वित्तीय हानि के आकलन को बनाएं उच्च स्तरीय समिति

By: Jun 11th, 2026 10:57 pm

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किया आग्रह

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

हिमाचल को हो रही राजस्व हानि के आकलन के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आग्रह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री के समक्ष किया है। साथ ही समिति की रिपोर्ट के आधार पर हिमाचल को न्यायोचित हिस्सा प्रदान करने का अनुरोध भी किया है। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी), मुफ्त बिजली और बीबीएमबी समेत प्रदेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाकर प्रदेश के हितों की जोरदार पैरवी की। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। बैठक में मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के समक्ष मौजूदा वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी व्यवस्था से उत्पन्न राजस्व हानि का आकलन कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति में हिमाचल प्रदेश महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन उक्त परिस्थितियों के कारण राज्य को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से राज्य को उसका न्यायोचित हिस्सा प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बहुत प्रभावित हुई है। पहाड़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मांग पर जारी की गई 25,000 करोड़ रुपए की राशि इस नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने विकास गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए इस राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपए करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ग्रीन फ्रंटियर है और विकसित भारत के लक्ष्य को वास्तविक रूप देने के लिए केंद्र सरकार को राज्य की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपए मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 13,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपए की बकाया राशि भी प्राप्त नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव झेलने के बावजूद प्रदेश को केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपए की विशेष सहायता राशि का अब भी इंतजार है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज तथा बैटरी स्टोरेज जैसी पहलों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए गगल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया, ताकि हिमाचल प्रदेश को वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विशेष आमंत्रित सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव केके पंत भी उपस्थित थे।


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