ग्रेजिंग परमिट की जांच करेगी सरकार, उपयोग न होने पर अनुमति पत्र होंगे रद्द, पांच साल बाद होगी परमिट की समीक्षा
वरिष्ठ संवाददाता — शिमला
प्रदेश में ग्रेजिंग के लिए जारी किए गए परमिट की राज्य सरकार जांच करेगी। जांच में गे्रजिंग परमिट की उपयोगिता को देखा जाएगा। इसके बाद उपयोग में न लाए जाने वाले परमिट को सरकार रद्द कर देगी। वहीं, सरकार ने ग्रेजिंग परमिट की पांच वर्षों के बाद समीक्षा करने का भी नीति में प्रावधान किया गया है। इसके लिए चीफ कंजरवेटर और डीएफओ की अध्यक्षता में समितियों का गठन होगा। हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई नई ग्रेजिंग पॉलिसी में यह व्यवस्था बनाई गई है। नई नीति को लेकर अब राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी करना बाकी है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के भेड़पालकों व पारंपरिक चरवाहों को राहत प्रदान करने का फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने नई ग्रेजिंग पॉलिसी को मंजूरी प्रदान की है। नीति में सरकार की ओर से कई व्यवस्थाएं की गई है। नीति में गे्रजिंग परमिट की हर पांच वर्ष की अवधि के बाद इनकी समीक्षा करने की भी व्यवस्था बनाई गई है। इसके लिए चीफ कंजरवेटर और डीएफओ की अगवाई में समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में प्रवासी और पशुपालकों, पंचायत प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों तथा वूल फेडरेशन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। ये समितियां हर पांच वर्ष में पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर चराई परमिटों की समीक्षा करेगी।
चरवाहों के लिए चरागाहों को खोलने का प्रावधान
नई नीति में चराई अनुमति की प्रक्रिया को पूरी तरह से वैज्ञानिक आधार पर बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए चरागाहों की उपलब्धता, वन क्षेत्रों की वहन क्षमता, वन्यजीवों की आवश्यकताएं तथा स्थानीय लोगों की पारंपरिक चराई अधिकारों का भी आकलन करने की व्यवस्था बनाने की बात नीति में कही गई है। मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई नीति में भेड़पालकों व चरवाहों के लिए चरागाहों को खोलने का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत सात वर्ष से अधिक पुराने वनरोपण क्षेत्रों में नियंत्रित चराई की अनुमति दी जाएगी।
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