नहीं कोई जिनके आसपास, वे लोग भी मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए बहुत खास

By: Jun 30th, 2026 12:08 am

सीएम का दुर्गम क्षेत्रों से लगाव फिर आया सामने; डोडरा क्वार, कुपवी, सरची, बागा सराहन के बाद पहुंचे बड़ा भंगाल

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — धर्मशाला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में शामिल कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल का दो दिवसीय प्रवास दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के समग्र विकास के प्रति उनकी संवेदनशीलता एवं विशेष लगाव का सशक्त प्रमाण है। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वर्तमान सरकार की विकास यात्रा केवल सडक़ों और शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने के संकल्प से प्रेरित है। जिन क्षेत्रों की आवाज़ वर्षों तक शिमला में सत्ता के गलियारों तक मुश्किल से पहुंच पाती थी, वहां आज मुख्यमंत्री स्वयं पहुंचकर लोगों के बीच बैठ रहे हैं, उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए यह सिद्ध किया है कि उनके लिए विकास का पैमाना वोटों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतें हैं। कम आबादी वाले और राजनीतिक दृष्टि से कम प्रभाव वाले क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोडऩे की उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। बड़ा भंगाल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा, ‘मैं यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि आपका दुख-दर्द बांटने आया हूं।’ यह कथन उनकी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। कांग्रेस सरकार के गठन के बाद जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के संतुलित विकास को नई गति मिली है।

सीएम को देख बड़ा भंगाल के लोग खुश

मुख्यमंत्री के आगमन से बड़ा भंगाल के लोग बहुत खुश नजर आए। स्थानीय निवासी कमलो देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे से उम्मीद है कि यहां पर सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। वहीं, रिशू राम ने कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने यहां पर रात्रि ठहराव किया है। उन्होंने कहा कि अब हमारी समस्याओं का समाधान होगा। संतोष कुमारी ने कहा कि हमने अपनी बातें मुख्यमंत्री सुक्खू के सामने रखी हैं और उन्होंने अधिकारियों को इनका तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याएं निकट से समझीं

मुख्यमंत्री सुक्खू इससे पहले शिमला के दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार और कुपवी, कुल्लू के बागा सराहन तथा बंजार के सरची जैसे कठिन इलाकों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों में रात्रि प्रवास कर स्थानीय लोगों की समस्याओं को निकट से समझा और उनके समाधान के लिए तत्काल निर्णय भी लिए। यह केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता और जनसरोकारों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। इसी सोच के तहत सरकार बनने के बाद पहला राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस जनजातीय क्षेत्र स्पीति के काजा में आयोजित किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2025 का राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस भी देश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक पांगी में आयोजित कर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास और सम्मान पर प्रदेश के हर क्षेत्र का समान अधिकार है।


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