शिलाई में मक्की पर फॉल आर्मीवर्म का अटैक, किसानों की बढ़ीं मुश्किलें
60 से 80 फीसदी तक उपज घटने की आशंका, कृषि विभाग ने नियमित निगरानी-वक्त पर नियंत्रण की दी सलाह
निजी संवाददाता-शिलाई
शिलाई विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में मक्के की फसल पर फॉल आर्मीवर्म (सैनिक कीट) का प्रकोप तेजी से फैलने लगा है। इस कीट के बढ़ते हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के सामने फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती में अपनाए जाने वाले जैविक उपाय इस कीट पर प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। वहीं, यदि रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है तो फसल की प्राकृतिक गुणवत्ता और उसकी पहचान प्रभावित होने का खतरा रहता है। हालांकि कृषि विभाग प्राकृतिक खेती के अनुरूप विभिन्न जैविक उपायों की सलाह दे रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि इनसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फॉल आर्मीवर्म का लार्वा मक्के की पत्तियों को खाकर बड़े-बड़े छेद कर देता है और पौधे के गोफ (व्हॉर्ल) में छिपकर लगातार नुकसान पहुंचाता है। अधिक प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन में 60 से 80 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गोफ में कीट या उसका मल दिखाई देने पर तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाएं। रासायनिक खेती करने वाले किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें, जबकि प्राकृतिक खेती करने वाले किसान यथासंभव प्राकृतिक विधियों से ही कीट प्रबंधन करें। उन्होंने किसानों को नाइट्रोजन उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाने की भी सलाह दी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि फॉल आर्मीवर्म के प्रकोप की सूचना तुरंत नजदीकी कृषि प्रसार अधिकारी या कृषि विभाग को दें।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
खेतों का नियमित निरीक्षण करें और मक्का के गोफ (व्हॉर्ल) की जांच करते रहें
गोफ में कीट या उसका मल दिखाई दे तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाएं
रासायनिक खेती करने वाले किसान केवल कृषि विशेषज्ञों की सलाह से अनुशंसित कीटनाशकों का ही प्रयोग करें
प्राकृतिक खेती करने वाले किसान जैविक एवं प्राकृतिक तरीकों को प्राथमिकता दें
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