प्राकृतिक खेती हिमाचल की नई ताकत, कुदरत के सच्चे दोस्त बने 2.23 लाख किसान
कार्यालय संवाददाता-शिमला
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती अब केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बड़ा जनआंदोलन बनती जा रही है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 63 हजार किसानों से प्राकृतिक उपज खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मिलने से किसानों का रुझान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ा है। प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। सरकार इस वर्ष प्राकृतिक गेहूं 80 रुपये, मक्की 50 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये, पांगी की जौ 80 रुपये तथा अदरक 30 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता से राहत मिली है और गांवों में नई आर्थिक उम्मीद जगी है। प्रदेश में अब तक 2.23 लाख से अधिक किसान एवं बागवान परिवार पूर्ण या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। यह अभियान प्रदेश की 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। कृषि विभाग ने इस वर्ष एक लाख नए किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोडऩे का लक्ष्य रखा है, जिनमें से अब तक 70 हजार से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। सरकार के अनुसार अब तक 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल प्राकृतिक उपज खरीदी जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों के खातों में सीधे 6.40 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। प्राकृतिक गेहूं की खरीद में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। पिछले वर्ष जहां 838 किसानों से खरीद हुई थी, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढकऱ 2,022 तक पहुंच गई है।
सरकार ने लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को आने वाले वर्षों में एमएसपी लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य गांव की पूंजी को गांव की अर्थव्यवस्था में बनाए रखना और किसानों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। प्रदेश सरकार प्राकृतिक उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन पर भी विशेष जोर दे रही है। पिछले वर्ष खरीदे गए प्राकृतिक उत्पादों से 420 क्विंटल गेहूं आटा, 1,370 क्विंटल दलिया, 1,628 क्विंटल मक्की आटा और 59 क्विंटल जौ आटा तैयार कर बाजार में उतारा गया।
प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभकारी
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती कृषि लागत, घटती मिट्टी की उर्वरता और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। सरकार की यह पहल अब ग्रामीण हिमाचल में आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखती दिखाई दे रही है।
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