अस्पतालों को ऑक्सीजन न देना नरसंहार के बराबर, कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

By: May 5th, 2021 1:48 pm

प्रयागराज — उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते अस्पतालों में आक्सीजन की आपूर्ति में कमी को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि ऐसा करना नरसंहार से कम नही हैं। ऐसी मौतों की जवाबदेही ऑक्सीजन आपूर्ति करने वालों की है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने कहा कि मेडिकल साइंस इतना आगे है कि हम हार्ट ट्रांसप्लांट कर रह है।

ब्रेन आपरेट कर रहे और दूसरी तरफ ऑक्सीजन की कमी से मौत हो जा रही है। उच्च न्यायालय ने कहा कि सामान्यत: कोर्ट सोशल मीडिया की खबरों पर ध्यान नहीं देती, मगर इस खबर का समर्थन वकीलो ने भी किया है कि प्रदेश में कई जिलों में आक्सीजन की आपूर्ति न हो सकने के चलते मौतें हुईं हैं।

कोर्ट ने कहा कि इसके सुधार के लिये तुरंत कदम उठाए जाए। उन्होंने लखनऊ व मेरठ के जिलाधिकारी को ऑक्सीजन की कमी से मौत की खबरो की 48 घंटे मे जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने तथा जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि केस की सुनवाई के दौरान दोनों जिलों के डीएम वर्चुअल सुनवाई के समय उपस्थित रहेंगे।

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पंचायत चुनाव मतगणना सीसीटीवी के साए में करने और कोविड 19 गाइडलाइंस के पालन के निर्देश पर राज्य चुनाव आयोग को आठ जिलों की मतगणना का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद मेरठ, गौतमबुद्धनगर व आगरा जिला की पंचायत चुनाव के मतगणना के दौरान की सीसीटीवी फुटेज सात मई को पेश किया जाए।

खंडपीठ ने हाई कोर्ट के कार्यरत जज की लखनऊ के एसजीपीजीआई में हुई मौत का भी संज्ञान लिया है और उनके इलाज की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वीके श्रीवास्तव 23 अप्रैल को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हुए । शाम 7:30 बजे तक उनकी ठीक से देखभाल नहीं की गई। इसके बाद में उन्हें लखनऊ एसजीपीजीआई में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

कोर्ट ने जस्टिस श्रीवास्तव के इलाज से संबंधित रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस जनहित याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट अब सात मई को करेगी । केस की सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा और कहा कि सरकार इस कोरोना महामारी संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए सप्ताहांत दो दिन के लॉकडाउन की अवधि को और बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि मरीजों की अधिक से अधिक टेस्टिंग की जा रही है। उन्हें इलाज की समुचित व्यवस्था कराने के शासन के आदेश का हर जिलों में अनुपालन कराया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट चार दिन बाद क्यों मिल रही है, जबकि जांच रिपोर्ट जल्दी मिल जानी चाहिए।

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