बिजली परियोजनाओं के नियम बदले, बायोमास, गैसीफिकेशन और हाइब्रिड ऊर्जा पर परिभाषाएं स्पष्ट

By: Jun 25th, 2026 12:01 am

विद्युत नियामक आयोग ने जारी की अधिसूचना; बायोमास, गैसीफिकेशन और हाइब्रिड ऊर्जा पर परिभाषाएं स्पष्ट

वरिष्ठ संवाददाता — शिमला

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2017 के नवीकरणीय ऊर्जा टैरिफ नियमों में संशोधन किया है। इस संबंध में आयोग की ओर से एक अधिसूचना भी बुधवार को जारी की है। संशोधित नियमों के तहत बायोमास और बायोमास गैसीफिकेशन की परिभाषाओं को विस्तार से शामिल किया गया है। बायोमास में कृषि, बागबानी और वानिकी गतिविधियों से निकलने वाले अवशेष, जैसे भूसा, डंठल, पत्तियां, चीड़ की सूखी सुइयां, लकड़ी का कचरा तथा कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से निकलने वाले अवशेष शामिल किए गए हैं। वहीं, बायोमास गैसीफिकेशन को ऐसी प्रक्रिया बताया गया है, जिसमें बायोमास के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन और मीथेन जैसी ज्वलनशील गैसें उत्पन्न होती हैं, जिनका उपयोग बिजली उत्पादन में किया जा सकता है।

आयोग ने विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की संचालन अवधि भी तय की है। इसके अनुसार पवन ऊर्जा परियोजनाओं और बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं की 25 वर्षों तक संचालित किया जा सकेगा। छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के लिए यह अवधि 40 वर्ष रखी गई है, जबकि नगर ठोस कचरे और रिफ्यूज आधारित ऊर्जा परियोजनाओं की उपयोगी आयु 20 वर्ष तय की गई है। संशोधन में सौर फोटोवोल्टिक (पीवी), फ्लोटिंग सोलर और सोलर थर्मल परियोजनाओं की उपयोगी आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अलावा बायोमास गैसीफायर आधारित तथा बायोगैस आधारित बिजली परियोजनाओं की उपयोगी आयु भी 25 वर्ष तय की गई है।

अधिसूचना में ये भी प्रावधान

अधिसूचना में नवीकरणीय हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज) वाली परियोजनाओं के लिए भी अलग प्रावधान किए गए हैं। हाइब्रिड परियोजनाओं की उपयोगी आयु उसमें शामिल विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों की न्यूनतम उपयोग की समयावधि के आधार पर तय होगी। वहीं, स्टोरेज वाली परियोजनाओं के लिए उपयोगी आयु उसी परियोजना के बराबर मानी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इन संशोधनों से टैरिफ निर्धारण, परियोजनाओं के वित्तपोषण तथा निवेश संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी।


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