वनों को आग से कैसे बचाएगा वन विभाग

By: Apr 19th, 2022 12:11 am

आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां नहीं आ रही नजर

टीम-मीलवां, डमटाल
हिमाचल प्रदेश वन संपदा संपन्न प्रदेश है। यहां यह वन संपदा हिमाचल के वातावरण व सुंदरता को चार चांद लगाती हैं प्रदेश व केंद्र सरकार पौधारोपण पर बल दे रही है, लेकिन हर वर्ष लाखों एकड़ वन संपदा आग की भेंट चढ़ जाती है, इससे न केवल तापमान में वृद्धि होती है, बल्कि पक्षियों सहित इन वनों में रहने बाली अन्य जीव-जंतुओं की प्रजातियां इन्हें संरक्षण की आवश्यकता है, वह भी विभिन्न जगहों में लगने वाली आग की वजह से विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में हिमाचल के खूबसूरत व सुंदर वातावरण को रखने के लिए वन संपदा को आग से बचाना जरूरी हो जाता है, लेकिन फायर सीजन शुरू हो जाने के बाद भी विभाग द्वारा आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां नजर नहीं आ रही है। फायर सीजन में वन संपदा को आग से बचाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

वन विभाग के पास ना तो पर्याप्त मात्रा में मेन पावर है और न ही आधुनिक उपकरण ऐसे में वन संपदा को बचाने के लिए वनरक्षकों को डंडों व झाडिय़ों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे आग पर काबू पाते समय जान का खतरा भी बना रहता है। पूरे जिला में कई स्थानों पर एक हजार एकड़ वनों की सुरक्षा का जिम्मा एक-एक वनरक्षक को सौंपा गया है और कई स्थानों पर एक वनरक्षक के पास दो-दो बीट की जिम्मेदारी है। वन मंडल अधिकारी नूरपुर सुमन ओरी ने बताया कि फायर सीजन से निपटने के लिए हमारी पूरी तरह से तैयारी है।

विभाग के पास नहीं हैं पर्याप्त उपकरण
विभाग भले ही जंगलों में आगजनी की घटनाओं को कम करने हेतु जागरूकता अभियानों का हवाला देता रहे, लेकिन वास्तविकता यह है कि विभाग के पास में आग से निपटने के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं है, ना तो वनरक्षकों के पास अग्निरोधक यंत्र है और न ही हेलमेट उपलब्ध करवाए गए हैं और तो और आग की स्थिति में जंगल में जाने के लिए विभाग द्वारा विशेष जूते वह फायर वाचर तक भी उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं और ना ही ऐसी ट्रस्ट उन्हें उपलब्ध करवाई गई है इसे पहनकर में आग से निपटने के लिए बेधड़क जंगल में जा सके।


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