तेल-गैस के बाद दवाइयों पर भी संकट, युद्ध ने बढ़ाई टेंशन, फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन पर बढ़ रहा दबाव
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
ईरान पर अमरीकी और इजरायली हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध का पैमाना बढ़ता ही जा रहा है। प्रमुख जलमार्गों के प्रभावी रूप से बंद होने और सप्लाई चेन में आई दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। इस बीच अब एक और संकट ने दस्तक दे दी है। रिपोट्र्स के मुताबिक इस जंग का असर भारत के दवा उद्योग पर भी पडऩा शुरू हो गया है। रिपोट्र्स के मुताबिक भारत की फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल यानी रॉ मैटेरियल की कीमत लगातार बढ़ रही है। फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ‘की स्टार्टिंग मटेरियल’ (केएसएम) और ‘एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स’ (एपीआई) की कीमतें बढऩे लगी हैं।
बता दें कि केएसएम और एपीआई दवा बनाने के लिए जरूरी घटक हैं। पिछले हफ्ते वैश्विक तनाव, डॉलर में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में आ रही रुकावटों की वजह से कीमत 5 से 100 फीसदी तक बढ़ गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध इस तरह चलता रहा तो इन अहम रॉ मैटेरियल की कमी भी हो सकती है। अल्ट्रा ड्रग्स के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर संदीप अरोड़ा ने बताया कि दवाओं की कमी हो सकती है, क्योंकि ट्रेडर रॉ मटेरियल के लिए कोई ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सॉल्वेंट की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा छोटे व्यापारी और सप्लायर भी कीमतों में और बढ़ा कर युद्ध की स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
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