मंडी जिला में लंपी से अब तक 125 पशुओं की मौत

By: Sep 21st, 2022 12:19 am

3537 एक्टिव मामले, 17300 हुई वैक्सीनेशन

स्टाफ रिपोर्टर — मंडी
जिला मंडी में लंपी वायरस का कहर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पशु पालकों की चिंताएं बढ़ गई है। जिला में अब तक 125 पशुओं की संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। इसके लिए 3537 पशु इस बीमारी की चपेट में हैं, जिनके उपचार के लिए पशु पालन विभाग के सभी अधिकारी, विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ के सदस्य फील्ड में दिन-रात कार्य कर रहे हैं। विभाग के कड़ी मेहनत के बाद भी लंपी वायरस दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। संक्रमण की चपेट में आए पशुओं के उपचार के लिए विभागीय अधिकारी व विशेषज्ञ 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, पशु पालन विभाग की ओर से स्वस्थ पशुओं को गोटपॉक्स वैक्सीन लगाने के लिए अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत पशु पालन विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन कर रही हैं, जिसके चलते अब तक 17300 स्वस्थ पशुओं को विभाग की ओर से गोटपॉक्स वैक्सीन लगा चुका है। अन्य पशुओं को वैक्सीनेशन लगाने के लिए पशु पालन विभाग जिला मंडी ने 18000 वैक्सीन की खेप की डिमांड कर दी है। वहीं, जिला मंडी में सबसे ज्यादा मामले सरकाघाट और बल्ह क्षेत्र से आ रहे हैं।

पशु पालन विशेषज्ञों के अनुसार लंपी चर्म रोग पशुओं को एक साथ बांधने से नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार के मक्खी-मच्छर के काटने से फैलता है। जिसके चलते पशु पालकों को पशुओं को बांधने के स्थान पर विशेष साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा, जिससे कम से कम मक्खी-मच्छर पशुओं के पास आएं। वहीं, इसके लिए पशु पालन विभाग ने उपमंडल, सब-उपमंडल व पंचायत स्तर पर टीमों का गठन किया हुआ है, जो अपने-अपने कार्य क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, जिसमें उपमंडल स्तर पर पशु विशेषज्ञ, सिनियर वैटरिनरी, फार्मासिस्ट सहित अन्य टीम में शामिल किए गए हैं। इसके साथ पंचायत स्तर पर वैटनरी डाक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, पशु पालन विभाग जिला मंडी के उपनिदशेक डा. संजीवन नड्डा ने कहा कि विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। सभी अधिकारी व कर्मचारी दिन-रात बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सीरियस संक्रमित पशुओं को बचाने के लिए विभाग रात के समय भी बचाव में जुटा हुआ है। इसके साथ विभाग ने वैक्सीनेशन के लिए 18000 वैक्सीन की खेप की डिमांड और कर दी है।

संक्रमित पशुओं का दूध उबालना जरूरी
पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार लोग संक्रमित पशुओं का दूध उबालकर पी सकते हैं। दूध को उबालने के बाद उसे पीने से इंसानों को कोई भी खतरा नहीं है। इसके साथ पशुओं को मक्खी-मच्छर से बचाने के लिए एक लीटर पानी में तीन चम्मच सरसों का तेल और एक चम्मत फिनायल का तेल का गोलकर बनाकर उसे पशुओं पर लेप लगा सकते हैं। इससे पशुओं को मक्खी-मच्छर से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही पशुशाला में पंखा लगाकर व धुंआ जलाकर भी पशुओं को राहत प्रदान की जा सकती है।

जागरूकता वाहन से किया जा रहा जागरूक

वहीं, पशुपालन विभाग की ओर से जिला मंडी में पशु पालकों को लंपी वायरस से पशुओं को बचाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। इसके लिए जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित की जा रहे हैं और विभागीय अधिकारी लोगों को इस बीमारी को लेकर सचेत भी कर रहे हैं।