संसद में गूंजा ईरान-इजरायल युद्ध, पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा

By: Mar 10th, 2026 12:05 am

जयशंकर बोले, हमें भारतीयों की चिंता

दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन की शुरुआत काफी गहमागहमी भरी रही। ईरान, इजरायल और अमरीका के बीच छिड़े युद्ध के वैश्विक और स्थानीय प्रभावों को लेकर राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों की मुख्य मांग इस युद्ध से उत्पन्न स्थितियों पर विस्तृत चर्चा की थी। हंगामे के बीच विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट भी किया। लोकसभा में भी स्थिति वैसी ही रही, जहां सांसदों ने ‘वी वांट डिस्क्शन’ के नारों के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन में बार-बार व्यवधान डाला। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन को खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की स्थिति से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि युद्ध क्षेत्र और आसपास के इलाकों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं। आठ मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ चुके हैं। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित मंत्रालय आपस में समन्वय कर रहे हैं, ताकि हर भारतीय की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।

अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं हुई चर्चा

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा सोमवार की कार्यसूची में दर्ज थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित होने से इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकी। पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने के लिए वह तैयार हैं। उन्होंने श्री जावेद से बार-बार अपना प्रस्ताव पेश करने को कहा, लेकिन वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर ही चर्चा कराने की मांग पर जोर देते रहे। बता दें श्री बिरला ने उनके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के बाद से सदन में न आने का फैसला लिया है।

ईरान में नेतृत्व का संकट और भारत की चिंता

एस. जयशंकर ने एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में ईरान के भीतर नेतृत्व स्तर पर भारी क्षति हुई है, जिसके कारण वहां की लीडरशिप से संपर्क साधना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि ईरान में कई महत्त्वपूर्ण नेता मारे गए हैं और बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो गया है। हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह शांति और संवाद का पक्ष लिया है। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाह (कोच्चि) पर अपने युद्धपोत ‘लावन’ को डॉक करने की अनुमति देने के लिए आभार व्यक्त किया है।

ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की शहादत

भारत के लिए यह युद्ध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और आर्थिक भी है। पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। इसके अलावा, यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र है। सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। विदेश मंत्री ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि संघर्ष के दौरान हमने अपने दो जांबाज भारतीय नाविकों को खो दिया है, जबकि एक अभी भी लापता है।

राहुल गांधी ने अमरीका से डील पर घेरे पीएम मोदी

कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से कितना नुकसान होगा? एक बड़े बदलाव की लड़ाई चल रही है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। आपने शेयर बाजार देखा। प्रधानमंत्री मोदी ने अमरीका के साथ समझौता कर लिया है। देश को बड़ा झटका लगने वाला है। तो फिर इस पर चर्चा करने में उन्हें क्या दिक्कत है? राहुल गांधी ने आगे कहा कि हम इसके बाद दूसरे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। क्या पश्चिम एशिया का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है? ईंधन की कीमतें और आर्थिक तबाही चर्चा के महत्त्वपूर्ण विषय नहीं हैं? ये सार्वजनिक मुद्दे हैं। हम इन्हें महत्त्वपूर्ण मानते हैं और इन पर चर्चा करना चाहते हैं… लेकिन वह चर्चा नहीं करना चाहते क्योंकि इससे और भी बातें सामने आएंगी, प्रधानमंत्री की छवि खराब होगी। उनकी छवि खराब होगी और उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है, ये सब सामने आएगा। इसलिए वह चर्चा नहीं करना चाहते। आपने देखा कि प्रधानमंत्री संसद से कैसे भाग गए। मैं आपको बता रहा हूं, वह नहीं आ पाएंगे।

खडग़े बोले, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा प्रभाव

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने सोमवार को एशिया के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामथ्र्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। खडग़े ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा कि मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया। खडग़े ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है।


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