पावर वीडर की सबसिडी का इंतजार खत्म

By: जीवन ऋषि , 98163-24264 Dec 20th, 2020 12:10 am

प्रदेश में अब खेत जोतने के लिए बैलों की जगह पावर वीडर या बड़े ट्रैक्टर इस्तेमाल होते हैं। इन मशीनों पर कृषि विभाग सबसिडी देता है। पेश है यह रिपोर्ट…

कांगड़ा में कृषि विभाग के पास बड़े ट्रैक्टरों की सबसिडी भी पहुंची, नूतन पोलीहाउस भी लगा सक तें हैं किसान

कांगड़ा घाटी में सैकड़ों किसानों ने पावर वीडर या बडे़ ट्रैक्टर खरीदे हैं। इन मशीनों से घंटों की खेत जुताई मिनटों में हो जाती है। मन मशीनों पर कृषि विभाग किसानों को सबसिडी भी देता है। किसानों को मशीन खरीदते समय एक फार्म पर महकमे को अप्लाई करना होता है, उसके बाद सबसिडी उनके खाते में आ जाती है। कई बार बजट की कमी के कारण सबसिडी देर से मिलती है। अपनी माटी टीम ने सबसिडी का हाल जानने के लिए डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर डा. पीसी सैनी से बात की। उन्होंने हमारे सीनियर जर्नलिस्ट जयदीप रिहान से सबसिडी को लेकर कई अहम जानकारियां शेयर की हैं। उन्होंने कहा कि बड़े ट्रैक्टर यानी 20 से 40 होर्स पावर तक की मशीनों पर तीन लाख रुपए तक सबसिडी दी जा रही है।

मौजूदा समय में उनके पास ऐसी 70 मशीनों का पैसा पहुंचा है। इसी तरह 400 पावर वीडर का पैसा भी मिला है। मार्च तक और पैसा आने की उम्मीद है। पिछले साल सबसिडी के लिए दस करोड़ रुपए मिले थे। इस बार अगर 22 करोड़ रुपए की जरूरत है। अगर इतना पैसा मिल जाता है,तो डिमांड के हिसाब से किसानों को ट्रैक्टर पर सबसिडी की मांग पूरी की जा सकेगी। दूसरी ओर नूतन पोलीहाउस का पैसा जल्द विभाग को मिलने वाला है। यह नई योजना है। इस पर भी विभाग 85 प्रतिशत सबसिडी देगा।

रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, पालमपुर

बागीचों में व्यस्त बागबान

नौहराधार — ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम साफ होते ही बागबानों ने अब अपने बागीचों की और रुख कर दिया है। बागबान अपने बागीचों में खाद और गोबर डालने में जुट गए है। कई बागबान नए पौधे लगा रहे है। हर वर्ष बागबान नए बागीचे लगाने के लिए अहमियत दे रहे है। बागबानी विशेषज्ञ के अनुसार नए पौधे लगाने के लिए यह उपयुक्त समय है। नए बगीचे लगाने से पूर्व पहले गद्दे में सुपर फास्फेट, पोटाश और गोबर भी मिलाकर बागबान डालें। अच्छी किस्म और उपचारित किए हुए पौधे बाग्बानों को लगाने चाहिए।

सिरमौर जिला के गिरिपार में ब्रश कटर का बड़ा क्रेज

सिरमौर जिला के संगड़ाह एरिया में किसान नए नए प्रयोग करने में यकीन रखते हैं। इन ग्रामीण इलाकों में अब मशीनों से खेती करने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। पेश है यह रिपोर्ट ….

पांच आदमियों के बराबर घास काट रही अकेली मशीन

सिरमौर जिला के गिरिपार में आलू, मटर और टमाटर की खेती होती है। यहां का अदरक और लहसुन तो विश्वविख्यात है। इसके अलावा इस इलाके में पशुओं के लिए बड़े पैमाने पर घास काटकर उसका स्टॉक किया जाता है। खैर, आलू और अदकर  वे फसलें हैं, जिनके लिए खेत को जुताई करके अच्छे से नरम करना पड़ता है। बैलों से यह काम काफी मेहनत भरा होता है, ऐसे में अब इस इलाके में भी मशीनों से खेती हो रही है। इन दिनों यहां 60 फीसदी किसान पावर वीडर से खेती कर रहे हैं, वहीं घास काटने के लिए ब्रश कटर का इस्तेमाल होता है। ब्रश कटर पांच आदमियों का काम अकेले कर देता है। इससे यह किसानों को खूब भा रहा है। डुंगी गांव के प्रगतिशील किसान तपेंद्र शर्मा व पंकज तथा काठियोग के अशोक ने इस बार बिजाई मशीन से की है, वहीं  तपेन्द्र ने ब्रश कटर से अपने लिए घास काटी है। इन किसानों ने बताया कि मशीन से काम करने का अनुभव गजब का रहा है। इलाके में मशीनों से काम करने का ट्रेंड तेजी से चल रहा है। आखिर हो भी क्यों न। आखिर इन मशीनों पर सबसिडी भी तो मिल रही है।

