कितनी भी तरक्की करें, पर जड़ों को मत भूलें, पूर्व राष्ट्रपति ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी
कुल्लू पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — कुल्लू
आधुनिक जीवन की भागदौड़ में लोग भौतिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहे हैं, जबकि वास्तविक सुख अपने भीतर झांकने और प्रकृति के करीब रहने में है। इनसान को ऊंचे पद पर पहुंच जाने के बाद भी अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह कहना है पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का। दरअसल विश्व जागृति मिशन के जागृति आश्रम में सोमवार का दिन आध्यात्मिकता, प्रेरणा और भावनाओं से भरा रहा। देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आश्रम पहुंचकर सबसे पहले प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने पूजा-अर्चना एवं हवन में भाग लिया और फिर साधना धाम में आयोजित विशाल सत्संग कार्यक्रम में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने मनुष्य के भीतर बढ़ते अहंकार को जीवन की अनेक समस्याओं की जड़ बताते हुए कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर से अहंकार को समाप्त कर दें, तो तनाव स्वत: दूर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ जुड़ाव और सरल जीवनशैली मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करती है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करता था। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त करना और आगे बढऩा आसान नहीं था, लेकिन परिवार के संस्कार, मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा दी। वह आज भी अपने गांव और घर के बेहद करीब हैं, उनकी बहन भी गांव में ही रहती है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि चाहे वे किसी भी क्षेत्र में कितनी भी सफलता हासिल कर लें अपने गांव, अपनी मिट्टी संस्कृति से हमेशा जुड़े रहें।
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