श्रीवामन द्वादशी मेला

By: Sep 11th, 2021 12:21 am

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर की तहसील पच्छाद के मुख्यालय सराहां में एक मंदिर है, जहां भगवान विष्णु के राम व कृष्ण रूप के साथ वामन अवतार की भी पूजा की जाती है। प्रतिवर्ष भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को उनके जन्म दिवस के सुअवसर पर यहां राज्य स्तरीय मेले का आयोजन किया जाता है। भगवान वामन की पूजा-अर्चना करने के उपरांत, उनकी पालकी को स्थानीय देवता शिरगुल के साथ, शोभा यात्रा निकालते हुए यहां के शिरगुल ताल में नौका विहार करवाया जाता है। वैसे तो आधिकारिक रूप से यह मेला दो दिवसीय होता है, लेकिन मेला इलाके में लोकप्रिय होने के चलते पांच-छह दिन तक चलता है, जिसमें स्थानीय निवासियों के अलावा साथ लगते जिलों व प्रदेशों से भी लोग और दुकानदार शिरकत करते हैं। सृष्टि में धर्म की स्थापना तथा अत्याचारियों व आततायियों का नाश करने के उद्देश्य से भगवान विष्णु समय-समय पर अवतार लेते रहे हैं। इन्हीं में से भगवान विष्णु के पांचवें अवतार को वामन अवतार कहा जाता है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार दैत्य सेनापति बलि ने देवताओं को पराजित करके स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उसने इसी खुशी में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। देवताओं ने पराजय से दुखी होकर भगवान विष्णु की शरण ली। भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं। भगवान विष्णु ने देवताओं को वामन रूप में माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन भी दिया। दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद कश्यप जी के कहने से माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं, जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। तब भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से विष्णु भगवान ने वामन के रूप में अवतार लिया।

वामन अवतार लेकर विष्णु भगवान ब्राह्मण वेश धर कर राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंचते हैं। वामन रूप में श्री विष्णु भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं। वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था। ऐसे में राजा बलि अपना वचन निभाते हुए अपना सिर भगवान के आगे रख देते हैं और वामन भगवान के पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक पहुंच जाते हैं। बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और बलि को पाताल लोक का स्वामी बना देते हैं। इस तरह भगवान वामन देवताओं की सहायता कर उन्हें पुन: स्वर्ग का अधिकार प्रदान करते हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वामन भगवान जी की जयंती 17 सितंबर को मनाई जाएगी। लेकिन करोना महामारी के चलते इसे सूक्षम रूप से ही मनाया जाएगा। गौरतलब है कि वामन द्वादशी के अवसर पर सराहां में तीन दिवसीय राज्यस्तरीय मेले का आयोजन किया जाता है, लेकिन करोना महामारी के चलते इस वर्ष भी मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा, बल्कि सूक्षम रूप से सभी रस्मों को निभाया जाएगा। इस वर्ष 17 सितंबर को प्रात: 9 बजे से 10 बजे तक पूजा पाठ व हवन का आयोजन सराहां के राम मंदिर में किया जाएगा।

उसी प्रकार यहां आयोजित होने वाले प्रसिद्ध दंगल की भी सिर्फ रसम निभाई जाएगी, जिसके तहत प्रात: 10 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक सराहां के कुश्ती ग्राउंड में कार्यक्रम होगा जिसमें सबसे पहले अखाड़ा पूजन होगा और उसके उपरांत परंपरा को निभाते हर एक कुश्ती करवाई जाएगी। उसके उपरांत दोपहर 12 बजे से वामन भगवान व शिरगुल देवता की पालकियों की सराहां बाजार में शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो शिरगुल ताल तक पहुंचेगी उसके बाद पालकियों के साथ शिरगुल ताल में नोका विहार किया जाएगा। प्रशासन के आदेशानुसार पूजा-अर्चना के कार्यक्रम में केवल 20 लोग ही उपस्थित होंगे, जबकि शोभायात्रा में 50 लोगों को आने की इजाजत होगी, जो इन कार्यक्रमों में भाग लेंगे उनकी सूची प्रशासन द्वारा जारी कर दी जाएगी। वही 16 सितंबर सायं से 17 सितंबर सायं तक सराहां बाजार को पूरी तरह सजाया जाएगा।

— संजय राजन, सराहां

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