लहलहाएंगी बेजान फसलें, संजीवनी बनी बारिश

By: Jan 26th, 2023 12:45 am

कृषि विभाग की सलाह, फसलों की रिकवरी के लिए डालें यूरिया, पीला रतुआ से बचाएं

सुरेंद्र कौर-धर्मशाला
प्रदेश में लगातार दो दिन से हो रही बारिश फसलों के लिए संजीवनी की तरह सिद्ध हो रही है। लंबे समय से बारिश न होने से सूखा पडऩे के कारण जिला कांगड़ा में 92 हजार हेक्टेयर में लगाई जाने वाली रबी की 25 प्रतिशत फसल खराब होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन इस बारिश से बेजान हो रही फसलें अब रिक्वर हो जाएंगी। जिले में बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर लगातार जारी है। हालांकि रबी की फसलों के लिए ज्यादा बारिश की अवश्यकता भी नहीं होती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वह खेतों में फसलों की रिक्वरी के लिए यूरिया खाद्य उपयोग कर सकते हैं। फसलों को पीला रतुआ नामक बीमारी से बचाने के लिए संभावित क्षेत्रों में जहां पानी खड़ा होता है उससे बचें। बारिश का यह मौसम पीले रतुए के लिए पसंदीदा मौसम है जिसमें इसके पनपने के चांस ज्यादा रहते हैं।

बारिश होने से किसानों-बागबानों के चेहरे खिल गए हैं। अब ज्यादा नुकसान होने की संभावना कम हो गई है। पिछली बार के मुकाबले इस बार कम बर्फबारी हुई है। इस बार की बर्फबारी त्रियूंड व ठठारना की पहाडिय़ों तक ही सीमित रह गई। मकलोडगंज व नड्डी तक बर्फ नहीं पहुंच पाई है। हिमाचल प्रदेश में इन सर्दियों में मौसम लगातार शुष्क बना हुआ है। अब तक मात्र चौथी बार ही सीजन में भारी बर्फबारी देखने को मिली है। लगातार ड्राई स्पेल रहने से अभी व गर्मियों के समय में पानी की समस्या होने की भी चिंता लोगों को सताने लगी थी। बहरहाल, लगातार हो रही बारिश से अब पानी की समस्या का हल निकल सकता है। वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से मिली जानकारी के अनुसार वीरवार और शुक्रवार को मौसम साफ रह सकता है। अब लोगों को शुष्क सर्दी से राहत मिली है, लेकिन बर्फानी हवाओं ने समस्त क्षेत्र को शीतलहर की चपेट में ले लिया है।

किसानों को फसलों को रिकवर करने की सलाह
नॉर्थ जोन के कृषि संयुक्त निदेशक डा. जीत कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर कुछ समय और बारिश नहीं होती तो किसानों का और ज्यादा नुकसान हो सकता था, लेकिन अब किसानों को बारिश के बाद खराब हुई फसलों को रिक्वर करने के लिए बारिश के बाद खेतों में यूरिया के उपयोग करने का सुझाव दिया जाता है और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए टिल्ट फंगीसाइड जैसे केमिकल का भी उपयोग किसान कर सकते हैं।