फोरलेन ने उलझाए लोग, न ठिकाना मालूम, न व्यापार, राजोल से कछियारी तक उलझन में सैकड़ों परिवार

By: Jun 11th, 2026 12:01 am

गगल एयरपोर्ट के पास अटकी सूई, राजोल से कछियारी तक सैकड़ों परिवार मानसिक उलझन में जीने को मजबूर

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — धर्मशाला

एक तरफ पठानकोट-मंडी फोरलेन का निर्माण कार्य जिला कांगड़ा में जोर-शोर से चल रहा है, तो दूसरी तरफ गग्गल हवाई अड्डे का विस्तारीकरण भी रफ्तार पकड़ रहा है, लेकिन इन दोनों महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं के बीच पिस रहा है राजोल से कछियारी तक का वह आम आदमी, जिसे न घर का ठिकाना मालूम है, न दुकान का। गग्गल एयरपोर्ट के समीप से गुजरने वाले फोरलेन की एलाइनमेंट आज तक तय न हो पाने के कारण इस पूरे क्षेत्र के सैकड़ों परिवार गहरी अनिश्चितता और मानसिक उलझन के बीच जीने को मजबूर हैं। पठानकोट से मंडी तक लगभग संपूर्ण फोरलेन मार्ग की रूपरेखा और एलाइनमेंट को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सैकड़ों किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर काम आगे बढ़ता रहा, लेकिन कांगड़ा के राजोल से कछियारी तक के चंद किलोमीटर के इस संवेदनशील हिस्से पर आकर सब कुछ थम गया। यह मार्ग सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है, फिर भी इसी अहम पैच पर निर्णय लेने में लंबे समय से टाल-मटोल जारी है। स्थानीय प्रभावितों और ग्रामीणों के अनुसार शुरुआत में एयरपोर्ट की बैक साइड यानी धर्मशाला की दिशा से फोरलेन गुजारने का सर्वे किया गया था।

इसके बाद अचानक एक नया सर्वे एयरपोर्ट के निचले हिस्से इच्छी-गग्गल की तरफ से कराया गया। इन दो परस्पर विरोधी सर्वेक्षणों ने भ्रम को और गहरा कर दिया। न पहले सर्वे को मंजूरी मिली, न दूसरे को और इस खींचतान में आम आदमी की जिंदगी ठहर गई। इस पूरी उलझन की जड़ में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की प्रशासनिक सुस्ती साफ नजर आती है। नियमों के तहत इस संवेदनशील पैच की एलाइनमेंट को अंतिम स्वीकृति देने से पहले एक विशेष कंसलटेंट कंपनी और तकनीकी टीम का चयन अनिवार्य है, जो दोनों सर्वेक्षणों का तकनीकी मूल्यांकन कर सके। लंबा अरसा गुजर जाने के बाद भी न कंसलटेंट कंपनी फाइनल हुई है, न ही यह जिम्मेदारी किसी एजेंसी को सौंपी गई है। जब तक विशेषज्ञ टीम जमीन पर उतरकर दोनों विकल्पों को परखेगी नहीं, तब तक फोरलेन की दिशा तय होना संभव ही नहीं। इस लापरवाही का सीधा खामियाजा राजोल-कछियारी क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपने घर, जमीन और रोजगार के भविष्य को लेकर घोर अंधकार में खड़े हैं।

दोहरी मुसीबत

जो परिवार पहले से ही गग्गल एयरपोर्ट विस्तारीकरण की भेंट चढक़र विस्थापन की पीड़ा झेल रहे हैं, उन पर फोरलेन की अनिश्चितता ने दोहरी मुसीबत थोप दी है। प्रभावितों का कहना है कि यदि एलाइनमेंट समय रहते स्पष्ट हो जाए, तो वे कम से कम नए सिरे से रहने और कारोबार की व्यवस्था तो कर सकें। उन्हें यह भी नहीं पता कि किस दिशा में कदम बढ़ाएं।


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