बहुमत के गणित में उलझे दल, शह-मात का खेल शुरू

By: Jun 6th, 2026 12:43 am

निकाय और जिला परिषद के साथ-साथ बीडीसी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चयन पर भी सभी की नजरें, बैठकों का दौर तेज
दिव्य हिमाचल ब्यूरो – बिलासपुर
जिला बिलासपुर में नगर निकाय और जिला परिषद चुनावों के साथ साथ पंचायत समितियां भी अब राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई हैं। पंचायत समिति (बीडीसी) चुनाव परिणाम घोषित होने के साथ ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चारों विकास खंडों में सत्ता की बागडोर किसके हाथ जाएगी, इसे लेकर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय खेमों में रणनीतिक मंथन का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि पंचायत समिति चुनाव गैरदलीय आधार पर लड़े जाते हैं, लेकिन वास्तविक राजनीतिक तस्वीर इससे अलग है। प्रत्येक चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मैदान में थे। अब दोनों दल अपने-अपने समर्थित विजयी सदस्यों की संख्या का आकलन कर बहुमत जुटाने की कवायद में लग गए हैं। यही वजह है कि पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव स्थानीय राजनीति के साथ-साथ भविष्य के बड़े राजनीतिक समीकरणों का आधार भी माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत समितियों की सत्ता केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने का सबसे प्रभावी मंच भी है।

ऐसे में अध्यक्ष पद पर कब्जा भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। जिले के चारों विकास खंडों में अध्यक्ष पदों का आरक्षण अलग-अलग होने के कारण राजनीतिक समीकरण भी अलग-अलग बन रहे हैं। यहां बता दें कि इस बार घुमारवीं विकास खंड में अध्यक्ष पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि झंडूता में यह पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए सुरक्षित रखा गया है। वहीं सदर और श्रीनयनादेवी विकास खंड में अध्यक्ष पद अनारक्षित हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को बहुमत के साथ-साथ आरक्षण की शर्तों को ध्यान में रखकर अपने उम्मीदवारों का चयन करना होगा। पंचायत समिति अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता नहीं करती, बल्कि निर्वाचित बीडीसी सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करते हैं। ऐसे में प्रत्येक ब्लॉक में बहुमत का आंकड़ा जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब समर्थकों को एकजुट रखने, संभावित गठजोड़ तैयार करने और निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल करने के प्रयास तेज हो गए हैं।


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