बड़सर में ऑनलाइन नहीं मिल रहे जमीन के कागजात

By: Jun 6th, 2026 12:44 am

छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए पटवारियों पर रहना पड़ रहा है निर्भर, बंदोबस्त न हो पाने के कारण भविष्य में आ सकती हैं भारी परेशानियां

निजी संवाददाता – बड़सर
उपमंडल बड़सर के अंतर्गत राजस्व विभाग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 116 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बड़सर में भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जबकि इसी उपमंडल के बिझड़ी क्षेत्र में वर्ष 2004 से शुरू हुई यह प्रक्रिया आज तक अधर में लटकी हुई है। बड़सर में अंग्रेजों के समय (वर्ष 1910) के बाद से बंदोबस्त नहीं हुआ था और पुराने उर्दू रिकॉर्ड के कारण यह कार्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। लोगों की निरंतर मांग और मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बादए फरवरी, 2026 में तहसीलदार रितेश कंवर ने इस कार्य की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में 11 पटवारियों और 4 कानूनगो की टीम ने मात्र तीन महीनों के अथक प्रयास से 3800 खसरा नंबरों की 30 मौसाबियां तैयार कर इस जटिल काम को अंजाम दिया। इस बड़ी सफलता के बीच बिझड़ी के निवासियों की स्थिति बिल्कुल विपरीत है।

डिजिटल युग में भी बिझड़ी के लोग अपनी जमीन के कागजात ऑनलाइन प्राप्त करने से वंचित हैं और छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए पटवारियों के रहमोकरम पर निर्भर हैं। बंदोबस्त न होने के कारण लगातार हो रहे नए निर्माण कार्यों से भविष्य में जमीनी विवाद और कब्जे की समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। बड़सर में मिली इस त्वरित सफलता ने अब बिझड़ी के लोगों में भी यह उम्मीद जगाई है कि शायद उनका दशकों पुराना इंतजार भी जल्द खत्म होगा। बिझड़ी क्षेत्र में बंदोबस्त प्रक्रिया की विफलता के पीछे मुख्य रूप से विभागीय लापरवाही और त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली रही है। विभाग ने 30 दिसंबर, 2004 को बिझड़ी में बंदोबस्त शुरू किया था, लेकिन पैमाइश में 13, 10 और 16 मीटर तक की भारी गलतियां की गईं। आरटीआई कार्यकत्र्ता दलवीर कौशल द्वारा पत्राचार और आरटीआई के माध्यम से मामले का खुलासा करने के बाद अक्तूबर, 2018 में सेटलमेंट ऑफिसर (एसओ) धर्मशाला ने पुरानी पैमाइश को निरस्त कर नए सिरे से काम करने के निर्देश दिए थे।

जल्द ही पूरा किया जाएगा बंदोबस्त का काम
अब बड़सर का कार्य पूरा होने के बाद तहसीलदार रितेश कंवर ने बताया है कि वहां एसओ का सर्टिफिकेट लग चुका है और एक महीने के भीतर सारा रिकॉर्ड हमीरपुर में जमा कर दिया जाएगा। उन्होंने बड़सर के लोगों से अपील की है कि वे 4-5 महीने बाद अपने रिकॉर्ड की कॉपी निकालकर उसकी जांच अवश्य कर लें। वहीं बिझड़ी में लंबित पड़े कार्य को लेकर प्रशासन ने फैसला लिया है कि अब वहां मैन्युअल पैमाइश के बजाय आधुनिक ‘रोवर’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।कंपनी से मशीनें मंगवा ली गई हैं और प्रशासन का दावा है कि जल्द ही बिझड़ी क्षेत्र में भी इस नई तकनीक के माध्यम से भूमि बंदोबस्त का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कर लिया जाएगा।


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