मनाली-लेह होगा मॉर्डन आल वैदर Road, दूरी भी होगी कम, हिमाचल को होंगे बड़े लाभ, छह घंटे रह जाएगा सफर

By: Jun 15th, 2026 7:58 pm

बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला में प्रस्तावित तीन सुरंगों की डीपीआर तैयार कर रहा एनएचआईडीसीएल

हिमाचल को पर्यटन, व्यापार और सामरिक दृष्टि से होंगे बड़े लाभ, कम होकर छह घंटे रह जाएगी सफर

वरिष्ठ संवाददाता-शिमला

मनाली-लेह हाइवे पर प्रस्तावित तीन सुरंगों के निर्माण के बाद यह मार्ग मॉर्डन ऑल वैदर रोड़ बनेगा और यह देश के सबसे ऊंचे मोटर योग्य वाली सडक़ों में शामिल होगा। टनल निर्माण सें मनाली से लेह के बीच की दूरी पचास किलोमीटर कम होगी। साथ ही सफर भी दस घंटे से कम होकर छह घंटे तक रह जाएगा। मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को देश के सबसे आधुनिक और वर्षभर चालू रहने वाले पर्वतीय मार्गों में शामिल करने की दिशा में केंद्र सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत इस मार्ग पर बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला के नीचे तीन नई सुरंगों के निर्माण की योजना है और इनकी डीपीआर को लेकर भी काम शुरू हो चुका है। इन सुरंगों के निर्माण से हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बीच हर मौसम में सुरक्षित होगा। इन महत्वाकांक्षी सुरंग परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का जिम्मा नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को सौंपा गया है। केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडक़री ने हाल ही में इन तीनों सुरंगों को लेकर जानकारी सांझा की और बताया था कि डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2021 में एनएचआईडीसीएल ने इन परियोजनाओं पर प्रारंभिक कार्य शुरू किया था। हालांकि यह मार्ग सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) के सामरिक सडक़ नेटवर्क का हिस्सा है, लेकिन तकनीकी योजना और डीपीआर का कार्य एनएचआईडीसीएल देख रहा है। अंतिम निर्माण एजेंसी का चयन केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद किया जाएगा।

प्रस्तावित योजना के तहत बारालाचा ला के नीचे लगभग 13.2 किलोमीटर, लाचुलुंग ला के नीचे करीब 14.7 किलोमीटर तथा तंगलंग ला के नीचे लगभग 7.3 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण किया जाना है। इन सुरंगों के बनने के बाद वाहन बर्फबारी और खराब मौसम से प्रभावित ऊंचे दर्रों को पार किए बिना सीधे सुरंगों से होकर गुजर सकेंगे। इससे यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनेगी। प्रस्तावित सुरगों का निर्माण पूरा होने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी करीब 50 किलोमीटर तक कम हो सकती है। जबकि वर्तमान में लगभग 10 घंटे का सफर घटकर करीब 6 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को वर्षभर बेहतर सडक़ सुविधा उपलब्ध होगी और मौसम के कारण होने वाली बाधाएं भी काफी कम हो जाएंगी। इन परियोजनाओं से प्रदेश को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्षभर सडक़ संपर्क उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होगी और लंबे समय तक मार्ग बंद रहने की समस्या में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से मनाली, लाहौल, स्पीति और लेह में पर्यटन गतिविधियों को भी नया बल मिलेगा। होटल उद्योग, होम-स्टे, टैक्सी संचालन, रेस्टोरेंट व्यवसाय और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ पहुंचने की संभावना है।

जबकि किसानों और बागवानों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए बेहतर और तेज परिवहन सुविधा मिलेगी। वहीं सडक़ अवसंरचना के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। अहम है कि सामरिक दृष्टि से भी मनाली-लेह मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण राजमार्गों में से एक है। यह मार्ग लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की रसद, सैन्य उपकरणों और जवानों की आवाजाही का प्रमुख माध्यम है। नई सुरंगों के निर्माण के बाद सेना की आपूर्ति व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और मौसम पर कम निर्भर हो जाएगी। चीन सीमा के निकट संवेदनशील क्षेत्रों तक हर मौसम में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इन परियोजनाओं को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बहरहाल अटल टनल, जोजिला टनल और निर्माणाधीन शिंकू ला सुरंग की तर्ज पर बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला सुरंग परियोजनाओं के मूर्तरूप लेने से मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग देश के सबसे आधुनिक, सुरक्षित और ऑल-वेदर पर्वतीय मार्गों में शामिल हो जाएगा।

—अजय


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