सात जुलाई तक करंे बौनी किस्मों की रोपाई

By: Jun 18th, 2026 12:02 am

कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने किसानों की धान की रोपाई के लिए दी सलाह

कार्यालय संवाददाता-पांवटा साहिब
कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने बताया कि जून महीने के दूसरे पखवाड़े के लिए किसानों को धान, मक्की, दलहन, सब्जी, चारा फसल, पशुपालन और मत्स्य पालन पर विस्तृत सलाह जारी की गई है। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने बताया कि धान की लंबी और बौनी किस्मों की रोपाई 15 जून से सात जुलाई तक और बासमती की रोपाई 20 से 30 जून तक की जा सकती है। मक्की की बुवाई 15 से 30 जून तक पूरी कर लें। चारे के लिए अफ्रीकन टॉल और देसी मक्की 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बोएं या 75 प्रतिशत चरी और 25 प्रतिशत बाजरा मिलाकर बुवाई करें।

मक्की में कटुआ कीट और सफेद सुंडी के नियंत्रण के लिए सड़ी गोबर खाद का उपयोग करें। टमाटर, बैंगन, भिंडी में फल छेदक के लिए साइपरमेथ्रिन का छिडक़ाव करें। मक्का में फॉल आर्मी वर्म से बचाव के लिए अगेती बुवाई, नीम खली का प्रयोग और बीज उपचार की सलाह दी गई है। डा. पंकज मित्तल ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुओं को ठंडा ताजा पानी, संतुलित आहार और साफ-सुथरा स्थान उपलब्ध करवाएं। लवण की कमी से बचाने के लिए नमक मिश्रण चारे और पानी में मिलाएं। दुधारू पशुओं को संतुलित आहार दें और गोबर जांच करवाकर पशु चिकित्सक की सलाह से कृमिनाशक दवा दें। मुर्गियों को सुबह-शाम फीड दें, पानी की अच्छी व्यवस्था रखें और अंदर ताजी हवा आने का प्रबंध करें। डा. पंकज मित्तल ने बताया कि जून में सूर्योदय से पहले तालाब में ताजा पानी डालें या एरेटर्स द्वारा ऑक्सीजन की मात्रा ठीक रखें। उच्च ऑक्सीजन मछली को स्वस्थ रखेगी और भोजन परिवर्तन दक्षता बढ़ाएगी। यदि मछली सतह पर आए या रोग के लक्षण दिखें तो ताजे पानी का प्रवाह और पानी की गुणवत्ता सुधारें।


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