केंद्र की लापरवाही से ट्रेक से उतर गई कांगड़ा घाटी रेलगाड़ी
कांगड़ा घाटी रेलवे की बदहाल स्थिति पर क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ी, रेलवे के बेहतर संचालन की उठी मांग
कार्यालय संवाददाता- बैजनाथ
हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन की पहचान मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेलवे के संरक्षण, आधुनिकीकरण और बेहतर संचालन को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर आवाज बुलंद होने लगी है। पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक लगभग एक सदी से अधिक समय से संचालित यह नैरोगेज रेलमार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि कांगड़ा घाटी की संस्कृति, इतिहास, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों तथा रेलवे प्रेमियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कांगड़ा घाटी रेलवे की स्थिति लगातार चिंताजनक होती गई है। रेलवे ट्रैक, स्टेशन भवनों, यात्री सुविधाओं और संचालन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार न होने के कारण यह विश्वस्तरीय पर्यटन क्षमता रखने वाला रेलमार्ग अपनी पूरी संभावनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहा है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जम्मू रेल मंडल कांगड़ा घाटी रेलवे का प्रभावी संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है, तो रेलवे मंत्रालय को इस रेलमार्ग को किसी अन्य मंडल के अधीन लाने पर विचार करना चाहिए। लोगों का मानना है कि अंबाला मंडल जो कालका-शिमला रेलवे जैसी विश्व प्रसिद्ध विरासत रेल सेवा का सफल संचालन करता है। कांगड़ा घाटी रेलवे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं कुछ लोगों का यह भी मत है कि फिरोजपुर मंडल के अधीन रहते हुए इस रेलमार्ग का संचालन अपेक्षाकृत बेहतर था, इसलिए उसे पुन: उसी मंडल में शामिल करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
विरासत के संरक्षण का सवाल
कांगड़ा घाटी रेलवे केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, गौरव और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इसे उपेक्षा का शिकार बनने देने के बजाय विश्वस्तरीय विरासत एवं पर्यटन रेलमार्ग के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। अब लोगों
की निगाहें केंद्र सरकार, रेलवे मंत्रालय और रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं।
अधिकांश रेलवे स्टेशनों की स्थिति दयनीय
बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन को छोडक़र पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलखंड के अधिकांश स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। कई स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था, शौचालय, प्लेटफॉर्म शेड, बैठने की बेंच, प्रतीक्षालय और प्रकाश व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। स्टेशन भवनों तथा रेलवे कर्मचारियों के आवासीय क्वार्टरों की हालत भी कई स्थानों पर जर्जर बनी हुई है।
यात्रियों की संख्या बढऩे से दिख रही संभावनाएं
रेलवे की मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यात्रियों का आकर्षण लगातार बना हुआ है। हाल ही में कई ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिली। पंचरुखी रेलवे स्टेशन पर एक ही दिन में लगभग 500 टिकटों की बिक्री ने यह साबित कर दिया कि यदि सेवाओं में सुधार किया जाए, तो कांगड़ा घाटी रेलवे यात्री संख्या और राजस्व दोनों मामलों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर
सकती है।
Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also, Download our Android App or iOS App