रिपोर्टः निजीसंवाददाता, नौहराधार

मक्की की रोटी के लिए मशहूर है बागी बनौला का बहादुर ढाबा

1960 के आसपास रोजगार के लिए नेपाल से हिमाचल पहुंचे तारा चंद ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके ढाबे पर बनी मक्की की रोटियां, माह की दाल और देशी घी का स्वाद एक दिन पूरे भारत मे अपनी पहचान बना लेगा। तारा चंद ने नेपाल से हिमाचल पंहुचकर कुछ दिन इधर-उधर काम किया और फिर बिलासपुर जिला के बागी बनौला मे एक छोटी सी चाय की दुकान खोल ली। विद्युत परियोजना के निर्माण के समय जब इक्का दुका ट्रक चलने लगे तो आर्डर पर तारा चंद ट्रकों के ड्राइवरों और क्लीनरों के लिए भोजन भी बनाने लगे।

 इस दौरान माह की दाल और मक्की की रोटियां भी बनाई जाने लगी तो उनके स्वाद से धीरे धीरे इसी की डिमांड होने लगी और अब बहादुर ढाबे मे यह एक ब्रांड ही बन गया है। इसी बीच मनाली की ओर आने-जाने बाले टूरिस्ट भी यहां रुकने लगे और बहादुर ढाबे को देश भर मे पहचान मिलने लगी। 2007 मे तारा चंद की मृत्यु हो गई और अब उनके छोटे बेटे 43 वर्षीय रमेश चंद ही बहादुर ढाबे को संभाल रहे हैं। ताराचंद के बड़े बेटे राज कुमार और रमेश चंद दोनो भाई काफी समय तक बहादुर ढाबे को चलाते रहे, लेकिन 2018 में राजकुमार का भी निधन हो गया और अब रमेश चंद ही इस ढाबे को चला रहे है। शुरू से लेकर आज तक इस ढाबे मे चूल्हे पर लकड़ी की आंच में ही मक्की की रोटियां और माह की दाल बनाई जाती हैं। माह की दाल के साथ कढ़ी भी यहां बनाई जाती है और जनवरी और फरवरी महीने में यहां मक्की की रोटी के साथ साग भी परोसा जाता है। रमेश चंद बताते हैं कि एक बार उनके यहां जो भी मक्की की रोटी, माह की दाल और देशी घी खाता है वह बार-बार यहां आता है। कई लोग तो यहां से पैक करवा कर भी रोटियां और दाल ले जाते है। दिन मे यहां आप हिमाचल, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली की कई गाडि़यों को रुके हुए देख सकते हैं। रमेश चंद बताते है कि वह घराट का आटा और लोकल माह ही प्रयोग करते हैं।

रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, नेरचौक

यहां है ढाबा

बहादुर ढाबा बागी बनौला मे चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाई-वे पर स्थित है। अगर आप चंडीगढ़ से मनाली को ओर जा रहे हैं तो यह ढाबा बिलासपुर से आठ किलोमीटर आगे और घाघस से एक किलोमीटर पीछे है।

हिमाचल में किसान कानूनों पर घमासान तेज

हिमाचल में किसान कानूनों पर दोनों प्रमुख विपक्षी दलों में सियासत तेज हो गई है। कल तक शांत दिख रही भाजपा एकदम आक्रामक हो गई है,जबकि कांग्रेस भी लगातार काउंटर अटैक कर रही है। एक रिपोर्ट

हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने बयान दागा था कि किसान आंदोलन गलत हाथों में है। ये तीनों नए कृषि कानून किसानों के हक में हैं। कुछ राजनीति  दल एक एजेंडे के तहत किसानों को बरगला रहे हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस ने शांता कुमार पर जोरदार पलटवार किया है। पीसीसी चीफ कुलदीप राठौर ने कहा है कि शांता कुमार हमेशा किसान विरोधी रहे हैं। जब भी एग्रेरियन सोसायटी की बात चलती है, तो शांता तुरंत किसानों के विरोध में आ जाते हैं। राठौर ने कहा कि साल 1990 में जब शांता सीएम थे, तो शिमला में बागबानों पर लाठियां और कोटगढ़ में गोलियां चली थीं। उस समय पांच बागबानों को जान से हाथ धोना पड़ा था। शांता का किसानों के प्रति रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। दूसरी ओर प्रदेश भाजपा का आरोप है कि किसान आंदोलन पर कांग्रेस राजनीति राजनीति कर रही है। पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कं वर का कहना है कि तीनों नए कानून किसानों के हित में हैं। विपक्षी इन कानूनों पर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का स्टैंड साफ है, ये कानून वापस नहीं होंगे। सरकार इनमें संशोधन के लिए तैयार है। अगर कहीं कमी है, तो इसमें संशोधन किया जाएगा। कंवर ने विपक्ष से पूछा कि आखिर कानूनों में क्या कमी है,इस बात को क्यों नहीं बताया जा रहा है। विपक्षी दलों को अपनी कारगुजारी पर शर्म आनी चाहिए।

मटर की बिजाई कर रहे हैं, तो यह तरीका अपनाएं

प्रदेशभर में इन दिनों मटर की बिजाई होती है।  मटर की गिनती प्रमुख नकदी फसलों में होती है। मटर की खेती पर पेश है नौणी से वैज्ञानिक कुलदीप ठाकु र का एक्सपर्ट कमेंट

हिमाचल में इन दिनों मटर की बिजाई का दौर है। प्रदेश में मटर एक प्रमुख नकदी फसल है, जिसके मार्केट में खूब दाम मिलते हैं।  प्रदेशभर के किसानों की खातिर अपनी माटी टीम ने इस बार मटर की खेती को और बेहतर बनाने का प्रयास किया है। हमारी सहयोगी मोहिनी सूद ने नौणी यूनिवर्सिटी का दौरा किया। उन्होंने वहां प्रिंसीपल साइंटिस्ट कुलदीप ठाकुर से बात की।

कुलदीप ठाकुर ने  बताया कि  मटर की बिजाई से पहले उसके बीज का उपचार जीवाणु खाद से करने पर अच्छी उपज आती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मटर की बिजाई से पहले बीज को 12 से 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें। ऐसा करने से अंकुर अच्छा होता है। मटर का उपचार करने के लिए इसमें राइजोबियम व जीवाणु खाद डालें। राइजोबियम को 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकता है। उपचार किए गए बीज को लाइन में चार अंगुलियों के फासले में लगाएं । बाद में इसे वर्मी कंपोस्ट या खाद से ढक दें। ऐसे में बीज बेहतर तरीके से फूटेगा और फसल भी अच्छी होगी। रिपोर्टः निजी संवाददाता, नौणी

सरकार ने घटाया फोरलेन प्रभावितों का मुआवजा

शाहपुर। प्रदेश कांग्रेस महासचिव केवल सिंह पठानिया ने कहा है कि मौजूदा सरकार ने फोरलेन प्रभावितों का मुआवजा घटाकर उनसे धोखा किया है। पठानिया ने कहा कि पूर्व की यूपीए की कांग्रेस सरकार ने लैंड एक्ट बिल जो पास किया था, उस वक्त फोरलेन प्रभावित लोगों को एक कनाल का लगभग 42 लाख मिलना था।  बिल्डिंग का लैंड एक्ट एक्यूजीशन पास जो हुआ था वह पर स्कवेयर मीटर 52 हजार की नोटिफिकेशन हुई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसको घटा कर एक कनाल का सात लाख और बिल्डिंग का एक स्कवेयर मीटर का 18 हजार करके जनता को धोखा दिया है।

तीन लाख किसान परिवार करेंगे मोदी का थैंक्स

हमीरपुर। प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डा. राकेश शर्मा बबली ने कहा है कि केंद्र सरकार के तीन कृषि सुधार कानूने किसानों की दशा सुधारेंगे। इसके लिए हिमाचल के तीन लाख किसान परिवार हस्ताक्षर करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार कानूनों को लागू करने के लिए पूरे देश के किसान मोदी सरकार के ऋणी हैं और प्रदेश किसान मोर्चा कृषि सुधार विधेयक को गांव-गांव, जन-जन तक पहुंचाने के लिए अभियान छेड़ चुका है।

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