कारगिल विजय के 27 वर्ष : वीरता, शौर्य और बलिदान की अमर गाथा
स्टाफ रिपोर्टर—शिमला
देश 26 जुलाई को 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल की दुर्गम और बर्फ से ढकी चोटियों पर अदम्य साहस, उत्कृष्ट रणनीति और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया था। यह दिन उन अमर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। कारगिल युद्ध के दौरान 18 ग्रेनेडियर्स की कमान संभालने वाले मंडी निवासी ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशाल ठाकुर ने कहा कि कारगिल विजय केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के साहस, नेतृत्व, अनुशासन और अटूट संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद भारतीय जवानों ने असाधारण मनोबल का परिचय देते हुए विजय हासिल की और पूरी दुनिया के सामने भारतीय सेना की क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में 18 ग्रेनेडियर्स ने 2 राजपूताना राइफल्स और 8 सिख बटालियन के साथ मिलकर टाइगर हिल और तोलोलिंग जैसी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चोटियों पर तिरंगा फहराया। इस युद्ध में उनकी यूनिट को 52 वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए, जो जवानों की बहादुरी और अद्वितीय पराक्रम का प्रमाण हैं। कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें हिमाचल प्रदेश के 52 जवान भी शामिल थे।
ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि कारगिल युद्ध ने देश को कई महत्वपूर्ण सीख दी। सीमाओं पर चौबीसों घंटे सतर्क निगरानी, मजबूत खुफिया तंत्र, आधुनिक सैन्य तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के अनुभवों ने भारत की रक्षा नीति को नई दिशा दी। युद्ध के बाद सीमा प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था, सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए, जिससे भविष्य की किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता और अधिक सुदृढ़ हुई।ब्रिगेडियर ठाकुर ने युवाओं से कारगिल के वीरों के साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर हथियार उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा से पालन कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कारगिल विजय दिवस देशवासियों को यह भी याद दिलाता है कि भारत की सुरक्षा हमारे वीर सैनिकों के त्याग, समर्पण और बलिदान की बदौलत सुनिश्चित होती है। कारगिल के रणबांकुरों का अद्वितीय शौर्य और बलिदान सदैव आने वाली पीढिय़ों को राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।
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