हिमाचल के रेशम कीट पालकों का नया रिकार्ड, खुले बाजार में 1960 रुपए प्रतिकिलो रेट मिलने से खुश
मुख्यमंत्री के हिम सिल्क मिशन विजन को सफलता
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-शिमला
प्रदेश के रेशम क्षेत्र के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। प्रदेश के कोया उत्पादक किसानों को खुले नीलामी बाजार में उनकी उपज का 1960 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जो राज्य के सेरीकल्चर इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मूल्य माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने न केवल प्रदेश के रेशम कृषकों की मेहनत को नई पहचान दी है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा सेरीकल्चर क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सफलता को भी प्रमाणित किया है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रदेश के सभी रेशम कृषकों, विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है।
राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में प्रदेश के रेशम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए हिम सिल्क मिशन की घोषणा की गई है, जिसके लिए दो करोड़ का प्रावधान किया है। इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश में रेशम उत्पादन, गुणवत्ता युक्त कोया उत्पादन, शहतूत रोपण विस्तार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार, महिला एवं युवा सहभागिता तथा विपणन सुविधाओं को सुदृढ़ करना है।
उद्योग मंत्री बोले, रेशम कृषकों के लिए गर्व का क्षण
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस उपलब्धि को प्रदेश के रेशम कृषकों के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। किसानों को गुणवत्तायुक्त कीट बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, रोग प्रबंधन तथा विपणन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोया गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
हिम सिल्क मिशन से नई संभावनाओं के खुलेंगे द्वार
उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश में संचालित खुले एवं पारदर्शी कोया नीलामी बाजारों ने किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज प्राप्त 1960 प्रति किलोग्राम का मूल्य न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए एक रिकॉर्ड है। हिम सिल्क मिशन के माध्यम से प्रदेश में रेशम क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
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