‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर होगी सजा, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 पारित

By: Jul 30th, 2026 5:38 pm

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान के लिये दंड का प्रावधान करने से संबंधित राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 गुरुवार को लोकसभा में पारित होने के बाद इस पर संसद की मुहर लग गयी। इस विधेयक को राज्यसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया था। तीन बार स्थगन के बाद तीन बजकर तीस मिनट पर सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने हंगामे के बीच राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक को चर्चा और पारित कराने के सदन के समक्ष रखा। द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की के. कनिमोझी ने हंगामे के बीच इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र विरोधी करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह संघवाद के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा सदन व्यवस्थित नहीं है इसलिए वह कैसे बोल सकती है। इस विधेयक पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से देश में ध्रुवीकरण करना चाहती है। इसके माध्यम से तमिल लोगों का अपमान कर रहे है। यह देश को बाँटने वाला है। यह राष्ट्रवाद नहीं है और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है। सरकार को राज्यों को भी सुनना चाहिए। यह विधेयक इस देश के लोगों के ख़िलाफ़ है।

भाजपा के संबित पात्रा ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से वंदेमातरम को कानूनी संरक्षण दिया जा रहा है ताकि लोग बिना किसी बाधा के राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान का सम्मान दिखा सके। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है जब इतने बड़े विधेयक पर चर्चा हो रही है तो सदन की परिस्थिति देखिये, जो राष्ट्र को समझ नहीं रहे वे आज यहां आवाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1950 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की ओर से आश्वासन दिया गया था कि जन गण मन और वंदे मातरम् को एक तरह से गाया जाएगा, दोनो को एक ही सम्मान दिया जाएगा लेकिन दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि 76 साल के बाद कांग्रेस की सरकारों ने इसे लागू नहीं किया।

विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय श्री राय ने कहा कि यह केवल विधायी संशोधन नहीं बल्कि यह भारत की आत्मा सांस्कृतिक विरासत राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के सम्मान के प्रति हम सबकी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्र गान को जो सम्मान मिला है उसी प्रकार का सम्मान देने की बात 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा में कही था कि वंदे मातरम् का जन गण मन के समान ही सम्मान किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने जब वंदेमातरम गीत की रचना की थी तब उस ऋषि ने कहा था कि मैं वंदे मातरम के प्रभाव को देख पाउं या न देख पाउं लेकिन एक समय आयेगा जब इस देश के लोगों को होठों पर वंदेमातरम को होगा। उनके सपनों को आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत का संकल्प है वंदेमातरम। स्वामी विवेकानंद ने भविष्यवाणी की थी कि 21वीं सदी भारत की होगी। उनकी भविष्यवाणी थी कि भारत केवल आर्थिक महाशक्ति बनने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत अध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों के जरिये एक अपराजय वैश्विक शक्ति के रूप में विश्व गुरू बनेगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेन्द्र था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक नरेन्द्र ने भविष्यवाणी की और दूसरे नरेन्द्र पूरा कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन करता है। यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, देश के संविधान और राष्ट्रगान के अपमान के लिए सज़ा का प्रावधान करता है। इस कानून में राष्ट्रगान (जन गण मन) के गायन को जानबूझकर रोकने या राष्ट्रगान गाने वाली सभा में रुकावट पैदा करने को दंडनीय अपराध बताया गया है और इनके लिए तीन वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों सज़ा का प्रावधान करता है। हंगामे के बीच विधेयक को पारित किया गया और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।


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