईके डोगरा, रिटायर्ड प्रिंसीपल व शिक्षाविद

कुछ प्रवेश परीक्षाओं व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग की आवश्यकता है, जिसमें कांगड़ा व धर्मशाला के संस्थान अब अच्छा रिजल्ट देकर प्रदेश ही नहीं, देश भर में नाम रोशन कर रहे हैं। इन्हें बाहरी राज्यों की बजाय अच्छी एजुकेशन के लिए जाना जाने लगा है

केसी कंवर, रिटायर्ड प्रोफेसर, धर्मशाला

कोचिंग सेंटर की आज के दौर में बहुत आवश्यकता है। वहीं, स्कूलों-कालेजों के छात्रों को क्वालिफाइड स्टाफ को सही पढ़ाई भी करवानी चाहिए। कुछ कोचिंग सेंटर में फीस पर थोड़ा नकेल लगाए जाने की जरूरत है, जबकि बाहरी राज्य जाने पर भी माता-पिता व छात्रों पर बोझ पड़ता है। ऐसे में हिमाचल में ही ऐसा एन्वायरनमेंट तैयार करने के लिए अकादमियों को प्रयास करने चाहिए

डा. विजय शर्मा, पूर्व प्रिंसीपल व शिक्षाविद

बहुत से फैक्टर भी हैं

कांगड़ा व मुख्यालय धर्मशाला के एजुकेशन हब बनने में कई महत्त्वपूर्ण फैक्टर अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहां लगातार नए कोचिंग संस्थान खुल रहे हैं। इसके अलावा एजुकेशन का वातावरण डिवलेप हो रहा है, जिसमें अच्छे कोचिंग सेंटर, पीजी, पुस्तकालय व अन्य सुविधाएं भी विकसित हो रही हैं। वहीं, संस्थानों के बेहतर रिजल्ट भी बाहरी राज्यों को बड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं, अब प्रोफेशनल कोचिंग व फैकल्टी भी लेवल को उच्च स्तर पर लेकर जाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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