बाबा अजिपाल मंदिर बधमाणा में आज सजेगा मेला, तैयारी पूरी
चीड़ के जंगलों के बीच गुफा में विराजमान हैं सिद्ध बाबा
स्टाफ रिपोर्टर-दौलतपुर चौक
धार्मिक स्थल केवल पत्थरों और ईंटों से निर्मित भवन नहीं होते, बल्कि वे आस्था, संस्कृति, तपस्या और आध्यात्मिक चेतना के जीवंत केंद्र होते हैं। गगरेट विधानसभा एवम चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के मध्य और उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी धाम के समीप बधमाणा गांव की पवित्र वादियों में स्थित सिद्ध बाबा अजिपाल धाम ऐसा ही एक दिव्य स्थल है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालु स्वयं को अलौकिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत अनुभव करते हैं। चीड़ के घने जंगलों, पीहू पीहू करते मोर और प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित इस धाम में बाबा अजिपाल की पावन पिंडी एक पहाड़ी गुफा में विराजमान है। गुफा का रहस्यमय वातावरण और आसपास फैली शांति श्रद्धालुओं को ध्यान, साधना और आत्मचिंतन की अनुभूति कराती है। यही कारण है कि यहां आने वाले भक्त केवल दर्शन कर लौटते नहीं, बल्कि घंटों तक इस पवित्र स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा में रम जाते हैं। 12वीं शताब्दी में राजस्थान के अजमेर राजघराने से संबंध रखने वाले विजय सिंह नामक युवक जंगल में पशु चराने आया करता था। एक दिन उसने झाडय़िों के नीचे तपस्या में लीन तेजस्वी संत बाबा अजिपाल के दर्शन किए। बाबा के तेज और आध्यात्मिक प्रभाव से प्रभावित होकर वह नियमित रूप से उनके सत्संग में आने लगा। कहा जाता है कि एक दिन प्रसन्न होकर बाबा ने विजय सिंह से वरदान मांगने
को कहा।
ठीक होते हैं चर्म रोग
बाबा अजिपाल धाम के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है। विशेष रूप से चर्म रोगों और नेत्र संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोग यहां के पवित्र जल और विभूति को आस्था के साथ ग्रहण करते हैं। अनेक श्रद्धालु इसे अपने जीवन के सकारात्मक अनुभवों से जोडक़र देखते हैं।
ठंडी जोत की परंपरा
इस धाम की सबसे विशिष्ट परंपरा ‘ठंडी जोत’ चढ़ाने की है। श्रद्धालु दीपकों में घी और तेल अर्पित करते हैं, लेकिन उन्हें प्रज्वलित नहीं करते। यह परंपरा मनोकामना पूर्ति और श्रद्धा समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। पहले यहां आटे के दीपक चढ़ाने की परंपरा थी, लेकिन अब पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीपक अर्पित करने की अपील की जा रही है।
धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग
पूर्व जिला पार्षद सुशील कालिया, गोंदपुर बनेहड़ा अप्पर के पूर्व प्रधान सुरेश शर्मा, अभयपुर केप्रधान गुलशन चौधरी, उपप्रधान सुमित सिंह, विनय शर्मा तथा डंगोह खुर्द के पूर्व उपप्रधान खेम सिंह डढ़वाल ने सरकार से मांग की है कि उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी और प्राचीन माता भद्रकाली मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण बधमाणा सिद्ध स्थल को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए।
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