पक्षियों की 600 दुर्लभ प्रजातियां कैमरे में कैद, डाक्टर अभिनव ने वन्य जीव संरक्षण की दुनिया में रचा इतिहास
धर्मशाला के डाक्टर अभिनव चौधरी ने वन्य जीव संरक्षण की दुनिया में रचा इतिहास
स्टाफ रिपोर्टर — धर्मशाला
जोनल अस्पताल धर्मशाला में कार्यरत त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अभिनव चौधरी ने वन्यजीव संरक्षण की दुनिया में एक अनोखा और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पक्षियों की 600 अलग-अलग प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों को अपने कैमरे में कैद किया है। यह उपलब्धि इसलिए बेहद खास है, क्योंकि इनमें से कई पक्षी बेहद दुर्लभ हैं, और राज्य में बहुत कम ही दिखाई देते हैं। वह संभवत: अकेले ऐसे वन्यजीव प्रेमी हैं, जिन्होंने इतने बड़े आंकड़े को छुआ है। साल 2017 में वन विभाग की सूची के अनुसार हिमाचल में पक्षियों की 672 प्रजातियां दर्ज थीं, जिसका मतलब है कि इस डाक्टर ने अपने लैंस के जरिए राज्य के लगभग हर कोने के पक्षियों का एक जीवंत रिकार्ड तैयार कर दिया है। डा. अभिनव चौधरी पिछले 25 सालों से बिना किसी आधुनिक मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया ग्रुप या ऑनलाइन डाटाबेस की मदद के बिना केवल पुराने जमाने के धैर्य, दूरबीन और कैमरे के भरोसे इस जुनून को जी रहे हैं।
इस लंबे सफर में उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे हैं, और राज्य में पक्षियों के करीब 30 नए रिकॉर्ड भी खोजे हैं। पक्षियों की इस विविधता को कैमरे में उतारने के लिए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया है। उत्तरी भाग के बर्फीले व ऊंचे इलाकों जैसे लाहुल-स्पीति और पांगी में उन्होंने रेड क्रॉस बिल और तिब्बती सैंडग्राउज जैसे पहाड़ी पक्षियों की तस्वीरें लीं। इसके उलट, दक्षिणी हिस्से में स्थित सिरमौर के घने जंगलों में उन्होंने हुडेड पिट्टा जैसे उष्णकटिबंधीय पक्षियों को ढूंढा। डा. चौधरी बताते हैं कि इस काम का सबसे दुखद पहलू प्रकृति और जीवों का तेजी से खत्म होना है। आज भी कई इलाकों में अवैध शिकार जारी है, और विकास के नाम पर जंगलों की कटाई तथा जलस्रोतों को नष्ट किया जा रहा है, जिससे इन पक्षियों के रहने की जगह छिन रही है।
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