हिमाचल में आकार लेने लगी नई श्वेत क्रांति, ढगवार प्लांट में 24,000 लीटर प्रतिदिन पहुंचा दुग्ध संग्रह
धर्मशाला। सुख सरकार की दूरदर्शी नीतियों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के सरकार के संकल्पों से कांगड़ा जिला के किसानों और पशु पालकों के चेहरों पर खुशहाली की मुस्कान दिखने लगी है। प्रदेश सरकार द्वारा दूध खरीद मूल्य में की गई बढ़ोतरी का सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दिखाई देने लगा है। अब किसानों और बेरोजगारों के दूध उत्पादन की ओर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाए हैं। पशुपालन जो पहले केवल आजीविका का साधन माना जाता था अब किसानों के लिए मजबूत व्यवसाय बनता जा रहा है। सुख सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में नई श्वेत क्रांति आकार लेने लगी है।
दूध खरीद मूल्य बढ़ने पर 6200 से 24 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता में हुई बढ़ोतरी
तीन वर्ष में सरकार ने दूध के खरीद मूल्य में 21 रुपए प्रति किलो की वृद्धि की है। इस निर्णय के बाद किसानों में नया उत्साह देखने को मिला है और लोगों का डेयरी क्षेत्र की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसका परिणाम यह है कि दिसंबर 2023 में जहां केवल 44 दुग्ध सहकारी समितियों से लगभग 6200 लीटर दूध एकत्रित हो रहा था, वहीं आज यह बढ़कर 24000 लीटर प्रतिदिन हो गया है। साथ ही कांगड़ा कलस्टर में 352 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

डगवार में 225 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र
दुग्ध क्षेत्र को और सशक्त बनाने के लिए कांगड़ा जिले के डगवार में लगभग 225 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक पूर्णतः स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जो सितंबर तक तैयार होने की संभावना है। इसके अलावा, कांगड़ा दुग्ध संघ के अंतर्गत 20 हजार किलोलीटर क्षमता के दो नए चिलिंग सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं। इस नए प्लांट में दूध के साथ-साथ फ्लेवर्ड मिल्क, दही, लस्सी, मोजरेला चीज, पनीर, योगर्ट और खोया जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हिमाचल प्रदेश सरकार के ये प्रयास दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सहकारी दुग्ध समितियों में गाय का दूध लगभग 51 रुपए प्रति किलो तक खरीदा जा रहा है। अच्छे दाम मिलने से किसानों का रुझान पशुपालन की ओर बढ़ा है।

पशुपालक हुए सक्रिय
बेहतर आय की उम्मीद ने न केवल पुराने पशुपालकों को सक्रिय किया है, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं ने भी इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी का असर उत्पादन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एक वर्ष के दौरान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है।
क्या कहते हैं दूध उत्पादक
दाड़ी के पवन कहते हैं कि पहले दूध का मूल्य करीब 30 रुपए प्रति किलो मिलता था, लेकिन अब यह बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। खरीद मूल्य बढ़ने से दुग्ध उत्पादकों को राहत मिली है और आय में भी सुधार हुआ है। मैं प्रतिदिन करीब दस लीटर दूध सहकारी दुग्ध सभा को देता हूं। पशुपालन उनकी आय का प्रमुख साधन बनाया है। दूध से हर माह लगभग 15 हजार रुपए की आय हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च आसानी से चल रहा है और आगे पशुपालन बढ़ाने की योजना है।

सोसाइटी से जुड़े तंगरोटी के विकास सरीन कहते हैं कि दुग्ध उत्पादन के साथ लंबे अरसे से जुड़े हैं, लेकिन अब सरकार ने दूध के मूल्य में बढ़ोतरी की जिसके जिसके पश्चात लोगो में दूध उत्पादन के साथ स्वयं को जोड़ना आरंभ किया है और तंगरोटी में ही दुग्ध सहकारी समिति गठित कर करीब 1200 लीटर प्रतिदिन दूध डगवार मिल्क प्लांट के लिए सप्लाई किया जा रहा है।
ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के प्रबंधक अखिलेश पराशर का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी नीतियों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी से उत्पादन में दोगुना वृद्धि हुई है। सरकार अब प्लांटों की क्षमता बढ़ाने जा रही है, जिससे आने वाले समय में किसानों से और अधिक दूध खरीदा जा सकेगा।

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